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Tuesday,03-November-2026
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सीरियाई संघर्ष : पाकिस्तान लड़ रहा अपने आप से

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Terrorists

इससे ज्यादा विडंबना देखने को नहीं मिल सकती कि जिस समय प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान को आतंक समर्थकों और प्रमोटरों की कुख्यात सूची से बाहर निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, उसी वक्त वह अपने देश को अच्छी तरह से विकसित आतंकी दलदल में डूबते हुए पाते हैं।

इस सप्ताह ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई है कि अमेरिका और सीरिया ने 29 पाकिस्तानियों को हिरासत में लिया है, जो सीरिया सरकार के खिलाफ खूंखार इस्लामिक स्टेट (आईएस) के लिए लड़ रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि इन 29 में से नौ महिलाएं हैं। अब अमेरिका उनसे यह पता लगाने के लिए पूछताछ कर रहा है कि उन्हें सीरिया में लड़ने के लिए किसने भेजा था और क्या वे आईएस में शामिल होने से पहले अन्य आतंकी संगठनों के साथ भी संलिप्त थे।

आतंक के वित्त पोषण (टेरर फाइनेंसिंग) और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में अहम भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तान 2018 से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में है। अगर वह एफएटीएफ को यह साबित नहीं कर पाता है कि उसने अपने देश से आतंकी संगठनों को साफ किया है, तो उसे ब्लैक लिस्ट (काली सूची) में डाल दिया जाएगा।

एफएटीएफ एक अंतर-सरकारी निकाय है, जिसे जी-7 देशों द्वारा 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग से लड़ने के लिए स्थापित किया गया था। 2001 में इसने मानव तस्करी और आतंकी वित्त पोषण के मामलों को शामिल करने के साथ अपने दायरे का विस्तार किया। इसने पहली बार 2012 से 2015 तक पाकिस्तान को ग्रे सूची में शामिल किया। इसके बाद पाकिस्तान को 2018 में दूसरी बार इस सूची में डाला गया। अब वह इस सूची से बाहर आना चाहता है, क्योंकि यह उस समय वित्तीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जब उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा रही है और उस पर बाहरी ऋण का भी बोझ है, जो लगातार नई ऊंचाई पर पहुंच रहा है। पाकिस्तान बड़े पैमाने पर आतंकी तत्वों का अड्डा होने के बावजूद चीन और तुर्की इसकी मदद करते रहे हैं।

इस साल मार्च में अमेरिकी पत्रकार लिंडसे स्नेल ने अपनी एक खबर में बताया था कि पाकिस्तान तुर्की के समर्थन में सीरियाई संघर्ष में शामिल हो रहा है। सीरिया में 2011 में शुरू हुए गृहयुद्ध में विभिन्न लोग और संप्रदाय एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। स्नेल की जानकारी काफी महत्व रखती है, क्योंकि यह पहली बार था, जब पाकिस्तान ने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ लड़ने के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं।

स्नेल ने अपने ट्विटर पर संकेत दिया कि लगभग 1,400 पाकिस्तानी मर्सनेरी (दूसरे देश में लड़ाई के लिए रखे जाने वाले सिपाही) असद के खिलाफ तुर्की समर्थित मिलिशिया का समर्थन करने आए थे। स्नेल की जानकारी ने हंगामा खड़ा कर दिया था, क्योंकि पाकिस्तानी सीरिया में आ रहे थे, लेकिन वे असद के समर्थन में थे। ये पाकिस्तानी तालिबान विंटेज के शिया लड़ाके थे।

इस साल मार्च में समाचार एजेंसियों ने बताया कि 50 पाकिस्तानी शिया लड़ाके तुर्की बलों द्वारा मारे गए थे और उन्हें ईरान के पवित्र शहर कोम में दफनाया गया था। पाकिस्तानियों ने सीरिया में जिहाद में शामिल होने के लिए ईरान और इराक में शिया पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा छोड़ दी और आतंकी प्रशिक्षण लिया। इसके बाद वे असद शासन का समर्थन करने वाले ईरान समर्थित समूहों में शामिल हो गए।

सीरियाई भागीदारी के अलावा, पाकिस्तान दुनिया के लगभग हर हिस्से में आतंक में शामिल रहा है, जिसमें अमेरिका में कुख्यात सितंबर 2001 के हमले और मुंबई में 2008 के आतंकवादी हमले शामिल हैं।

