अंतरराष्ट्रीय
एनबीए ने देश भर में रिलायंस फाउंडेशन जूनियर एनबीए प्रोग्राम की वापसी की घोषणा की
नेशनल बास्केटबॉल एसोशिएसन (एनबीए) ने गुरुवार को कहा कि देश भर में लड़के और लड़कियों के वर्ग में रिलायंस फाउंडेशन जूनियर एनबीए प्रोग्राम की वापसी हो रही है। 12 सप्ताह तक चलने वाली वर्चुअल सीरीज का आयोजन जूम पर होगा और चाहें जो भी इससे जुड़ना चाहे वह जुड़ सकता है क्योंकि यह सबके लिए फ्री है।
इस सीरीज की शुरूआत 6 मार्च को हो गई है। इसके तहत डब्ल्यूएनबीए के क्लब शिकागो स्काई की गार्ड सिडनी कोलसन ने एक लाइव क्लीनिक की मेजबानी की थी।
इस सीरीज में हर शनिवार सुबह भारतीय समयानुसार एनबीए, डब्ल्यूएनबीए और एनबीए जी लीग के खिलाड़ियों, लेजेंड्स और कोचेज के साथ कौशल विकास, नेतृत्व और जीवन कौशल सत्र (सेशंस) में भाग लेने की सुविधा होगी। दो बार के एनबीए ऑल-स्टार रॉय हिबर्ट 13 मार्च शनिवार को अगले वर्चुअल क्लिनिक की मेजबानी करेंगे।
प्रत्येक सत्र में शामिल होने के बारे में अधिक जानकारी के लिए, इच्छुक खिलाड़ी और उनके परिवार फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भारत में एनबीए के सोशल मीडिया चैनलों को फॉलो कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले स्कूलों में नियुक्त पीई शिक्षकों और प्रशिक्षकों को पूर्व-रिकॉर्ड किए गए प्रशिक्षण वीडियो के साथ-साथ अन्य सामग्री भी प्रदान की जाएगी। साथ ही साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी विकास के अवसर प्रदान किए जाएंगे। सत्र में भाग लेने के लिए, सभी प्रतिभागियों को इस लिंक पर पूर्व-पंजीकरण करना होगा।
रिलायंस फाउंडेशन जूनियर एनबीए कार्यक्रम लगातार आठवें वर्ष वापसी कर रहा है। यह एक व्यापक युवा विकास पहल है जिसका उद्देश्य खेल को जमीनी स्तर पर विकसित करना और बास्केटबॉल के मुख्य मूल्यों को लागू करना है। ये मूल्य हैं- टीम वर्क, सम्मान, ²ढ़ संकल्प और समुदाय। यह सब भारत में लड़कों और लड़कियों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव लाने के लिए किया जाता है। ।
2013 में इसकी शुरूआत के बाद से, यह कार्यक्रम 34 शहरों में 13,000 से अधिक स्कूलों के 1.1 करोड़ से अधिक युवाओं तक पहुंच गया है और इसके तहत देश भर में 13,000 से अधिक शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
2019-20 के सीजन के दौरान, एनबीए और इसकी टीमें दुनिया भर में 1.45 करोड़ युवाओं तक इन-पर्सन इवेंट्स और क्लीनिकों के माध्यम से पहुंचीं। इससे बाद वर्चुअल प्रोग्रामिंग और ऑनलाइन यूथ बास्केटबॉल डेवलपमेंट इवेंट्स आयोजित किए जाने लगे, जिसमें 118 देशों के प्रशंसकों और युवा खिलाड़ियों से 21.0 करोड़ से अधिक व्यूज मिले हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान को लेकर ट्रंप के संकेत के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई

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वॉशिंगटन, 8 अप्रैल : तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए रोकेंगे, जिससे ऊर्जा-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कम हो गईं।
अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गए, जिससे हालिया बढ़त उलट गई। यह बढ़त होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास कई हफ्तों से जारी तनाव के कारण हुई थी, जो वैश्विक तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने को यह जानकारी दी।
जर्नल के अनुसार, यह गिरावट ट्रंप की उस घोषणा के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जलडमरूमध्य को फिर से खोलता है तो वे ईरान पर हमले रोक देंगे।
शेयर बाजारों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों से जुड़े वायदा 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए, जो संकट से जुड़ी कई दिनों की अस्थिरता के बाद निवेशकों की राहत का संकेत है।
रिपोर्ट में कहा गया, “स्टॉक फ्यूचर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और तेल की कीमतें गिर रही हैं, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए रोक देंगे।”
होरमुज़ जलडमरूमध्य, जिसके माध्यम से वैश्विक तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, इस संघर्ष का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कई हफ्तों तक इस मार्ग को सीमित किया था, जिससे कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
जर्नल के अनुसार, ईरान के साथ समझौते की समयसीमा से पहले बाजारों में तनाव था क्योंकि व्यापारियों को डर था कि बड़े स्तर पर संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इसके बजाय, संभावित युद्धविराम की घोषणा से वैश्विक बाजारों में व्यापक तेजी आई। एशियाई शेयर बाजार भी चढ़े, जिसमें जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुए।
निवेशकों ने ट्रंप की पहले की धमकियों को काफी हद तक बातचीत की रणनीति माना था। रिपोर्ट के अनुसार, “कुछ निवेशकों ने दांव लगाया था कि ट्रंप समयसीमा बढ़ा सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पिछले महीने कई बार किया है।”
हाल के हफ्तों में तेल की कीमतें इस आशंका के कारण बढ़ी थीं कि जलडमरूमध्य को बंद या गंभीर रूप से सीमित किया जा सकता है। यह मार्ग कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
तनाव कम होने से अन्य परिसंपत्तियों को भी समर्थन मिला। सोने की कीमतें बढ़ीं, जो अनिश्चितता को दर्शाती हैं जबकि शेयर बाजार में तेजी आई क्योंकि तत्काल संघर्ष का जोखिम घटा।
हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्धविराम इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलता है और दोनों पक्ष आगे तनाव नहीं बढ़ाते।
घोषणा के बाद भी खाड़ी के कुछ हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने इस विराम की स्थिरता पर सवाल उठाए।
व्यापक संघर्ष पहले ही ऊर्जा बाजारों को कई हफ्तों से प्रभावित कर चुका है। सीमित शिपिंग और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है।
अब यह दो सप्ताह का समय कूटनीति के जरिए स्थिति को स्थिर करने का अवसर देता है लेकिन व्यापारी अभी भी नीतिगत या सैन्य बदलावों को लेकर सतर्क हैं।
होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक बना हुआ है। इसमें कोई भी व्यवधान वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रभाव डाल सकता है, खासकर बड़े आयातकों पर।
भारत के लिए, जो खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है, तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से महंगाई, मुद्रा स्थिरता और समग्र आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप की 14 दिनों की युद्धविराम घोषणा के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर ईरान की सहमति

