खेल
फरीदाबाद, गुरुग्राम कैम्प में ट्रेनिंग के साइंटिफिक तरीके अपनाएगा खो खो महासंघ
खो खो का राष्ट्रीय प्रशिक्षण कैम्प 16 जनवरी से फरीदाबाद और गुरुग्राम में आयोजित किया जाएगा और इस 28 दिवसीय कैम्प में भारतीय खो खो महासंघ (केकेएफआई) खिलाड़ियों के साइंटिफिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगा। केकेएफआई के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सुधांशु मित्तल ने बताया कि 125 खिलाड़ियों को लेकर आयोजित किया जाने वाला यह कैम्प इसलिए खास होगा क्योंकि देश भर से आए खिलाड़ियों को वैज्ञानिक पद्धति से ट्रेनिंग दी जाएगी और इसके लिए बकायदे स्पोटर्स साइंस की मदद ली जाएगी।
मित्तल ने यहां संवाददाताओं से कहा, “हम एक पुरातन खेल को नया रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत सबसे पहले हमने खिलाड़ियों पर फोकस किया है क्योंकि यह खेल उन्हीं से है। अगला कैम्प हमारे और खिलाड़ियों के लिए खास है क्योंकि इसमें खिलाड़ियों को वैज्ञानिक पद्धति से ट्रेन किया जाएगा।”
मित्तल ने कहा कि देश भर से जुटने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों को दो भागों में विभाजित कर इन्हें इसके लिए चयनित-दो सेन्टर मानव रचना यूनिवर्सिटी-फरीदाबा और गुरुतेग बहादुर यूनिवर्सिटी-गुरुग्राम में प्रशिक्षित किया जाएगा।
मित्तल के मुताबिक यह पहली बार हो रहा है कि ट्रेनिंग के लिए स्पोर्ट्स साइंस का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें खिलाड़ियों की क्षमताओं का आकलन कर उन्हें उसके अनुसार ट्रेनिंग दी जायेगी। फरीदाबाद में 60 और गुरुग्राम में इतने ही खिलाड़ी शिरकत करेंगे।
मित्तल ने कहा, “हम खिलाड़ियों से जुड़े हर पक्ष पर काम करना चाहते हैं। हम खिलाड़ी की कद-काठी, उसके सामाजिक परिदृश्य, खान-पान इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उसे ट्रेनिंग देंगे। इसमें हर खिलाड़ी की शारीरिक संरचना और खेल में उसकी भूमिका को देखते हुए उसके शरीर के विशेष हिस्सों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे कि वह अपना श्रेष्ठ दे सके।”
मित्तल ने कहा कि उनका लक्ष्य खो खो को एक दिन ओलंपिक में जगह दिलाना है और वह उसी दिशा में काम करना चाहते हैं। इसके लिए हालांकि कम से कम 70 देशों में खो खो का खेल जारी रहना चाहिए।
मित्तल ने कहा, “हम पहले इस खेल को एशियाई खेलों में जगह दिलाना चाहते हैं। हमारा अल्टीमेट लक्ष्य वैसे इसे ओलंपिक तक लेकर जाना है लेकिन इसके लिए अभी काफी काम किया जाना है। इसे 70 देशों तक ले जाना है। हम अपने सफर का आधा हिस्सा पार कर चुके हैं और आधे के लिए तैयार हैं। हम भारत के इस पुरातन खेल को नई पहचान दिलाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि इस खेल से जुड़े खिलाड़ी पैसा और शोहरत कमाएं क्योंकि डायनामिक्स में यह खेल किसी अन्य खेल से कम रोचक नहीं है।”
खेल
‘गुरनूर बहुत अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं,’ वेलिंगटन में जीत के बाद कप्तान गिल ने तेज गेंदबाज को सराहा

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे मैच में शानदार प्रदर्शन करने तेज गेंदबाज गुरनूर बरार की भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने जमकर तारीफ की। शनिवार को हेनरी स्टेडियम में गुरनूर ने अपने 10 ओवरों में 30 रन देकर 4 विकेट हासिल किए। वेलिंगटन की उछाल भरी पिच पर, इस तेज गेंदबाज ने अपनी गति और कद का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने भारत को मजबूत स्थिति में रखा और कीवी टीम को महज 134 रन पर ऑलआउट करने में अहम भूमिका निभाई।