हालांकि पाकिस्तान 11 सितंबर के हमलों के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध’ का सहयोगी रहा है, मगर फिर भी इसने ओसामा बिन लादेन को देश में शरण देने के दौरान एक डबल गेम खेलना जारी रखा।

पाकिस्तान आतंकवाद के निर्यात में बेहद सफल रहा है और सभी सरकारों ने इसका समर्थन किया है। नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला के हमलावर पाकिस्तानी जेल से भाग निकले, वहीं खूंखार आतंकी लादेन को पकड़ने में मदद करने वाले डॉक्टर को भी बुरा अंजाम भुगतना पड़ा।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान अपने देश में आतंक का सफाया करने का महज ढोंग करता रहा है। सच्चाई तो यह है कि वह अभी भी आतंकियों को पनाह देने के साथ ही उनके पोषित कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

रूस के साथ मौजूद भारतीय नागरिकों की वापसी का मुद्दा भारत लगातार उठा रहा: एमईए

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया क‍ि भारत रूस के साथ विभिन्न स्तरों पर उन भारतीय नागरिकों की रिहाई का मुद्दा उठाना जारी रखेगा, जो अभी भी रूस के पास है। उन्‍होंने बताया कि‍ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी20 बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की और यूरोप तथा मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “विदेश मंत्री ने जी20 बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें से एक बैठक रूस के विदेश मंत्री के साथ थी, जिसमें यूरोप और मध्य पूर्व के मौजूदा संघर्षों पर चर्चा हुई।”

विदेश मंत्री जयशंकर ने शनिवार को अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव से मुलाकात की थी। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा था कि उन्होंने रूस के विदेश मंत्री के साथ यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई दिल्ली और उससे पहले बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की थी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं भी मॉस्को गए थे और वहां लावरोव से चर्चा की थी। इसके अलावा वह इस दौरान कीव भी गए थे।

रूस के साथ मौजूद भारतीय नागरिकों की वापसी के बारे में रणधीर जायसवाल ने कहा, “जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूं, यह ऐसा मुद्दा है जिसे हम लगातार विभिन्न स्तरों पर रूसी पक्ष के साथ उठा रहे हैं।”

पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 259 भारतीय नागरिकों की भर्ती रूसी सेना में हुई थी। इनमें से 139 लोगों को भारत सरकार के प्रयासों से सेवा से मुक्त कराकर वापस भारत लाया जा चुका है, जबकि 69 अन्य भारतीयों की वापसी को लेकर मॉस्को के साथ बातचीत जारी है।

मंत्रालय ने कहा कि वह यह नहीं बता सकता कि इनमें से कितने लोगों ने रूसी नागरिकता ले ली है, क्योंकि उसके रिकॉर्ड केवल भारतीय नागरिकों से संबंधित हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत से व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का नुकसान: रिपोर्ट

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भारत के साथ वर्ष 2019 से व्यापारिक संबंध निलंबित होने के कारण पाकिस्तान को अनुमानित 40 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत से आयात बंद होने के बाद पाकिस्तानी कारोबारियों को दूसरे और दूरस्थ देशों से सामान मंगाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी वृद्धि हुई है। पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष ने यह जानकारी दी।

कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, काउंसिल के अध्यक्ष नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के चलते वाणिज्यिक संबंध बाधित हुए। इसका सीधा असर पाकिस्तान के कारोबार और उद्योगों पर पड़ा है। भारत से पहले जिन वस्तुओं का आयात आसानी से हो जाता था, अब उन्हें दूसरे देशों से मंगाने में अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

कसूरी ने बताया कि पाकिस्तान का दवा उद्योग पहले भारत से मिलने वाले कच्चे माल पर काफी हद तक निर्भर था। उनके अनुमान के मुताबिक, भारत से आयात दोबारा शुरू होने पर पाकिस्तान को हर साल 2 से 3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।

उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर कपास उत्पादन में गिरावट के कारण पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग पर भी अतिरिक्त 5 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। कपड़ा मिलों को अब ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कपास मंगानी पड़ रही है। वहीं, कपास उत्पादन वाले पारंपरिक क्षेत्रों के किसान तेजी से गन्ने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यह संकट और गंभीर हो सकता है।

