राजनीति
केरल भाजपा प्रतिशोध की राजनीति के विरोध में सड़कों पर उतरी
केरल भाजपा के शीर्ष नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने एक दिन पहले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की थी। इसने पिनाराई विजयन सरकार पर पार्टी की छवि को ‘खराब’ करने और प्रतिशोध’ की राजनीति करने का आरोप लगाया था । इस मसले पर विरोध के तौर पर पार्टी ने गुरुवार को राज्य भर में 10,000 स्थानों पर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।
भाजपा नेताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मीडिया का उपयोग करके झूठी आधारहीन रिपोर्ट का प्रचार करके, त्रिशूर के हवाला धन मामले में चल रही जांच की आड़ में भाजपा नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रहे हैं।
संयोग से, मामला 6 अप्रैल के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बड़ी रकम का खुलासा करने से संबंधित है। इसमें भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सहयोगी एक महिला पदाधिकारी के नाम का खुलासा हुआ था।
जिसके बाद एक और खुलासा हुआ। मंजेश्वरम निर्वाचन क्षेत्र में बसपा के उम्मीदवार के. सुंदरा ने कहा कि सुरेंद्रन के पक्ष में अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए उन्हें स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा पैसे दिए गए थे।
भाजपा के एक शीर्ष नेता ने कहा, “विरोध कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार आयोजित किए जाएंगे और हमारे सभी शीर्ष नेता राज्य में 10,000 स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने के लिए ऑनलाइन लाइव आएंगे।”
मीडिया में खबरें है कि सुरेंद्रन से ही नहीं, बल्कि उनके छोटे बेटे से भी पूछताछ की जाएगी।
चुनावों के दौरान, सुरेंद्रन ने कहा था कि भाजपा 35 सीटें जीतेगी और केरल में सरकार बनाएगी। जब वोटों की गिनती हुई, तो भाजपा अपनी एकमात्र सीट हार गई जो उसने 2016 में जीती थी।
केरल में भाजपा एक विभाजित घर की तरह है । चुनावी हार और अपने वोट शेयर में गिरावट के बाद, सुरेंद्रन पार्टी में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
राजनीति
टीवीके नेताओं ने पार्टी उम्मीदवार सत्यभामा के खिलाफ टिप्पणियों को लेकर स्टालिन से माफी की मांग की

धारापुरम विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा टीवीके उम्मीदवार सत्यभामा के बारे में कथित तौर पर की गई टिप्पणियों की मंत्री सेंगोत्तैयन और अरुण राज ने आलोचना की है। उन्होंने स्टालिन पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।
स्टालिन ने शुक्रवार को डीएमके उम्मीदवार सुकन्या के समर्थन में चुनाव क्षेत्र में प्रचार किया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने कथित तौर पर सत्यभामा के लिए अपमानजनक उपनामों का इस्तेमाल किया, जिस पर टीवेके नेतृत्व ने आपत्ति जताई।
इस विवाद ने 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले पार्टियों के बीच चल रही बहस को और बढ़ा दिया है। मंत्रियों का तर्क है कि राजनीतिक प्रचार का ध्यान मतदाताओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर होना चाहिए, न कि किसी महिला उम्मीदवार पर व्यक्तिगत हमले करने पर।
एक्स पर एक पोस्ट में मंत्री सेंगोत्तैयन ने सवाल उठाया कि क्या स्टालिन की टिप्पणियों को चुनाव प्रचार माना जा सकता है या यह महिलाओं का मजाक उड़ाने की एक अपमानजनक कोशिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियां डीएमके के भीतर महिलाओं के प्रति अनादर की सोच को दर्शाती हैं।
मंत्री ने स्टालिन पर राजनीतिक हालात के हिसाब से अलग-अलग रुख अपनाने का भी आरोप लगाया और न्याय, ईमानदारी, जाति और भेदभाव पर उनके बयानों पर सवाल उठाए।
उन्होंने डीएमके नेता से उन टिप्पणियों के लिए माफी मांगने की मांग की जो उनसे जुड़ी हैं। सेंगोत्तैयन की आलोचना इस बात पर केंद्रित थी कि उन्होंने सत्यभामा के राजनीतिक रिकॉर्ड या धारापुरम के मतदाताओं के सामने मौजूद मुद्दों पर बहस करने के बजाय उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
अरुण राज ने एक्स पर एक पोस्ट में इन टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि स्टालिन ने चुनाव क्षेत्र में एक प्रचार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और टीवीके उम्मीदवार का मजाक उड़ाया।
अरुण राज ने कहा कि पार्टी सत्यभामा की गरिमा पर हुए हमले की कड़ी निंदा करती है।
उनका बयान, चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषण के लहजे पर सेंगोत्तैयन की आपत्ति से मेल खाता था। दोनों मंत्रियों की आपत्तियों ने उपचुनाव प्रचार की बहस में महिला उम्मीदवारों के साथ व्यवहार का मुद्दा भी शामिल कर दिया। दोनों ने स्टालिन की कथित टिप्पणियों को अस्वीकार्य राजनीतिक व्यवहार बताया।
मंत्रियों की आलोचना पर स्टालिन या डीएमके की कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसमें भाषण का पूरा विवरण भी नहीं दिया गया है, जिससे विवादित टिप्पणियों के शब्द और संदर्भ स्पष्ट नहीं हो पाते हैं।
सुकन्या डीएमके और सत्यभामा टीवीके की ओर से धारापुरम में चुनाव लड़ रही हैं। मंगलवार को होने वाले मतदान से पहले यहां चुनाव प्रचार तेज हो गया है और विरोधी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही हैं।
