राजनीति
फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने वालों को जया बच्चन ने लगाई फटकार
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पिछले तीन महीनों से चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच समाजवादी पार्टी की सदस्य जया बच्चन ने मंगलवार को राज्यसभा में फिल्म इण्डस्ट्री को बदनाम करने का मुद्दा उठाया। बच्चन ने सरकार से फिल्म उद्योग के सदस्यों को लगातार कोसे जाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों को नाम और प्रसिद्धि मिली है, उनमें से कुछ ने इसे ‘गटर’ कहा है।” उन्होंने लोगों का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें इण्डस्ट्री को इस तरह बदनाम नहीं करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “यह फिल्म उद्योग ही है जिसने कई लोगों को नाम और प्रसिद्धि दी। मुट्ठी भर लोगों द्वारा कुछ चीजों के लिए इण्डस्ट्री को लगातार बदनाम करने की प्रक्रिया चलती रही है।”
उन्होंने कहा कि इण्डस्ट्री विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को रोजगार देती है और इण्डस्ट्री के कुछ लोग तो सबसे अधिक टैक्स देने वालों में शुमार है।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन से शादी करने वाली दिग्गज अभिनेत्री जया बच्चन सोशल मीडिया और मीडिया पर हो रही टिप्पणियों से भी व्यथित हैं।
बता दें कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद से फिल्म बिरादरी में भाई-भतीजावाद, इनसाइडर-आउटसाइडर के मुद्दे पर खासी बहस चल रही है। वहीं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने इण्डस्ट्री के अपने सहयोगियों पर लगातार तीखे हमले किए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
एनआईए भर्ती 2026: इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के 57 पदों पर आवेदन जारी, 22 नवंबर अंतिम तिथि

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के आधार पर सामान्य केंद्रीय सेवा समूह ‘बी’, गैर-राजपत्रित गैर-मंत्रालयी में इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर के कुल 57 पदों को भरने के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
एनआईए की ओर से जारी 57 रिक्तियों में इंस्पेक्टर के 29 और सब इंस्पेक्टर के 28 पद शामिल हैं। इन दोनों पोस्ट के लिए ऑफलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 7 अक्टूबर से जारी है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 22 नवंबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के अंदर अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जाती है।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर दोनों पदों के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री और आपराधिक मामलों की जांच, खुफिया कार्य, ऑपरेशंस, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़े मामलों, आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण या खुफिया एजेंसियों/पुलिस या प्रवर्तन एजेंसी के विशेष खुफिया विंग में खुफिया जानकारी जुटाने के काम में दो वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
आवेदकों की अधिकतम आयु इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर दोनों पदों के लिए 56 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि यानी 22 नवंबर 2026 के आधार पर की जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों और दस्तावेजों की जांच, योग्यता, आदि के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी इंस्पेक्टर के लिए 44,900 से 1,42,400 रुपए के बीच और सब इंस्पेक्टर के लिए 35,400 से 1,12,400 रुपए के बीच के साथ 4,200 रुपए ग्रेड पे तय किया गया है। इसके अतिरिक्त कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एनआईए की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां भर्ती सेक्शन में संबंधित पोस्ट के लिए जारी अधिसूचना लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद नोटिफिकेशन में दिए गए एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकाल लें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें। संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स को आवेदन के साथ अटैच करें। इसके बाद सभी को एक लिफाफे में डालकर उसे ‘उपमहानिरीक्षक (प्रशासन), एनआईए मुख्यालय, सीजीओ कॉम्प्लेक्स के सामने, लोधी रोड, नई दिल्ली-110003’ पते पर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले डाक या अन्य के माध्यम से पहुंचा दें।
राजनीति
यूपी विधानसभा चुनाव 2027: अमरोहा जिले में पिछली बार भाजपा-सपा के बीच रहा बराबरी का मुकाबला, इस बार कौन भारी?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होने लगी हैं। अमरोहा जिले में कुल 4 विधानसभा सीटें हैं। पिछली बार 2022 में यहां जिला स्तर पर दो-दो सीटें जीतकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला बराबरी का रहा।
15 अप्रैल 1997 को मुरादाबाद से अलग करके अमरोहा जिला बनाया गया था। अमरोहा को पहले ज्योतिबा फुले नगर के नाम से जाना जाता था और जिले की स्थापना के समय तीन तहसील बनाई गईं, जिसमें अमरोहा, धनौरा और हसनपुर थीं। वर्तमान में जिले में नवीन तहसील नौगावां सादात को मिलाकर 4 तहसील हैं यानी चार विधानसभा क्षेत्र हैं।
धनौरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जहां वर्तमान में भाजपा के राजीव तरारा विधायक हैं। जिले के हसनपुर क्षेत्र से भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी वर्तमान विधायक हैं। इसके अलावा नौगावां सादात क्षेत्र का प्रतिनिधित्व समाजवादी पार्टी के समरपाल सिंह और अमरोहा सीट का प्रतिनिधित्व महबूब अली कर रहे हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में धनौरा में राजीव तरारा ने समाजवादी पार्टी के विवेक सिंह को 11 हजार से अधिक वोटों से हराया था, जहां राजीव तरारा को कुल 1,03,054 वोट मिले। वहीं सपा के विवेक सिंह के खाते में 91,629 वोट आए। बसपा से हरपाल सिंह कुल 43,974 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। यहां कांग्रेस ने भी समरपाल सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें महज 1,385 वोट मिले।
नौगावां सादात में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार समरपाल सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के देवेंद्र नागपात को साढ़े छह हजार से अधिक वोटों से हराया था। समरपाल सिंह को कुल 1,08,497 लोगों ने वोट दिया, जबकि भाजपा के देवेंद्र नागपात को 1,01,957 वोट मिले। 2022 में नौगावां सादात विधानसभा सीट पर कुल 12 उम्मीदवार थे, जिनमें बसपा के शादाब खान और कांग्रेस की रेखा रानी क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर पर रहे।
हसनपुर विधानसभा सीट पर पिछली बार भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने समाजवादी पार्टी के मुख्य गुर्जर को 22 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी। महेंद्र सिंह के पक्ष में कुल 1,20,135 वोट आए, जबकि सपा प्रत्याशी को 97,753 वोट मिले। बसपा से फिरेराम 36,150 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। पिछली बार कुल 14 उम्मीदवारों ने हसनपुर में किस्मत आजमाई थी।
वहीं, अमरोहा में समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा। सपा के महबूब अली ने पिछली बार 71 हजार से अधिक वोटों से विजय प्राप्त की थी। उन्हें कुल 1,28,735 वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी राम सिंह के खाते में कुल 57,699 वोट आए। बसपा ने मोहम्मद नावेद अयाज को टिकट दिया था, जिन्हें 34,585 लोगों ने वोट दिया। 2022 में अमरोहा सीट पर कुल 10 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे।
राष्ट्रीय समाचार
केंद्र ने ‘रिलीफ’ योजना की अवधि बढ़ाई, खाड़ी क्षेत्र में निर्यात को मिलेगी सुरक्षा

केंद्र सरकार के तहत आने वाले वाणिज्य विभाग ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण निर्यात को जोखिम सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (ईपीएम) के तहत चलाई जा रही ‘रिलीफ (निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन एवं लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप)’ योजना के घटक-II की समयसीमा 31 मार्च, 2027 तक बढ़ा दी है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
यह विस्तार पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों और खाड़ी क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों में समुद्री लॉजिस्टिक्स पर उनके प्रभाव को देखते हुए किया गया है।
इस पहल के ‘घटक-II’ का उद्देश्य निर्धारित क्षेत्रों में आगामी खेपों के लिए निर्यातकों को भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) का बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज प्रदान किया जाता है।
यह लाभ 16 मार्च, 2026 या उसके बाद ली गई व्यक्तिगत पॉलिसियों और समग्र कारोबार (होल टर्नओवर) पॉलिसियों पर उपलब्ध है। इस घटक के तहत पात्र निर्यातकों को निर्धारित पात्रता अवधि के दौरान बीमा प्रीमियम में व्यवधान से पहले के स्तर की तुलना में होने वाली बढ़ोतरी से सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इस योजना के तहत कवर की जाने वाली माल श्रेणियों में पूर्ण कंटेनर लोड (एफसीएल), आंशिक कंटेनर लोड (एलसीएल) और रेफ्रिजरेटेड यानी तापमान नियंत्रित कंटेनर शामिल हैं। हालांकि, ऊर्जा से संबंधित खेपों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
बयान के अनुसार, रिलीफ पहल के तहत कवरेज का लाभ लेने के इच्छुक निर्यातकों को ईसीजीसी के ग्राहक पोर्टल के माध्यम से दावे और सहायक दस्तावेज जमा करने होंगे। यूजर आईडी और पासवर्ड बनाने, निर्यातक के रूप में पंजीकरण पूरा करने एवं योजना के तहत दावे जमा करने के संबंध में मार्गदर्शन ईसीजीसी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध विशेष वीडियो ट्यूटोरियल के जरिए प्राप्त किया जा सकता है।
19 मार्च, 2026 को शुरू की गई रिलीफ योजना का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र और व्यापक पश्चिम एशियाई समुद्री गलियारे में व्यवधानों के कारण असाधारण रूप से बढ़ती माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम में वृद्धि और युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है।
मध्य पूर्व में तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ड्रोन और मिसाइल हमलों में जहाजों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट्स आई हैं। यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा तटीय क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कब्जा करने के उद्देश्य से हमले शुरू किए जाने के बाद युद्ध का खतरा लाल सागर क्षेत्र तक भी फैल गया है।
बयान में कहा गया कि रिलीफ योजना की अवधि बढ़ाना निर्यात क्षेत्र की जोखिमों से निपटने की क्षमता मजबूत करने, व्यापार प्रवाह बनाए रखने और लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक तथा समुद्री लॉजिस्टिक्स संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यातकों को समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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