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Saturday,31-October-2026
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किसान आंदोलन का आज 29वां दिन, साफ नहीं किस मसले पर हो वार्ता

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Narendra Singh Tomar

 किसान आंदोलन गुरुवार को 29वें दिन जारी है। नये कृषि कानून के मसले पर सरकार और किसान संगठनों के बीच गतिरोध बना हुआ है। हालांकि दोनों पक्षों की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने की दिशा में वे बातचीत के लिए तैयार हैं, मगर अगले दौर की वार्ता किन मसलों पर होगी, यह साफ नहीं है। किसान संगठन कहते हैं कि सरकार कोई ठोस प्रस्ताव दे तो वार्ता हो। जबकि सरकार कहती है कि किसान संगठन कानून में संशोधन के जो भी प्रस्ताव लेकर आएंगे उस पर विचार किया जाएगा। मगर, प्रदर्शनकारी किसान तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करवाने की मांग पर कायम हैं जबकि सरकार उनकी इस मांग को मानने को तैयार नहीं है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां), पंजाब के प्रेसीडेंट जोगिंदर सिंह ने आईएएनएस से कहा कि सरकार अगर तीनों काूननों को रद्द करने की बात करें तो वार्ता हो क्योंकि संशोधन किसानों को मंजूर नहीं है।

पंजाब के कुछ किसान संगठनों की गुरुवार की सुबह हुई बैठक के बाद जोगिंदर सिंह ने आईएएनएस के एक सवाल पर कहा, कानून में संशोधन का प्रस्ताव पिछली बात है जिस पर पहले ही बातचीत टूट चुकी है। अब सरकार अगर कोई नया प्रस्ताव लेकर आए तो उस पर बातचीत हो। हमारी बातचीत अब तो इस मसले पर होगी कि कानूनों को रद्द करने को लेकर सरकार क्या सोचती है। आईएएनएस ने उनसे पूछा कि आंदोलन समाप्त करने को लेकर किसान संगठन अब सरकार से किन मसलों पर बातचीत करना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा, हमारी चुनी हुई सरकार है और हम उम्मीद करते हैं कि सरकार लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए जल्द कोई फैसला ले क्योंकि सर्द के मौसम में लोग यहां बैठे हुए हैं।

उधर, सरकार का कहना है पूरे देश के किसान कानून के पक्ष में हैं, कुछ ही लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, सरकार समानांतर किसान संगठन बनाकर प्रचार कर रही है और किसान आंदोलन को तोड़ने की तमाम कोशिशें विफल हो चुकी हैं।

पंजाब के ही एक अन्य संगठन भारतीय किसान यूनियन के नेता पाल माजरा से आईएएनएस ने जब पूछा कि किसान संगठनों की तरफ से बातचीत के मसले क्यों नहीं सुझाए जा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि तीनों काूननों को रद्द करने की मांग पर सभी किसान संगठनों की एक राय है और इसके लिए सरकार तैयार होगी तो बातचीत होगी।

उन्होंने कहा, बातचीत के और भी मसले हैं। मसलन, एमएसपी पर फसलों की खरीद की गारंटी, पराली दहन अध्यादेश, बिजली अनुदान समेत कई और मसले हैं जिन पर हम सरकार से ठोस बातचीत की उम्मीद करते हैं।

बता दें कि सरकार ने किसानों के सारे मसलों के समाधान के लिए नौ दिसंबर को ही किसान संगठनों को प्रस्ताव भेजा था, जिसे किसान नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद से लगातार दोनों पक्षों की तरफ से कहा जा रहा है कि समाधान के रास्ते तलाशने के लिए वे अगले दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं। मगर, न तो सरकार की तरफ से कोई नया प्रस्ताव दिया गया है और न ही किसान संगठनों की ओर से। ऐसे में अगले दौर की वार्ता किन मसलों पर हो यह साफ नहीं है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को एक बार फिर साफ कर दिया है कि नये कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव किसानों को मंजूर नहीं है और वे तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करवाना चाहते हैं। हालांकि मोर्चा की ओर से सरकार को लिखे पत्र में कहा गया है कि सरकार अगर साफ नीयत से बातचीत को आगे बढ़ाना चाहे तो किसान संगठन वार्ता के लिए तैयार हैं।

