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Wednesday,16-September-2026
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माइक्रोसॉफ्ट, एमएक्यू और पेप्सिको ने यूपी में रखा कदम, अमेरिकी कंपनियां सूबे में अपना उद्यम स्थापित करने को आतुर

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 उत्तर प्रदेश का औद्योगिक माहौल अब अमेरिका की विख्यात बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भाने लगा है। राज्य की इंवेस्टर फ्रेंडली नीतियों के चलते अमेरिकी कंपनियों सहित 40 से अधिक विदेशी कंपनियों ने करीब 17 हजार करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव किया। इनमें से अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी माइक्रोसॉफ्ट, पेप्सिको और एमएक्यू सॉफ्टवेयर ने अपनी यूनिट लगाने के लिए प्रदेश सरकार से जमीन ली है। माइक्रोसॉफ्ट तथा एमएक्यू सॉफ्टवेयर नोएडा में अपनी यूनिट (उद्यम) लगाएंगे, जबकि पेप्सिको मथुरा में अपनी फैक्ट्री का निर्माण शुरू कर दिया है। अमेरिका की ये तीनों कंपनियां 2866 करोड़ रुपए का निवेश कर 7500 लोगों को स्थायी रोजगार मुहैया कराएंगी।

इन अमेरिकी कंपनियों के अलावा यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम से जुड़े कई अन्य बड़े अमेरिकी निवेशक राज्य में निवेश करने को इच्छुक हैं। ये अमेरिकी निवेशक भारत में अमेरिका के राजदूत के जरिए यहां पर निवेश करने के लिए वार्ता कर रही हैं। सरकार से भी फोरम से जुड़े अमेरिकी निवेशकों ने निवेश करने को लेकर संपर्क किया है।

कुछ दिनों पूर्व यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम से जुड़े उद्यमियों के साथ हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग संवाद के दौरान अमेरिकी कंपनियों ने मेडिकल इक्यूपमेंट, डिजिटल पेमेंट तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश करने में रूचि दिखाई। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की एडोब, एमेजॉन, अमेरिकन टावर कापोर्रेशन, एपल, कैटरपिलर, डेल्फी, सिस्को, डेलॉयट, इमर्सन, अर्नस्ट एंड यंग, गूगल, जॉनसन एंड जॉनसन, जेपी मोर्गन एंड कंपनी, लॉकहीड मार्टिन, मैरियॉट इंटरनेशनल, मास्टर कार्ड, मोंडलेज इंटरनेशन, कार्लयिल ग्रुप, वालमार्ट, वारबर्ग पिंकस,आइएचएस मार्केट व यूएसआइबीसी जैसी बड़ी कंपनियां देश और प्रदेश में निवेश करने को इच्छुक हैं। इनमें एडोब, एमेजॉन, माइक्रोसाफ्ट, डेल्फी न्यू हॉलैंड, ग्लोबल लॉजिक, एक्सल, पेप्सिको, सिनोप्सिस तथा कारगिल जैसी कंपनियां पहले ही भारत में कार्य कर रही हैं।

अब माइक्रोसाफ्ट, एमएक्यू साफ्टवेयर नोएडा तथा पेप्सिको ने यूपी में अपनी यूनिट लगाने के लिए कदम बढ़ाए हैं। इन कंपनियों के राज्य में आने के बाद से अमेरिका की कई अन्य कंपनियों में यूपी में अपनी यूनिट लगाने के लिए तेजी दिखाना शुरू कर दिया है। जल्दी ही सरकार सूबे में निवेश को इच्छुक कई अन्य अमेरिकी कंपनियों के नामों का खुलासा करेगी।

दुनिया की सबसे नामी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट नोएडा में देश का सबसे बड़ा सेंटर बनाएगी। ये कंपनी 3500 से अधिक लोगों को रोजगार देगी। नोएडा प्राधिकरण ने कंपनी को 60 हजार वर्ग मीटर जमीन बीते दिनों आवंटित की है। अभी तक माइक्रोसॉफ्ट का हैदराबाद के गाची बावली में सबसे बड़ा ऑफिस है। कंपनी ने प्राधिकरण के समक्ष दावा किया है कि तय समय यानि पांच साल से पहले ही यहां पर शुरूआत कर दी जाएगी ताकि एनसीआर में रहने वाले लोगों को इसका फायदा मिल सके। नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-145 माइक्रोसॉफ्ट को जमीन आवंटित की है। इसी प्रकार दुनिया की अग्रणी आईटी-आईटीईएस कंपनी एमएक्यू इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोएडा के सेक्टर-145 में कुल 16350 वर्ग मीटर का प्लॉट दिया गया है। यह कंपनी यहां एक बड़ी आईटी फर्म स्थापित करेगी। इस प्रोजेक्ट में करीब 252 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 2500 लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि बहुराष्ट्रीय फूड एंड बेवरेज कंपनी पेप्सिको ने मथुरा के कोसीकलां में आलू चिप्स बनाने की फैक्ट्री लगा रही है। करीब 814 करोड़ रुपये का निवेश कर तैयार के जा रही पेप्सिको की फैक्ट्री में वर्ष 2021 के बीच उत्पादन शुरू होने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब पंद्रह सौ लोगों को रोजगार मिलेगा। आलू चिप्स तैयार करने के लिए कच्चा माल (आलू) स्थानीय स्रोतों से खरीदा जाएगा। स्थानीय किसानों को इस फैक्ट्री से लाभ होगा। जल्दी ही कई अन्य अमेरिकी कंपनियां भी राज्य में फूड प्रोसेसिंग, मेडिकल इक्यूपमेंट, ऑटोमोबाइल, आईटी तथा डिजिटल पेंमेट तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश कर यूपी के युवाओं को रोजगार मुहैया कराएंगी।

अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल का कहना है कि यूपी सरकार की इंवेस्टर फ्रेंडली नीतियों के चलते यहां पर अमेरिकी कंपनियां निवेश के लिए आ रही है। इनके यहां निवेश से यूपी के युवाओं को बहुत संख्या में रोजगार मिलेगा।

व्यापार

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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व्यापार

भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।

चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।

दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

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व्यापार

बोफा ने भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ाया भरोसा, दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 26,200 तक पहुंचने का लगाया अनुमान

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बोफा यानी बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) सिक्योरिटीज ने लगभग दो वर्षों तक सतर्क रुख अपनाने के बाद भारतीय शेयर बाजारों को लेकर अपना दृष्टिकोण सकारात्मक कर लिया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 12 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

अपनी नवीनतम रणनीति रिपोर्ट में बीओएफए ने कहा कि वह अगस्त 2024 से भारतीय शेयरों को लेकर सतर्क था और उसने आठ प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, जो बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकते थे। हालांकि अब इन आठ में से पांच जोखिम या तो सामने आ चुके हैं या फिर बाजार पहले ही उन्हें अपने मूल्यांकन में शामिल कर चुका है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने अब भारतीय इक्विटी बाजारों पर अधिक सकारात्मक रुख अपनाया है।

बोफा के अनुसार, शेष तीन जोखिमों के कारण उसके नकारात्मक परिदृश्य में निफ्टी 50 में लगभग 7 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि उसके आधारभूत अनुमान में निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बचे हुए जोखिम अक्टूबर 2026 तक अपने चरम पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद नवंबर से बाजार में टिकाऊ सुधार की संभावना बन सकती है।

ब्रोकरेज फर्म ने पहले जिन प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, उनमें कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना भी शामिल था। ब्रोकरेज का चौथी तिमाही 2026 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 81 डॉलर प्रति बैरल है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले सात महीनों में कच्चे तेल की कीमतें सात बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से वापस नीचे आई हैं।

रुपया भी पहले चिंता का विषय था, हालांकि बीओएफए का कहना है कि हाल में आए लगभग 136 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह से भारतीय मुद्रा को समर्थन मिलना चाहिए और उसने रुपये को लेकर मजबूती का दृष्टिकोण बनाए रखा है।

कमजोर मानसून को भी जोखिमों में शामिल किया गया था। वर्तमान में वर्षा की कमी 13 प्रतिशत है, जो बीओएफए के पहले से अनुमानित 15 प्रतिशत के सबसे खराब परिदृश्य के काफी करीब है।

ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि एल्यूमीनियम और तांबे की कीमतों में अब अधिक तेजी की संभावना सीमित है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर बीओएफए के अर्थशास्त्री का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर 2026 तक नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि स्वैप बाजार फिलहाल करीब 45 आधार अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं।

बोफा ने जिन तीन प्रमुख जोखिमों को अभी भी बरकरार बताया है, उनमें पहला प्राथमिक बाजार में बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने की गतिविधियां हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से दिसंबर के बीच लगभग 30 अरब डॉलर के नए इश्यू आ सकते हैं और अक्टूबर में इनकी रफ्तार सबसे अधिक रहने की संभावना है।

दूसरा जोखिम अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अपेक्षा से अधिक बढ़ोतरी का है। बीओएफए का अनुमान है कि फेड कुल 75 आधार अंक तक दरें बढ़ा सकता है, जबकि बाजार फिलहाल लगभग 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी को मूल्यांकन में शामिल कर रहे हैं।

तीसरा और दीर्घकालिक जोखिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा है। बीओएफए ने कहा कि एआई-आधारित बदलावों का भारत में रोजगार बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है और निवेशकों को इस विषय पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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