राजनीति
अखिलेश को निशाद-दानिश की नसीहत, विपक्षी एकता से पहले जमीनी हकीकत देखें

यूपी में राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव द्वारा विपक्षी एकता के आह्वान पर सत्ताधारी गठबंधन के मंत्रियों ने पलटवार किया है। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने विपक्षी एकता के दावे को खोखला बताया। जहां कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने विपक्ष पर बयानबाजी, पोस्टरबाजी और एसी-पीसी तक सीमित रहने का आरोप लगाया, वहीं राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी के दावों को लेकर निशाना साधा।
संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष के पास केवल बयानबाजी, पोस्टरबाजी और एसी-पीसी के अलावा कोई शक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को लोग 70 साल तक देख चुके हैं। विभिन्न दलों के नेताओं ने यह सब देखने के बाद ही अपने दल खड़े किए हैं या एनडीए के साथ आए हैं।
निषाद ने कहा कि सत्ता के बाहर रहने पर अखिलेश को मिलन दिखाई देता है; उनके इन बयानों से कुछ होने वाला नहीं है।
संजय निषाद ने दावा किया कि इस बार एनडीए की ऐतिहासिक जीत होगी। वहीं, राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि समाजवादी पार्टी बहुत बड़े-बड़े दावे कर रही थी लेकिन अब उसके सारे दावों की पोल खुल चुकी है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने झूठ का जो गुब्बारा फुलाया था, अब उस गुब्बारे की हवा निकल चुकी है।
उत्तर प्रदेश में जिस तरीके से समाजवादी पार्टी ने गफलत और नफरत की राजनीति को फैलाने का काम किया, उसके लिए राज्य की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
दानिश आजाद ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तरफ सपा जिस तरीके से आगे बढ़ रही है, उसकी अब तक की सबसे बड़ी हार होने वाली है। 2027 में समाजवादी पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में बढ़ा केंद्र का सहयोग, ग्रामीण आजीविका को मिल रही नई मजबूती: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में समर्थन बढ़ा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर मजबूत हों और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और विभिन्न जिलों में पशु चिकित्सकों की तैनाती जैसी पहलें डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत बना रही हैं। इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से कृषि क्षेत्र में सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निवेश किसानों की आय विविधीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार रायलसीमा को ‘रत्नाला सीमा’ यानी समृद्धि की भूमि में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में एनडीए को मिले जनादेश ने विकास से जुड़े बड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में नई ऊर्जा दी है।
सीतारमण ने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के 10 जिलों, जिनमें रायलसीमा के आठ जिले और दो पड़ोसी जिले शामिल हैं, को कवर करने वाली 1 लाख करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना की है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र को विश्वस्तरीय ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के साथ-साथ विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त होगा। परियोजना के तहत आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जल उपयोग दक्षता में सुधार किया जाएगा और कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वित्त मंत्री ने जल संरक्षण को कृषि विकास की प्रमुख आवश्यकता बताते हुए कहा कि सरकार विशेष रूप से जल संकट वाले क्षेत्रों में हर बूंद पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर काम कर रही है। इसके लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों और तकनीकी हस्तक्षेपों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक रूप से विकसित नई बीज किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो अत्यधिक गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम हैं। इससे कृषि को अधिक जलवायु-लचीला बनाने में मदद मिलेगी।
सीतारमण ने केंद्र सरकार की कई किसान-केंद्रित योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गोबरधन योजना के तहत ग्रामीण अपशिष्ट को स्वच्छ बायोगैस में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और अतिरिक्त आय दोनों के अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उन्हें भरोसेमंद और कम लागत वाली बिजली मिल रही है।
फसलों को प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को मजबूत बीमा सुरक्षा प्रदान कर रही है और कृषि जोखिमों को कम करने में मदद कर रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन, जल संरक्षण, तकनीक आधारित खेती और कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है। उन्होंने बताया कि कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में समन्वित विकास से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
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