राजनीति
पीएम ने अंडमान-निकोबार को एएफसी कनेक्टीवीटी का तोहफा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर को जोड़ने वाली एक पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) का उद्घाटन किया। इससे भारत के अन्य हिस्सों की तरह अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह को भी तेज और भरोसेमंद मोबाइल व लैंडलाइन टेलीकॉम सर्विसेज की सुविधा मिल पाएगी। पीएम मोदी ने कहा, “यह ऑप्टिकल फाइबर केबल परियोजना स्वतंत्रता दिवस से पहले अंडमान के लोगों के लिए एक तोहफा है। यह जिंदगी को आसानी से जी पाने की हमारी प्रतिबद्धता का एक प्रतीक है। ऑनलाइन कक्षाएं, पर्यटन, बैंकिंग, खरीदारी, या टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का लाभ अब अंडमान और निकोबार के हजारों परिवारों को मिलेगी।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यटकों को भी इस सुविधा का काफी लाभ मिलेगा क्योंकि बेहतर नेट कनेक्टिविटी किसी भी पर्यटन स्थल की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या का अब समाधान कर दिया गया है। इसके अलावा, सड़क, वायु और पानी के माध्यम से भी फिजिकल कनेक्टिविटी को सशक्त बनाया जा रहा है।”
पीएम ने आगे यह भी बताया कि इस परियोजना से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, तेज और भरोसेमंद मोबाइल व लैंडलाइन दूरसंचार सेवाओं की सुविधा मिलेगी, जिसके बदले में स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और टेली-शिक्षा सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी।
यह परियोजना संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के तहत भारत सरकार द्वारा सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि के माध्यम से वित्त पोषित है।
लगभग 1,224 करोड़ रुपये की लागत से करीब 2,300 किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई है।
यह सबमरीन केबल पोर्ट ब्लेयर को स्वराज द्वीप, लिटिल अंडमान, कार निकोबार, कामोर्टा, ग्रेट निकोबार, लॉन्ग आइलैंड और रंगट से भी जोड़ेगा।
इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री ने 30 दिसंबर, 2018 को पोर्ट ब्लेयर में रखी थी।
इस सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल लिंक से चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर के बीच 2 गुना 200 प्रति सेकेंड गिगाबाइट्स (जीबीपीएस) की रफ्तार से डेटा का आदान-प्रदान हो सकेगा, जबकि पोर्ट ब्लेयर और दूसरे द्वीपों के बीच इसकी गति 2 गुना 100 जीबीपीएस रहेगी।
इन द्वीपों में भरोसेमंद, तेज और मजबूत ब्रॉडबैंड और टेलीकॉम सर्विसेज के इस प्रावधान से उपभोक्ताओं के ²ष्टिकोण के साथ-साथ यह स्ट्रैटेजिक और गवर्नेंस कारणों से भी अहम है।
4 जी मोबाइल सेवाएं, जो उपग्रह के माध्यम से प्रदान की गई सीमित बैकहॉल बैंडविड्थ के कारण बाधित थीं, उसमें भी इसकी मदद से अब एक बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
राजनीति
इंसाफ रैली में राहुल गांधी बोले-‘पंजाब में ऐसी सरकार चाहिए, जो जनता के लिए काम करे’

लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब में ‘इंसाफ रैली’ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और पंजाब की ‘आप’ सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए जो यहां की जनता के लिए काम करे।
राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब की सरकार दिल्ली से नहीं चलाई जा सकती। कांग्रेस पार्टी जब सरकार में होती है तो यहां सरकार पंजाब से ही चलाई जाती है। हमारा मुख्यमंत्री पंजाब का मुख्यमंत्री होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकार में पंजाब को न हिंदुस्तान का गृह मंत्री चलाता है और न ही दिल्ली का पूर्व मुख्यमंत्री चलाता है। आज दिल्ली से पंजाब की सरकार चलाई जा रही है। आधी लगाम अमित शाह ने और आधी केजरीवाल ने पकड़ रखी है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप के धमकाने पर मोदी ने 5 मिनट के अंदर यूएस डील साइन कर दी। इस बारे में कैबिनेट तक को जानकारी नहीं दी गई और न ही किसी ब्यूरोक्रेट को बताया गया। मोदी ने हिंदुस्तान के किसानों और एमएसएमई का डेटा ट्रंप के हवाले कर दिया।
राहुल ने कहा कि अमित शाह लॉ एंड ऑर्डर की बात करते हैं लेकिन पूरा देश जानता है, उन्होंने जेल में गैंगस्टर्स पाल रखे हैं। अमित शाह बताएं कि मणिपुर में क्या स्थिति है क्योंकि वहां की कानून व्यवस्था के चलते नरेंद्र मोदी मणिपुर भी नहीं जा सकते।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को नशे में झोंकने वाली ‘आप’ सरकार को माफ नहीं किया जा सकता। प्रदेश की जनता इन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता जरूर दिखाएगी। उन्होंने कहा कि भगवंत मान जब सांसद थे तो हमारे पास बैठकर चुटकुले सुनाते थे। भगवंत मान का शराब पीना उनका व्यक्तिगत मामला है लेकिन अगर पंजाब नशे से लड़ना चाहता है, तो यहां का मुख्यमंत्री हर शाम नशा नहीं कर सकता।
