अपराध
तमिलनाडु में निवार चक्रवात के कारण 3 की मौत
तमिलनाडु में आए चक्रवाती तूफान निवार के कारण 3 लोगों की मौत हो गई। राज्य सरकार के अनुसार, बारिश से संबंधित घटनाओं के कारण 3 लोगों की जान चली गई और 3 घायल हो गए। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि तूफान में 26 मवेशियों की भी मौत हुई है। साथ ही 101 घर भी चक्रवात से क्षतिग्रस्त हो गए। निवार ने लगभग 380 पेड़ों को उखाड़ दिया और 14 एकड़ केले के बागान को भी नुकसान पहुंचाया।
सरकार ने कहा कि बिजली लाइनों को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए मरम्मत कार्य चल रहा है। बिजली के 19 खंभे गिर गए हैं।
तमिलनाडु के 7 जिलों में गुरुवार दोपहर को चक्रवात से पहले 24 नवंबर से रुकी हुईं बस सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं। चेन्नई में उपनगरीय ट्रेन सेवाओं को भी दोपहर 3 बजे फिर से शुरू किया जाएगा। वहीं, अभी भी 3,085 राहत शिविरों में लगभग 2.27 लाख लोगों को रखा गया है।
मुख्यमंत्री के.पलानीस्वामी ने ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन और ग्रेटर चेन्नई पुलिस द्वारा गिरे हुए पेड़ों को हटाने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए सराहना की है। साथ ही उन्होंने चक्रवात के नुकसान का निरीक्षण करने और प्रभावित लोगों से मिलने के लिए कुड्डालोर का दौरा किया।
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने एक समाचार चैनल को बताया कि गुरुवार से ही चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। चक्रवात के कारण बहुत सारे पेड़ गिर गए हैं और अभी भी बारिश जारी है।
निवार के कारण आंध्रप्रदेश में 164 जगहों पर गुरुवार सुबह तक पिछले 24 घंटों में 60 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, नेल्लोर जिले में 5 जगहों – एपीएफटी कॉलोनी (302.7 मिमी), बोग्गुलामित्त वार्ड (272.7 मिमी), एमपीपी स्कूल (264 मिमी), समर स्टोरेज टैंक (242.7 मिमी) और थाटीपरी (239.5 मिमी) में सबसे ज्यादा बारिश हुई।
चित्तूर के जिला कलेक्टर नारायण भरत गुप्ता ने कहा, “बुधवार को जिले में औसतन 8.6 सेमी बारिश हुई। वरदयैपलेम, येरपेडु, श्रीकालहस्ती, सत्यवेदु, नागुलपुरम, विजयपुरम और नारायणवनम मंडल में 12 सेमी से ज्यादा बारिश हुई।”
भारी बाढ़ के कारण प्रमुख जलाशयों के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। कलेक्टर ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों को पानी का प्रवाह कम होने तक सड़कें पार नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा आग्रह है कि जब तक स्थिति बेहतर नहीं हो जाती, एक या दो दिन के लिए घर में ही रहें, सुरक्षित रहें।”
निवार के चलते पश्चिम गोदावरी जिले के अधिकांश हिस्सों में बुधवार की रात से ही बारिश हो रही है। बुधवार की रात 9 बजे से भीमावरम और इसके आसपास के कई गांवों- सीसली, बोंडाडा, कल्ला, कल्लाकुरु, डोडदानपुड़ी, चिन्नापुल्लेरू आदि में लगातार बारिश हो रही है।
पश्चिमी गोदावरी जिले के वाईएसआरसीपी नेता तल्लुरि राजकुमार ने गुरुवार की दोपहर को कहा, “अभी भी बारिश हो रही है। सर्दियों के मौसम में यहां बारिश होना बहुत असामान्य है। 2-3 दिनों तक लगातार बारिश होना झींगा के लिए ठीक नहीं है।”
यहां हजारों एक्वाकल्चर किसान राज्य के इस हिस्से में झींगा पालते हैं। खराब मौसम के कारण वे चिंतित हैं। इसके अलावा धान उपजाने वाले हजारों किसान भी निवार तूफान से परेशान हुए हैं।
अपराध
मुंबई : अंधेरी में 60 लाख रुपये से ज़्यादा कीमत के गहने चोरी का ड्रामा करने के आरोप में दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने दो ऐसे चालाक आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है, जिन्होंने चोरी और सड़क हादसे की कहानी रची थी और 60 लाख रुपये के गहने चोरी होने का नाटक किया था। हालांकि, पुलिस जांच में पता चला कि सोने के गहने पहुंचाने वाला व्यक्ति ही चोर था और उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर चोरी की थी। एमआईडीसी पुलिस ने गोल्ड स्टार कंपनी की कंचन पवार की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया था। जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने अपने कर्मचारी अविनाश गंगाधर कदम (26) को सोने के गहने पहुंचाने के लिए भेजा था। उसी समय उसने बताया कि उसकी मोटरसाइकिल एक्टिवा का एक्सीडेंट हो गया था और इस दौरान सोने के गहने और बैग भी चोरी हो गए। उसने बिना किसी चोट या घाव के अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। इस दौरान पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पता चला कि संदिग्ध, जिसका नाम मनोज हेमंत जोगदंड (41) है, एक्सीडेंट से पहले संदिग्ध तरीके से यहां गश्त कर रहा था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों ने चोरी का नाटक किया था और घटना को एक्सीडेंट बताकर लूट की योजना बनाई थी। इसके बाद पुलिस ने अविनाश को भी हिरासत में ले लिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर रहस्य सुलझा लिया। यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर डीसीपी दत्ता नलावड़े ने किया।
अपराध
पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन मामले में आरोपी नासिक में गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन के मामले में फरार एक आरोपी को नासिक में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुणे पुलिस में 38 वर्षीय किरण दादासाहेब शिंदे की दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ‘गंगा फर्नहिल’ प्रोजेक्ट की चार इमारतों में फ्लैट बेचने और उससे जुड़े कामों की जिम्मेदारी सीनियर सेल्स मैनेजर साइमन रॉनी पीटर को सौंपी गई थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फ्लैट की बिक्री से मिली रकम को कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय, अपने सहयोगी बी. चंद्रशेखर के एक फर्जी प्राइवेट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह उन्होंने 32 ग्राहकों से इकट्ठा किए गए लगभग 2 करोड़ रुपए का गबन किया।
इस शिकायत के आधार पर 9 जून को पुणे के कालेपडल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामला दर्ज होने के बाद पीटर फरार हो गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया।
जांच के दौरान पुणे पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी नासिक शहर में छिपा हुआ है। कालेपडल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अशोक शर्माले से संपर्क किया और पीटर का पता लगाने और उसे पकड़ने में मदद मांगी।
विश्वसनीय जानकारी मिलने पर शर्माले को पता चला कि आरोपी पीटर कार से नासिक आया था और गंगापुर रोड पर कालेनगर में होटल ट्रीबो सफायर के कमरा नंबर 301 में ठहरा हुआ था।
यह जानकारी मिलने पर क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम के अधिकारी घनश्याम भोये और उनकी टीम को तुरंत उस जगह भेजा गया। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और बाद में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे पुणे पुलिस को सौंप दिया।
यह ऑपरेशन गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शर्माले और उनकी टीम की अगुवाई में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उनकी टीम में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर तुषार देवरे और पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रवींद्र मोहिते, गिरीश महाले, भागवत थाविल, घनश्याम भोये, प्रवीण केदारे, गोरख सालुंखे, सुजीत जाधव और तुलसीदास चौधरी शामिल थे।
अपराध
जम्मू-कश्मीर : सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में दो वन अधिकारियों समेत तीन गिरफ्तार

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने रविवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार के आरोप में वन विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में वन विभाग के दो अधिकारी और उसी विभाग का एक कैजुअल लेबरर (अस्थायी कर्मचारी) शामिल है।
गिरफ्तार लोगों की पहचान कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; और रामहामा, बीरवाह के कैजुअल लेबरर बशीर अहमद गनी के तौर पर हुई है।
ये गिरफ्तारियां सीबीआई पुलिस स्टेशन, कश्मीर में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गईं।
इससे पहले, सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया और बशीर अहमद गनी को तब पकड़ा जब वह कथित तौर पर 15,000 रुपये की रिश्वत ले रहा था।
यह ऑपरेशन अवैध रूप से पैसे की मांग के आरोपों के बाद शुरू किया गया था। सूत्रों ने बताया कि आगे की जांच चल रही है।
इस केंद्र शासित प्रदेश की अपनी भ्रष्टाचार-रोधी संस्था, ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) है, जिसे सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने का अधिकार है।
सीबीआई के पास ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ के तहत भ्रष्टाचार की जांच करने का मुख्य अधिकार क्षेत्र है, जिसमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी शामिल होते हैं।
सीबीआई के भ्रष्टाचार-रोधी अधिकार क्षेत्र के दायरे और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई खास ऑपरेशनल नियम हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के तहत केंद्रीय अधिकार क्षेत्र उन अधिकारियों पर लागू होता है जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी आम तौर पर राज्य के ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
चूंकि पुलिसिंग राज्य का विषय है, इसलिए सीबीआई राज्यों में ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम’ की धारा 6 के तहत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा दी गई ‘सामान्य सहमति’ के माध्यम से काम करती है।
कई राज्यों ने यह सामान्य सहमति वापस ले ली है, जिसका मतलब है कि सीबीआई को उन इलाकों में जांच करने के लिए मामले-विशेष की सहमति या अदालत के आदेश की जरूरत होती है।
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट सीबीआई को देश में कहीं भी किसी भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने का अधिकार दे सकते हैं, भले ही राज्य सरकार सहमति देने से इनकार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय राज्य पुलिस बल और एसीबी के पास भी अपने राज्य में काम कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत मामले दर्ज करने और उनकी जांच करने का अधिकार क्षेत्र है।
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