अंतरराष्ट्रीय
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले नॉटिंघम पहुंची भारतीय टीम
विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम डरहम से नॉटिंघम पहुंच गई है। ट्रेंट ब्रिज क्रिकेट स्टेडियम में 4 अगस्त से इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले पहले टेस्ट से पहले वे नॉटिंघम में अपना प्रशिक्षण सत्र कर रहे हैं।
साउथेम्प्टन में विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के तीन सप्ताह के ब्रेक के बाद, भारतीय टीम का 20-22 जुलाई तक काउंटी सिलेक्ट इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच था।
उसके बाद, भारतीय टीम ने डरहम के चेस्टर-ले-स्ट्रीट मैदान में शुक्रवार को अपने अंतिम प्रशिक्षण सत्र तक अभ्यास जारी रखा।
पृथ्वी शॉ और सूर्यकुमार यादव, जिन्हें अवेश खान (अंगूठे में फ्रैक्च र) और वाशिंगटन सुंदर (उंगली की चोट) के लिए सब्सीटूयुट चुना गया है, को अभी इंग्लैंड में टेस्ट टीम में शामिल होना है।
खान और सुंदर घर वापस आ गए हैं। उनसे पहले, शुभमन गिल अपने बाएं पिंडली में चोट के बाद घर वापस जा चुके हैं।
भारतीय टीम : रोहित शर्मा, मयंक अग्रवाल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे (उपकप्तान), हनुमा विहारी, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जडेजा, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, उमेश यादव, केएल राहुल, रिद्धिमान साहा, पृथ्वी शॉ, सूर्यकुमार यादव और अभिमन्यु ईश्वरन।
स्टैंडबाय खिलाड़ी : प्रसिद्ध कृष्णा और अर्जन नागवासवाला
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने समयसीमा तय की, ईरान पर हमलों की चेतावनी दी

TRUMP
वॉशिंगटन, 7 अप्रैल : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौता करने के लिए अंतिम समयसीमा दी है और चेतावनी दी है कि अगर बातचीत विफल होती है तो व्यापक सैन्य कार्रवाई की जाएगी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है, जिसका वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, “उनके पास कल तक का समय है और जोड़ा कि कूटनीति की गुंजाइश तेजी से खत्म हो रही है।
उन्होंने बताया कि बातचीत जारी है लेकिन अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा “हमें लगता है कि वे ईमानदारी से बातचीत कर रहे हैं… हमें जल्द ही पता चल जाएगा।”
इसके साथ ट्रंप ने साफ किया कि सैन्य विकल्प अब भी खुले हैं। “हम उन्हें बुरी तरह हिला सकते हैं,” उन्होंने कहा, संभावित अमेरिकी कार्रवाई के पैमाने को रेखांकित करते हुए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि संभावित लक्ष्यों के मामले में “बहुत कम चीजें सीमा से बाहर हैं,” जिससे संकेत मिलता है कि यदि ईरान ने पालन नहीं किया तो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी हमला किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अमेरिका की मांगों का एक प्रमुख हिस्सा है। “उस समझौते का एक हिस्सा यह होगा कि हम तेल और अन्य चीजों की मुक्त आवाजाही चाहते हैं।” उन्होंने कहा, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे ऊर्जा मार्गों के रणनीतिक महत्व की ओर इशारा किया।
ट्रंप ने हालिया अमेरिकी अभियानों के बाद ईरान को कमजोर बताया। उन्होंने कहा, “उनके पास नौसेना नहीं है… उनके पास वायु सेना नहीं है… उनके पास वायु रक्षा प्रणाली नहीं है।” हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि असममित खतरे अब भी मौजूद हैं।
उन्होंने संघर्ष के अगले चरण को लेकर अनिश्चितता भी स्वीकार की। ट्रंप ने कहा, “मैं आपको नहीं बता सकता… यह इस पर निर्भर करता है कि वे क्या करते हैं।”
ये टिप्पणियां दबाव और कूटनीति के मिश्रण को दर्शाती हैं, जहां अमेरिका रियायतें हासिल करने की कोशिश कर रहा है, साथ ही हमलों को तेज करने का विकल्प भी खुला रख रहा है। ट्रंप ने कहा कि कई देश इस संकट के समाधान के प्रयासों में लगे हुए हैं। “इस युद्ध से बहुत से लोग प्रभावित हो रहे हैं।”
यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव रखती है, खासकर यदि तनाव के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों में बाधा आती है, जो तेल आपूर्ति की एक प्रमुख धुरी है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि सीमित कदम, जैसे समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाना, भी यातायात रोक सकते हैं और व्यापक आर्थिक असर पैदा कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरानी बुनियादी ढांचों पर हमले की अमेरिकी धमकी से संयुक्त राष्ट्र चिंतित; प्रवक्ता ने जताई आपत्ति

