मनोरंजन
‘रोल अप’ के लिए साथ आए बादशाह, कृष्ण
रैप स्टार बादशाह और कृष्ण ‘रोल अप’ नामक एक एकल गीत के लिए पहली बार साथ आए हैं। इस गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रैप और हिप-हॉप का एक अनोखा मिश्रण है। कृष्ण इस पर कहते हैं, “इस गीत में मैंने बेहद ही सहजता के साथ धुनों को पिरोया है, जिसे आप ड्राइव करने या दोस्तों के साथ बैठकर बातें करने के दौरान आराम से सुन सकते हैं, हालांकि इसमें मैंने अपने रैप की शैली को प्रभावशाली बनाए रखने का प्रयास किया है।”
उन्होंने आगे कहा, “युवा हिप-हॉप से काफी ज्यादा प्रभावित रहते हैं और इसकी भी झलक गाने में देखने को मिलेगी।”
बादशाह ने अपने इस गीत के बारे में कहा है, “यह एक बेहद ही रोमांचकर सहयोग है क्योंकि कृष्ण हमारे बीच मौजूद कुछ बेहद ही दमदार लेखकों में से एक हैं और उन्होंने खुद को एक बेहतर रैपर के रूप में भी साबित किया है। यह हम दोनों के प्रशंसकों के लिए ही एक अच्छी बात है और इसके साथ ही मुझे यह भी लगता है कि यह दिल्ली हिप हॉप को एक नई बुलंदी पर लेकर जाएगा।”
मनोरंजन
इमरान खान के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की मांग, किरीट सोमैया ने गृह मंत्रालय को लिखा पत्र

महाराष्ट्र भाजपा नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने अभिनेता इमरान खान के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को पत्र लिखकर अपील की कि इमरान खान को फिलहाल भारत छोड़ने से रोका जाए। सोमैया का कहना है कि 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन के मामले में दर्ज एफआईआर की जांच और उनकी ओर से दी गई शिकायत पर जांच पूरी होने तक इमरान का भारत में रहना जरूरी है।
सोमैया ने गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन को लिखे पत्र में कहा कि इमरान खान 10 अक्टूबर को अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी और मुंबई पुलिस ने मौके पर इमरान समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था। इस घटना के संबंध में मुंबई के गावदेवी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज है और इसमें इमरान खान का नाम भी शामिल है।
पत्र में सोमैया ने दावा किया है कि इमरान खान अमेरिका के नागरिक हैं और उनके पास ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड है। उन्होंने लिखा कि इमरान भारत के बाहर जा सकते हैं और अगर जांच पूरी होने से पहले वह देश छोड़ देते हैं, तो आगे की जांच, बयान दर्ज करने और कानूनी प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है। इसी आधार पर उन्होंने गृह मंत्रालय से इमरान के भारत छोड़ने पर रोक लगाने के लिए आदेश जारी करने और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से उनके खिलाफ एलओसी जारी करने का अनुरोध किया है।
सोमैया ने अपने पत्र में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धाराओं का हवाला भी दिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत केंद्र सरकार कुछ परिस्थितियों में किसी विदेशी नागरिक के भारत छोड़ने पर रोक लगाने का आदेश दे सकती है। उन्होंने ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से कहा कि अगर इमरान भारत छोड़ने की कोशिश करते हैं, तो इसकी जानकारी गावदेवी पुलिस स्टेशन को दी जाए।
दरअसल, यह पूरा मामला 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था। इमरान खान, उनकी पार्टनर लेखा वॉशिंगटन और उनकी कजिन जायन मैरी खान भी प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद थे। मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया था, जिसमें इमरान खान भी शामिल थे। बाद में उन्हें और अन्य लोगों को छोड़ दिया गया।
मनोरंजन
कैसे अलका याग्निक बनीं 90 के दशक की बड़ी गायिका, रमेश तौरानी ने बताया अनुराधा पौडवाल का कनेक्शन

