राजनीति
सिंधिया ने हैदराबाद हवाई अड्डे के विस्तार के लिए समर्थन का आश्वासन दिया
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को आश्वासन दिया कि केंद्र हैदराबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार के लिए पूरा समर्थन देगा। सिंधिया, जो राज्य सरकार की ‘मेडिसिन फ्रॉम द स्काई’ परियोजना का शुभारंभ करने के लिए तेलंगाना के दौरे पर थे, ने मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से मुलाकात की।
सिंधिया ने 2 सितंबर को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 30 साल के लिए रियायत समझौते को बढ़ाने के लिए हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एचआईएएल) के अनुरोध की फिर से जांच करने के लिए लिखा था।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से एचएआईएल के अनुरोध की फिर से जांच करने और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने का अनुरोध किया था।
हैदराबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास, निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार और एचआईएएल के बीच 20 दिसंबर 2004 को रियायत समझौता (सीए) निष्पादित किया गया था।
एचआईएएल ने अपनी रियायत अवधि को शुरूआती 30 वर्षों से आगे 30 वर्षों के लिए, यानी 23 मार्च, 2038 से आगे और 23.03.2068 तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
एचआईएएल एक संयुक्त उद्यम कंपनी है जिसे जीएमआर ग्रुप (63 प्रतिशत) द्वारा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (13 प्रतिशत), तेलंगाना सरकार (13 प्रतिशत) और मलेशिया एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स बरहाद (एमएएचबी) (11 प्रतिशत) के साथ साझेदारी में प्रवर्तित किया गया है।
शनिवार को मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध के अनुसार छह नए हवाई अड्डों के गठन के लिए पर्याप्त उपाय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि चूंकि तेलंगाना एक आर्थिक विकास केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है और हैदराबाद तेजी से अंतर्राष्ट्रीय शहर बन रहा है, इसलिए हैदराबाद के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से अन्य देशों के लिए उड़ानें संचालित करने के लिए और अधिक सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री के संज्ञान में लाया कि चूंकि हैदराबाद तेजी से एक व्यवसाय बन रहा है, आईटी, स्वास्थ्य, पर्यटन और व्यापार केंद्र और तेलंगाना राज्य का विस्तार हो रहा है, लोग देश के अन्य स्थानों से और कई अंतरराष्ट्रीय शहरों से सीधी उड़ान के लिए जा रहे हैं। हैदराबाद से दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के देशों के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाई जानी चाहिए।
सीएम ने सिंधिया से तत्काल उपाय करने, छह हवाई अड्डों की स्थापना और विकास के लिए समर्थन देने और उन्हें चालू करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने उनसे हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए मेट्रो रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।
इसका जवाब देते हुए, सिंधिया ने कहा कि हैदराबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए सभी सहायता दी जाएगी, क्योंकि हैदराबाद एक अंतरराष्ट्रीय शहर के रूप में विकसित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वारंगल के मामुन्नूर में जल्द ही एटीआर संचालन के लिए तत्काल उपाय किए जाएंगे, जो छह हवाई अड्डों के प्रस्तावों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि निजामाबाद जिले के जकरानपल्ली में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए तकनीकी मंजूरी दी जाएगी।
सिंधिया ने यह भी कहा कि उनका मंत्रालय वायु सेना के समर्थन से आदिलाबाद में एक हवाई अड्डा स्थापित करने के लिए जांच और निगरानी करेगा। उन्होंने सीएम को आश्वासन दिया कि पेद्दापल्ली (बसंत नगर), कोठागुडेम, देवरकाद्रा (महबूबनगर) में छोटे विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए मामले की फिर से जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
राज्य मंत्री के.टी. रामा राव, महमूद अली, वी. प्रशांत रेड्डी, मुख्य सचिव सोमेश कुमार, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप करोला और जीएमआर समूह के अध्यक्ष ग्रैंडी मल्लिकार्जुन राव भी बैठक के दौरान उपस्थित थे।
राजनीति
प्रधानमंत्री देश की जनता को लेकर चिंतित, तेल-गैस की नहीं होगी किल्लतः संजय सरावगी