संयुक्त राष्ट्र, 7 अप्रैल : संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका के उस बयान पर चिंता जताई है, जिसमें ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की धमकी दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की भाषा को लेकर संगठन चिंतित है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, “सोशल मीडिया पर किए गए उस पोस्ट में अमेरिका द्वारा बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य ढांचों पर हमले की बात कही गई थी, जिसे लेकर हम चिंतित हैं, खासकर अगर ईरान किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होता।”
उन्होंने कहा कि महासचिव पहले भी साफ कर चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है और सभी पक्षों को संघर्ष के दौरान अपने दायित्वों का सम्मान करना चाहिए।
प्रवक्ता के मुताबिक, गुटेरेस ने दोहराया कि आम लोगों से जुड़ी सुविधाओं, जैसे बिजली और ऊर्जा से जुड़े ढांचे, पर हमला नहीं किया जाना चाहिए, भले ही कुछ मामलों में उन्हें सैन्य लक्ष्य माना जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि सभी पक्ष इस संघर्ष को खत्म करें, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान ही सबसे सही रास्ता है।
जब यह पूछा गया कि क्या ऐसे हमले युद्ध अपराध माने जाएंगे, तो दुजारिक ने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होंगे। यह तय करना कि यह अपराध है या नहीं, अदालत का काम है।
उन्होंने साफ कहा, “किसी भी नागरिक ढांचे पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।”
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने तेहरान स्थित शरिफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर अमेरिका और इजरायल के हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में यूनिवर्सिटी के सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र की इमारत और पास में स्थित गैस स्टेशन को भारी नुकसान पहुंचा।
ईरान की सेना ने रविवार को बताया कि उसने दक्षिणी इज़रायल में स्थित पेट्रोकेमिकल उद्योगों और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया है। इसके अलावा, उसने कुवैत स्थित एक सैन्य अड्डे पर मौजूद अमेरिकी उपकरणों के गोदामों, उपग्रह संचार इकाइयों और वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों पर भी हमला किया है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकराया, ‘स्थायी समाधान’ के लिए 10-सूत्रीय योजना पेश की

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तेहरान, 7 अप्रैल : ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने इसके जवाब में 10 बिंदुओं का एक दस्तावेज़ पेश किया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ईरान ने अपने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वह सिर्फ युद्धविराम (सीजफायर) को स्वीकार नहीं करेगा। इस जवाब में ईरान की कई मांगें रखी गई हैं, जैसे क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, युद्ध से प्रभावित इलाकों का पुनर्निर्माण करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना।
आईआरएनए ने बताया कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में दिया गया, जब ईरान के पश्चिमी और मध्य इलाकों में हालात बदले हैं और अमेरिका का एक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सफल नहीं रहा। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तय की गई समय सीमा को फिर बढ़ा दिया और अपने पुराने रुख में कुछ बदलाव किया।
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने ईरान के 10 बिंदुओं वाले जवाब को “एक अहम कदम” बताया, लेकिन कहा कि यह “पर्याप्त नहीं है।”
सोमवार को ही ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि सीज़फ़ायर से विरोधियों को सिर्फ़ फिर से संगठित होने और और ज़्यादा अपराध करने का समय मिल जाएगा, और “कोई भी समझदार” व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगा।
मार्च के आखिर में अमेरिकी मीडिया ने खबर दी थी कि अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा था, ताकि युद्ध खत्म किया जा सके। बाद में ईरान ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह “ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बनाया गया है और जमीनी हकीकत से जुड़ा नहीं है।”
ईरान ने शांति के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। इनमें अमेरिका और इजराइल के हमलों को रोकना, भविष्य में हमले रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करना, पश्चिम एशिया में सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद करना और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है।
28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमला किया था। इस हमले में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में इजराइल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
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