राजनीति
नीतीश सरकार में दूर हो सकती है मुस्लिम मंत्री की कमी, ओवैसी और कांग्रेस विधायकों पर जदयू की नजर

बिहार की नई नीतीश सरकार में एक भी मुस्लिम मंत्री न होने की कमी आगे चलकर दूर हो सकती है। ओवैसी की पार्टी एआईआईएम से सीमांचल की सीटों पर जीतने वाले पांच में से तीन मुस्लिम विधायक पाला बदल सकते हैं। एआईआईएम ही नहीं बल्कि कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों पर भी नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की नजर है। वजह कि बिहार चुनाव में भाजपा के 74 सीटों के मुकाबले सिर्फ 43 सीटें पाने वाली जदयू अपनी संख्या बल को लेकर चिंतित है। वह दूसरे दलों के बागी विधायकों को लेकर संख्या बल के हिसाब से अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि एनडीए में शामिल सभी घटक दल संख्या बल को और बढ़ाने की कोशिश में है। ताकि महागठबंधन से एनडीए के सीटों का फासला और बढ़ सके।
कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी चिंतित
विधायकों के जदयू में जाने की आशंका से ओवैसी की पार्टी एआईआईएम चिंतित बताई जाती है। पार्टी मुखिया ओवैसी अपने विधायकों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। यही वजह थी कि जीत के बाद ओवैसी ने सभी विधायकों को हैदराबाद बुला लिया था। सभी विधायकों से लगातार संपर्क कर ओवैसी उन्हें पार्टी से जोड़कर ही रखने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। उधर कांग्रेस भी अपने 19 विधायकों के साथ कई वरिष्ठ नेताओं की बैठकें कराकर उन्हें पार्टी में रहने के लिए प्रेरित कर रही है।
आईएएनएस को भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ओवैसी के विधायकों को लगता है कि जदयू में जाने पर वो मंत्री बन सकते हैं। क्योंकि बिहार में मुसलमानों की 16 प्रतिशत आबादी के बावजूद इस बार एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं बना है। सेक्युलर छवि के नीतीश कुमार ने जदयू से 11 मुसलमानों को चुनाव लड़ाया था मगर सभी हार गए। यहां तक कि नीतीश सरकार में इकलौते मुस्लिम मंत्री रहे खुर्शीद उर्फ फिरोज आलम भी चुनाव हार गए। ऐसे में ओवैसी की पार्टी से आने वाले मुस्लिम विधायक सरकार में मंत्री बन सकते हैं। जदयू के एक नेता के मुताबिक, बिहार में जदयू की मुसलमानों के बीच भी पैठ है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक मुस्लिम मंत्री की जरूरत हो सकती है। लेकिन एनडीए में एक भी मुस्लिम विधायक के न होने पर बाहर से ही चांस बनता है।
मांझी के ऑफर से कांग्रेस में भी हो सकती है टूट
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 19 सीटों पर जीत सकी है। एनडीए सहयोगी जीतनराम मांझी ने चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस विधायकों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ आने का ऑफर दिया था। दरअसल, बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच फासला सिर्फ 15 सीटों का है। एनडीए के पास बहुमत से सिर्फ 3 विधायक ज्यादा 125 की संख्या है, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व के महागठबंधन के पास 110 सीटें हैं। इस प्रकार बहुमत के 122 के आंकड़े से महागठबंधन 12 सीट दूर है। ऐसे में एनडीए के नेता संख्या बल को बढ़ाकर भविष्य में भी सरकार को ‘सेफ मोड’ में रखना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि चुनाव में जदयू 43 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही। जबकि भाजपा 74 सीटों के साथ एनडीए में सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी। ऐसे में जदयू को कम सीटों का आंकड़ा असहज करता है। यह आंकड़ा कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी के विधायकों के आने से बढ़ सकता है।
किसी दल के दो तिहाई विधायकों के टूटने पर दलबदल कानून के तहत सदस्यता रद्द नहीं होती। सूत्रों का कहना है कि ऐसे में अगर कांग्रेस और एआईआईएम से असंतुष्ट विधायक आना चाहेंगे तो जदयू दो-तिहाई संख्या होने पर ही आगे कदम उठाएगी। क्या बिहार में दूसरे दलों के विधायक आना चाहेंगे तो बहुमत से सरकार बनाने वाली एनडीए स्वीकार करेगी? इस सवाल पर भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि एनडीए के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। कांग्रेस के अंदरखाने रार मची हुई है। लेकिन भाजपा किसी विधायक के संपर्क में नहीं है। जदयू के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
महाराष्ट्र
न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक गबन के आरोपियों की संपत्ति जब्त

