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Saturday,07-November-2026
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अमेजन सेलर्स को फेस्टिव सीजन में बिक्री में इजाफे की उम्मीद : सर्वे

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अमेजन ने मंगलवार को कंपनी के एक विशेष सर्वे के निष्कर्षों को साझा किया। यह सर्वेक्षण आने वाले फेस्टिव सीजन से अमेजन पर बिक्री करने वाले एसएमबी (एसएमबी) सेलर्स की उम्मीदों और इसके लिए की जाने वाली तैयारी का अनुमान लगाना शामिल है। यह अध्ययन 2000 से अधिक अमेजन सेलर्स के बीच नीएल्सन द्वारा 12-22 सितम्बर 2020 के दौरान किया गया था। पूरे भारत के 17 शहरों में अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में किये गये इस अध्ययन में दिल्ली एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ, लुधियाना, इंदौर, नागपुर, कोयम्बटूर, कोच्चि, पटना, जयपुर और राजकोट के सेलर्स शामिल थे।

खास बात यह है कि सर्वे में शामिल 98 फीसदी सेलर्स (2036) फेस्टिव सीजन के दौरान ई-कॉमर्स का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।

इस फेस्टिव सीजन से सर्वे में शामिल अमेजन सेलर्स (2001) की शीर्ष उम्मीदों के मुताबिक 89 फीसदी सेलर्स ने नए ग्राहकों तक पहुंचने की बात कही जबकि 85 फीसदी ने बिक्री में वृद्धि का उल्लेख किया। इसी तरह 74 फीसदी ने लॉकडाउन के बाद बिजनेस की रिकवरी होने की उम्मीद जताई जबकि 78 फीसदी ने प्रॉडक्ट्स की बिजिबिलिटी में वृद्धि का उल्लेख किया।

सर्वे में शामिल 29 फीसदी सेलर्स सफल फेस्टिव सीजन के लिए अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रहे हैं। उनमें से 62 प्रतिशत सेलर्स मांग में होने वाली वृद्धि को पूरा करने के लिए सीजनल हायरिंग, यानी मौसमी जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की भर्ती करने में, निवेश करने की योजना बना रहे हैं; गैर-मेट्रो शहरों में प्रतिशत अधिक है जहां 76 प्रतिशत सेलर्स ने कहा कि वे सीजनल हायरिंग में निवेश करेंगे।

इसके अलावा सीजनल हायरिंग की योजना बनाने वाले 69 प्रतिशत सेलर्स इस फेस्टिव सीजन में कम से कम 5 लोगों को काम पर रखने की बात कर रहे हैं जबकि 23 प्रतिशत सेलर्स की योजना 25 से अधिक लोगों को नियुक्त करने की है। इसी तरह 62 प्रतिशत सेलर्स कर्मचारी प्रशिक्षण में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

इसी तरह 59 प्रतिशत सेलर्स की योजना इन्वेंट्री और वेयरहाउसिंग को बढ़ाने के लिए निवेश करने की है जबकि 77 प्रतिशत की योजना मार्केटिंग संबंधी गतिविधियों में निवेश करने की है। सर्वे में शामिल 48 प्रतिशत सेलर्स फेस्टिव सीजन के दौरान अमेजन पर पहली बार बिक्री करेंगे।

इस साल फिर से फेस्टिव सीजन के दौरान बिक्री करने वाले सेलर्स में से 75 प्रतिशत सेलर्स को इस वर्ष बिक्री में वृद्धि की उम्मीद है। उनमें से 57 प्रतिशत सेलर्स को पिछले वर्ष की तुलना में इस फेस्टिव सीजन में वृद्धि की उम्मीद है। लगभग 30 प्रतिशत सेलर्स को पिछले साल के फेस्टिव सीजन की तुलना में बिजनेस में 25 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की उम्मीद है।

