अपराध
कर्नाटक में 2 पूर्व मंत्रियों के खिलाफ 25 घंटे तक चली ईडी की छापेमारी खत्म
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेता और विधायक बी. जेड. जमीर अहमद खान और पूर्व मंत्री आर. रोशन बेग, जो कथित तौर पर करोड़ों के आईएमए पोंजी घोटाले में शामिल हैं, उनके खिलाफ अपना व्यापक तलाशी अभियान चलाया। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि ईडी के 100 से अधिक अधिकारियों ने गुरुवार की तड़के दोनों नेताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया था और तलाशी लगभग 24 घंटे से अधिक समय तक चली।
सूत्रों के अनुसार, एक साथ तलाशी अभियान चलाने के लिए ईडी के 100 से अधिक अधिकारियों ने पूरे बेंगलुरु में छापेमारी की। खान की संपत्तियों में तलाशी अभियान करीब 23 घंटे तक चला जबकि बेग के परिसरों की तलाशी पूरी करने में एजेंसी को 25 घंटे लगे।
चामराजपेट से चार बार विधायक रहे खान ने अपने परिसरों और संस्थाओं पर छापेमारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से कहा कि ईडी की छापेमारी एक शानदार बंगले से संबंधित थी, जिसे उन्होंने कुछ महीने पहले बेंगलुरु के छावनी क्षेत्र में बनाया था।
उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश करते हुए कि उनकी संपत्तियों पर की गई छापेमारी करोड़ों रुपये के आईएमए पोंजी घोटाले के संबंध में नहीं थी। उन्होंने कहा, “मेरे कुछ विरोधियों ने उनसे (ईडी) शिकायत की हो सकती है और उन्होंने इसलिए ही मेरे भाइयों और कुछ करीबी रिश्तेदारों पर भी इसी तरह के तलाशी अभियान चलाने के अलावा मेरी संपत्तियों पर छापेमारी की होगी।”
खान ने कहा कि उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई (व्हाइट मनी) से अपना आलीशान घर बनाया और एक पैसा भी गलत तरीके से अर्जित नहीं किया गया है।
विपक्ष के नेता सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी खान ने कहा कि ईडी ने उनके दस्तावेज छीन लिए हैं और उन्हें निर्देश दिया है कि जब भी ईडी उन्हें या उनके परिवार के सदस्यों को आगे की पूछताछ के लिए समन करे तो वे उपलब्ध रहें।
उन्होंने कहा, “मेरा ²ढ़ विश्वास है कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। यह छापेमारी मेरे निर्दोष होने को साबित करेगी, क्योंकि यह छापे मेरी संपत्तियों और मेरे पारिवारिक व्यावसायिक संस्थाओं के लेन-देन से जुड़े हैं।”
खान नेशनल ट्रैवल्स के मालिक भी हैं, जो कर्नाटक के सबसे पुराने बस बेड़े ऑपरेटरों में से एक है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु के कलासीपलयम में है। कंपनी बेंगलुरु से देश भर के विभिन्न शहरों के लिए बस सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है। नेशनल ट्रेवल्स की स्थापना खान के पिता बी. पी. बशीर अहमद खान के समय में 1930 में हुई थी और अब इस व्यवसाय को उनके बेटों जमीर अहमद खान और उनके भाई संभालते हैं। कंपनी के पास 1,700 से अधिक बसों का बेड़ा है।
वहीं पूर्व मंत्री आर. रोशन बेग ने अपने परिसरों पर छापेमारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से कहा, “मैंने अधिकारियों को पूरा सहयोग दिया है। मैंने उनकी सभी शंकाओं का जवाब दिया है। जांच तीन-चार घंटे में समाप्त हो जानी चाहिए थी, लेकिन मुझे नहीं पता कि किस वजह से उन्हें इतना समय लगा। अधिकारियों ने मुझसे मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मुद्दों पर सवाल पूछे।”
बेग कांग्रेस में रहे हैं और जुलाई 2019 तक जब भी पार्टी राज्य में सत्ता में आई तो वह मंत्री बने। हालांकि, उन्होंने भाजपा में शामिल होने के लिए कांग्रेस छोड़ दी थी, लेकिन अपने आसपास के कुछ विवादों के कारण उन्हें भाजपा में शामिल नहीं किया जा सका।
बेग को पहले ही आईएमए मामले में चार्जशीट किया जा चुका है और यहां तक कि उन्हें गिरफ्तार और भी किया जा चुका है, मगर उन्हें जमानत भी मिल गई थी। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अलग से जांच की जा रही है।
आईएमए और कर्नाटक के अन्य घोटालों में सक्षम प्राधिकारी ने 6 जुलाई को बेग से संबंधित लगभग 20 चल और अचल संपत्तियों को पहले ही कुर्क कर लिया है, जिनकी कीमत 15 करोड़ रुपये से अधिक है।
अपराध
मुंबई: ईओडब्ल्यू ने 30 करोड़ के शेयर बाज़ार निवेश घोटाले में कार्रवाई की, आरोपी गिरफ़्तार, 1 करोड़ बरामद।

ARREST
मुंबई; मुंबई इकोनॉमिक विंग ईओडब्ल्यू ने इनविस्टॉक ऐप के नाम पर शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने की आड़ में इन्वेस्टर्स को 2 से 5 परसेंट का प्रॉफिट देने में फ्रॉड और गड़बड़ी के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है। ईओडब्ल्यू में एमपीआईडी एक्ट समेत फ्रॉड का एक केस दर्ज किया गया था जिसमें इनविस्टॉक नाम की कंपनी ने 30 करोड़ रुपये की फ्रॉड की है, जिसमें 42 इन्वेस्टर्स के साथ ठगी की गई है, जिसकी कीमत 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मुंबई ईओडब्ल्यू यूनिट 5 को जानकारी मिली थी कि लोगों से ठगी करने वाला शख्स गुजरात में छिपा हुआ है, जिस पर ईओडब्ल्यू टीम ने आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से 1.65 करोड़ रुपये भी बरामद किए गए हैं और नागरिकों से अपील की है कि वे कैपिटल स्कीम में इन्वेस्ट न करें ताकि वे फ्रॉड का शिकार न हों। इसके साथ ही नागरिक अबी आई की स्कीम के हिसाब से ही इन्वेस्ट करें।
अपराध
मुंबई पुलिस ने 1.07 करोड़ रुपए के ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड का किया पर्दाफाश, 6 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने एक संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कथित तौर पर फर्जी ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग योजनाओं के माध्यम से निवेशकों से 1.07 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी करने में शामिल था।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत पुलिस ने छह ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है जिन पर फर्जी निवेश के अवसरों का लालच देकर पीड़ितों को ठगने और धोखाधड़ी करने का आरोप है।
