मनोरंजन
फिल्म ‘स्निफ’ में नजर आएंगे मॉर्गन फ्रीमैन, हेलेन मिरेन, अल पचीनो
ऑस्कर विजेता मॉर्गन फ्रीमैन, अल पैचीनो, हेलेन मिरेन और ऑस्कर नामांकित डैनी डेविटो टेलर हैकफोर्ड द्वारा निर्देशित फिल्म ‘स्निफ’ में अभिनय करेंगे। ‘रे’ हैकफोर्ड ऑस्कर विजेता निर्देशक हैं। ‘स्निफ’ में फ्रीमैन जासूस का रोल निभा रहे हैं, जो मुलरे और डेविटो द्वारा विलियम कीज की याद दिलाता है। वे अपने दो निवासियों की रहस्यमय मौतों के बाद एक उच्च जांच करते हैं।
कहानी में जासूसी जोड़ी सेक्स, ड्रग्स और हत्या के एक छिपे हुए अंडरवल्र्ड को उजागर करती है।
रिपोर्ट वैराइटी डॉट कॉम के अनुसार, एंडेवर कंटेंट टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टीआईएफएफ) में दुनिया भर में बिक्री शुरू करेगा, जिसमें सीएए मीडिया फाइनेंस अमेरिका का सह-प्रतिनिधित्व करेगा।
एडम गुडमैन और मैट स्कीना अपनी प्रोडक्शन कंपनी एनविल फिल्म्स के माध्यम से हैकफोर्ड के साथ अपने डिकोटॉमी क्रिएटिव ग्रुप के माध्यम से निर्माण करेंगे।
हैकफोर्ड ने डेडलाइन को बताया कि मैं हमेशा से फिल्म नोयर का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं।
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अजय देवगन की ‘दृश्यम : द कन्क्लूजन’ का दूसरा गाना ‘मुस्कुरा दो’ आया सामने, लकी अली ने बिखेरा जादू

अभिनेता अजय देवगन की आगामी फिल्म ‘दृश्यम : द कन्क्लूजन’ के मेकर्स ने बुधवार को ‘मुस्कुरा दो’ गाना रिलीज कर दिया। यह गाना विजय सालगांवकर के आसपास के सस्पेंस और टेंशन से हटकर उसके परिवार पर फोकस करता है, जिसके लिए वह लड़ता आ रहा है।
इस गाने को लकी अली ने अपनी आवाज में गाया है, रोचक कोहली ने कंपोज किया है और मनोज मुंतशिर ने लिखा है। ‘मुस्कुरा दो’ सालगांवकर परिवार के बीच के प्यार, अपनापन और एकजुटता को दिखाता है और विजय की जिंदगी के सुकून भरे पलों की झलक देता है।
लकी अली इस गाने में एक पुरानी यादों वाली मिठास लेकर आए हैं। साथ ही यह अजय देवगन के साथ उनका पहला म्यूजिकल कोलैब भी है, जो गाने को खास बनाता है।
लकी अली ने कहा, “‘मुस्कुरा दो’ दिल को अच्छी तरह से छूता है। इसमें एहसास पहले से ही मौजूद हैं, जिस वजह से हमने इमोशन को जबरदस्ती दिखाने की कोशिश नहीं की है। इस गाने ने मुझे परिवार के साथ उन पलों की याद दिला दी, जहां खुश होने के लिए कुछ खास होना जरूरी नहीं है। मैं अपनी गायकी के जरिए इसी एहसास को करीब रखना चाहता था और गाने को जितना हो सके नेचुरल रहने देना चाहता था।”
कंपोजर रोचक कोहली ने कहा, “जब मैंने ‘मुस्कुरा दो’ पर काम शुरू किया, तो मुझे पता था कि इसे एक फैमिली सॉन्ग जैसा लगना चाहिए। ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ जैसी गंभीर और थ्रिलर फिल्म में इतनी गर्मजोशी वाला गाना बनाना एक अलग तरह का प्रेशर था। मैं चाहता था कि धुन में अपनापन हो, लेकिन वह बहुत आसान भी लगे। कहानी में बहुत टेंशन है, इसलिए इस गाने को थोड़ा खुलकर सांस लेने और एक अलग एहसास देने की जरूरत थी। जब लकी अली इस गाने से जुड़े, तो गाने का इमोशनल मूड बिल्कुल साफ हो गया।”
गीतकार मनोज मुंतशिर ने कहा, “मैं बार-बार इसी ख्याल पर लौट रहा था कि परिवार अक्सर बहुत छोटी-छोटी बातों से बनता है। कमरे के दूसरे कोने से एक मुस्कान, साथ बैठना, बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह देना, यही वो चीजें हैं, जो हमें याद रहती हैं। वहीं से मेरे लिए ‘मुस्कुरा दो’ बना। मैं चाहता था कि शब्द फिल्मी न लगकर जिंदगी के करीब और बातचीत जैसे लगें।”
‘मुस्कुरा दो’ फिल्म के पहले गाने ‘विंगांसा’ से बिल्कुल अलग है। ‘विंगांसा’ में फिल्म का डार्क और बदले वाला मूड दिखाया गया था, जबकि यह नया गाना प्यार और सुकून भरा है। ‘दृश्यम : द कन्क्लूजन’ फिल्म ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का तीसरा और आखिरी चैप्टर है।
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बिग बॉस से बाहर हुए रोहिद खान, बोले-नियम तोड़ा तो पता था टिकट कटेगा

