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Sunday,16-August-2026
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यूपी विधानमंडल की कार्यवाही कल तक स्थागित, योगी सहित तमाम नेताओं ने दिवंगत विधायकों को दी श्रद्धांजलि

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 उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी दल सपा तथा कांग्रेस का विधान भवन के बाहर तथा अंदर जमकर हंगामा किया। विधान परिषद में सपा के सदस्य शोक प्रस्ताव के दौरान ही वेल में आ गए। हंगामें के बीच मुख्यमंत्री योगी ने शोक प्रस्ताव रखा। दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में दिवंगत विधायक सुरेश श्रीवास्तव, औरैया विधायक रमेश चंद्र दिवाकर, नवाबगंज विधायक केसर सिंह, सलोन रायबरेली के विधायक दल बहादुर कोरी व विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री के साथ ही नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भी दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। बसपा दल के नेता गुड्डू जमाली, कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने भी दिवगंत विधायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सपा के नेताओं ने शोक सभा के दौरान भी वेल में आकर पोस्टर लहराया। विधान परिषद में शोर शराबे के बीच कार्यवाई स्थगित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शोक प्रस्ताव रखने के बाद विधान सभा और विधान परिषद की कार्यवाई शुरू हुई। इस दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार के एक राज्य मंत्री पिछले दिनों छह सदस्यों के निधन पर शोक सभा की गई।

सत्र के पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष गांव, गरीब, महिलाओं व विकास के हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। हमें उम्मीद है कि सदन में सार्थक चर्चा होगी।

इसके पहले सपा विधायक व एमएलसी सत्र के पहले दिन बैलगाड़ियों से विधानभवन जा रहे थे जिन्हें पुलिस कर्मियों ने रोक लिया। सपा नेता पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकार का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा सपा कार्यकतार्ओं ने विधानभवन के सामने भी प्रदर्शन किया।

आज पहले दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी के विधायक तथा विधान परिषद सदस्य विधान भवन के बाहर सड़क पर प्रदर्शन करने लगे। मानसून सत्र के पहले दिन महंगाई और बेरोजगारी का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के विधायक बैलगाड़ी से विधानभवन पहुंचे। सपा विधायकों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। एक हाथ में राष्ट्रध्वज और एक हाथ में समाजवादी पार्टी का झंडा लिए बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी का विरोध कर रहे थे।

इसके बाद सपा के कुछ विधायक विधान भवन में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद जो भी गेट बंद थे, वहां पर इनका प्रदर्शन शुरू हो गया। मंहगाई तथा महिला के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर इनका आक्रोश काफी बढ़ा है। विधान परिषद सदस्य राजेंद्र चौधरी तथा राजपाल कश्यप के नेतृत्व में यह लोग सड़क पर जमे थे।

कांग्रेस के नेता भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, विधायक दल की नेता अराधना मिश्रा मोना तथा नेता विधान परिषद दीपक सिंह ने भी विधान भवन में सरकार के खिलाफ प्ले कार्ड लेकर प्रदर्शन किया। कांग्रेसी नेता रिक्शा और ठेला लेकर विधानसभा पहुंचे।

सपा विधान मंडल दल के नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि पार्टी महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे को जोरशोर से उठाएगी। सरकार ने किसानों से किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं किया। खाद-बीज महंगा कर दिया गया। डीजल के दाम बढ़ने से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। तमाम किसानों ने इस सीजन में खेत को खाली छोड़ दिए हैं। अनाज से लेकर दाल तक के दाम बढ़ गए हैं। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से तमाम लोगों ने दम तोड़ दिया। युवाओं को नौकरी देने के वादे पर भी सरकार पूरी तरह से फेल रही है।

राष्ट्रीय समाचार

साइबर सुरक्षा आकलन में मानवीय निर्णय क्षमता की परीक्षा को एनआईईएलआईटी ने ‘साइबर कुश्ती 2026’ लॉन्च किया

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) ने ‘साइबर कुश्ती 2026’ की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रव्यापी साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हैकाथॉन है, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की केवल कमजोरियों की पहचान करने की क्षमता नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा आकलन के दौरान मानवीय निर्णय क्षमता का परीक्षण करना है। इसकी घोषणा रविवार को की गई।

