अपराध
पहलवान हत्याकांड में ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के 4 साथी गिरफ्तार
पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड में दिल्ली पुलिस ने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के चार साथियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए सभी लोग काला असौदा और नीरज बवाना गिरोह के सदस्य हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुप्त सूचना पर रोहिणी जिले के रोहिणी जिले के ऑपरेशन सेल के एसीपी ब्रह्मजीत सिंह की निगरानी में इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह और रोहिणी के स्पेशल स्टाफ की टीम ने काला असौदा, नीरज बवाना गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को कंझावला क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।
अधिकारी ने बताया कि छत्रसाल स्टेडियम में धनखड़ हत्याकांड में सभी आरोपी सुशील कुमार के सहयोगी पाए गए।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा के झज्जर और रोहतक के रहने वाले भूपेंद्र उर्फ भूपी, मोहित उर्फ भोली, गुलाब उर्फ पहलवान और मंजीत उर्फ चुन्नील के रूप में हुई है।
उन्होंने सागर की हत्या की पूरी साजिश और घटनाओं के क्रम का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) लंबित हैं।
अधिकारी ने उनकी गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए बताया कि चार और पांच मई की दरमियानी रात को मॉडल टाउन थाने में छत्रसाल स्टेडियम के अंदर फायरिंग की सूचना मिली थी।
अधिकारी ने कहा कि छत्रसाल स्टेडियम में पुलिस को मारुति ऑल्टो, होंडा सिटी, टोयोटा फॉर्च्यूनर, महिंद्रा स्कॉर्पियो और मारुति ब्रेजा सहित पांच कारें मिलीं।
पुलिस ने स्कॉर्पियो कार के अंदर एक भरी हुई डबल बैरल गन और तीन राउंड और पाकिर्ंग क्षेत्र में दो लाठी भी बरामद की।
मौके की जांच के दौरान यह पाया गया कि सुशील कुमार और उनके सहयोगियों ने घायल व्यक्तियों को पीटा था। आईपीसी और शस्त्र अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बाद में मामले की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई।
सुशील कुमार और उनके सहयोगी अजय को रविवार सुबह गिरफ्तार किया गया और वे अपराध शाखा के पुलिस रिमांड पर हैं।
अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को सूचना मिली थी कि छत्रसाल स्टेडियम में धनखड़ की हत्या में संलिप्त काला असौदा गिरोह और नीरज बवाना गिरोह के चार सदस्य हरियाणा के झज्जर निवासी अपने सहयोगी कला से मिलने घेवरा गांव आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने घेवरा रेलवे क्रॉसिंग के पास जाल बिछाया और चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि 4 और 5 मई की मध्यरात्रि में, वे छत्रसाल स्टेडियम गए थे। वे रात लगभग 12 बजे दो वाहनों, एक स्कॉर्पियो कार और एक ब्रेजा कार में स्टेडियम पहुंचे। इसके बाद सक्रिय रूप से खुद को अपराध में शामिल किया।
पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि चारों आरोपियों ने घटनाओं का क्रम और अपराध में शामिल अन्य व्यक्तियों का विवरण भी बताया।
उन्होंने कहा कि पुलिस का सायरन सुनकर, वे अपने वाहनों के साथ भाग नहीं सके, दोनों कारों (स्कॉर्पियो और ब्रेजा) और अपने हथियारों को वहीं छोड़ दिया।
आईएएनएस ने सोमवार को महिंद्रा स्कॉर्पियो के नीरज बवाना गिरोह के लोगों से जुड़े होने की खबर दी थी।
पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय भूपेंद्र 2000 में राजीव उर्फ कला के संपर्क में आया और एक डकैती करने के बाद वह काला का करीबी सहयोगी बन गया और 2011 तक कई डकैती और हत्याएं कीं।
अधिकारी ने बताया कि भूपेंद्र दोहरे हत्याकांड में 2011 में जेल गया और फरवरी 2021 तक जेल में रहा।
अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2020 में, उसके गिरोह के नेता काला की रोहतक में अदालत परिसर में प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सदस्यों द्वारा हत्या कर दी गई थी और उसकी रिहाई के बाद वह बदला लेने के लिए अपने गिरोह को पुनर्जीवित कर रहा था।