ऑस्ट्रियाई अभिनेता और मॉडल रोहिद खान लोकप्रिय रियलिटी शो ‘बिग बॉस -20’ से बाहर आ गए हैं। अभिनेता ने बताया कि जब उन्होंने शो के रूल्स तोड़े थे, तो उन्होंने इस बात का अंदाजा हो गया था कि वे बाहर जाने वाले हैं।
अभिनेता ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि अगर वे शो में और ज्यादा दिन रुकते, तो शायद शो के होस्ट सलमान खान और दर्शकों को और अच्छे से समझ पाते। अभिनेता रोहिद खान ने कहा, “जब मैंने नियम तोड़े और बिग बॉस को गुस्सा दिलाया, तब मुझे अंदाजा हो गया था कि मेरा टिकट कटने वाला है। इसलिए मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई और जब मैं बाहर आया और देखा कि सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि और भी लोग नियम तोड़ रहे थे, तो मुझे थोड़ा बुरा लगा लेकिन शायद मैं उस बारे में थोड़ा ज्यादा खुलकर बोल गया था।”
अभिनेता से आईएएनएस ने सवाल किया, “क्या आपको लगता है कि अगर आप बिग बॉस में थोड़ी और लड़ाई करते, तो आपका सफर लंबा चलता?”
इस पर उन्होंने कहा, “शो में हम फिजिकली नहीं लड़ सकते हैं, अगर ऐसा होता तो शायद लोगों को मैं अपनी बाहों में ले लेता और मैं महिलाओं की रिस्पेक्ट करता हूं, जिस वजह मैं उनसे जुबानी जंग नहीं कर सकता था। अगर मुझे कोई टॉपिक पसंद नहीं आता, तो मैं बैठकर अपनी बात समझाता क्योंकि बिग बॉस का घर ऐसा बना है कि आप कई सिचुएशन में फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं। अगर मैं कुछ और हफ्ते घर में रहता, तो शायद मेरे गुस्से का वह हिस्सा बाहर आ जाता।”
अभिनेता रोहिद ने बताया कि शो में उन्होंने किसी को बुली नहीं किया और न ही किसी की बेइज्जती की। मैं सबके साथ इज्जत और प्यार से पेश आया और इसी वजह से मुझे बदले में इज्जत और प्यार मिला। रोहिद खान ने कहा, “शो के दौरान मुझे अमन भाई पर गुस्सा आया था। मैंने उनसे लड़ाई भी की थी और अगर वो ज्यादा कुछ करते तो शायद मैं उन पर चिल्ला भी देता।”
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हीरो बनने मुंबई आए थे प्रेम चोपड़ा, किस्मत ने बना दिया हिंदी सिनेमा का मशहूर विलेन

सिनेमा की दुनिया में कदम रखने वाला लगभग हर कलाकार हीरो बनने का सपना देखता है, लेकिन किस्मत कई बार उसकी अलग पहचान तय कर देती है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता प्रेम चोपड़ा भी ऐसे ही कलाकार हैं, जिन्होंने अपने लंबे करियर में हीरो और विलेन दोनों तरह की भूमिकाएं निभाईं। हालांकि दर्शकों के बीच उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता एक खलनायक के रूप में मिली।
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रेम चोपड़ा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्मों में एक हीरो के तौर पर की थी। बाद में हिंदी सिनेमा में उन्होंने नकारात्मक किरदार निभाकर ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम बॉलीवुड के सबसे चर्चित खलनायकों में शामिल हो गया। अपनी दमदार अदाकारी और अलग अंदाज के कारण प्रेम चोपड़ा ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया और भारतीय सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया।
23 सितंबर 1935 को लाहौर (अब पाकिस्तान में) में जन्मे प्रेम चोपड़ा के पिता रणबीर लाल चोपड़ा एक कंपनी में अकाउंट ऑफिसर थे और माता रूपरानी चोपड़ा गृहिणी थीं। भारत विभाजन के बाद अभिनेता का पूरा परिवार शिमला आ गया था, जहां उनका शुरुआती जीवन बीता।
प्रेम चोपड़ा ने अपनी स्कूली और कॉलेज की शिक्षा शिमला से पूरी करने के बाद हीरो बनने की चाह में मुंबई की तरफ रुख किया, हालांकि शुरुआती सफर इतना आसान नहीं था। अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने एक कंपनी में सर्कुलेशन विभाग में काम किया था। एक दिन प्रेम चोपड़ा लोकल ट्रेन से कहीं जा रहे थे। उस समय उनकी मुलाकात पंजाबी फिल्म के निर्माता या उनके प्रोडक्शन कंट्रोलर से हुई।
उस व्यक्ति ने प्रेम चोपड़ा के व्यक्तित्व को देखकर पूछा कि क्या वे फिल्मों में काम करना चाहेंगे। अभिनेता खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने तुरंत हां कर दिया और उस शख्स के साथ रंजीत स्टूडियो चले गए, जहां उन्हें वर्ष 1960 की सुपरहिट पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ में काम करने का मौका मिला।
यह फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई और इसे पंजाबी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। कुछ पंजाबी फिल्में करने के बाद जब उन्हें हिंदी फिल्में मिलीं तो जिन फिल्मों में वह हीरो बने वह ज्यादातर फ्लॉप रही।
‘शहीद’ (1965) में सुखदेव का किरदार मिला, जिसने उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए और वे हिंदी सिनेमा के जाने-माने खलनायक बने। फिल्म ‘बॉबी’ में उनका बोला गया संवाद ‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध और यादगार डायलॉग्स में गिना जाता है।
पर्दे पर खूंखार विलेन का किरदार निभाने वाले प्रेम चोपड़ा वास्तविक जीवन में बेहद शांत, सरल और विनम्र स्वभाव के इंसान हैं। एक दौर था जब लोग उन्हें पर्दे पर देखकर असल जिंदगी में भी उनसे डरने लगे थे।
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