अंतरराष्ट्रीय समाचार
बाइडेन-मोदी ने की फोन पर बात, आतंकवाद, कोविड समेत कई मुद्दों पर चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद से लड़ने और कोविड-19 महामारी को हराने, वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने जैसे कई मुद्दों पर बारीकी से काम करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। व्हाइट हाउस की ओर से एक बयान में यह कहा गया।
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने ‘वैश्विक आतंकवाद के संकट के खिलाफ एक साथ खड़े होने’ का वादा किया।
इसने कहा, “नेताओं ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत को बढ़ावा देने के लिए घनिष्ठ सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें नैविगेशन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता, और क्वाड के माध्यम से एक मजबूत क्षेत्रीय ऑर्किटेक्चर के लिए सपोर्ट शामिल है। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।”
व्हाइट हाउस ने कहा, “दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों को लेकर निकट संपर्क में रहने और अमेरिका और भारत अपने लोगों के लिए और देश के लिए एक साथ जो हासिल कर सकते हैं, उसे लेकर तत्परता, उत्सुकता दिखाई।”
मोदी ने ट्वीट किया, “राष्ट्रपति जो बाइडेन और मैं नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भारत-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे की शांति और सुरक्षा के लिए हमारी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।”
एक अन्य ट्वीट में, मोदी ने कहा, “हमने क्षेत्रीय मुद्दों और हमारी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। हम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपने सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए।”
व्हाइट हाउस ने कहा कि मोदी और बाइडेन ने कोरोनोवायरस से प्रभावित वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण पर काम करने पर सहमति व्यक्त की जो दोनों देशों के लोगों को लाभ पहुंचाए।
हाइट हाउस के बयान के अनुसार “दोनों ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए और जलवायु परिवर्तन पर अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को लेकर भी प्रतिबद्धता जताई।”
दोनों नेताओं के बीच म्यांमार में सेना द्वारा किए गए तख्तापलट को लेकर भी चर्चा हुई।
बयान के अनुसार, मोदी और बाइडेन ने कहा कि “बर्मा में कानून का शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखा जाना चाहिए।”
बाइडेन ने कहा है कि दुनिया भर में लोकतंत्र को बढ़ावा देना और उसका बचाव करना उनकी विदेश नीति के एजेंडे की आधारशिला होगी।
व्हाइट हाउस के बयान में सीधे तौर पर चीन का जिक्र नहीं था, लेकिन मोदी के साथ चर्चा में ‘क्षेत्रीय अखंडता’ के लिए विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के समर्थन का उल्लेख चीन से भारत को खतरों के संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है। सीनेट में उन्होंने भारत के साथ काम करने की बात कही थी ताकि चीन सहित कोई भी देश इसकी संप्रुभता को चुनौती नहीं दे सके।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
शी चिनफिंग ने ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर से मुलाकात की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 6 नवंबर को पेइचिंग में स्थित जन वृहद भवन में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर से मुलाकात की, जो चीन की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
इस दौरान, शी चिनफिंग ने कहा कि इस वर्ष चीन और ऑस्ट्रिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 55वीं वर्षगांठ है। तब से, दोनों पक्षों ने आपसी सम्मान, खुलेपन और समावेशिता तथा पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों को कायम रखते हुए, राजनीतिक आपसी विश्वास को निरंतर सुदृढ़ किया है और व्यावहारिक सहयोग में फलदायी परिणाम प्राप्त किए हैं, जिससे दोनों देशों के लोगों को ठोस लाभ प्राप्त हुए हैं। विश्वास और मित्रता चीन-ऑस्ट्रिया संबंधों के अनमोल गुण हैं, जो सामाजिक व्यवस्थाओं, ऐतिहासिक संस्कृतियों और विकास के विभिन्न चरणों में व्याप्त अंतरों से परे हैं।
शी चिनफिंग ने चीन और ऑस्ट्रिया के बीच राजनीतिक आपसी विश्वास को मजबूत करते हुए उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की सकारात्मक गति को जारी रखने, आदान-प्रदान के माध्यम से विश्वास का निर्माण करने और संदेह को दूर करने पर जोर दिया, उद्देश्य है कि भविष्य के सहयोग के लिए एक ठोस राजनीतिक आधार तैयार हो सके।