कसूरी के मुताबिक, पाकिस्तान भारत की पर्याप्त उत्पादन क्षमता के बावजूद चीनी, उर्वरक, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा और इस्पात, सब्जियां तथा भारी मशीनरी जैसी वस्तुएं दूरस्थ बाजारों से आयात कर रहा है।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बहाल होने से परिवहन लागत कम हो सकती है और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार आ सकता है। भारत की तेल रिफाइनरियां भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के अधिक नजदीक हैं, इसलिए भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात सस्ता पड़ सकता है। इसके अलावा, भारतीय कृषि और औद्योगिक उत्पादों की उपलब्धता से पाकिस्तान के कई उद्योगों की उत्पादन लागत भी घट सकती है।

कसूरी ने कहा कि व्यापारिक संबंधों के निलंबन का असर पर्यटन पर भी पड़ा है। पाकिस्तान आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में बड़ी कमी आई है। इनमें धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ अपने पैतृक घरों और गांवों को देखने आने वाले लोग भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों की नींव बन सकते हैं।

कसूरी ने क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का उदाहरण देते हुए श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत की ओर से दी गई वित्तीय सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में क्षेत्रीय सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

अगर डेमोक्रेट्स जीते तो मैं बन जाऊंगा ‘मिस्टर वीटो’ : ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) में डेमोक्रेट्स कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो वह भविष्य में उनकी ओर से लाए गए किसी भी कानून को वीटो (अधिकार का इस्तेमाल कर रोकना) कर देंगे।

सोमवार को जारी ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ के पॉडकास्ट “पॉड फोर्स वन” में मिरांडा डिवाइन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे। लेकिन अगर हम नहीं जीते, तो मैं हर चीज को वीटो कर दूंगा। मैं बस वीटो ही करता रहूंगा।”

रविवार को प्रसारित एक प्रीव्यू क्लिप में ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं ‘मिस्टर वीटो’ बन जाऊंगा।” उन्होंने कहा कि एक-दो महीने तक लगातार वीटो करने के बाद, डेमोक्रेट्स “खुद चलकर आएंगे और एक समझौता करेंगे”।

तीसरे कार्यकाल के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “अगर मुझे मौका मिलता, तो मैं फिर से चुनाव लड़ना पसंद करता, लेकिन संविधान की भाषा बहुत सख्त है। मैं जरूर लड़ना चाहता। हाल ही में एक पोल हुआ था जिसमें मैं बाकी सभी से काफी आगे था। मैं चुनाव लड़ना पसंद करता, लेकिन कोई बात नहीं।”

अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन कहता है कि कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति नहीं चुना जा सकता। 80 ​​वर्षीय ट्रंप ने 2016 और 2024 में राष्ट्रपति पद जीता था।

उन्होंने कहा, “हमारे पास अभी दो साल से ज्यादा का समय बचा है। यह काफी लंबा समय होता है। इतने समय में बहुत कुछ किया जा सकता है, और आपने देखा ही है कि हमने अब तक क्या काम किया है।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस जीतने के बाद उनके लिए काम करने वाले लोगों के खिलाफ जांच शुरू करते हैं, तो वह उन लोगों को पहले से ही ‘माफी’ (पार्डन) देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ी, तो मैं बिल्कुल ऐसा करूंगा… मुझे इसके बारे में सोचने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं बस कर दूंगा। मैंने जे6 (6 जनवरी की घटना) के मामले में भी ऐसा ही किया था।”

उन्होंने उन पोल (सर्वे) को खारिज कर दिया जिनमें डेमोक्रेट्स को आगे दिखाया गया है। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि इन पोल्स में धांधली हुई है। मुझे तो लगता है कि कई पोल करने वाली एजेंसियां ​​तो लोगों को सर्वे के लिए बाहर भेजती ही नहीं हैं। हो सकता है कि वे रिपब्लिकनों के बीच पोल न करते हों, लेकिन मुझे लगता है कि हम काफी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। मैं रैलियों के आधार पर ऐसा कह रहा हूं।”

ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर डेमोक्रेट्स हाउस, सीनेट और बाद में व्हाइट हाउस जीत जाते हैं, तो “हमारा देश खत्म हो जाएगा”।

ज्यादातर पब्लिक पोल में हाउस जीतने के मामले में डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी दिख रहा है। रविवार को जारी न्यू यॉर्क टाइम्स/सिएना के अंतिम पोल के अनुसार, कंसास, ओहियो, मेन, टेक्सास और मिशिगन में डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार 5 से 11 अंकों से आगे चल रहे हैं।

संविधान के तहत, कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को केवल तभी खारिज कर सकती है, जब हाउस और सीनेट दोनों में दो-तिहाई वोट मिलें। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 10 बिलों पर वीटो लगाया था।

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