सर्वे के निष्कर्षो पर टिप्पणी करते हुए अमेजन इंडिया के वीपी मनीष तिवारी ने कहा कि “फेस्टिव सीजन इवेन्ट्स के लिए हमारा प्रमुख पैमानों में से एक यह है कि हमारे सेलर्स इससे कैसे लाभ उठाते हैं और इस फेस्टिव सीजन में, हमारे सेलर्स के लिए बिजनेस को ठीक करने और उसमें तेजी लाने में मदद करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। नीएल्सन रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि हमारे प्रयासों का सेलर्स और छोटे व्यवसायों की जरूरतों के साथ तालमेल बना हुआ है। जैसा कि हम नए नियमों को देखते हैं, अपने घरों के सुरक्षित माहौल में बैठे ग्राहकों की सेवा करने, पूरे भारत में ग्राहकों के व्यापक समूह तक पहुंचने के नए अवसर पैदा करने, और उन व्यवसायों के प्रॉडक्ट्स के लिए अधिक वैल्यू जनरेट करने के लिए ई-कॉमर्स सही विकल्प है।

व्यापार

कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार की फ्लैट शुरुआत, सेंसेक्स में 358 अंकों की बढ़त; आईटी शेयरों ने दिखाया दम

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पिछले दिनों की लगातार शानदार तेजी के बाद, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई तेज गिरावट के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला।

बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,310.01 से 103.65 अंक यानी 0.13 प्रतिशत चढ़कर 79,413.66 पर खुला। हालांकि कुछ ही समय बाद इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 293.95 अंक यानी 0.37 प्रतिशत गिरकर 79,016.05 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि बाद के कारोबार में बाजार ने फिर से रिकवरी की और यह 358.36 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,668.37 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद भाव 24,536.60 की तुलना में 24,538.20 पर फ्लैट खुला और कुछ ही देर में इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 148.55 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 24,388.05 के दिन के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया। हालांकि बाद के कारोबार में इसने भी रिकवरी की और 108.55 अंक या 0.44 प्रतिशत चढ़कर 24,645.15 के दिन के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया।

इस बीच, व्यापक बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टोरल आधार पर सबसे ज्यादा दबाव मेटल शेयरों पर देखने को मिला, और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.7 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.56 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। केमिकल, ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में भी 1.34 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

इसके विपरीत आईटी सेक्टर ने बाजार की धारणा को कुछ हद तक संभाला। निफ्टी आईटी करीब 2 प्रतिशत चढ़ गया। निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम, प्राइवेट बैंक और मीडिया शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बाजारों में आई भारी गिरावट का असर दुनिया के अधिकांश शेयर बाजारों पर दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। उनका कहना है कि नैस्डैक में 5.6 प्रतिशत की तेज गिरावट डेटा सेंटर निवेश में संभावित मंदी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कारोबार की विकास दर को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण आई।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तकनीकी शेयरों में आई गिरावट और एआई आधारित निवेश थीम की रफ्तार कम होने का भारतीय बाजार को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अन्य उभरते बाजारों की ओर बढ़ सकती है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक बना हुआ है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने 35,781 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। गुरुवार को उन्होंने लगातार पांचवें सत्र में 14,974 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और गुरुवार को उन्होंने 10,444 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में जारी हालिया तेजी को मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों का समर्थन मिला है। खासकर लार्जकैप शेयरों में आकर्षक मूल्यांकन के कारण निवेशकों की खरीदारी बढ़ी है, जिससे बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 91.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।

विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में वैश्विक बाजारों की अस्थिरता, कच्चे तेल की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और एफआईआई की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक कारक बने हुए हैं।

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व्यापार

ट्रंप की चुनावी हार के बाद कीमती धातुओं में जोरदार उछाल, पलक झपकते ही सोना 3,000 रुपए और चांदी 6,900 रुपए तक चढ़ी

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लगातार कई दिनों तक दबाव में रहने के बाद बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव नतीजों, कमजोर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा, जिससे कीमती धातुओं में तेज खरीदारी देखने को मिली।

घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना एक ही दिन में 2.21 प्रतिशत यानी 3,088 रुपए चढ़कर 1,42,540 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी में और अधिक तेजी देखने को मिली तथा इसका भाव 3.84 प्रतिशत यानी 6,902 रुपए बढ़कर 1,86,600 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया।

वहीं खबर लिखे जाने तक, एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 1,42,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा, तो वहीं दिसंबर वायदा चांदी 3.71 प्रतिशत की उछाल के साथ 1,86,373 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई।

बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया। चुनाव परिणामों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बढ़त हासिल की, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में नई राजनीतिक संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई।

विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को अतिरिक्त समर्थन दिया। आमतौर पर कमजोर डॉलर और कम बॉन्ड यील्ड सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों को आकर्षक बनाते हैं।

पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं, जिससे निवेशकों को उम्मीद जगी है कि केंद्रीय बैंकों के पास मौद्रिक नीति में कुछ लचीलापन दिखाने की गुंजाइश बन सकती है। सोना ऐसे वातावरण में बेहतर प्रदर्शन करता है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो कॉमेक्स में सोना 2.32 प्रतिशत चढ़कर 4,031.90 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती नजर आई, जबकि चांदी 4.10 प्रतिशत चढ़कर 51.795 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

बाजार की नजर अभी वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी बनी हुई है। रूस ने यूक्रेन और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय शांति वार्ता के लिए सहमति जताई है, जबकि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.41 लाख के आसपास पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, इसके बाद अगला रेजिस्टेंस जोन 1,43,000 से 1,43,700 रुपए पर है। नीचे की तरफ 1,40,000 रुपए के स्तर पर तत्काल सपोर्ट बना हुआ है, जबकि अगला सपोर्ट बैंड 1,37,500 रुपए से 1,38,300 रुपए पर है।

एक्सपर्ट का कहना है कि रिकवरी के बावजूद, मोमेंटम इंडिकेटर्स अभी भी काफी कमजोर हैं। आरएसआई लगभग 35 के आसपास है, जबकि एमएसीडी हिस्टोग्राम नेगेटिव बना हुआ है और लगातार बढ़ रहा है। इससे पता चलता है कि तकनीकी संरचना में अभी तक सुधार के कोई ठोस संकेत नहीं दिखे हैं।

वहीं चांदी में 1,86,000 रुपए से 1,88,000 रुपए के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस है। अगर कीमतें इस बैंड से ऊपर टिक जाती हैं, तो यह 1,94,000 रुपए से 1,96,000 रुपए के अगले रेजिस्टेंस जोन की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकता है। नीचे की तरफ, 1,78,000 रुपए से 1,80,000 रुपए का स्तर तत्काल सपोर्ट का काम करता है, और इसके बाद अगला सपोर्ट जोन 1,70,000 रुपए से 1,72,000 रुपए पर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक राजनीतिक माहौल आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।

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व्यापार

भारत की बायोइकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए तेज मंजूरियां और आसान फंडिंग जरूरी: पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की जैव अर्थव्यवस्था (बायोइकोनॉमी) को गति देने के लिए नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया तेज करने, स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण को आसान बनाने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।

‘भारत की बायोइकॉनॉमी का अवसर: नवाचार और विकास को बढ़ावा देने में स्टार्टअप्स की भूमिका’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक की अध्यक्षता करते हुए गोयल ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उद्यमशील प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर देश को वैश्विक बायोइकोनॉमी क्षेत्र में अग्रणी बनाया जा सकता है।

वाणिज्य मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि गोयल ने बैठक के दौरान सामने आए सुझावों पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा का मुख्य फोकस बायोफार्मा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए नियमों को सरल बनाना, मंजूरी प्रक्रियाओं को तेज करना, पूंजी तक पहुंच बढ़ाना और साझा बुनियादी ढांचे का विकास करना था।

डीपीआईआईटी द्वारा नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब के सहयोग से आयोजित इस बैठक में प्रतिभागियों ने एक प्रस्तावित रेगुलेटरी सैंडबॉक्स, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, वैश्विक नियामकीय मानकों के साथ बेहतर तालमेल और पेटेंट आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे उपायों पर चर्चा की। इन कदमों का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स को तेजी से विस्तार करने में मदद करना है।

बैठक में केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने साझा प्रयोगशालाओं, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल ट्रायल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बायोफार्मा स्टार्टअप्स की लागत कम हो सके और नवाचार को बढ़ावा मिले।

इस बीच, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो ने कहा कि प्रतिस्पर्धी वैश्विक बायोइकोनॉमी के निर्माण के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वहीं, नीति आयोग के सदस्य गोबर्धन दास ने अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने और वैज्ञानिक खोजों को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पादों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।

राउंडटेबल में जीवन विज्ञान क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करने, प्रयोगशाला उपकरणों और रसायनों के आयात हेतु सीमा शुल्क मंजूरियों को तेज करने तथा सरकारी योजनाओं और नियामकीय समर्थन तक पहुंच को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि नीतिगत हस्तक्षेप अधिक प्रभावी हों और क्षेत्र विशेष की चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सके।

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