पटना, 14 मार्च : बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने ईरान द्वारा संघर्ष के बीच दो भारतीय एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने और राज्यसभा चुनाव के लिए हुई बैठक पर टिप्पणी की।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि आम लोगों को गैस या तेल की कमी का सामना न करना पड़े। युद्ध शुरू होने के लगभग 15 दिन बाद भी प्रधानमंत्री देश की जनता के बारे में चिंतित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपदा को अवसर में बदलना चाहते हैं, इसलिए देशवासियों को दिक्कत नहीं होगी।”
इसके पहले 13 मार्च को संजय सरावगी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बातचीत की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत आने वाले तेल और अन्य जरूरी सामान से भरे जहाजों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। विपक्ष जिस तरह से लोगों के बीच पैनिक पैदा करने की कोशिश कर रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरी कदम उठा रहा है। पिछले 5–6 दिनों में घरेलू गैस सिलेंडरों की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन प्रशासन इस स्थिति को भी संभाल रहा है और लगातार कार्रवाई कर रहा है। देश में गैस की कोई कमी नहीं है और आम लोगों को एलपीजी की सुविधा मिलती रहेगी।”
राज्यसभा चुनाव को लेकर संजय सरावगी ने कहा, “कांग्रेस को अपने ही सदस्यों पर भरोसा नहीं है। एनडीए देश में सत्ता में है और विभिन्न दलों के विधायक एनडीए में शामिल होना और उसका समर्थन करना चाहते हैं।”
सड़क पर होली और नमाज के सवाल पर सरावगी ने कहा, “होली में लोग रंग-गुलाल खेलते हैं, इससे सड़क नहीं बंद होती है, जबकि सड़क पर नमाज अदा करने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। इस्लाम धर्म में ये कहीं भी यह जिक्र नहीं है कि सड़क जाम कर धर्म की इबादत करें।
राजनीति
जहां बंद होता है कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला, वहां से शुरू होता है हमारा काम : प्रधानमंत्री मोदी

pm modi
सिलचर, 14 मार्च : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने शिलांग-सिचलर कॉरिडोर के भूमि पूजन के बाद कहा कि कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला जहां बंद होता है, वहां से हमारा काम शुरू होता है।
असम के सिलचर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ-ईस्ट को दिल्ली से और दिल से, दोनों से ही दूर रखा। कांग्रेस ने नॉर्थ-ईस्ट को एक तरह से भुला दिया था। लेकिन भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने नॉर्थ-ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है। आज नॉर्थ-ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है। दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही बराक वैली को बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब देश आजाद हुआ तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी, जिसने बराक घाटी का समुद्र से संपर्क कट गया। जो बराक वैली कभी ट्रेड रूट और एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जानी जाती थी, उस बराक वैली से उसकी ताकत ही छीन ली गई। आजादी के बाद भी दशकों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हुआ।”
उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए 24,000 करोड़ रुपए की लागत वाले शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन किया गया है। कांग्रेस तो यह गिन भी नहीं सकती कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में कितने शून्य होते हैं। जहां कांग्रेस की सोच खत्म होती है, वहां से हमारा काम शुरू होता है। यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर के लोगों के दशकों लंबे इंतज़ार को खत्म कर रहा है। इस कॉरिडोर के जरिए सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा से जुड़ जाएगा।”
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “जो विकास की दौड़ में पीछे रह गया, उसको प्राथमिकता देना भाजपा का मंत्र है। कांग्रेस की सरकारें बॉर्डर एरिया के देश के अंतिम गांव मानती थीं। हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं। इसलिए बॉर्डर एरिया के विकास के लिए कछार जिले से ही ‘बाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का अगला चरण शुरू किया था। इसे बराक वैली के भी अनेकों गांवों में सुधार होना तय हुआ।”
