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Thursday,17-September-2026
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बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामवादी हिफाजत प्रमुख शफी का निधन

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हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश के अमीर, शाह अहमद शफी का 104 वर्ष की आयु में असगर अली अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार थे और लाइफ सपोर्ट पर थे। उन्हें हाल ही में इलाज के लिए ढाका लाया गया था। बांग्लादेश के राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शुक्रवार को शफी की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया।

अपने अलग-अलग शोक संदेश में उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

अहमद शफी को जनाजे के बाद मदरसे में कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को ले जा रही एक एम्बुलेंस शुक्रवार की रात को करीब 10.20 बजे अस्पताल से उनके गांव चट्टोग्राम के लिए रवाना हो गई।

साल 2010 में हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश की स्थापना के बाद शफी सुर्खियों में आए।

हिफाजत-ए-इस्लामी प्रमुख और हतजारी मदरसा के महानिदेशक के रूप में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान शफी ने पहली बार 5 मई, 2013 को हिफाजत-ए इस्लाम के कार्यकर्ताओं की रैली से सुर्खियां बटोरीं थी। यह रैली हिंसक हो गई थी और कार्यकतार्ओं ने मोतीझील को करीब 12 घंटे तक कब्जे में रखा था, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने कार्रवाई कर उन्हें वहां से हटाया था।

राजधानी के पल्टन और मोतीझील क्षेत्र तबाही के ²श्य में तब्दील हो गए थे, वहीं हेफाजत के कार्यकर्ताओं ने संपत्ति को जला दिया था और तोड़फोड़ की थी। इसके साथ ही वे सुरक्षाकर्मियों से भी भिड़ गए थे। हिंसा में करीब 39 लोग मारे गए थे।

वह अक्सर अपने प्रवचन के दौरान अपनी भड़काऊ टिप्पणियों को लेकर खबरों में रहते थे, विशेष रूप से महिलाओं पर उनकी रूढ़िवादी टिप्पणियों के लिए वे जाने जाते थे।

उन्हें महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ और उनके नौकरी करने के खिलाफ उनके रुख के लिए जाना जाता था। साल 2013 में एक धर्मोपदेश के दौरान उन्होंने महिलाओं की तुलना इमली से की थी।

उन्होंने कहा था, “तुम महिलाओं को अपने घरों की चार दीवारी के भीतर रहना चाहिए। अपने पति के घर के अंदर बैठकर, तुम्हें अपने पति के फर्नीचर का ध्यान रखना चाहिए और अपने बच्चों का पालन और बेटों की सही परवरिश करनी चाहिए। ये तुम्हारें काम हैं। तुम्हें बाहर क्यों जाना है?”

साल 2019 में हतजारी मदरसे के छात्रों के माता-पिता को दिए गए एक उपदेश के दौरान शफी ने अभिभावकों से कहा था कि वे अपनी बेटियों को कक्षा चार या पांच से आगे पढ़ने के लिए स्कूल न भेजें।

साल 2019 में एक ‘शोकराना महफिल’ में कवमी मदरसा शिक्षा बोर्ड का नेतृत्व करने वाले शफी ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को ‘कवमी की मां’ की उपाधि दी थी।

शफी ने निधन के एक दिन पहले ही अल-जमीअतुल अहलिया दारुल उलुम मुइनुल इस्लाम मदरसा, जो हतजारी मदरसा के नाम से लोकप्रिय है उसके महानिदेशक के पद से इस्तीफा दिया था। हतजारी मदरसा में शनिवार को नमाज-ए-जनाजा का आयोजन किया जाएगा।

साल 1916 में चट्टोग्राम के रंगुनिया में जन्मे शाह अहमद शफी ने अल-जमीअतुल अरबियातुल इस्लामिया में अध्ययन किया था।

वह इस्लामिक विश्वविद्यालय दारुल उलुम देवबंद में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भारत गए थे। इसके बाद वह साल 1926 में हतजारी मदरसे से जुड़े। शफी ने अपने करियर की शुरूआत हतजारी में अल-जमीअतुल अहलिया दारुल उलुम मोइनुल इस्लाम में एक शिक्षक के रूप में की थी।

सामान्य

आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों में रुझानों का पता लगाने के लिए AIIA का राष्ट्रीय संगोष्ठी

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नई दिल्ली, 12 जुलाई। आयुष मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली, आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों में रुझानों का पता लगाने के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करेगा।

शल्यकॉन 2025, जो 13-15 जुलाई तक आयोजित होगा, सुश्रुत जयंती के शुभ अवसर पर मनाया जाएगा। 15 जुलाई को प्रतिवर्ष मनाई जाने वाली सुश्रुत जयंती, शल्य चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महान आचार्य सुश्रुत की स्मृति में मनाई जाती है।

“अपनी स्थापना के बाद से, AIIA दुनिया भर में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहा है। शल्य तंत्र विभाग द्वारा आयोजित शल्यकॉन, आधुनिक शल्य चिकित्सा प्रगति के साथ आयुर्वेदिक सिद्धांतों के एकीकरण को बढ़ावा देकर इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पहल का उद्देश्य उभरते आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सकों को एकीकृत शल्य चिकित्सा देखभाल के अभ्यास में बेहतर दक्षता और आत्मविश्वास प्रदान करना है,” AIIA की निदेशक (प्रभारी) प्रो. (डॉ.) मंजूषा राजगोपाला ने कहा।

