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Saturday,08-August-2026
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‘पाक ने हिंदू, ईसाई महिलाओं की चीन में ‘उप-पत्नी’ के तौर पर मार्केटिंग की’

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पाकिस्तान हिंदू और ईसाई महिलाओं को चीन में उप-पत्नी या रखैल और मजबूर दुल्हन के तौर पर मार्केटिंग कर रहा है। ये बात अमेरिका के शीर्ष राजनयिक सैमुअल ब्राउनबैक ने कही है।

ब्राउनबैक ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि चीनी पुरुषों के लिए “दुल्हनों के स्रोतों में से एक धार्मिक अल्पसंख्यक ईसाई और हिंदू महिलाएं हैं, जिनकी उपपत्नी के तौर पर मार्केटिंग की जा रही है और चीन में दुल्हन बनने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनकी वहां स्थिति अच्छी नहीं है और धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता है।”

उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत पाकिस्तान को कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न (सीपीसी) बताया है। चीन द्वारा दशकों से लागू की गई एक-बच्चे की नीति के कारण और लड़के को प्राथमिकता दिए जाने के कारण चीनी पुरुषों के लिए महिलाओं की खासी कमी हो गई है जिसके कारण वे अन्य देशों से मिस्ट्रेस और मजदूरों के रूप में दुल्हनों को आयात करते हैं।

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ)ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अन्य मुद्दों का हवाला देते हुए भारत को सीपीसी पर रखने की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने सोमवार को पदनामों की घोषणा करते समय इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया।

हालांकि ब्राउनबैक ने कहा कि वाशिंगटन भारतीय स्थिति को करीब से देख रहा है और ये मुद्दे सरकार, उच्च सरकारी स्तर पर उठे हैं और उठते रहेंगे।

हिंदुओं, ईसाइयों, बौद्धों और सिखों को पड़ोसी इस्लामिक या मुस्लिम बहुल देशों में धार्मिक उत्पीड़न से बचाकर उनको देश में नागरिकता देने के लिए नागरिक संशोधन कानून लाया गया है लेकिन ये कानून सामान्य प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद मुसलमानों को भी नागरिकता प्राप्त करने से नहीं रोकता है।

अमेरिका में भी सीएए जैसा एक कानूनी प्रावधान है जो ईरान के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को शरण देता है।

पाकिस्तानी रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान को सीपीसी पदनाम देना और भारत को नहीं देना, ये पोम्पिओ का दोहरा मानदंड है? इस पर ब्राउनबैक ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ काफी कार्रवाई सरकार द्वारा की जाती है, जबकि भारत में ऐसा नहीं है।

उन्होंने कहा, “ईशनिंदा के आरोप वाले दुनिया के आधे लोग केवल पाकिस्तान में बंद हैं। भारत में सीएए जैसी कुछ कार्रवाइयां सरकार द्वारा की जाती हैं, लेकिन सांप्रदायिक हिंसा आदि होने पर हम देखते हैं कि क्या इसके लिए पर्याप्त पुलिस फोर्स लगाई गई या सांप्रदायिक हिंसा के बाद न्यायिक कार्रवाई हुई या नहीं।”

एक अमेरिकी रिपोर्टर द्वारा पूछ जाने पर कि पोम्पिओ ने भारत को सीपीसी नामित करने की यूएससीआईआरएफ की सिफारिश का पालन क्यों नहीं किया। इस पर ब्राउनबैक ने कहा, “सचिव द्वारा लिए गए निर्णय के बारे में मैं नहीं बोल सकता हूं।”

लेकिन उन्होंने कहा कि पोम्पिओ भारत में होने वाली सांप्रदायिक हिंसा के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और इससे जुड़े कुछ मुद्दों के बारे में भी जानते हैं।

पोम्पिओ ने रूस और वियतनाम को भी सीपीसी के रूप में नामित करने की सिफारिशों का पालन नहीं किया।

पाकिस्तान के अलावा पोम्पिओ ने चीन, म्यांमार इरिट्रिया, ईरान, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को सीपीसी सूची में डाल दिया है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

होर्मुज स्ट्रेट के पास मर्चेंट जहाज पर हमला, इंजन रूम में आग लगने के बाद क्रू ने मांगी मदद