साइबर पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन और कई बैंक खातों के माध्यम से धोखाधड़ी की, जिसमें उन्होंने फर्जी शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश योजनाओं के जरिए आकर्षक रिटर्न का वादा किया था।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से चार को गुजरात के वडोदरा से पकड़ा गया, जबकि बाकी दो को मुंबई से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि जांच में पता चला है कि यह गिरोह एक सुनियोजित नेटवर्क के रूप में काम करता था, जिसमें अलग-अलग सदस्यों को स्पष्ट रूप से भूमिकाएं सौंपी गई थीं।
जांचकर्ताओं के अनुसार, यह ऑपरेशन कई चरणों में अंजाम दिया गया। पहले चरण में उन व्यक्तियों की पहचान करना शामिल था जो अपने बैंक खातों की जानकारी देने के इच्छुक थे।
इसके बाद, कथित तौर पर कंपनियों के नाम पर सेविंग अकाउंट खोले गए, जिसके बाद धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई बैंक खातों के माध्यम से आगे स्थानांतरित किया गया ताकि इसके निशान को छिपाया जा सके।
पुलिस का मानना है कि यह पूरी व्यवस्था संगठित साइबर धोखाधड़ी रैकेट का हिस्सा थी जिसे पकड़े जाने से बचने के लिए बनाया गया था।
यह मामला तब सामने आया जब मुंबई के एक 43 वर्षीय निवेश पेशेवर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांचकर्ताओं के अनुसार, उसे व्हाट्सएप पर ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग का विज्ञापन मिला और उसने मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक किया।
पुलिस ने बताया कि लिंक खोलने के बाद महिला ‘अर्जुन मेहता, कुआ सिक्योरिटीज, यूके’ नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ गई, जहां कई लोग खुद को बाजार विशेषज्ञ बताकर नियमित रूप से शेयर बाजार की अपडेट, निवेश सलाह और असाधारण रूप से उच्च रिटर्न के दावे साझा करते थे, जिसका मकसद ग्रुप के सदस्यों का विश्वास जीतना था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पेशेवर दिखने वाली बातचीत और निवेश संबंधी चर्चाओं के माध्यम से धीरे-धीरे पीड़ित का विश्वास जीत लिया।
अंततः उसे एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किए गए प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करने और एक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए राजी किया गया, जिसका इंटरफेस वास्तविक स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से काफी मिलता-जुलता था।
इस प्लेटफॉर्म को वैध मानते हुए पीड़िता ने अपने बैंक खातों के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के खातों से भी कई किस्तों में आरोपी द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जालसाजों ने कथित तौर पर पीड़ित से कुल 1,07,37,208 रुपए की धोखाधड़ी की थी।
साइबर क्राइम ब्रांच अब आरोपी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है, धोखाधड़ी से प्राप्त धन की आवाजाही का पता लगा रही है और उन अन्य व्यक्तियों की पहचान कर रही है जो इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।
जांचकर्ता यह पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि क्या विभिन्न राज्यों में और भी निवेशक इसी तरह की कार्यप्रणाली का शिकार हुए होंगे।
अपराध
नई दिल्ली: ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, पश्चिम बंगाल से 3 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की ओर से ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से पुलिस ने छह मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया है।
पुलिस को शिकायत मिली थी कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के जरिए 7.22 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। ठगों ने पीड़िता को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बनाए रखा और उसे आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी कर समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी संगठित साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल उपलब्ध कराते थे। पीड़ितों को फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट’ कॉल के जरिए डराकर सिंडिकेट की ओर से तैयार किए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
दक्षिण जिला (साउथ डिस्ट्रिक्ट) की साइबर पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान ‘डिजिटल अरेस्ट’ सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और अपराध से अर्जित धन का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।
इससे पहले, 29 जून को भी दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अभियान के दौरान साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने जामताड़ा समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा थी।
दक्षिण-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) अभिमन्यु पोसवाल ने बताया था कि जिले की पुलिस ने करीब 26 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े चार अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान 10 लोगों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान एक महिंद्रा थार रॉक्स वाहन, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और अपराध से जुड़े कई अन्य साक्ष्य बरामद किए गए।
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