अंतरराष्ट्रीय समाचार
श्रीलंका को सितंबर तक 30 वर्ष से ऊपर के सभी नागरिकों का टीकाकरण करने की उम्मीद
राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंका को उम्मीद है कि सितंबर तक 30 साल से ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों को कोविड -19 के खिलाफ टीका लगाया जाएगा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को राष्ट्र के नाम एक टेलीविजन संबोधन में, राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंका को एस्ट्राजेनेका टीकों की 1,264,000 खुराक, सिनोफार्म टीकों की 3.1 मिलियन खुराक और स्पुतनिक वी टीकों की 130,000 खुराक मिली है।
उन्होंने कहा कि चीनी सिनोफार्मा और सिनोवैक टीकों की ज्यादा खुराक जुलाई में आने की उम्मीद है और रूस से स्पुतनिक वी टीकों की 2 मिलियन खुराक प्राप्त करने की भी व्यवस्था की गई थी।
राष्ट्रपति ने कहा, “हम इस साल सितंबर के अंत तक 13 मिलियन लोगों का टीकाकरण कर सकते हैं। हम उस समय तक 30 वर्ष से ज्यादा उम्र के लगभग सभी लोगों को टीकाकरण कर सकते हैं।”
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन पर टिप्पणी करते हुए, राजपक्षे ने कहा कि कोई भी देश अपने हवाई अड्डों और बंदरगाहों को लंबे समय तक बंद रखने के साथ काम करना जारी नहीं रख सकता है।
उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसे श्रीलंकाई लोगों को वापस लाया जाना चाहिए और आयात और निर्यात कम से कम किसी तरह के नियंत्रण में होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “इस अपरिहार्य वैश्विक संपर्क के कारण कोई भी देश कोरोनावायरस के दोबारा प्रवेश को पूरी तरह से नहीं रोक पाया है। देश को बंद करने से जोखिम को अस्थायी रूप से ही नियंत्रित किया जा सकता है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि कोरोनावायरस को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के लिए, लोगों को जिम्मेदारी से सरकार द्वारा लगाए गए सख्त सामाजिक दूरियों के प्रतिबंधों का समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में श्रीलंका कोरोनवायरस की तीसरी लहर का सामना कर रहा है और देश में कई अलग-अलग उपभेद फैल गए हैं जिसने पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है।
“स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उपलब्ध मानव संसाधन और अन्य सुविधाएं उस स्थिति से तत्काल निपटने के लिए अपर्याप्त हैं जब वायरस तेजी से फैलता है और संक्रमित लोगों की संख्या खतरनाक रूप से बढ़ जाती है। इसलिए, सरकार को देश को फिर से बंद करना पड़ा।”
नतीजतन, कारखानों और संस्थानों में क्षमता को सीमित करना पड़ा।
हालांकि, प्रतिबंधों ने श्रीलंका के उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। राजपक्षे ने कहा, विशेष रूप से, परिधान उद्योग, जिसने लगभग 5 बिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त किया, को भारी नुकसान हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि महामारी के कारण श्रीलंका के पर्यटन उद्योग को भी झटका लगा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल में बाढ़ से तबाही के बीच चीन में भूकंप, सिचुआन में 5.1 तीव्रता के झटके, 47 ग्लेशियर झीलों पर बढ़ा खतरा

चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में शुक्रवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। लोंगचांग शहर में दोपहर 1:13 बजे 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप की गहराई लगभग 13 किमी थी। फिलहाल नुकसान या हताहत की कोई जानकारी नहीं है।
चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर (सीईएनसी) के अनुसार, चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में शुक्रवार दोपहर 1:13 बजे (बीजिंग समय) 5.1 तीव्रता का भूकंप आया।
सीईएनसी की ओर से जारी जानकारी के हवाले से ‘चाइना डेली’ ने बताया कि भूकंप का केंद्र 29.23 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 105.22 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। सीईएनसी के अनुसार, यह भूकंप 13 किलोमीटर की गहराई पर आया। फिलहाल भूकंप से हुए नुकसान या किसी हताहत की तत्काल जानकारी सामने नहीं आई है।
ये घटना ऐसे समय हो रही है जब चीन के पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ के कारण भारी तबाही मची हुई है। इस जल आपदा का कुछ असर चीन में भी हुआ है। ऐसे में भूकंप की दस्तक ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और नेपाल सरकार के वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, 47 ग्लेशियल झीलों को ‘संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलें’ (पीडीजीएलएस) के रूप में चिन्हित किया गया है। चेतावनी दी गई है कि इन झीलों से कभी भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) आ सकता है, जो नेपाल की नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकता है। ऐसे में भूकंप तबाही का एक बड़ा कारण बन सकता है।
इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं और सीमा पार की श्रेणी में आती हैं। ये झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल में प्रवेश करती हैं, इसलिए ये नीचे बसे समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए संभावित खतरा पैदा करती हैं।
नेपाल के भोटेकोसी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। यह बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ‘ल्हेन्डे’ का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण रुक गया। इसके बाद सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव प्रभावित हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाके में बारिश नहीं हुई थी, इसलिए लोगों को इस आपदा के आने का कोई अंदाजा नहीं था। बाढ़ आने के समय लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लगे हुए थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल त्रासदी : बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या 469 पहुंची, 977 लोग अब भी लापता