राहुल ने कहा कि पंजाब में नशा सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां ‘आप’ सरकार बनी और पंजाब के लोगों ने उनमें अपना भरोसा दिखाया। ‘आप’ सरकार का वादा था कि हम पंजाब से नशा मिटा देंगे। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि इस सरकार ने पंजाब के किस कोने से नशा मिटा दिया क्योंकि सच यही है कि ये लोग नशा नहीं हटा सकते।
राहुल गांधी ने गायक सिद्धू मूसेवाला को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सिद्धू मूसेवाला एक डायनामिक और टैलेंटेड युवा थे। मैं जब पहली बार उससे मिला, तब मैं उसे जानता नहीं था। मुझे सिर्फ ये बताया गया था कि वो एक अच्छा लड़का है, म्यूजिशियन है और कांग्रेस में आना चाहता है।
उन्होंने कहा कि जब मैंने उसका गाना 295 सुना, तब जाना कि पंजाब का एक बेहतरीन म्यूजिशियन राजनीति में आ रहा है। वो पंजाब के लिए बड़े काम कर सकते थे क्योंकि उसके अंदर पंजाब की आवाज थी, जिसे वो अपने गानों के जरिए दुनिया के सामने रखता था। इस बीच सिद्धू को धमकियां मिलने लगी थीं लेकिन फिर भी उसकी सिक्योरिटी हटा दी गई और एक दिन सबके सामने दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी गई। जो सिद्धू मूसेवाला के साथ हुआ, वो पंजाब में फैशन बन चुका है। जिस सोच ने सिद्धू मूसेवाला को मार डाला, वही सोच आज पंजाब के हर कोने में घूम रही है।
अंत में राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब के भाइयों और बहनों, आप सभी पंजाब में ऐसी सरकार बनाइए जो आपके लिए काम करे। ऐसी सरकार बनाइए जो नशा खत्म करे, एमएसएमई तैयार करे, युवाओं को रोजगार दे और किसानों की रक्षा करे। आप सब पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाइए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जयपुर की बेटी पिया दांडिया ने जीती फ्लोरिडा सीट, संसद पहुंचने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला

राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले अप्रवासी भारतीय माता-पिता की बेटी पिया दांडिया ने मंगलवार को हुए फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल कर ली है। डेमोक्रेटिक पार्टी की पिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं। उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।
दांडिया ने रिपब्लिकन पार्टी के कारोबारी उम्मीदवार केसी असकर को पराजित किया। डिसीजन डेस्क मुख्यालय और सीबीएस न्यूज के अनुमानों के मुताबिक, उन्होंने यह मुकाबला अपने नाम किया। एनबीसी न्यूज ने भी उन्हें इस सीट का संभावित विजेता घोषित किया। करीब 99 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के बाद दांडिया लगभग 52 प्रतिशत वोट के साथ आगे थीं, जबकि असकर को करीब 48 प्रतिशत मत मिले। एनबीसी न्यूज के अनुसार, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में इस सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में करीब 14 प्रतिशत का रुझान बदला।
पाम बीच काउंटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं दांडिया का बचपन जुपिटर में बीता। उनके माता-पिता 1980 के दशक में राजस्थान के जयपुर से अमेरिका पहुंचे थे और यहीं बस गए। अमेरिका आने के बाद उनके पिता डॉ. रोहित दांडिया ने बतौर डॉक्टर सेवाएं जारी रखीं, जबकि उनकी मां ने 40 वर्ष की उम्र में जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की। इस स्कूल की शुरुआत भी मुख्य रूप से पिया की शिक्षा को ध्यान में रखकर की गई थी।
दांडिया का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े माहौल में हुआ। उनके माता-पिता बचपन में उन्हें भारत भेजते थे, ताकि वह अपने चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के साथ समय बिता सकें और अपनी जड़ों को समझ सकें।
अगस्त 2025 में न्यू इंडिया अब्रॉड को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था, “मेरे माता-पिता बहुत छोटी उम्र से ही मुझे अकेले भारत भेजते थे, ताकि मैं अपने भाई-बहनों के साथ समय बिता सकूं। ये यात्राएं मेरे जीवन को बदलने वाली साबित हुईं और मेरी पहचान को आकार देने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनसे मुझे समझने का मौका मिला कि अलग-अलग लोकतंत्र किस तरह काम करते हैं और दुनिया में असमानता किस तरह मौजूद है।”