इससे पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि प्रदर्शनकारी किसान संगठन अगले दौर की वार्ता के लिए जल्द अपने निर्णय और तारीख बताएंगे।

संसद के मानसून सत्र में कृषि से जुड़े तीनों अध्यादेशों से संबंधित तीन अहम विधेयकों संसद में पेश किए गए और दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद इन्हें कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 के रूप सितंबर में लागू किए गए। किसान संगठन इन तीनों कानूनों को निरस्त करवाने की मांग को लेकर 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

राजनीति

किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को दी 5 सवालों की चुनौती, पूछा- जब ज्ञानेश सीईसी नहीं थे, तो कांग्रेस को कैसे मिली हार

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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चुनाव आयोग और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कांग्रेस को 5 सवालों के जवाब देने की चुनौती दी है।

किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “मैं कांग्रेस पार्टी को इन बुनियादी सवालों का जवाब देने की चुनौती देता हूं।”

पहला सवाल, जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कांग्रेस की सरकार ने की थी, तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 44 सांसद कैसे मिले?

दूसरा सवाल जब, 2024 में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तो कांग्रेस को लगातार तीसरी बार हार का सामना कैसे करना पड़ा?

तीसरा सवाल, क्या मौजूदा कांग्रेस के मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के दौरान सरकारें बनाने के लिए माफी मांगेंगे?

चौथा सवाल, क्या वोटर लिस्ट से अवैध अप्रवासी, मृत, शिफ्ट हो चुके या डुप्लीकेट नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?

पांचवा सवाल, क्या 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 में किए गए एसआईआर अवैध थे?

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में आगे लिखा कि एक परिवार की पार्टी बाहरी ताकतों के साथ मिलकर संविधान और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश कर रही है।

दरअसल, कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग की स्वायत्तता से समझौता किया है और ‘वोट चोरी’ किया है।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया का इस्तेमाल वोटर के नाम मनमाने तरीके से हटाने और सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में वोटरों को एक बूथ से दूसरे बूथ पर शिफ्ट करने के लिए किया गया है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जिससे चुनावी संस्था की संवैधानिक स्वतंत्रता कमजोर हो रही है।

विपक्षी नेताओं का यह भी आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने आयोग के अंदर अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी या सहमति के बिना महत्वपूर्ण फैसले लिए और सुप्रीम कोर्ट में झूठे बयान दिए गए।

इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीन मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर को रद्द करना और ईवीएम की जगह पूरी तरह से पेपर बैलेट से वोटिंग कराना शामिल हैं।

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राष्ट्रीय समाचार

अयोध्या दीपोत्सव में डिजिटल आस्था की रोशनी, ‘श्री मंदिर’ ऐप से प्रज्वलित होंगे एक लाख दीप

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अयोध्या के ऐतिहासिक दीपोत्सव-2026 में इस बार डिजिटल तकनीक के जरिए देश-विदेश के रामभक्त भी दीपदान में सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के 30 लाख दीप प्रज्वलित करने के लक्ष्य के बीच डिजिटल धार्मिक मंच ‘श्री मंदिर’ ऐप के माध्यम से एक लाख दीप जलाए जाएंगे।

इस पहल के तहत दुनिया के किसी भी कोने में बैठा श्रद्धालु अयोध्या के राजद्वार में भगवान श्रीराम के चरणों में अपने नाम से दीप अर्पित कर सकेगा। दीपोत्सव के 10वें संस्करण में लगातार पांचवें वर्ष श्री मंदिर ऐप की ओर से यह विशेष पहल की जा रही है। इसके माध्यम से श्रद्धालु एक, पांच, 11 और 21 दीप अर्पित करने का विकल्प चुन सकेंगे। ऑनलाइन बुकिंग के बाद अयोध्या के राजद्वार में मौजूद विद्वान पुरोहित संबंधित श्रद्धालु के नाम और गोत्र से विधिवत संकल्प लेकर वैदिक रीति से दीप प्रज्वलित करेंगे।