बारिश के कारण खेल में फिर से रुकावट आई, जिसके बाद भारत को डीएलएस नियम के तहत 4 रन से विजेता घोषित किया गया। उस समय भारत का स्कोर 26 ओवर में 7 विकेट पर 113 रन था। शानदार प्रदर्शन के लिए गुरनूर को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।
मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में भारतीय कप्तान ने गुरनूर की तारीफ में कहा, “गुरनूर ने पिछले मैच में भी बहुत अच्छी गेंदबाजी की थी। उम्मीद है कि जैसे-जैसे वह और मैच खेलेंगे और उन्हें अनुभव मिलेगा, उनकी लाइन और लेंथ और भी सटीक होती जाएगी। उनके पास गति है और उछाल भी है। अब बात बस इतनी है कि वह कितने निरंतर रह पाते हैं। आज हमने देखा कि अगर वह इसी तरह गेंदबाजी करते रहें, तो वह टीम के लिए कितने उपयोगी साबित हो सकते हैं।”
जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज की गैरमौजूदगी में भारत की गेंदबाजी लाइन-अप में अनुभवी खिलाड़ियों की कमी है। ऐसे में टीम वनडे वर्ल्ड कप 2027 को ध्यान में रखते हुए गेंदबाजी विभाग में नए स्टार खिलाड़ियों की तलाश कर रही है।
गिल ने उन युवा गेंदबाजों आकिब नबी, गुरनूर और अंशुल कंबोज को दिए गए संदेश के बारे में भी बात की। ये सभी खिलाड़ी इस सीरीज में अर्शदीप सिंह के साथ मिलकर तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
कप्तान ने कहा, “उनमें से ज्यादातर खिलाड़ियों में वे सभी खूबियां हैं जिनकी जरूरत होती है। असल बात दबाव में अच्छा प्रदर्शन करने की है। इंटरनेशनल क्रिकेट का मतलब ही दबाव में खेलना और अनुभव हासिल करना है—लगातार गेंदबाजी करना और दबाव के बीच अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करना। हमारे लिए यही सबसे अहम बात है।”
बल्लेबाजों के लिए मुश्किल पिच पर, भारत ने न्यूजीलैंड को करीबी अंतर से हराया और अब पांच मुकाबलों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। महज 113 रन पर अपने सात विकेट गंवा चुकी मेजबान टीम दबाव में थी, उसे जीत के लिए 22 रन चाहिए थे और क्रीज पर एकमात्र मुख्य बल्लेबाज केएल राहुल मौजूद थे।
अगर बारिश नहीं भी आती, तो भी कप्तान गिल पूरा भरोसा था कि वे मैच जीत सकते हैं, लेकिन बारिश शुरू होने के कारण वे (डीएलएस नियम के तहत) 4 रन से जीत गए। उन्होंने कहा, “हां, पिच वाकई मुश्किल थी, लेकिन अंत में हमने जरूरत से दो विकेट ज्यादा गंवा दिए। हमें पता था कि आखिर में बारिश आ सकती है। हमने जो आखिरी दो शॉट खेले, वे अच्छे नहीं थे। अगर हम डीएलएस नियम के तहत चार या पांच रन से यह मैच हार जाते, तो यह हमारे लिए बहुत निराशाजनक होता, लेकिन खुशी है कि हम जीत हासिल करने में कामयाब रहे।”
खेल
विश्व कप तक 100 शतक पूरा करने के लिए कोहली के पास पर्याप्त मैच नहीं: अभिषेक नायर

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर का मानना है कि विराट कोहली के पास 2027 वनडे विश्व कप से पहले 100 अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा करने के लिए ज्यादा मैच नहीं बचे।
अभिषेक नायर ने जियोस्टार से कहा, “मुझे नहीं लगता कि वर्ल्ड कप तक उनके पास उस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए पर्याप्त मैच है। मैं चाहता हूं कि वह ऐसा करे, लेकिन आपको भी आगे बढ़ने के लिए काफी गेम खेलने होंगे। हो सकता है कि वह वर्ल्ड कप के बाद भी खेलना जारी रखे, लेकिन मैं वर्ल्ड कप तक के समय के बारे में सोच रहा हूं। वर्ल्ड कप के बाद, उनकी प्रेरणा शायद वैसी न रहे।”
नायर ने सुझाव दिया कि टीम को हार्दिक पांड्या के साथ एक और विकल्प तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत को भविष्य के बारे में सोचना चाहिए, जहां हार्दिक पांड्या के साथ एक और ऑलराउंडर खेल सकता है। जब आप न्यूजीलैंड जाते हैं, तो हो सकता है कि आपके पास ऐसे दो ऑलराउंड विकल्प हों क्योंकि गौतम गंभीर को बल्लेबाज पसंद हैं। अगर आप एक और ऑलराउंडर तैयार करते हैं, तो वे एक साथ खेल सकते हैं। और अगर इंडिया दो अच्छे तेज गेंदबाज और दो सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर के साथ खेल सकता है, तो टीम का संतुलन बेहतर होता है और इसमें गहराई मिलती है। दूसरी बात यह है कि जब आप साउथ अफ्रीका जाते हैं, तो यह काम आएगा क्योंकि अब आपके पास बैटिंग के ज्यादा विकल्प हैं।”
