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Monday,11-May-2026
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वित्त वर्ष 2022 में भारत दो अंकों की वृद्धि की ओर अग्रसर

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देश के व्यापार योग्य क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन और इस साल महामारी संबंधी व्यवधानों के कारण सेवाओं की गतिविधि में अपेक्षा से बहुत कम गिरावट के कारण वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर दोहरे अंकों में रहने की संभावना है। ये सूचना बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक सामने आई है।

बार्कलेज के प्रमुख भारत के अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया द्वारा लिखी गई रिपोर्ट ने अपने वित्त वर्ष 2021- 22 के सकल घरेलू उत्पाद के 9.2 प्रतिशत के अनुमान के ऊपर जोखिम का अनुमान लगाया है और कहा है कि अगर इसके सभी पूवानुमानों को साकार किया जाता है, तो चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दोहरे अंकों के करीब हो सकती है।

भारत के वित्त वर्ष 2022 के सकल घरेलू उत्पाद पर बैंकर का अनुमान आरबीआई के करीब है, जिसने वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद का अनुमान 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था।

बाजोरिया ने लिखा, “भारत की दूसरी कोविड-19 लहर ने मजबूत रिकवरी के लिए एक ठोकर के रूप में काम किया। फिर भी, आर्थिक क्षति पहले की अपेक्षा कम लगती है। दूसरे प्रकोप को नियंत्रण में लाने के साथ तेजी से रिकवरी चल रही है।”

इस आकलन के आधार पर, बार्कलेज ने अनुमान लगाया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में 21 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून, या वित्तीय वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही) में 21.2 प्रतिशत वाई/वाई का विस्तार हुआ है, जो कि कम आधार और दूसरे के कारण गतिविधि के बहुत कम नुकसान के रूप में है। कोविड लहर ने एक तिमाही के लिए विकास को सर्वकालिक उच्च स्तर पर धकेल दिया।

देश का अप्रैल-जून जीडीपी डेटा, 31 अगस्त को जारी होने वाला, दो विपरीत विषयों का टकराव दिखाएगा, बार्कलेज ने कहा कि हालांकि कोविड के प्रकोप के कारण क्रमिक गति धीमी हो गई। भारत के व्यापार क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन और बहुत छोटी सेवाओं की गतिविधि में अपेक्षित गिरावट से पहले की अपेक्षा बहुत तेजी से सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का समर्थन करना चाहिए।

“विवरणों को देखते हुए, हमारा मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र में वाई/वाई विकास क्यू2 में मामूली रूप से धीमा होने की संभावना है, क्योंकि दूसरी लहर ग्रामीण इलाकों में गहराई तक फैली हुई है। इस तरह, ग्रामीण खपत ने तिमाही के दौरान धीमा होने के स्पष्ट संकेत दिखाए, साथ में रिपोर्ट में कहा गया है कि उर्वरक और दोपहिया वाहनों की कमजोर बिक्री और तिमाही के दौरान ग्रामीण बेरोजगारी दर में वृद्धि है। दूसरी ओर, हम खनन क्षेत्र में उत्पादन में मामूली सुधार की उम्मीद करते हैं।”

“विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में रिकवरी का नेतृत्व करने की संभावना है, क्योंकि स्टील और सीमेंट की खपत मजबूत बनी हुई है, जो उच्च सरकारी खर्च और निर्यात मांग दोनों से प्रेरित है। विशेष रूप से व्यवसायों के लिए आंदोलन पर प्रतिबंधों में ढील ने निर्यात को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जबकि कमजोर घरेलू मांग ने आयात को प्रभावित किया है।”

बाजोरिया ने कहा कि सरकारी व्यय कुल राजस्व संग्रह से कम हो गया है, लेकिन यह गतिविधि पर बहुत अधिक भार नहीं डालेगा। इसके अलावा, सेवाओं के भीतर, निम्न वर्ष-पूर्व आधार गति के क्रमिक नुकसान की भरपाई करने की संभावना है, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, ईंधन की मांग और वित्तीय सेवाओं ने छोटे लेकिन तीव्र दूसरे कोविड प्रकोप के दौरान गतिविधि के क्षरण के कुछ नुकसान का अनुभव किया। बार्कलेज ने कहा कि फिर भी, ये क्षेत्र तेजी से वापसी कर रहे हैं और तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि को और अधिक सार्थक रूप से जोड़ना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निरंतर व्यापक सरकारी व्यय के बावजूद, हम उम्मीद करते हैं कि सार्वजनिक प्रशासन क्षेत्र में उत्पादन वाई/वाई अनुबंधित होगा, क्योंकि खर्च का एक बड़ा हिस्सा हस्तांतरण भुगतान है, जो जीडीपी में योगदान नहीं करेगा।

राष्ट्रीय

पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राष्ट्रीय

राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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राजनीति

बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

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पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।

आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”

उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”

अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”

कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।

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