राजनीति
बदायूं मामले पर टिप्पणी के लिए प्रियंका ने एनसीडब्ल्यू के सदस्य को फटकार लगाई
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एनसीडब्ल्यू की सदस्य चंद्रमुखी देवी को उनके बयान के लिए फटकार लगाई है। चंद्रमुखी देवी ने कहा था कि बदायूं में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और जानलेवा हमला नहीं हुआ होता, अगर वह शाम को अकेले बाहर नहीं निकली होती या फिर उसके साथ एक बच्चा होता। कांग्रेस नेता ने कहा, “क्या आपको लगता है कि इस तरह के बयान के बाद महिला सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी? एनसीडब्ल्यू सदस्य अपराध के लिए पीड़िता को दोषी ठहरा रही हैं। प्रशासन परेशान है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कैसे लीक हो गई? मुरादाबाद में, एक पीड़ित महिला अपने जीवन से जूझ रही है। “
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में 50 वर्षीय सामूहिक बलात्कार पीड़िता के गांव का दौरा किया, और कहा कि यह अपराध नहीं हुआ होता, अगर महिला शाम में अकेले बाहर नहीं निकलती।
एनसीडब्ल्यू की सदस्य ने कथित रूप से कहा, “यह एक ऐसा अपराध है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है, लेकिन मैं यह भी कहना चाहूंगी कि महिलाओं को शाम के समय में अकेले बाहर नहीं निकलना चाहिए। मुझे लगता है कि महिला ने शाम को बाहर कदम नहीं रखा होता, या उसका एक बच्चा उसके साथ होता तो यह घटना नहीं होती। “
वहीं एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कहा, “मुझे नहीं पता कि सदस्य ने यह कैसे और क्यों कहा है, लेकिन महिलाओं को अपनी मर्जी से, जब भी और जहां भी चाहें जाने का अधिकार है।”
महाराष्ट्र
मुंबई मानखुर्द एटीएम कार्ड फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर फ्रॉड करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 5 अगस्त को शिकायत करने वाली महिला पैसे निकालने के लिए मंगल मूर्ति जंक्शन पर बने एटीएम सेंटर गई थी। एटीएम से पैसे निकालते समय उसके पीछे खड़े एक अनजान व्यक्ति ने कार्ड का पिन देख लिया। इसके बाद उसने चालाकी से एटीएम रॉड बदलकर 19,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में फ्रॉड का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग दिखे थे जो एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हुए पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान कल्याण के रहने वाले 30 साल के कासिम अली बरकत अली और 38 साल के परवेज अकबर अली शेख के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों से आगे की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने पहले कितने लोगों को ठगा है। यह कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी के निर्देश पर डीसीपी समीर शेख ने की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
राजनीति
एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सांसदों के जोरदार नारेबाजी के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना है, ताकि सहकारी समितियों के लिए निधिकरण प्रक्रिया को तेज और अधिक लचीला बनाया जा सके।
इस विधेयक का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, एनसीडीसी (एनसीडीसी) की भूमिका का विस्तार करना है, जो सहकारी समितियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करता है, ताकि देशभर में सहकारी क्षेत्रों को वित्तपोषित किया जा सके।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
इसके बाद लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित हो गया और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, भी लोकसभा में लगातार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे।
नित्यानंद राय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने के विधेयक पर चर्चा नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। जब हंगामा बंद नहीं हुआ, तो विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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