2011 में, उसे एक संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था और उसके पास से 32 अवैध आग्नेयास्त्र (7 पिस्तौल और 25 देशी पिस्तौल) बरामद किए गए थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जेल में वह काला असौदा के संपर्क में आया और उसके बाद अपने गिरोह के सदस्यों को हथियारों की आपूर्ति की।
अधिकारी ने कहा, उसे कई मामलों में काला के सहयोगियों के साथ कई बार गिरफ्तार किया गया था। अब वह काला असौदा गिरोह को मजबूत करने के लिए भूपेंद्र में शामिल हो गया। वह पहले चार मामलों में शामिल था।
अपराध
बंगाल: मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणी, युवक गिरफ्तार

पुलिस ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ ‘अपमानजनक’ टिप्पणी करने के आरोप में आकाश सरकार नामक एक युवक को गिरफ्तार किया है।
शिकायत के आधार पर, उत्तरी कोलकाता के नागरबाजार पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने उसे सोमवार को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आकाश पर सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप है, जिसमें न केवल मुख्यमंत्री बल्कि कई भाजपा नेताओं के खिलाफ भी झूठी जानकारी फैलाना शामिल है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियां क्यों करता था।
आकाश सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बारे में एक के बाद एक अभद्र और भद्दी टिप्पणियां करता था। आरोप है कि वह पश्चिम बंगाल भाजपा के कई नेताओं के नाम पर सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी भी फैलाता था।
नागरबाजार पुलिस स्टेशन में आकाश के नाम से एक लिखित शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने घटना की जांच शुरू की।
शिकायत की प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आकाश को गिरफ्तार कर सोमवार को बैरकपुर अदालत में पेश किया।
पुलिस ने आगे की पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लेने का आवेदन दिया है।
वहीं, पुलिस ने रविवार को पश्चिम मिदनापुर जिले में एक युवक को गिरफ्तार किया, जिस पर हिंदू देवी-देवताओं, प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री के बारे में सोशल मीडिया पर विकृत और व्यंग्यात्मक पोस्ट करने का आरोप है।
गिरफ्तार युवक की पहचान सुरजीत शी के रूप में हुई है।
हाल ही में हिंदुत्व संगठनों के कई लोगों ने सुरजीत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
गिरफ्तार युवक को रविवार को अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने उसे 4 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
अपराध
तेलंगाना में मिठाई की दुकानों पर छापा, गंदगी और मिलावट का खुलासा

तेलंगाना में मिठाई बनाने और बेचने वाली दुकानों पर की गई स्पेशल ड्राइव में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स (टीजी सेफ) ने पूरे राज्य में यह अभियान चलाया।
‘टीजी सेफ’ के फूड सेफ्टी ऑफिसर्स ने 53 मिठाई बनाने और रिटेल यूनिट्स पर छापेमारी की। ‘टीजी सेफ’ ने रविवार को एक बयान में बताया कि शुक्रवार को हुई जांच के दौरान अधिकारियों ने कुछ दुकानों में कई खामियां पाईं।
जांच में फर्श टूटा हुआ मिला और वहां खाने का कचरा बिखरा पड़ा था। धुलाई वाली जगह गंदी थी, नालियां खाने के कचरे से जाम थीं। दीवारों पर गंदगी, धूल और खाने के कचरे के दाग लगे थे। कई जगह कीट नियंत्रण रिकॉर्ड, फूड हैंडलर्स के हेल्थ रिकॉर्ड जैसे जरूरी कागजात भी नहीं थे। फूड हैंडलर्स बिना हेयरनेट और दस्तानों के काम कर रहे थे। एग्जॉस्ट और चिमनियां चिकनाई से भरी थीं और स्टोरेज का तरीका भी गलत था, जैसे खाने का सामान जमीन पर रखा होना और खाने और गैर-खाने के सामान को एक साथ रखना।
अधिकारियों ने मिलावट के शक में 38 सैंपल लिए। जांच में मिली खामियों को सुधारने के लिए 20 दुकानों को सुधार नोटिस दिया जाएगा।