नवाचार, एकीकरण और प्रेरणा पर केंद्रित विषय के साथ, शल्यकॉन 2025 का आयोजन राष्ट्रीय सुश्रुत संघ के सहयोग से राष्ट्रीय सुश्रुत संघ के 25वें वार्षिक सम्मेलन के सतत शैक्षणिक कार्यक्रम के एक भाग के रूप में किया जाएगा।

इस सेमिनार में सामान्य एंडोस्कोपिक सर्जरी, गुदा-मलाशय सर्जरी और यूरोसर्जिकल मामलों पर लाइव सर्जिकल प्रदर्शन होंगे।

मंत्रालय ने कहा, “पहले दिन, 10 सामान्य एंडोस्कोपिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाएँगी। दूसरे दिन 16 गुदा-मलाशय सर्जरी की लाइव सर्जिकल प्रक्रियाएँ होंगी, जो प्रतिभागियों को वास्तविक समय की सर्जिकल प्रक्रियाओं को देखने और उनसे सीखने का अवसर प्रदान करेंगी।”

शल्यकॉन 2025 परंपरा और प्रौद्योगिकी का एक गतिशील संगम होगा, जिसमें भारत और विदेश के 500 से अधिक प्रतिष्ठित विद्वान, शल्य चिकित्सक, शोधकर्ता और शिक्षाविद भाग लेंगे। यह कार्यक्रम विचारों के आदान-प्रदान, नैदानिक प्रगति को प्रदर्शित करने और आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों में उभरते रुझानों का पता लगाने में सहायक होगा।

तीन दिनों के दौरान एक विशेष पूर्ण सत्र भी आयोजित किया जाएगा जिसमें सामान्य और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, घाव प्रबंधन और पैरा-सर्जिकल तकनीक, गुदा-मलाशय सर्जरी, अस्थि-संधि मर्म चिकित्सा और सर्जरी में नवाचार जैसे क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी।

अंतिम दिन 200 से अधिक मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियाँ भी होंगी, जो चल रहे विद्वानों के संवाद और अकादमिक संवर्धन में योगदान देंगी।

मंत्रालय ने कहा कि नैदानिक प्रदर्शनों के अलावा, एक वैज्ञानिक सत्र विद्वानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को अपना काम प्रस्तुत करने और अकादमिक संवाद में शामिल होने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

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न्याय

‘आपकी बेटी आपके साथ में है’: विनेश फोगाट शंभू बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।

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भारतीय पहलवान विनेश फोगट शंभू सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं, क्योंकि उन्होंने अपना रिकॉर्ड 200वां दिन मनाया और बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया।

पेरिस 2024 ओलंपिक में पदक न मिलने के विवादास्पद फैसले के बाद संन्यास लेने वाली फोगट ने किसानों के आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया।

“मैं भाग्यशाली हूं कि मेरा जन्म एक किसान परिवार में हुआ। मैं आपको बताना चाहती हूं कि आपकी बेटी आपके साथ है। हमें अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा क्योंकि कोई और हमारे लिए नहीं आएगा।

मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि आपकी मांगें पूरी हों और अपना अधिकार लिए बिना वापस न जाएं। किसान अपने अधिकारों के लिए 200 दिनों से यहां बैठे हैं।

मैं सरकार से उनकी मांगों को पूरा करने की अपील करती हूं। यह बहुत दुखद है कि 200 दिनों से उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्हें देखकर हमें बहुत ताकत मिली।”

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राजनीति

पीएम मोदी: ’25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं’; बजट 2024 पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सराहना की।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार सातवें बजट को पेश करने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बजट 2024 से नव-मध्यम वर्ग, गरीब, गांव और किसानों को और अधिक ताकत मिलेगी।

देश के नाम अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि बजट युवाओं को असीमित अवसर प्रदान करेगा।

पिछले दस वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, इस बजट से नए मध्यम वर्ग को सशक्त बनाया जाएगा।

उन्होंने घोषणा की, ‘यह बजट युवाओं को असीमित अवसर प्रदान करेगा।’ यह बजट शिक्षा और कौशल के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा और उभरते मध्यम वर्ग को सशक्त करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि इस बजट से महिलाओं, छोटे उद्यमों और एमएसएमई को फायदा होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग अभी अपना करियर शुरू कर रहे हैं, उन्हें ‘रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना’ के माध्यम से सरकार से अपना पहला वेतन मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘सरकार ने इस बजट में जिस ‘रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना’ की घोषणा की है, उससे रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे।’

प्रधानमंत्री ने घोषणा की, ‘सरकार इस योजना के तहत उन लोगों को पहला वेतन देगी, जो अभी कार्यबल में शामिल होने की शुरुआत कर रहे हैं। प्रशिक्षुता कार्यक्रम के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों के युवा देश के प्रमुख व्यवसायों के लिए काम करने में सक्षम होंगे।’

मोदी 3.0 का पहला बजट

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट है।

लोकसभा में बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने मोदी सरकार में अपना भरोसा फिर से जताया है और इसे तीसरे कार्यकाल के लिए चुना है।

सीतारमण ने आगे कहा, “ऐसे समय में जब नीतिगत अनिश्चितता वैश्विक अर्थव्यवस्था को जकड़े हुए है, भारत की आर्थिक वृद्धि अभी भी प्रभावशाली है।”

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