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तेहरान, 8 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। ईरान ने बुधवार को संकेत दिया कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार है, बशर्ते उसके खिलाफ होने वाले हमले बंद कर दिए जाएं। इसके साथ ही ईरान ने रणनीतिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दो हफ्तों के लिए अस्थायी रूप से खोलने का भी ऐलान किया है।
ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने एक बयान में कहा कि यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है और हालात में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह की इस अवधि में जहाजों को सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए ईरान के अधिकारियों के साथ समन्वय और तय शर्तों का पालन करना जरूरी होगा।
अराघची ने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत की मांग और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करने की घोषणा के बाद यह कदम उठाया गया है। उन्होंने साफ किया कि ईरान का रुख पूरी तरह शर्तों पर आधारित है और यह दूसरे पक्ष की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा, “अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो हमारी सशस्त्र सेनाएं भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देंगी। दो हफ्तों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, लेकिन इसके लिए हमारी सेनाओं के साथ समन्वय और तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखना होगा।”
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो हफ्तों के लिए टालने पर सहमति दे दी है। उन्होंने कहा, “अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है, तो हम भी दो हफ्तों तक हमले रोकेंगे।” ट्रंप ने इसे ‘दोतरफा युद्धविराम’ बताया।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना अपने लक्ष्य हासिल कर चुकी है और अब दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव बातचीत के लिए एक मजबूत आधार है और अधिकांश विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
उन्होंने भरोसा जताया कि दो हफ्तों में समझौता अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप ने इसे मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया और कहा कि यह लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के करीब पहुंचने का मौका है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: युद्ध खत्म करने की शर्तें तय

तेहरान, 8 अप्रैल : ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ दो हफ्ते का सीजफायर युद्ध के खत्म होने का संकेत नहीं है। क्योंकि उसके 10-सूत्रीय प्रस्ताव के विवरण पर अभी बातचीत होनी बाकी है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ के अनुसार, तेहरान की ओर से रखे जाने वाले 10 सूत्रीय प्रस्ताव में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर ईरान का लगातार नियंत्रण, ईरान के परमाणु संवर्धन अधिकारों की स्वीकृति, सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना, सभी द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाना और ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना शामिल है। अमेरिका की यह प्रतिबद्धता कि वह आगे कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा और ईरान के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करने की भी मांग रखी गई है।
इसके अतिरिक्त, मांगों में युद्ध में हुए नुकसान के लिए ईरान को मुआवजा देना, क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर शत्रुता की समाप्ति भी शामिल है। काउंसिल ने एक बयान भी जारी किया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित दो हफ्ते के सीजफायर की पुष्टि की गई।
बयान के मुख्य बिंदुओं में यह उल्लेख किया गया है कि ईरान ने एक बड़ी जीत हासिल की है और अमेरिका को अपनी 10-सूत्रीय योजना को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया है। इस योजना में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से नियंत्रित मार्ग और प्रतिरोध की धुरी के सभी तत्वों के खिलाफ युद्ध को समाप्त करने की जरूरत शामिल है।
ईरान के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 10-सूत्रीय योजना को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया है। बयान में आगे कहा गया है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी के तहत, ईरान युद्धविराम के विवरण को अंतिम रूप देने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत करेगा।
बयान में कहा गया है कि अमेरिकी पक्ष पर पूर्ण अविश्वास के साथ ये बातचीत शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होगी और ईरान इन वार्ताओं के लिए दो हफ्ते का समय देगा। आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव की भी मांग की, जो अमेरिका के साथ सभी समझौतों को बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय कानून में बदल देगा।
इसमें यह भी कहा गया कि सीजफायर का मतलब युद्ध की समाप्ति या 10-सूत्रीय योजना के विवरण पर चल रही बातचीत का अंत नहीं है। बयान में आगे ईरानियों से अमेरिका के साथ बातचीत की प्रक्रिया पर भरोसा करने और उसका समर्थन करने की अपील की गई है। यह प्रक्रिया सर्वोच्च नेता और व्यवस्था के उच्चतम स्तरों की निगरानी में हो रही है।
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