उन्होंने कहा कि चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के दौरान, देश का लक्ष्य उभरते उद्योगों को बढ़ावा देना, पारंपरिक उद्योगों का उन्नयन करना और सेवा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हुए अपने खुलेपन को और अधिक विस्तारित करना है। “चीन अवसर 2.0” से न केवल बाजार लाभ प्राप्त होंगे, बल्कि नवाचार लाभ भी मिलेंगे। चीन, ऑस्ट्रिया के साथ नई ऊर्जा वाहनों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित विकास जैसे उभरते क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग का विस्तार करने के लिए तत्पर है, जिससे आर्थिक और व्यापारिक विकास के नए इंजन तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि चीन-ऑस्ट्रिया मित्रता का एक व्यापक सामाजिक आधार है, दोनों पक्षों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना चाहिए, लोगों के बीच आदान-प्रदान को सुगम बनाना चाहिए और दोनों देशों के लोगों के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, मुलाकात में शी चिनफिंग ने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति जटिल और अस्थिर है, जिसमें एकतरफावाद और संरक्षणवाद को बल मिल रहा है। चीन और ऑस्ट्रिया को मिलकर वास्तविक बहुपक्षवाद का अभ्यास करना चाहिए, मुक्त व्यापार का समर्थन करना चाहिए और अधिक न्यायपूर्ण और समान वैश्विक शासन प्रणाली के निर्माण में योगदान देना चाहिए। उनका कहना है कि बढ़ता और मजबूत होता चीन यूरोप की समस्याओं का मूल कारण नहीं है, बल्कि एक ऐसा सहयोगी और सहयात्री है जो यूरोप को इन समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है। चीन और यूरोप को सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए संवाद और परामर्श के माध्यम से व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और पारस्परिक लाभ, सभी पक्षों के लिए लाभकारी परिणाम और साझा विकास प्राप्त करना चाहिए।
वहीं, स्टॉकर ने कहा कि ऑस्ट्रिया-चीन संबंध अच्छी तरह से विकसित हो रहे हैं, और राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से पिछले 55 वर्षों में दोनों देशों ने लगातार एक-दूसरे पर भरोसा और समर्थन दिखाया है। ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रिया-चीन मैत्रीपूर्ण रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, एक-चीन नीति का पालन करता है, और व्यापार, निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार आदि क्षेत्रों में चीन के साथ व्यापक सहयोग को मजबूत करने, सांस्कृतिक और जन-समुदाय आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और वर्षों से स्थापित सहयोग और विश्वास के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों में नए विकास को गति देने के लिए तत्पर है।
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रिया यूरोपीय संघ-चीन संबंधों के विकास का सक्रिय रूप से समर्थन करता है और आशा करता है कि दोनों पक्ष स्पष्ट संवाद और परामर्श के माध्यम से आर्थिक और व्यापारिक मतभेदों का समाधान करेंगे। ऑस्ट्रिया बहुपक्षवाद को कायम रखते हुए बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान करने और वैश्विक समृद्धि और स्थिरता की रक्षा के लिए चीन के साथ मिल कर काम करने को तत्पर है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पेरिस से भी बड़ा होगा अमेरिकी एयर शो : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित पूर्व स्पेस शटल लैंडिंग सुविधा केंद्र पर एक विशाल एयरोस्पेस प्रदर्शनी स्थल बनाने की योजना पेश की है। उन्होंने वादा किया कि लगभग दो वर्षों के भीतर तैयार होगा और यहां होने वाला शो ‘पेरिस एयर शो’ से भी बेहतर होगा।
केनेडी स्पेस सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित 1,900 एकड़ का यह स्थान कमर्शियल विमानों, निजी विमानन और अंतरिक्ष तकनीक को एक साथ लाएगा। इससे अमेरिकी कंपनियों को अपने उत्पाद पेश करने और देश के भीतर ही बड़े सौदे करने के लिए एक बड़ा मंच मिलेगा।
ट्रंप ने कहा, “हम एक ऐसा शो आयोजित करने जा रहे हैं, जैसा पहले कभी नहीं हुआ है।”
उन्होंने पेरिस, ब्रिटेन और दुबई में होने वाली प्रमुख एयरोस्पेस प्रदर्शनियों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका को उन उद्योगों के लिए सबसे बड़ा प्रदर्शनी मंच आयोजित करना चाहिए, जिनमें अमेरिकी कंपनियों का दबदबा है।
उन्होंने कहा, “हमारा दबदबा है, इसलिए सबसे बड़ा शो भी हमारा ही होना चाहिए।”
ट्रंप ने अनुमान जताया कि यहां हर साल लाखों लोग आएंगे, अरबों डॉलर की आर्थिक गतिविधियां होंगी और सैकड़ों अरब डॉलर के सौदे होंगे।
राष्ट्रपति ने बताया कि यहां मौजूद रनवे और आसपास की जमीन, विमानों के प्रदर्शन, अंतरिक्ष संबंधी डेमो और नई प्रदर्शनी इमारतों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में इस जगह का और विस्तार किया जाएगा।
यह प्रस्ताव ‘मैक्स पावर’ के दौरान दिए गए भाषण का मुख्य हिस्सा था। ‘मैक्स पावर’ एक एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी एक्सपो और एयर शो है, जो 6 से 8 नवंबर तक केनेडी स्पेस सेंटर और उसके आसपास आयोजित हो रहा है।