‘टीजी सेफ’ कमिश्नर ने कहा कि इन दुकानों का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि उन्होंने फूड सेफ्टी के नियमों का पालन किया है या नहीं। दोबारा जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और एक दुकान को जांच के दौरान मिली खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
यह स्पेशल ड्राइव मंचेरियल, जंगांव, सिद्दीपेट, खम्मम, नारायणपेट, जोगुलाम्बा गडवाल, वनपर्थी, नलगोंडा, सूर्यापेट, पेद्दापल्ली, कामारेड्डी, नागरकुरनूल, निर्मल, निजामाबाद, हनुमाकोंडा, मेडक, वारंगल, राजन्ना सिरसिला, जगतियाल, महबूबनगर और कोठागुडेम जैसे जिलों में चलाई गई।
इससे पहले पिछले हफ्ते हैदराबाद में ‘टीजी सेफ’ की छापेमारी के बाद तीन मिठाई की दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। अधिकारियों ने जांच के दौरान साफ-सफाई में कमी और फूड सेफ्टी से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियां पाईं और जनहित में तीन दुकानों को तुरंत कारोबार बंद करने का निर्देश दिया।
छापेमारी में मकड़ी के जाले, चिकनाई से भरे एग्जॉस्ट, गलत स्टोरेज और फूड हैंडलर्स की खराब व्यक्तिगत सफाई मिली, जिनमें से कुछ के नाखून बढ़े हुए थे। अधिकारियों ने खाने के सामान में कीड़े, कॉकरोच और अचार में फंगल संदूषण की भी सूचना दी।
ये तीन दुकानें उन 21 खोवा और मिठाई बनाने और बेचने वाली इकाइयों में से थीं, जिनकी 11 प्रवर्तन टीमों ने जांच की थी, जिसमें फूड सेफ्टी ऑफिसर और पुलिस कर्मी शामिल थे।
पूरी जांच के दौरान अधिकारियों ने मिलावट के शक में 21 सैंपल लिए और 7,75,850 रुपए मूल्य के 1,035 किलो खाद्य पदार्थ जब्त किए।
अपराध
ओडिशा में 2.60 करोड़ के घोटाले में वन विभाग का अधिकारी गिरफ्तार

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस ने रविवार को राज्य वन विभाग के सीनियर क्लर्क को 2.60 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान बबलू सुना के रूप में हुई है, जो सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग, नुआपाड़ा के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) कार्यालय में स्थापना अनुभाग के प्रभारी वरिष्ठ सहायक के रूप में तैनात था।
आरोप है कि उसने 2023 से संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (एमएसीपी) और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (आरएसीपी) योजनाओं के तहत फर्जी बिल बनाकर 2.60 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी धनराशि का गबन किया।
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, विस्तृत सत्यापन और जांच में पता चला कि बबलू सुना ने एमएसीपी और आरएसीपी योजनाओं के तहत फर्जी एरियर बिल बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
विजिलेंस ने रविवार को एक बयान में कहा, “सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग के पूर्व, सेवानिवृत्त और मृत कर्मचारियों की साख और पहचान का उपयोग करके फर्जी बिलों को संसाधित किया गया ताकि सार्वजनिक धन को उसके परिवार के सदस्यों (पत्नी, भाई, बहन और दो करीबी सहयोगियों) के निजी बैंक खातों में भेजा जा सके।”
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर अपने वैध अधिकार से अधिक समय-समय पर वेतन वृद्धि हासिल करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया। उसने लंबी अवधि तक अतिरिक्त मासिक वेतन बिल भी बनाए, जिससे गलत तरीके से 10.58 लाख रुपए से अधिक की निकासी की गई। कथित तौर पर गबन की गई कुल राशि 2,60,21,306 रुपए आंकी गई है।
इस संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी के खिलाफ कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज किए गए हैं।
आरोपी पिछले छह महीनों से कथित तौर पर फरार था। उसे ओडिशा विजिलेंस ने शनिवार रात बलांगीर में उसके ठिकाने से पकड़ा।
18 अक्टूबर को विजिलेंस ने ढेंकानाल जिले में वन विभाग के एक सीनियर क्लर्क और उसके दो सहयोगियों को 2016 से 2026 की अवधि में 65,90,773 रुपए की सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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