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होर्मुज स्ट्रेट के पूर्वी एंट्रेंस के पास एक मर्चेंट जहाज में हमले के बाद उसमें आग लग गई। लंदन टाइम के अनुसार, शुक्रवार शाम को शिप-टू-शिप रेडियो कम्युनिकेशन ने यह जानकारी दी।

यह रिकॉर्डिंग जो खास तौर पर न्यूज एजेंसी सिन्हुआ को एक नाविक से मिली थी, एक ओपन मैरीटाइम रेडियो चैनल पर भेजी गई; उसमें क्रू मेंबर आग से जूझते हुए और मदद मांगते हुए दिखे।

कम्युनिकेशन के मुताबिक, जहाज ओमानी तट के पास था जब उस पर हमला हुआ, जिससे इंजन रूम में आग लग गई। चालक दल ने जहाज की कार्बन डाइऑक्साइड अग्निशमन प्रणाली सक्रिय कर दी और बैलास्ट ऑपरेशन के जरिए आग पर काबू पाने की कोशिश की।

रिकॉर्डिंग में बताया गया कि जहाज की हाइड्रोलिक प्रणाली के फेल होने से आग बुझाने के प्रयास और जटिल हो गए। संचार के एक अन्य हिस्से में आसपास के कई जहाजों ने कहा कि वे सहायता देने के लिए घटनास्थल की ओर बढ़ रहे हैं।

हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास के पानी में जहाजों पर कई हमले हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर घटनाएं स्ट्रेट के ओमानी साइड के पास शिपिंग रूट पर हुईं। इससे पहले जुलाई की शुरुआत में ओमान के तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक कमर्शियल जहाज में आग लग गई थी। अमेरिका-ईरान के बढ़ते तनाव की वजह से इस अहम जलमार्ग से शिपिंग में रुकावट आ रही थी। ऐसे में ब्रिटिश समुद्री अधिकारियों ने चेतावनी दी थी।

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने कहा कि उन्हें ओमान के कुमजार से लगभग 8 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम में एक घटना की रिपोर्ट मिली है। मिलिट्री अधिकारियों ने यूकेएमटीओ को बताया कि एक जहाज में आग लग गई थी, हालांकि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

अमेरिका-ईरान लड़ाई के बीच होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग काफी हद तक रुक गई है और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर चलने वाले जहाजों की सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अमेरिकी सेना ने पहले जहाजों से कहा था कि वे स्ट्रेट से गुजरते समय ओमान के कोस्टलाइन के पास वाले रास्तों का इस्तेमाल करें। ईरान ने उन रास्तों से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया और कहा कि पानी के रास्ते से नेविगेशन पर उसका कंट्रोल होना चाहिए।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ट्रंप प्रशासन का दावा, 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को अमेरिका से निकाला गया

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अमेरिका से 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को निर्वासित किया गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि लगातार 15 महीनों से किसी भी अवैध प्रवासी को रिहा नहीं किया गया है। उसने 14 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को करदाताओं के पैसे से संचालित सार्वजनिक सहायता लाभों से बाहर कर दिया है। इसके अलावा अवैध प्रवासियों को करदाताओं द्वारा वित्तपोषित एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य योजनाओं से भी वंचित किया गया है, हालांकि इन योजनाओं के नाम या राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए।

व्हाइट हाउस ने आव्रजन प्रवर्तन के अपने रिकॉर्ड का विस्तृत ब्योरा जारी करते हुए यह जानकारी दी। ये आंकड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित दो कार्यकारी आदेशों के साथ जारी व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में शामिल किए गए हैं।

इन आदेशों के तहत कुछ श्रेणियों के बच्चों के लिए जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) पर प्रतिबंध लगाया गया है और संघीय एजेंसियों को बर्थ टूरिज्म रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

व्हाइट हाउस के अनुसार, निर्वासित किए गए लोगों में हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए हजारों लोग भी शामिल थे। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित प्रवासियों के मूल देशों, निर्वासन की अवधि या विस्तृत आंकड़ों का कोई ब्योरा नहीं दिया।

प्रशासन ने यह भी दावा किया कि पिछले 15 महीनों में किसी भी अवैध प्रवासी को अमेरिका में रिहा नहीं किया गया। व्हाइट हाउस ने इसे ट्रंप के सत्ता में वापसी के पहले सप्ताह में शुरू किए गए कदमों का परिणाम बताया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिणी सीमा पर संकट का हवाला देते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अवैध आव्रजन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। व्हाइट हाउस का कहना है कि इससे पिछली सरकार की सीमा संबंधी नीतियों को पलटा गया।