ट्रंप ने नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन की तारीफ की और इस प्रदर्शनी परियोजना को अमेरिकी विमानन, विनिर्माण और अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े बड़े लक्ष्यों से जोड़ा।
उन्होंने अपने कार्यकाल के खत्म होने से पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा की सतह पर भेजने के अपने लक्ष्य को दोहराया, ताकि भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित हो सके।
नासा के कार्यक्रम के अनुसार, 2028 में ‘आर्टेमिस IV’ मिशन के तहत चंद्रमा पर लैंडिंग से पहले, 2027 में ‘आर्टेमिस III’ मिशन के जरिए पृथ्वी की कक्षा में एकीकृत प्रणालियों और परिचालन क्षमताओं का परीक्षण किया जाएगा।
ट्रंप ने मंगल ग्रह के लिए एक परमाणु-संचालित अंतरिक्ष यान की योजना का भी जिक्र किया। नासा ने मार्च में ‘स्पेस रिएक्टर-1 फ्रीडम’ मिशन की घोषणा की थी, जिसे 2028 के अंत से पहले लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह रोबोटिक मिशन डीप स्पेस में ‘न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन’ तकनीक का प्रदर्शन करेगा और मंगल ग्रह की खोज के लिए छोटे हेलीकॉप्टरों को तैनात करेगा। यह मिशन, मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के दीर्घकालिक लक्ष्य से अलग है।
विमानन की बात करते हुए, ट्रंप ने ‘कॉनकॉर्ड’ विमान में अपनी यात्रा को याद किया और सुपरसोनिक यात्री सेवा के बंद हो जाने पर अफसोस जताया।
उन्होंने कहा, “शायद यह दुनिया का इकलौता ऐसा उद्योग है जिसमें हम पीछे की ओर गए हैं, लेकिन अब और नहीं, हम बहुत आगे बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने ड्रोन, इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ़ और लैंडिंग विमान, और स्वायत्त उड़ान के साथ-साथ बिना शोर मचाए चलने वाले सुपरसोनिक विमानों के विकास के प्रयासों को बढ़ावा दिया।
ट्रंप ने प्रस्तावित फ्लोरिडा प्रदर्शनी को इन प्रौद्योगिकियों और अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक साझा मंच के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें वाणिज्यिक विमान निर्माता कंपनियां परिवहन के नए रूपों को विकसित करने वाली कंपनियों के साथ भाग लेंगी।
भाषण में विस्तारित एयरोस्पेस कार्यक्रम के लिए निकट भविष्य की महत्वाकांक्षाओं को दीर्घकालिक अन्वेषण लक्ष्यों के साथ जोड़ा गया। उन्होंने जिन चंद्र और मंगल कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला, वे पहले से ही नासा की प्रकाशित योजनाओं का हिस्सा थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो तेल टैंकरों में आग, नियमों के उल्लंघन पर बारूदी सुरंगों से टकराए

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार को कहा कि नियमों का उल्लंघन कर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) से टकरा गए, जिसके बाद उनमें आग लग गई।
आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार एजेंसी सेपाह न्यूज के बयान के अनुसार, उसकी नौसेना ने कहा कि दोनों जहाजों ने अपने नेविगेशन और पहचान संबंधी सिस्टम बंद कर दिए थे। वे जलडमरूमध्य से एक ‘अनधिकृत’ रास्ते के जरिए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें अमेरिकी सेना का समर्थन प्राप्त था लेकिन रास्ते में बारूदी सुरंगों से टकराने के कारण उनकी कोशिश नाकाम हो गई।
नौसेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अभी बंद है और जब तक अमेरिका ईरान द्वारा रखी गई सात शर्तों को नहीं मानता, तब तक वहां की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से तेल टैंकरों को इस बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर करने की कोशिशों से केवल लगातार और शर्मनाक हार ही मिलेगी।
गुरुवार को भी आईआरजीसी ने बताया था कि पिछली रात दो अलग-अलग घटनाओं में तीन जहाजों, जिनमें दो सुपरटैंकर शामिल थे, में आग लग गई थी। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में स्थित एक गैरकानूनी और अनधिकृत मार्ग से गुजर रहे थे।
एक घटना में एक तेल टैंकर उस गैरकानूनी रास्ते से गुजरते समय नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकरा गया और उसमें आग लग गई। दूसरी घटना में एक अन्य तेल टैंकर, जो उसी रास्ते से जलडमरूमध्य छोड़ रहा था, आग लगने के बाद रुक गया। उसकी मदद के लिए पहुंचे एक टगबोट (खींचने वाली नाव) में भी आग लग गई।
आईआरजीसी ने एक अलग अभियान का भी जिक्र किया। उसके अनुसार, उसकी नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाई ने घुसपैठ करने वाले दो मानव रहित लड़ाकू ड्रोन पर नियंत्रण हासिल कर लिया और उन्हें बिना नुकसान के सुरक्षित उतार लिया।
आईआरजीसी ने अमेरिकी सरकार पर आरोप लगाया कि वह जहाजों को नियमों का उल्लंघन करने और बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके कारण अमेरिका और उसके पश्चिम एशियाई सहयोगियों पर बीमा की भारी लागत पड़ रही है, जिसका बोझ अंततः अमेरिकी करदाताओं को उठाना पड़ रहा है।
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