नायर ने कहा, “यह मजेदार है क्योंकि उन सीरीज को देखना जहां आप ट्रॉफी जीतने के लिए फाइनल खेल रहे होते हैं, एक बहुत ही अलग एहसास होता है। यह आपको तैयार करता है और बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार करता है। जब आप तीन या चार देशों वाली ट्रॉफी के लिए खेलते हैं, तो आप स्टैंडिंग में ऊपर-नीचे हो सकते हैं और हर गेम मायने रखता है। इसलिए, मुझे लगता है कि ट्राई-नेशन या उससे अधिक देशों के टूर्नामेंट जैसा कुछ नहीं है।”
खेल
प्रीमियर लीग में कोई भी मैच आसान नहीं होता: जाबी अलोंसो

चेल्सी के मैनेजर जाबी अलोंसो ने कहा है कि प्रीमियर लीग का कोई भी मैच आसान नहीं होता और टीमें एक पल के लिए भी फोकस नहीं खो सकतीं। चेल्सी ने 2026-27 प्रीमियर लीग सीजन की जबरदस्त शुरुआत की है। टीम नौ मैचों में 16 पॉइंट्स के साथ स्टैंडिंग में चौथे स्थान पर है।
जियोस्टार द्वारा साझा एक इंटरव्यू में अलोंसो ने प्रीमियर लीग की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा, “प्रीमियर लीग सच में एक बहुत मुश्किल कॉम्पिटिशन है। चेल्सी जॉइन करने से पहले मुझे इसके बारे में पता था, लेकिन एक बार जब आप इसका अनुभव करते हैं, तो आप सभी टीमों और सभी खिलाड़ियों का स्तर देखते हैं कि हर मैच कितना चुनौतीपूर्ण होता है। इस लीग में कोई भी मैच आसान नहीं होता। हर सप्ताह आपका एक अलग टेस्ट होता है, चाहे वह खिताब के लिए लड़ने वाली टीम हो या ऊपर बने रहने के लिए। इससे हम खुद से बहुत कुछ डिमांड करते हैं और हर गेम के लिए पूरे फोकस के साथ तैयारी करते हैं। आप एक पल के लिए भी स्विच ऑफ नहीं कर सकते, क्योंकि लीग में क्वालिटी आपको सजा देगी।”
चेल्सी मैनेजर ने अपनी टीम की रक्षात्मक दिक्कतों को भी माना और जोर देकर कहा कि उनका रक्षात्मक रिकॉर्ड सुधारना उनकी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि इस सीजन में खाए गए कई गोल निजी गलतियों की वजह से हुए हैं, न कि विरोधी टीमों के उनके रक्षात्मक संरचना को तोड़ने की वजह से। हमारे डिफेंस के बहुत सारे गोल खाने के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है, लेकिन यह पक्का है कि यह एक ऐसा एरिया है जिसमें हम बेहतर करने के लिए समर्पित हैं। मुझे लगता है कि हम करेंगे। हम उस प्रक्रिया में हैं और विकसित हो रहे हैं।
चेल्सी मैनेजर ने कहा, “हमें एक यूनिट के तौर पर और ज्यादा एकजुट होने, अपने मुकाबले जीतने और आखिरी तीसरे हिस्से में बेहतर फैसले लेने की जरूरत है। खिलाड़ी यह जानते हैं, और वे जिम्मेदारी ले रहे हैं। डिफेंड करना सिर्फ बैक फोर के बारे में नहीं है। यह आगे से शुरू होता है, कि हम कैसे दबाव बनाते हैं और कैसे पीछे हटते हैं।”
अलोंसो ने पामर को एक सेंट्रल अटैकिंग मिडफील्डर के तौर पर भी पहचाना और बताया कि इंग्लैंड का यह इंटरनेशनल खिलाड़ी विरोधी टीम के मिडफील्ड और डिफेंसिव लाइन के बीच काम करते समय सबसे ज्यादा असरदार होता है।
अलोंसो ने कहा, “मेरे लिए, कोल पामर के लिए सबसे अच्छी पोजीशन एक सेंट्रल अटैकिंग मिडफील्डर की है। जब कोल को फॉरवर्ड के पीछे और डिफेंस की आखिरी लाइन के सामने गेंद मिलती है, तो वह आखिरी पास खेल पाता है, आखिरी ड्रिबल कर पाता है, गोल कर पाता है, और रन बना पाता है। लाइन के बीच वह टीमों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।”
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