फैक्ट शीट में वीजा जांच प्रक्रिया को और सख्त करने तथा 75 देशों के लिए वीजा प्रोसेसिंग निलंबित करने का भी जिक्र है, हालांकि प्रशासन ने इन देशों के नाम, निलंबन की अवधि या प्रभावित वीजा श्रेणियों की जानकारी नहीं दी।

इन कदमों का उद्देश्य अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऐसे विदेशी नागरिकों को हतोत्साहित करना है जो अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रुक जाते हैं।

व्हाइट हाउस ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह एक ऐसा अभियान है जो पहले कभी नहीं चला और जिसमें धोखाधड़ी से अमेरिकी नागरिकता पाने के आरोपी लोगों को निशाना बनाया गया।

इसमें कहा गया कि 88 लोगों के खिलाफ दावे किए गए हैं, जिन्हें अयोग्य होने के बावजूद अमेरिकी नागरिकता मिल गई। हालांकि फैक्ट शीट में उन लोगों की पहचान नहीं बताई गई, न ही कथित उल्लंघनों के बारे में बताया गया और न ही कार्रवाई की स्थिति बताई गई।

फैक्ट शीट में नागरिकता परीक्षा में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि संशोधित परीक्षा के जरिए आवेदकों के अमेरिकी इतिहास, शासन व्यवस्था और मूल्यों के ज्ञान का बेहतर आकलन किया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी कहा कि वह राज्यवार मतदाता सूचियों से हजारों अवैध प्रवासियों के नाम हटाने की दिशा में काम कर रहा है, हालांकि इसमें शामिल राज्यों या अब तक हटाए गए नामों की संख्या संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की गई।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

न्यूजीलैंड: 15 साल बाद वेलिंगटन में बर्फबारी, कई प्रमुख राजमार्ग बंद

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एक तरफ जहां यूरोप के कई इलाके भीषण गर्मी की मार अब भी झेल रहे हैं वहीं ओशिनिया के द्वीपीय देश न्यूजीलैंड की राजधानी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड का सामना कर रहा है। अंटार्कटिका से आई भीषण शीत लहर के प्रभाव से न्यूजीलैंड के बड़े हिस्से में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वेलिंगटन में करीब 15 वर्षों बाद समुद्र तल तक बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि दक्षिणी शहर डुनेडिन में लोगों ने दुनिया की सबसे खड़ी सड़क पर स्कीइंग कर इस दुर्लभ मौसम का आनंद लिया।

स्थानीय मीडिया आउटलेट स्टफ के अनुसार, राजधानी वेलिंगटन में बर्फबारी से शहर सफेद चादर में ढक गया। लंबे समय बाद हुई इस बर्फबारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर बर्फबारी की तस्वीरें और वीडियो भी तेजी से साझा किए जा रहे हैं।

दक्षिणी शहर डुनेडिन में भारी बर्फबारी के कारण कई स्कूल बंद कर दिए गए। बर्फ से ढकी दुनिया की सबसे खड़ी सड़क ‘बाल्डविन स्ट्रीट’ पर स्थानीय लोगों ने स्की और स्नोबोर्ड चलाकर मौसम का आनंद लिया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को देश के कई हिस्सों में तापमान शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच गया। बर्फबारी और फिसलन के कारण कई प्रमुख राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं, जबकि क्राइस्टचर्च हवाई अड्डे पर भी उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है। पुलिस ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

न्यूजीलैंड की मौसम एजेंसी ‘मेटसर्विस’ ने कहा है कि बुधवार को कुछ क्षेत्रों में मौसम में अस्थायी सुधार हो सकता है, लेकिन इसके बाद ठंड की एक और लहर आने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक, गुरुवार कई इलाकों में इस वर्ष की सबसे ठंडी सुबह हो सकती है।

इस बीच, राष्ट्रीय बिजली ग्रिड संचालक ‘ट्रांसपावर’ ने रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज होने की जानकारी दी है और सप्ताह के अंत तक बिजली आपूर्ति पर दबाव बने रहने की चेतावनी दी है।

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