दीपदान की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी, जिसे बाद में डिजिटल माध्यम से संबंधित श्रद्धालु के साथ साझा किया जाएगा। इससे विदेशों और देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले रामभक्त भी अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव से सीधे जुड़ सकेंगे और अपने आराध्य के चरणों में दीप अर्पित करने का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। श्री मंदिर ऐप की ओर से दीपोत्सव के अवसर पर दीपदान के साथ अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा। इसके तहत अखंड रामायण पाठ होगा। विद्वान आचार्यों और ब्राह्मणों का विधि-विधान से वंदन एवं सेवा की जाएगी। इसके अलावा पांच हजार से अधिक साधु-संतों, श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के लिए महा-अन्नदान एवं भंडारे की व्यवस्था की जाएगी।

श्री मंदिर के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशांत सचान ने कहा कि उनका मानना है कि किसी भी श्रद्धालु की आस्था और उसके आराध्य के पवित्र तीर्थस्थल के बीच भौगोलिक दूरी बाधा नहीं बननी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के दीपोत्सव और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का कार्य कर रही है। इस आयोजन में सहयोगी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि श्री मंदिर का प्रयास है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले रामभक्त का संकल्प अयोध्या तक पहुंचे और उनके नाम से प्रज्वलित होने वाला प्रत्येक दीप पूरी श्रद्धा, सम्मान और वैदिक विधि-विधान के साथ समर्पित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि चार करोड़ से अधिक डाउनलोड वाला श्री मंदिर ऐप देशभर के 100 से अधिक प्रमुख मंदिरों से जुड़ी ऑनलाइन पूजा, धार्मिक सेवा, चढ़ावा अर्पण और प्रसाद वितरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। इस डिजिटल पहल से उन बुजुर्गों, अस्वस्थ श्रद्धालुओं और विदेशों में रहने वाले रामभक्तों को भी दीपोत्सव में सहभागी बनने का अवसर मिलेगा, जो किसी कारणवश अयोध्या नहीं पहुंच सकते।

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राष्ट्रीय समाचार

1 नवंबर को प्रस्तावित रैली से व्यापारी वर्ग में चिंता, सीटीआई ने इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को लिखा पत्र

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1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे समेत सभी घटक दलों को पत्र लिखकर रैली को दीपावली के बाद कराने की मांग की है।

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि व्यापारी वर्ग रैली का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन 1 नवंबर, धनतेरस और दीपावली से पहले की तैयारियों के लिए पीक दिन है। अगर महारैली का आयोजन होता है तो 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोजाना होने वाला 10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप हो जाएगा।

सीटीआई ने इसके लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को टालने का अनुरोध किया। सीटीआई इससे पहले राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत करा चुकी है।

सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में 20 बाजार आते हैं जो 300 साल पुराने हैं और पूरे भारत को माल सप्लाई करते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

इन बाजारों में रोजाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5000 ट्रक-टेम्पो माल लाते हैं और यहां से 3000 ट्रक रोजाना गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों समेत देशभर के सभी राज्यों में माल ले जाते हैं।

व्यापारी वर्ग के अनुसार, ऐसी स्थिति में अगर महारैली होती है तो 31 अक्टूबर दोपहर से ही बसें और गाड़ियां दिल्ली बॉर्डर (सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, बदरपुर) पर आना शुरू हो सकती हैं और शाम से ही बहादुर शाह जफर मार्ग, जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग लग सकती है। ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही गाड़ी भेजने से मना कर रहे हैं। तो असर 1 नवंबर नहीं, 31 अक्टूबर से ही शुरू हो जाएगा।

सीटीआई ने कहा कि 1 नवंबर की रैली को दीपावली बाद 10 या 11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली पर कारोबार में कोई विघ्न न पड़े। अगर रैली करनी ही है तो रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में की जाए, जहां 15,000 गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो।

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