किसानों के मुद्दे पर भी पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है। शुक्रवार को ही गुवाहाटी से मैंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त जारी की है। कांग्रेस वालों ने इतने साल राज किया, प्रधानमंत्री तो असम से चुनकर गए थे लेकिन उसके बावजूद भी एक रुपया भी नहीं दिया।”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने असम के युवाओं को सिर्फ हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में ही उलझाए रखा था। कांग्रेस ने असम को ‘फूट डालो और राज करो’ नीति की प्रयोगशाला बनाया। आज असम के युवाओं के सामने अवसरों का खुला आसमान है।
अंतरराष्ट्रीय
हमले से ईरान को पहुंची ‘चोट’, हमें मिली बड़ी कामयाबी : ट्रंप

TRUMP
वॉशिंगटन, 14 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान “बहुत अच्छी तरह” आगे बढ़ रहे हैं। और अमेरिकी बलों ने बड़े पैमाने पर हमले करते हुए “बहुत बड़ी कामयाबियां” हासिल की हैं, क्योंकि मध्य-पूर्व में संघर्ष तेज होता जा रहा है।
वॉशिंगटन के जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में ट्रंप ने कहा कि सैन्य अभियान सफल रहा है और इससे ईरान की क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने कहा, “ईरान की स्थिति बहुत अच्छी है। आज बहुत बड़े हमले हुए हैं, बहुत बड़ी जीत मिली है, जैसा कि आपने सैन्य स्तर पर सुना होगा। मुझे लगता है कि सब कुछ बहुत अच्छी तरह नियंत्रण में है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि यह अभियान उस परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है, जिसे उनके मुताबिक ईरान से पैदा हो रहा था।
उन्होंने कहा, “हमें मध्य-पूर्व और पूरी दुनिया में मौजूद परमाणु खतरे को खत्म करना था और हम इसे खत्म करके रहेंगे।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि लड़ाई के दौरान ईरानी सेना को काफी कमजोर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “मेरे लिए इसका मतलब बहुत साफ है कि हम ऐसी प्रभुत्व वाली स्थिति में हैं, जैसी पहले कभी नहीं देखी गई।”
बिना शर्त आत्मसमर्पण की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है, उनकी ज्यादातर सेना खत्म हो चुकी है। उनका बड़ा खतरा हर तरह से खत्म हो गया है।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की वायु रक्षा और रडार प्रणालियों को बड़े पैमाने पर निष्क्रिय कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “उनके पास रडार नहीं है, ज्यादातर मामलों में उनके पास एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार नहीं हैं। लगभग सब कुछ खत्म हो चुका है और आप यह देखेंगे।”
संघर्ष कितने समय तक चलेगा, इस सवाल पर ट्रंप ने कोई निश्चित समयसीमा देने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि अभियान उम्मीद से कहीं तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं आपको समय नहीं बता सकता। मेरे मन में एक अंदाजा है, लेकिन उसे बताने से क्या फायदा? यह उतने समय तक चलेगा जितना जरूरी होगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हम तय समय से काफी आगे हैं।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है, लेकिन उनका मानना है कि हालात सामान्य होते ही कीमतों में गिरावट आएगी।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जैसे ही यह सब खत्म होगा, पेट्रोल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ऊर्जा से जुड़ी हर चीज की कीमतों में बड़ी कमी देखने को मिलेगी।”
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने इस मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की है।
उन्होंने कहा, “हां, मैंने उनसे बात की है। हम इस मुद्दे पर और कुछ अन्य विषयों पर भी चर्चा कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में इजरायल के नेतृत्व से भी बातचीत हुई है, हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक लक्ष्य कुछ हद तक अलग हो सकते हैं। यहां उनका इशारा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर था।
ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि उनका नजरिया थोड़ा अलग हो सकता है, क्योंकि वे एक अलग देश हैं।”
फिर भी उन्होंने अमेरिकी सैन्य बल की प्रशंसा करते हुए कहा, “वह आपको बताएंगे कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी ताकत दुनिया में कभी नहीं रही।”
ये बयान ऐसे समय आए हैं जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है।
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