हिंदी सिनेमा में 90 का दशक संगीत के मामले में बेहद खास रहा। इस दौर में कुमार सानू, उदित नारायण, सोनू निगम, अलका याग्निक और अनुराधा पौडवाल जैसे गायकों के गाने लोगों की जुबान पर चढ़े रहते थे।
संगीत निर्माता रमेश तौरानी ने उस दौर को याद करते हुए बताया है कि कैसे अनुराधा पौडवाल के एक फैसले से अलका याग्निक को फायदा पहुंचा था और वह हिंदी फिल्मों की सबसे व्यस्त सिंगर्स में शामिल हो गईं थी।
रमेश तौरानी हाल ही में संगीतकार कुमार सानू के साथ ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 90 के दशक के हिंदी फिल्म संगीत और उस दौर के गायकों की लोकप्रियता पर बात की। अलका याग्निक के करियर में आए बदलाव के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ”उस समय लता मंगेशकर और आशा भोसले पहले से ही स्थापित नाम थीं। जब मैं संगीत तैयार करता था, तब लता मंगेशकर मेरी पहली पसंद होती थीं। इसके बाद अलका याग्निक और अनुराधा पौडवाल का नाम आता था।”
तौरानी ने कहा, ”90 के दशक में अनुराधा पौडवाल को नई लता मंगेशकर और अलका याग्निक को नई आशा भोसले के तौर पर देखा जाने लगा था। अनुराधा पौडवाल ने जब फिल्मों के लिए गाना बंद कर टी-सीरीज पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया, तो इसका सीधा फायदा अलका याग्निक को मिला। अलका को अलग-अलग तरह के गाने मिलने लगे। उन्हें सोलो के साथ डुएट गाने और शायरी वाले गीत गाने के मौके भी मिले।”
तौरानी ने कहा, ”उस दौर में कुमार सानू, उदित नारायण और सोनू निगम जैसे गायकों के बीच अलका याग्निक को सबसे ज्यादा गाने मिल रहे थे। इस तरह वह हिंदी फिल्म संगीत की सबसे प्रमुख आवाजों में शामिल हो गईं।”
बता दें कि अनुराधा पौडवाल 80 के दशक के आखिरी वर्षों और 90 के दशक की शुरुआत में हिंदी फिल्म संगीत की प्रमुख गायिकाओं में शामिल थीं। ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘साजन’ जैसी फिल्मों के गानों ने उनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ाया था। उनकी आवाज रोमांटिक गीतों के लिए खूब पसंद की जाती थी।
दूसरी ओर, अलका याग्निक ने ‘कयामत से कयामत तक’, ‘साजन’ और ‘फूल और कांटे’ जैसी फिल्मों के गानों से लोकप्रियता हासिल की।
मनोरंजन
सोनाली बेंद्रे ने बताया कैंसर से लड़ने का अलग नजरिया, बोलीं-मैंने इसे जंग की तरह नहीं देखा

अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे हाल ही में मराठी क्विज शो ‘कोण होणार करोडपति’ के प्रीमियर में पहुंचीं, जिसे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित होस्ट कर रही हैं। शो में हुई बातचीत के दौरान अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने अपने कैंसर बैटल पर खुलकर बात की।
अभिनेत्री ने बताया कि इस मुश्किल दौर में उन्होंने अपने शरीर से प्यार करना सीखा और इस फेज से काफी कुछ सीखा। बातचीत के दौरान माधुरी ने सोनाली के कैंसर से लड़ने के हौसले और इस कठिन दौर में उनकी हिम्मत की तारीफ की। माधुरी ने सवाल पूछते हुए कहा, “आपने जिंदगी में कई अलग-अलग अनुभव देखे हैं और जब आपने कैंसर को मात दी, तब हमने आपका एक नया रूप देखा। हमने आपको एक मजबूत सोनाली के रूप में उभरते हुए देखा।”
इस पर अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे कहती हैं कि उन्होंने कभी भी कैंसर को लड़ाई के तौर नहीं देखा था, बल्कि अपने शरीर को समझने और इससे कुछ सीखने पर ध्यान दिया था। उन्होंने कहा, “हम हमेशा कहते हैं कि किसी ने कैंसर पर जीत हासिल कर ली, लेकिन उस वक्त मेरा इरादा इससे उबरने का नहीं था बल्कि, यह समझने का था कि ऐसा क्यों हो रहा है और इससे मैं क्या सीख सकती हूं।”
सोनाली बेंद्र ने माधुरी दीक्षित को बताया कि कैंसर के दौरान उन्हें जिंदगी के कई अनुभव मिलें। उन्होंने कहा, ” यकीन मानिए, मैंने इससे वाकई बहुत कुछ सीखा और मैंने इसे इसी नजरिए से देखा।”
सोनाली ने यह भी बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि लड़ाई और जीतने जैसी भाषा कभी-कभी अपने ही शरीर के साथ एक टकराव पैदा कर देती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जब हम कहते हैं कि हमने किसी चीज पर जीत हासिल कर ली है, तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है जैसे ये एक लड़ाई है। इसमें कहीं न कहीं एक निगेटिविटी आ जाती है और आखिर है तो ये हमारा ही शरीर, है ना? कैंसर सेल्स भी तो हमारे ही सेल्स हैं। तो हम खुद से ही कैसे लड़ सकते हैं?”
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