मुंबई: न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में मुंबई आर्थिक शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी संपत्ति जब्ती की कार्यवाही शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि गबन की रकम से प्राप्त संपत्तियों की पहचान करने के बाद उसे कुर्क कर जब्त कर लिया गया है। इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और इन आरोपियों की 21 अचल संपत्तियां पाई गई हैं, जिन्हें कुर्क करने की अनुमति दी गई है।
मुंबई शहर में 107 बीएनएसएस के तहत यह पहली कार्रवाई है जिसमें आरोपियों की संपत्ति जब्त की गई है। मुंबई एओडब्ल्यू ने कहा कि जब्त संपत्तियों से बरामद राशि का भी अनुमान लगाया जाएगा। मुंबई में हुए बैंक घोटाले के बाद ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है और आरोपियों की अन्य संपत्तियों का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है।
राजनीति
मध्य प्रदेश के विभाग चुका रहे हैं पुरानी देनदारियां : मोहन यादव

भोपाल, 3 अप्रैल। मध्य प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन सुधर रहा है और सरकार के तमाम विभाग अपनी पुरानी वर्षों से लंबित देनदारियों को चुकाने में लगे हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन के फलस्वरूप तमाम विभाग अपनी पुरानी देनदारियों को चुका रहे हैं। इससे सरकार ने बजट का जो पैमाना तय किया है, उसके अनुसार विभाग काम कर रहे हैं। दो दिन पहले ही उद्योग विभाग ने लगभग 5,225 करोड़ की धनराशि देते हुए पूरी देनदारी चुका दी है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अपनी पुरानी देनदारियों को चुका दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में औद्योगिक विकास का सरकार ने जो संकल्प लिया है, कि जो भी उद्योग हमसे जुड़ेगा और उससे जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। इसी क्रम में नए वित्तीय वर्ष, 1 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा सभी केंद्रीय कोयला कंपनियों की बकाया देनदारी का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। साथ ही हमने पावर जनरेशन कंपनी के चारों ताप विद्युत गृह द्वारा कुशल प्रबंधन के फलस्वरूप अब तक का सर्वाधिक 11.73 लाख मीट्रिक टन कोयले का भंडारण किया गया है, जिसका अग्रिम भुगतान कर दिया गया है।
इसी तरह राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में सभी विभागों की समीक्षा बैठक की। मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभागीय योजनाओं के लक्ष्य पूरा होने की जानकारी ली। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 की लक्ष्यपूर्ति के लिए दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने विजन 2047 के अंतर्गत विभागीय कार्य योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की और संकल्प पत्र में सभी विभागों से जुड़े संबंधित बिंदुओं पर चर्चा करते हुए उनकी वर्तमान स्थिति का भी आकलन किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले विषयों के क्रियान्वयन की समय-सीमा में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए, केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं मांग स्थिति की भी जानकारी ली।
अपराध
मुंबई लॉरेंस बिश्नोई गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, बिश्नोई गैंग को मुंबई क्राइम ब्रांच का झटका

मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ऑपरेशन में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के पांच शूटरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इन शूटरों के कब्जे से 5 रिवॉल्वर और 21 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। मुंबई पुलिस भी इन शूटरों से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने घटना को अंजाम देने से पहले ही हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया और घटना को टाल दिया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इन पांचों को अंधेरी इलाके से गिरफ्तार किया है। वे यहां बड़ी तोड़फोड़ की वारदात को अंजाम देने के इरादे से आए थे, लेकिन पुलिस ने उससे पहले ही वारदात को नाकाम कर दिया।
गिरफ्तार आरोपियों में विकास ठाकुर, समित दिलावर, देवेन्द्र रूपेश सक्सैना, श्रेया सुरेश यादव, विवेक गुप्ता शामिल हैं। विकास ठाकुर वर्सोवा अंधेरी के रहने वाले हैं, समित मुकेश कुमार दिलावर सोनीपत, हरियाणा के रहने वाले हैं, देवेन्द्र रूपेश सक्सेना मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, श्रेया सुरेश यादव जगदीशपुर, बिहार की रहने वाली हैं और विवेक कुमार गुप्ता रामपुर, राजस्थान के रहने वाले हैं।
उनके कब्जे से हथियार बरामद किए गए हैं और अपराध शाखा ने उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 3 और 25, धारा 55 और 61 (2) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी हथियार कहां से लाए थे।
सलमान खान की शूटिंग के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुंबई में सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मुंबई क्राइम ब्रांच की सख्त कार्रवाई के चलते गैंग की कमर टूट चुकी है और अब क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को बड़ा झटका दिया है और इसके पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अपराध शाखा मामले की आगे जांच कर रही है।
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