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गर्मी की छुट्टी दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने में बिताई। वह आशा कोऑपरेटिव सोसायटी के साथ जुड़ी थीं और सात से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों को पढ़ाती थीं।
इस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा था, “वंचित बच्चों को पढ़ाते हुए मैंने सीखा कि लोगों के बीच वास्तव में अंतर उनकी क्षमताओं का नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का होता है जिनमें उन्हें जीवन बिताना पड़ता है।”
2025 में इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड की ओर से समर्थन मिलने पर दांडिया ने अपने राजनीतिक सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, “मेरा जन्म और पालन-पोषण इसी क्षेत्र में हुआ। मेरे माता-पिता अमेरिकी सपने को पूरा करने की उम्मीद लेकर इस देश आए थे। मैंने अपना करियर यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित किया है कि यह सपना अधिक से अधिक परिवारों की पहुंच में हो।”
दांडिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से गवर्नमेंट विषय की पढ़ाई की और बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उन्होंने बोस्टन में ‘टीच फॉर अमेरिका’ कार्यक्रम के तहत अध्यापन किया। इसके बाद महज 28 वर्ष की उम्र में वह न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं।
उनके चुनाव अभियान के अनुसार, इस स्कूल के करीब 86 प्रतिशत विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से आते थे। इसके बावजूद स्कूल के सभी स्नातक विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश मिला।
उन्होंने न्यू इंडिया अब्रॉड से कहा था, “मेरे स्कूल के करीब 86 प्रतिशत विद्यार्थी गरीबी में जीवन बिता रहे थे। लेकिन हमने उन्हें बेहतर भविष्य का भरोसा दिया था। हमने वादा किया था कि यदि वे हमारे स्कूल में पढ़ेंगे तो उनमें से 100 प्रतिशत को कॉलेज में दाखिला मिलेगा।”
वर्ष 2020 में दांडिया को व्हाइट हाउस फेलो चुना गया था। इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस की घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। बाद में उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों का नेतृत्व किया। इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने उन्हें राज्य की पी-20 परिषद में भी नियुक्त किया था।
चुनावी राजनीति में यह उनका पहला प्रयास था। शुरुआत में उन्होंने फ्लोरिडा के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था, जहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मास्ट से होना था। हालांकि, फ्लोरिडा में मध्यावधि परिसीमन के बाद उन्होंने 22वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। 18 अगस्त को उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव जीता।
फ्लोरिडा पॉलिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता पंजीकरण के लिहाज से यह क्षेत्र रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में माना जाता है। यहां करीब 1.85 लाख रिपब्लिकन, 1.46 लाख डेमोक्रेटिक और 1.50 लाख अन्य राजनीतिक संबद्धता वाले मतदाता हैं।
अपने चुनाव प्रचार में दांडिया ने महंगाई, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बंदूक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। फ्लोरिडा पॉलिटिक्स से बातचीत में उन्होंने कहा था, “दक्षिण फ्लोरिडा के लोग बढ़ती लागत और वाशिंगटन से निकलने वाली दिखावटी राजनीति से तंग आ चुके हैं।”
इस चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच भारी आर्थिक मुकाबला भी देखने को मिला। 14 अक्टूबर तक दांडिया के चुनाव अभियान को करीब 46 लाख डॉलर का चंदा मिला था, जबकि असकर ने लगभग 74 लाख डॉलर जुटाए थे। हालांकि, असकर की इस राशि का बड़ा हिस्सा उनके अपने चुनाव अभियान को दिए गए कर्ज से आया था। संघीय चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने करीब 68 लाख डॉलर स्वयं अपने अभियान में लगाए थे।
फेडरल इलेक्शन कमीशन के दस्तावेजों के मुताबिक, मैगा इंक से वित्त पोषित सुपर पीएसी ‘नो गोइंग बैक पीएसी’ ने 24 अक्टूबर तक दांडिया के खिलाफ करीब 65 लाख डॉलर खर्च किए थे। वहीं, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले प्रमुख सुपर पीएसी ‘हाउस मेजॉरिटी पीएसी’ ने असकर के खिलाफ करीब 79 लाख डॉलर खर्च किए।