नेपाल के भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। यह जानकारी नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने शुक्रवार को जारी की।
माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल और चीन की सीमा के बीच बहने वाली एक अंतरराष्ट्रीय नदी में ऊपर की ओर हुए हिमस्खलन के कारण आई। इससे भोटेकोसी नदी के किनारे के निचले इलाकों में भारी तबाही मची है। बाढ़ के तेज बहाव में कई बस्तियां, सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएं, बिजली प्रसारण ढांचा और अन्य सुविधाएं बह गईं।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, विभिन्न जिलों से अब तक 469 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 178 शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, तनहुन में 28, नवलपरासी पश्चिम में 27, धाडिंग में 23 और रसुवा में 12 शव बरामद किए गए हैं। प्राधिकरण के अनुसार, जिन 977 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार रात बताया था कि भोटेकोसी नदी में आई इस आपदा के बाद 290 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं।
अमेरिका ने कहा है कि करीब 90 अमेरिकी नागरिक इस बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चीन के अनुसार बुधवार को हुए भूस्खलन के बाद नेपाल की तरफ लगभग 100 चीनी नागरिक अब भी लापता हैं। लापता लोगों में विदेशों में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं।
अथॉरिटी के अनुसार, संपर्क से बाहर लोगों में नेपाल पुलिस के 28 जवान, नेपाल सेना के 45 जवान, आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान, कस्टम ऑफिस के 15 कर्मचारी और इमिग्रेशन ऑफिस के चार कर्मचारी शामिल हैं।
अथॉरिटी ने बताया कि इस आपदा में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं। जिनमें रसुवा में 43, धाडिंग में तीन और नुवाकोट में 27 लोग शामिल हैं।
बचाव और राहत कार्यों के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं। अब तक बचाव दलों ने 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला है। फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने राहत सामग्री वितरित करने या बचाव कार्य में मदद करने के इच्छुक लोगों और संगठनों से अपील की है कि वे पहले अपने संबंधित जिले के जिला प्रशासन कार्यालय से संपर्क करें और आवश्यक समन्वय के बाद ही राहत सामग्री भेजें।
पीएमओ ने कहा, “संबंधित मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) का कार्यालय क्षेत्र की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार राहत सामग्री सीधे प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने की समन्वित व्यवस्था करेगा।”
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हाल के दिनों में कई लोग और संगठन बिना पूर्व समन्वय के छोटे निजी वाहनों में सीमित मात्रा में राहत सामग्री लेकर प्रभावित क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे सड़कों पर भारी जाम लग रहा है। इसके कारण आपातकालीन मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंसों की आवाजाही प्रभावित हुई है। साथ ही, सरकार की मुख्य बचाव टीमों और प्राथमिकता वाले राहत वाहनों को भी समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
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नेपाल त्रासदी : बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या 469 पहुंची, 977 लोग अब भी लापता

नेपाल के भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। यह जानकारी नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने शुक्रवार को जारी की।
माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल और चीन की सीमा के बीच बहने वाली एक अंतरराष्ट्रीय नदी में ऊपर की ओर हुए हिमस्खलन के कारण आई। इससे भोटेकोसी नदी के किनारे के निचले इलाकों में भारी तबाही मची है। बाढ़ के तेज बहाव में कई बस्तियां, सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएं, बिजली प्रसारण ढांचा और अन्य सुविधाएं बह गईं।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, विभिन्न जिलों से अब तक 469 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 178 शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, तनहुन में 28, नवलपरासी पश्चिम में 27, धाडिंग में 23 और रसुवा में 12 शव बरामद किए गए हैं। प्राधिकरण के अनुसार, जिन 977 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार रात बताया था कि भोटेकोसी नदी में आई इस आपदा के बाद 290 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं।
अमेरिका ने कहा है कि करीब 90 अमेरिकी नागरिक इस बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चीन के अनुसार बुधवार को हुए भूस्खलन के बाद नेपाल की तरफ लगभग 100 चीनी नागरिक अब भी लापता हैं। लापता लोगों में विदेशों में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं।
अथॉरिटी के अनुसार, संपर्क से बाहर लोगों में नेपाल पुलिस के 28 जवान, नेपाल सेना के 45 जवान, आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान, कस्टम ऑफिस के 15 कर्मचारी और इमिग्रेशन ऑफिस के चार कर्मचारी शामिल हैं।
अथॉरिटी ने बताया कि इस आपदा में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं। जिनमें रसुवा में 43, धाडिंग में तीन और नुवाकोट में 27 लोग शामिल हैं।
बचाव और राहत कार्यों के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं। अब तक बचाव दलों ने 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला है। फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने राहत सामग्री वितरित करने या बचाव कार्य में मदद करने के इच्छुक लोगों और संगठनों से अपील की है कि वे पहले अपने संबंधित जिले के जिला प्रशासन कार्यालय से संपर्क करें और आवश्यक समन्वय के बाद ही राहत सामग्री भेजें।
पीएमओ ने कहा, “संबंधित मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) का कार्यालय क्षेत्र की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार राहत सामग्री सीधे प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने की समन्वित व्यवस्था करेगा।”
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हाल के दिनों में कई लोग और संगठन बिना पूर्व समन्वय के छोटे निजी वाहनों में सीमित मात्रा में राहत सामग्री लेकर प्रभावित क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे सड़कों पर भारी जाम लग रहा है। इसके कारण आपातकालीन मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंसों की आवाजाही प्रभावित हुई है। साथ ही, सरकार की मुख्य बचाव टीमों और प्राथमिकता वाले राहत वाहनों को भी समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
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