‘साइबर कुश्ती 2026’ को साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और इंटेलिजेंस पर आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीसीडीएफआई 2026) के आधिकारिक समानांतर तकनीकी ट्रैक के रूप में शुरू किया गया है। इस पहल का आयोजन नेशनल सिक्योरिटी डेटाबेस (एनएसडी) के अंतर्गत इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि सीईआरटी-इन इसमें नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।

प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण 15 अगस्त से शुरू हो चुका है और 10 सितंबर तक जारी रहेगा। इसमें भाग लेना पूरी तरह निःशुल्क है और तीन सदस्यीय टीमों में छात्र तथा स्वतंत्र शोधकर्ता हिस्सा ले सकते हैं। पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रतियोगिताओं से अलग, जो मुख्य रूप से कमजोरियों की पहचान या ‘कैप्चर द फ्लैग’ (सीटीएफ) चुनौतियों पर केंद्रित होती हैं, ‘साइबर कुश्ती 2026’ को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह प्रतिभागियों की सुरक्षा जोखिमों का मूल्यांकन और प्राथमिकता तय करने की क्षमता की जांच कर सके।

आयोजकों ने कहा कि यह प्रतियोगिता ऐसे पेशेवरों की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो स्वचालित प्रणालियों द्वारा उत्पन्न गलत संकेतों (फॉल्स पॉजिटिव) और वास्तविक खतरों के बीच अंतर कर सकें।

प्रतियोगिता के प्रारूप के तहत सभी टीमों को एक समान, जानबूझकर अपूर्ण रखा गया ‘सिक्योरिटी असेसमेंट पैकेज’ प्रदान किया जाएगा। इस पैकेज में एआई द्वारा तैयार निष्कर्ष, सोर्स कोड, एप्लिकेशन लॉग, आर्किटेक्चर दस्तावेज, स्टैटिक एनालिसिस रिपोर्ट, डिपेंडेंसी स्कैन और सीक्रेट्स स्कैन जैसी सामग्री शामिल होगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक क्षमता को परखने के लिए आयोजकों ने जानबूझकर इसमें कुछ गलत, दोहराए गए और वास्तविक निष्कर्ष शामिल किए हैं, जबकि कुछ वास्तविक कमजोरियों को छोड़ा भी गया है। प्रतिभागियों को एक संशोधित और प्राथमिकता-आधारित सुरक्षा आकलन रिपोर्ट तैयार करनी होगी तथा अपने निष्कर्षों और निर्णयों का स्पष्ट औचित्य भी बताना होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिभागियों को केवल वास्तविक सुरक्षा खामियों की पहचान करने के लिए ही नहीं, बल्कि गलत या भ्रामक निष्कर्षों को सही ढंग से खारिज करने के लिए भी पुरस्कृत किया जाएगा।

कार्यक्रम के शुभारंभ पर प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि साइबर सुरक्षा का परिदृश्य अब केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तय करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि कौन-सी खामियां सबसे गंभीर हैं और किन पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मशीनें बड़े पैमाने पर सुरक्षा संबंधी निष्कर्ष तैयार कर सकती हैं, लेकिन उनकी सत्यता की पुष्टि करने और प्राथमिकता तय करने के लिए मानवीय विवेक और निर्णय क्षमता अब भी अपरिहार्य है।

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राष्ट्रीय समाचार

ब्राह्मण चेहरों के अभाव में बसपा 2027 में कैसे साधेगी सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला?

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 2007 के विधानसभा चुनाव में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के जरिए यूपी में सत्ता हासिल की थी, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने उस सामाजिक गठजोड़ को फिर से मजबूत करने की चुनौती है।