दांडिया को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड और सर्व अमेरिका पीएसी के अलावा वेलिंगटन के रिपब्लिकन मेयर माइकल नेपोलियोन का भी समर्थन मिला था। नेपोलियोन ने कहा था, “मैं हमेशा मानता रहा हूं कि पार्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है और पिया ने मेरा सम्मान तथा समर्थन हासिल किया है।”
पूर्व अमेरिकी परिवहन मंत्री पीट बटिगिएग ने 26 अक्टूबर को उनके समर्थन में चुनाव प्रचार भी किया था।
डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी ने एक्स पर दांडिया की जीत और उनके चुनाव प्रचार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिण फ्लोरिडा के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत का संकट दूर करना तथा हर व्यक्ति को अमेरिकी सपना पूरा करने का अवसर देना शामिल था।
भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी उनकी जीत पर बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस का चुनाव जीतने के लिए पिया दांडिया को बधाई! मैं सदन में तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला का स्वागत करने को लेकर बेहद उत्साहित हूं।”
दांडिया पाम बीच गार्डन्स में अपने पति नवनीत अलग और बेटे साहिब के साथ रहती हैं।
उनकी जीत के साथ अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनौपचारिक समूह ‘समोसा कॉकस’ की मौजूदगी भी बरकरार रहेगी।
राजनीति
पीएम मोदी ने शरद पवार को फोन कर जाना हाल, स्वास्थ्य पर चर्चा से महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एनसीपी(एसपी) अध्यक्ष शरद पवार को फोन किया और उनका हालचाल पूछा। इस बात की पुष्टि शरद पवार के पारिवारिक मित्र और करीबी सहयोगी विट्ठल मनियार ने की है। हालांकि, प्रधानमंत्री के इस फोन कॉल ने महाराष्ट्र में राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।
अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए मनियार ने बताया कि पीएम मोदी ने वरिष्ठ नेता से आग्रह किया कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और आराम करें।
पीएम मोदी ने शरद पवार से कहा, “सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे। आप अपनी सेहत का ध्यान रखें और आराम करें। अपना आशीर्वाद हम पर बनाए रखें।”
पीएम मोदी के फोन कॉल के बाद पवार के अस्पताल में भर्ती होने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया। पीएम मोदी ने सुबह-सुबह फोन करके शरद पवार का हाल-चाल पूछा था।
पवार ने फोन करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे आराम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप सभी के रहते मुझे देश की कोई चिंता नहीं है।”
दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत ने महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को लेकर मीडिया में फिर से अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि उनके करीबी सहयोगियों का कहना है कि यह केवल पवार की सेहत के बारे में पूछा गया एक शिष्टाचार भरा कॉल था।
मनियार ने पुष्टि की कि वरिष्ठ नेता की हालत स्थिर है और कोई गंभीर समस्या नहीं है। “उनकी सेहत काफी अच्छी है; कोई गंभीर बात नहीं है। दो दिन पहले उन्हें खांसी और सीने में जकड़न (कंजेशन) की शिकायत थी, जिसके चलते उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। वे अपनी सेहत को लेकर हमेशा बहुत सतर्क रहते हैं, इसलिए वे रूटीन चेक-अप के लिए आए थे।”
पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में रूटीन मेडिकल चेक-अप और सीने की जकड़न व थकान के इलाज के बाद पवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वे आराम करने के लिए मुंबई स्थित अपने आवास ‘सिल्वर ओक’ चले गए हैं। डॉक्टरों ने उन्हें अपनी यात्राओं को सीमित करने, ज्यादा भागदौड़ न करने और खान-पान के सख्त नियमों का पालन करने की सलाह दी है।
डॉक्टरों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में फिर से शामिल होने से पहले कम से कम 2 से 4 दिन तक पूरा आराम करने की सलाह दी है। शरद पवार अपनी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के साथ सीधे दक्षिण मुंबई स्थित अपने घर चले गए। आराम करने के दौरान वे अपनी निजी मेडिकल टीम की देखरेख में रहेंगे।
इससे पहले, सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “बाबा अब काफी बेहतर हैं और हम मुंबई जा रहे हैं। रूबी हॉल की पूरी टीम का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने उनका इतना अच्छा ख्याल रखा। आप सभी की शुभकामनाओं के लिए मैं तहे दिल से आभारी हूं।”
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