राजनीति
पंजाब : अमरिंदर ने विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को सुल्तानपुर लोधी में 40.75 करोड़ की लागत से छह विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने यह आधारशिला गुरु नानक देव की जयंती के अवसर पर रखी। पहले सिख गुरू के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर शुरू हुए समारोह की समाप्ति पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अमरिंदर सिंह ने किला सराई को संरक्षित करने के लिए 6.5 करोड़ की लागत वाली परियोजना, 1.25 करोड़ की लागत से सरकारी स्कूल पर सोलर पॉवर प्लांट और 9.5 करोड़ रुपये की लागत से एक स्मार्ट स्कूल बनाने की आधारशिला रखी।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान पूरी हुई कई परियोजनाओं के बारे में बताया और कहा कि पवित्र काली बेई के सौंदर्यीकरण में 10.8 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं गुरुनानक देव सेंटर फॉर इनवेंशन, इन्नोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग को बनाने में 319 करोड़ रुपये खर्च हुए।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने हेरिटेज स्ट्रीट, गुरु नानक देव सुगरकेन रिसर्च एंड डवलपमेंट इंस्ट्टियूट, बाबा बंदा सिंह बहादुर म्यूजियम और क्लॉक टॉवर की आधारशिला रखी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अफगानिस्तान से तनातनी पाकिस्तान की क्षेत्रीय व्यापार महत्वाकांक्षा पर भारी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस टकराव का असर अब केवल दोनों देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है।
मध्य एशिया और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाली व्यापारिक और परिवहन योजनाओं के सामने भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान के रास्ते मध्य एशियाई देशों को समुद्री बंदरगाहों तक पहुंच उपलब्ध कराने की इस्लामाबाद की महत्वाकांक्षा को झटका लगा है। इसका ताजा संकेत कजाखस्तान के साथ व्यापार बढ़ाने के लक्ष्य में आई कमी से मिला है।
क्षेत्रीय मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘यूरेशियानेट’ ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की। जिसके अनुसार, कजाखस्तान और पाकिस्तान के बीच सालाना व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों ने व्यापार की संभावित क्षमता करीब 645 मिलियन डॉलर आंकी है। यह आकलन एक नवंबर को अस्ताना में कजाखस्तान के उप प्रधानमंत्री सेरिक झुमांगारिन और पाकिस्तान के निवेश मंत्री कासिम अहमद शेख के बीच हुई बातचीत के दौरान सामने आया।
पाकिस्तान मध्य एशियाई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंध मजबूत करने और कराची, ग्वादर तथा अन्य बंदरगाहों के जरिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है। उसकी ख्वाहिश और उम्मीदों को डेंट अफगानिस्तान ने लगाया है। अफगानिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्ते और सीमा पार व्यापार में बाधाएं इन योजनाओं की रफ्तार में ब्रेक लगा रही हैं।
पाकिस्तान के सामने उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य भी चुनौतीपूर्ण होता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में सालाना द्विपक्षीय व्यापार को दो अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े इस लक्ष्य की राह आसान नहीं बताते।
वर्ष 2024 में पाकिस्तान ने उज्बेकिस्तान को करीब 129 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया था, जबकि उज्बेकिस्तान से पाकिस्तान का आयात लगभग 257 मिलियन डॉलर रहा। वर्ष 2025 के व्यापार आंकड़ों में भी खास बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं को अफगानिस्तान के साथ जारी संघर्ष से बड़ा झटका लगा है। अफगानिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान और मध्य एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके रास्ते मध्य एशियाई देशों का सामान पाकिस्तान के बंदरगाहों तक पहुंच सकता है और वहां से समुद्री रास्तों के जरिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा सकता है। लेकिन दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव ने इस पूरे परिवहन नेटवर्क की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का असर पहले से ही सीमा पार कारोबार पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच प्रमुख सीमा चौकियों के बंद रहने से माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे पाकिस्तान के उन व्यापारियों और निर्यातकों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो अफगानिस्तान को बाजार के रूप में इस्तेमाल करने के साथ-साथ मध्य एशियाई देशों तक सामान पहुंचाने के लिए इस मार्ग पर निर्भर थे।
पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ कार्रवाई की मांग और काबुल की ओर से इन आरोपों को खारिज किए जाने के बीच दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस विवाद ने क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को भी प्रभावित किया है।
इसका एक संकेत अक्टूबर में मास्को फॉर्मेट के तहत हुई क्षेत्रीय बैठक में भी देखने को मिला था। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर मतभेद के कारण बैठक में संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। इस बैठक में मध्य एशियाई देशों के अलावा भारत, चीन, ईरान और रूस समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
पाकिस्तान के निवेश मंत्री कासिम अहमद शेख ने अस्ताना में निवेश मंच पर अपने संबोधन में देश के बंदरगाहों को मध्य एशिया के लिए रणनीतिक प्रवेश द्वार बताया था। उनका कहना था कि पाकिस्तान के बंदरगाह क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन संपर्क मजबूत करने के साथ सामान की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध करा सकते हैं। फिलहाल जो हालात हैं, उसके मद्देनजर इन दावों को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा।
इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत के क्षेत्रीय हितों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान और ईरान के रास्ते मध्य एशिया तक व्यापारिक एवं परिवहन संपर्क मजबूत करने की पैरवी करता रहा है। चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) इसी व्यापक क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का हिस्सा हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराए दो टैंकर और एक टगबोट, लगी आग: ईरान

ईरान ने गुरुवार को दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे दो टैंकर्स और एक टगबोट में आग लग गई। उनके मुताबिक ये अनधिकृत रास्ते से निकलने की कोशिश कर रहे थे और इसी दौरान बारूदी सुरंग से टकरा गए जिससे आग लग गई। इसी बीच, ईरान की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर यूनिट्स ने अमेरिका के दो ‘लुकास’ ड्रोन को अपने कब्जे में लेने का दावा भी किया है।
ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के हवाले से ये जानकारी साझा की। आईआरजीसी के अनुसार, “एक ‘अनधिकृत रास्ते’ से गुजरने की कोशिश के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों और एक टगबोट में आग लग गई।”
आईआरजीसी के बयान अनुसार, “बुधवार रात होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी रास्ते से गुजरते समय एक बड़ा तेल टैंकर बारूदी सुरंग (माइन) से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई। वहीं, एक दूसरा सुपरटैंकर जलमार्ग के पूर्वी हिस्से से बाहर निकलते समय आग की चपेट में आ गया, और आग बुझाने के लिए भेजी गई एक टगबोट भी बाद में जलने लगी।”
बयान में कहा गया है कि अमेरिका द्वारा जहाजों को बारूदी सुरंगों वाले रास्तों से ले जाने की जिद के कारण, अमेरिकी करदाताओं और क्षेत्रीय सहयोगियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है और बीमा का खर्च भी बढ़ रहा है।
वहीं, आईआरजीसी की नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर यूनिट्स ने दावा किया कि उनके वायुक्षेत्र में घुसे दो अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को उन्होंने अपने नियंत्रण में ले लिया।
इससे पहले बुधवार को भी नौसैनिक यूनिट ने अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने की बात कही थी। बयान के अनुसार, “आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट में केशम द्वीप के ऊपर एक यूएस एमक्यू-1 ड्रोन को इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया। यह ईरानी एयर डिफेंस द्वारा गिराया गया अपनी तरह का 15वां एयरक्राफ्ट है।”
आईआरजीसी के जनसंपर्क कार्यालय ने कहा, “पहले ड्रोन को ट्रैक किया गया और फिर उसे हमारे एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया, जो देश के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क के तहत काम करता है।” बयान में घटना का सही समय या इस्तेमाल की गई मिसाइल के टाइप के बारे में नहीं बताया गया।
राजनीति
समाजवादी पार्टी सत्ता में आई तो 24 घंटे में खत्म करेंगे अग्निवीर व्यवस्था : अवधेश प्रसाद

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अग्निवीरों की सेवा अवधि चार से बढ़ाकर छह साल किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इस पूरी योजना को ही सेना के सम्मान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनेगी तो इसको खत्म कर दिया जाएगा।
अयोध्या में आईएएनएस से बातचीत के दौरान सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि अग्निवीर जैसी व्यवस्था लागू करके सरकार ने भारतीय सेना के गौरव को कम करने का काम किया है। जब भी उनकी सरकार सत्ता में आएगी, तो 24 घंटे के अंदर अग्निवीर जैसी व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती की पुरानी व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाएगा, जिसके तहत युवाओं को सम्मान के साथ स्थायी नौकरी मिलती थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे गौरवशाली सेना के जवानों के साथ चार साल या छह साल की अस्थायी नौकरी वाली व्यवस्था करना उचित नहीं है। यह न केवल सेना का अपमान है, बल्कि पूरे देश का अपमान है। युवाओं को कुछ सालों के लिए सेना में रखकर फिर बाहर कर देना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को बदलकर पहले की तरह ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि युवाओं को पूरा सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
अयोध्या में होने वाले भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शामिल होने के प्रस्तावित दौरे पर भी सांसद अवधेश प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है। दीपावली का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। हम लोग भी इसे मनाएंगे, पूरा देश मनाएगा और पूरा क्षेत्र मनाएगा। लोग अपने-अपने घरों में दीपक जलाकर खुशियां मनाएंगे।
वहीं, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के हालिया बयान पर भी अवधेश प्रसाद ने कड़ी आपत्ति जताई। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि राम-कृष्ण में भेद करने वाला महापापी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री का बयान बेहद निंदनीय है। इसकी निंदा के लिए उनके पास कड़े शब्द भी नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की विचारधारा रखने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह के बयानों से देश को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। किसी भी देवी-देवता के खिलाफ इस प्रकार का बयान देना पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की कि ऐसे बयानों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, ताकि समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द बना रहे।
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