अंतरराष्ट्रीय
आईपीएल 2021 : सीएसके अपने चौथे तथा केकेआर तीसरे खिताब के लिए होगी आमने-सामने
महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व वाली चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की टीम शुक्रवार को यहां दुबई इंटरनेशल स्टेडियम में होने वाले आईपीएल 2021 के फाइनल मुकाबले में इयोन मोर्गन की कप्तानी वाली कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ अपने चौथे खिताब के लिए उतरेगी जबकि कोलकाता की नजरें भी तीसरी आईपीएल ट्रॉफी जीतने पर होगी। सीएसके का 12 सीजन में यह नौंवां फाइनल है। उन्होंने 2010, 2011 और 2018 में ट्रॉफी जीती थी जबकि केकेआर ने गौतम गंभीर की कप्तानी में 2012 और 2014 में आईपीएल का खिताब अपने नाम किया था। केकेआर का यह तीसरा फाइनल है। कोलकाता ने 2012 में सीएसके को हराकर अपना पहला खिताब जीता था और शुक्रवार को एक बार फिर दोनों टीमें खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगी।
सीएसके ने क्वालीफायर-1 में दिल्ली कैपिटल्स को हराकर आईपीएल 2021 के फाइनल में जगह बनाई थी जबकि केकेआर ने क्वालीफायर-2 में दिल्ली को तीन विकेट से हराकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया।
दोनों टीमों के बीच खिताबी मैच के साथ ही यह धोनी और मोर्गन जैसे दो सर्वश्रेष्ठ सीमित ओवरों के कप्तानों के बीच भी मुकाबला है।
सीएसके के लिए फॉफ डू प्लेसिस, रुतुराज गायकवाड़, मोइन अली और रवींद्र जडेजा ने बल्ले से बखूबी काम किया है। लेकिन इन्हें अब वरूण चक्रवर्ती, शाकिब अल हसन और सुनील नारायण जैसे केकेआर के स्पिन ट्रियो का सामना करना है।
हालांकि, शारजाह की धीमी पिच की तुलना में दुबई की पिच अच्छी है। सीएसके के लिए अंबाटी रायुडू, रॉबिन उथप्पा और धोनी मध्य क्रम में फायदेमंद हो सकते हैं।
इनके अलावा दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर, जोश हेजलवुड और ड्वेन ब्रावो ने गेंदबाजी से सीएसके के लिए बेहतर किया है। लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए वे दबाव में आ जाते हैं।
दूसरी तरफ केकेआर की टीम है जिसने आईपीएल के दूसरे चरण में अपने प्रदर्शन से सभी को चकित किया है। कोलकाता के सफल होने का राज युवा खिलाड़ियों का भयमुक्त होकर खेलना भी है।
शुभमन गिल और वेंकटेश अय्यर ने टीम को बेहतरीन शुरूआत दिलाई है और राहुल त्रिपाठी तथा नितीश राणा ने भी योगदान दिया है।
आंद्रे रसेल की अनुपस्थिति में जो चोटिल होने के कारण पिछले कुछ मैचों से बाहर चल रहे हैं, शाकिब की ऑलराउंड क्षमता केकेआर को संतुलित कर रही है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि रसेल फाइनल में खेलेंगे या नहीं।
केकेआर के तेज गेंदबाज लॉकी फग्र्यूसन और शिवम मावी विकेट लेने में सफल रहे हैं जबकि वरूण और नारायण विपक्षी टीम को परेशान करने में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
केकेआर के लिए हालांकि, मोर्गन और दिनेश कार्तिक की फॉर्म चिंता का विषय है। यह दोनों खिलाड़ी दिल्ली के खिलाफ खाता खोले बिना आउट हुए थे।
दोनों टीमें इस प्रकार हैं :
कोलकाता नाइट राइडर्स : इयोन मोर्गन (कप्तान), आंद्रे रसेल, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), कमलेश नागरकोटी, कुलदीप यादव, लॉकी फग्र्यूसन, नितीश राणा, प्रसिद्ध कृष्णा, राहुल त्रिपाठी, संदीप वारियर, शिवम मावी, शुभमन गिल, सुनील नारायण, टिम सेफर्ट, वरुण चक्रवर्ती, शाकिब अल हसन, शेल्डन जैक्सन, वैभव अरोड़ा, करुण नायर, बेन कटिंग, वेंकटेश अय्यर, पवन नेगी, गुरकीरत मान सिंह और टिम साउदी।
चेन्नई सुपर किंग्स : महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), सुरेश रैना, अंबाटी रायुडू, केएम आसिफ, दीपक चाहर, ड्वेन ब्रावो, फॉफ डू प्लेसिस, इमरान ताहिर, एन जगदीसन, कर्ण शर्मा, लुंगी एनगिदी, मिशेल सेंटनर, रवींद्र जडेजा, रुतुराज गायकवाड़, शार्दुल ठाकुर, आर साई किशोर, मोइन अली, के. गौतम, चेतेश्वर पुजारा, हरिशंकर रेड्डी, भगत वर्मा और सी हरि निशांत।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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