पिछले कुछ वर्षों में बसपा के कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे पार्टी से अलग हुए या निष्कासित किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मायावती पुराने चेहरों के आभाव के बीच ब्राह्मण समाज और अन्य सामाजिक समूहों को साथ लेकर नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला कैसे तैयार करेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2007 में बसपा की सत्ता में वापसी में ब्राह्मण मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन महत्वपूर्ण रहा था। उस समय पार्टी ने दलित आधार के साथ ब्राह्मण समाज को जोड़कर व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार किया था। अब पार्टी के सामने चुनौती केवल नए ब्राह्मण चेहरों को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि समाज के बीच पुराने भरोसे को दोबारा कायम करने की भी है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि बसपा के सामने इस समय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती है। हाल ही में अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित किया गया है। इससे पहले राकेशधर त्रिपाठी, रंगनाथ मिश्रा, रामू द्विवेदी, कुशल तिवारी, विनय शंकर तिवारी, ब्रजेश पाठक और गुड्डू त्रिपाठी जैसे कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे बसपा से अलग हो चुके हैं। रामवीर उपाध्याय का परिवार भी बसपा की राजनीति में सक्रिय रहा है। इनमें से कई नेता बाद में दूसरे राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए और कुछ को मंत्री पद भी मिला।

विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, वर्तमान में सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। ऐसे में 2027 में सत्ता की दावेदारी के लिए मायावती को केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधते हुए संगठन को भी मजबूत करना होगा।

ब्राह्मण संगठन से जुड़े अभिषेक पांडेय कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण है। कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समुदाय चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है। ऐसे में 2027 से पहले ब्राह्मण समाज का समर्थन हासिल करना किसी भी राजनीतिक दल के व्यापक सामाजिक गठजोड़ की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

हालांकि, मायावती का कहना है कि पार्टी से निकाले गए या निजी स्वार्थ के चलते दूसरे दलों में गए नेताओं के राजनीतिक समर्पण का आकलन उनके कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कई लोगों ने बसपा सरकार के दौरान भी अपने निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता दी और पार्टी तथा समाज के हित में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।

मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी में लंबे समय से ईमानदार और निष्ठावान वरिष्ठ नेता नए कर्मठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं, खासकर युवाओं को तैयार कर रहे हैं। पार्टी की यह ‘नर्सरी’ लगातार जारी है और नए लोगों को संगठन में आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

बसपा से निष्कासित अनंत मिश्रा ने कहा कि 2007 में ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने में सतीश मिश्रा के चेहरे, मायावती के प्रति समाज के भरोसे और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि उस समय ब्राह्मण समाज को सम्मान और राजनीतिक भागीदारी का स्पष्ट संदेश मिला था। लगातार पार्टी के राजनीतिक प्रदर्शन में गिरावट पर नेतृत्व को आत्मचिंतन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनकी राय लेंगे और उनके सुझाव के आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।

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महाराष्ट्र

मुंबई स्थित आवास में नौसेना के नाविक, उसकी पत्नी और दो बच्चों के शव मिले

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पुलिस ने बताया कि भारतीय नौसेना के एक नाविक, उनकी पत्नी और उनके दो नाबालिग बच्चे दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित नेवी नगर में अपने आवास पर मृत पाए गए।

यह घटना 15 अगस्त को सामने आई। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाविक की मौत आत्महत्या से होने की आशंका है, जबकि उनकी पत्नी और दो बच्चों, जिनकी उम्र दो महीने और तीन वर्ष बताई गई है, की मौत जहर देने के कारण होने की आशंका है। हालांकि, मौतों की वास्तविक परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं।

पुलिस ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और मामले की आगे जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य पहलुओं से मौत के कारणों तथा घटनाक्रम की पुष्टि होने की उम्मीद है।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनीष कलवानिया ने कहा कि प्रथमदृष्टया जांच में संकेत मिले हैं कि नाविक की मौत फांसी लगाने से हुई जबकि उनकी पत्नी और बच्चों की मौत का कारण विषाक्तता प्रतीत होता है। भारतीय नौसेना ने भी घटना की पुष्टि की है और कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग दे रही है।

नौसेना ने एक बयान में कहा, “कोलाबा के नेवी नगर में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 15 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना के एक नाविक, उनकी पत्नी और दो बच्चों के शव उनके आवास पर पाए गए। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है और भारतीय नौसेना हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है।”

इस घटना के बाद पुलिस और नौसेना दोनों ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी मौतों से पहले की परिस्थितियों और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। अब तक उपलब्ध जानकारी में मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है और पोस्टमार्टम के माध्यम से मौतों के सटीक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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