अंतरराष्ट्रीय
आईपीएल-13 : मुंबई इंडियंस खिलाड़ी 5 बार कोरोना टेस्ट से गुजरेंगे यूएई जाने से पहले
आईपीएल की मौजूदा विजेता मुंबई इंडियंस के खिलाड़ी एक जगह एकत्रित होना शुरू हो गए हैं। कई घरेलू खिलाड़ी मुंबई आ गए हैं और कुछ अगले सप्ताह तक आ जाएंगे। भारतीय स्टार भी अगले सात-आठ दिन में टीम के साथ जुड़ जाएंगे।
मुंबई इंडियंस के एक अधिकारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि खिलाड़ियों का आना शुरू हो गया है और इस तरह से सख्त नियम बनाए गए हैं कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई कोरोनावायरस से संक्रमित न हो।
उन्होंने कहा, “घरेलू खिलाड़ियों का आना शुरू हो गया है और इन सभी को 14 दिन क्वारंटीन के लिए भेज दिया गया है। उन्हें बाहर तब ही आना होगा जब उनका कोविड-19 टेस्ट कराया जाएगा। इसके अलावा सभी तरह की सुविधाएं कमरे के अंदर ही दी जाएंगी।”
अधिकारी ने बताया, “भारतीय खिलाड़ीयों के भी जल्दी आने की संभावना है और उन्हें भी क्वारंटीन के नियम से गुजरना होगा। एक बार जब खिलाड़ी का क्वारंटीन समय खत्म होगा वो मैदान पर ट्रेनिंग शुरू कर सकता है।”
कोविड-19 के टेस्ट को लेकर जब अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाने से पहले खिलाड़ियों के पांच कोविड-19 टेस्ट होंगे।
उन्होंने कहा, “हमने खिलाड़ियों से कहा कि वह मुंबई आने से पहले अपने-अपने शहरों में दो राउंड कोविड-19 टेस्ट कराएं। और फिर हम तीन राउंड के टेस्ट कराएंगे जो हमें लगता है कि काफी होंगे। एक या दो मामले ऐसे भी हो सकते हैं कि जहां सही सुविधाएं न हों और खिलाड़ी एक टेस्ट ही करा पाए, लेकिन हम कुल मिलाकर आईपीएल के लिए यूएई रवाना होने से पहले पांच राउंड के कोविड-19 टेस्ट कराएंगे, खिलाड़ियों के भी स्टाफ के भी।”
अधिकारी से जब मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मुश्किल समय है और फ्रेंचाइजी का मानना है कि बीसीसीआई के साथ काम करना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “हम बीसीसीआई की एसओपी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हम समझते हैं कि यह मुश्किल समय है और बोर्ड पर पहले से ही काफी दबाव है। हमने भी अपना रोडमैप बना लिया कि हम टूर्नामेंट में किस एप्रोच के साथ जाएंगे और इसे बीसीसीआई की एसओपी के साथ मिलाकर लागू करेंगे, जो हमे अगले कुछ दिनों में मिल जाएगी। धैर्य ही कुंजी है क्योंकि इस तरह की चीज के लिए कोई भी तैयार नहीं था।”
यूएई रवाना होने के सवाल पर अधिकारी ने कहा, “देखते हैं, शायद 21 या 22 अगस्त तक। अंतिम तारीख अभी तय नहीं गई है। आईपीएल गवनिर्ंग काउंसिल के साथ होने वाली बैठक के बात स्थिति साफ हो जाएगी।”
अंतरराष्ट्रीय
इस्लामाबाद में सन्नाटा, बातचीत की आहट! लेकिन भरोसे पर सवाल बरकरार

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : “ईरान की सभ्यता को पूरी तरह से खत्म करने” की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी मध्यस्थता का जिक्र करते हुए सीजफायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये संघर्ष विराम अगले 2 हफ्तों तक जारी रहेगा।
इसके बाद लगा कि हालात सामान्य होंगे। पूरी दुनिया ने प्रसन्नता जाहिर की। पाकिस्तान फूला नहीं समाया, लेकिन इसके बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है। इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था।
इस सबके बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है। सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है। वजह है ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन, जो एक बेहद संवेदनशील और अहम कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंचने वाला है।
एक अस्थायी संघर्षविराम के बाद शुरू हो रही इस वार्ता से उम्मीद तो है, लेकिन उसके सफल होने को लेकर संशय भी उतना ही गहरा है। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसे उसकी कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
शहर में लागू सुरक्षा इंतजाम इस बात का संकेत हैं कि इस वार्ता को कितना संवेदनशील माना जा रहा है। खासकर डिप्लोमैटिक एन्क्लेव और सरकारी परिसरों के आसपास कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे या विरोध को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है। पिछले अनुभवों और बार-बार संघर्षविराम उल्लंघनों के आरोप ने इस अविश्वास को और गहरा किया है।
बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां बंद सड़कों और कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की एक मुश्किल कोशिश जारी है।
आशंका इसलिए भी क्योंकि ईरानी संसद के स्पीकर एमबी घालिबाफ ने 10 में से तीन शर्तों के हनन का आरोप यूएस पर लगाया, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में ईरान के एम्बेसडर, रेजा अमीरी मोगादम, ने एक्स पर एक पोस्ट डिलीट कर दी, जिसमें कहा था कि ईरान का एक डेलीगेशन गुरुवार रात यूएस के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने वाला है।
मोगादम ने पोस्ट किया था: “इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी पब्लिक ओपिनियन पर शक के बावजूद… ईरान के बताए 10 पॉइंट्स पर सीरियस बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने सीजफायर के तीन बिंदुओं के उल्लंघन का किया दावा, दोनों पक्षों में इन 10 बिंदुओं पर बनी थी सहमति

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए सीजफायर को लेकर सहमति बनी है। दोनों पक्ष सीजफायर करने के लिए 10 बिंदुओं पर राजी हुए। इस बीच ईरान ने आरोप लगाया है कि तीन प्वाइंट का उल्लंघन हुआ है। आइए जानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच किन 10 बिंदुओं पर सहमति बनी।
सीएनबीसी न्यूज के अनुसार, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बुधवार को अमेरिका पर दो हफ्ते के सीजफायर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया। गालिबफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, “अमेरिका पर हमारा जो गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है, वह उसके सभी तरह के कमिटमेंट्स के बार-बार उल्लंघन से पैदा हुआ है। अफसोस की बात है कि अमेरिका के इस पैटर्न को एक बार फिर दोहराया गया है।
गालिबफ ने कहा कि ईरान के 10-पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव के तीन हिस्सों का उल्लंघन किया गया है। उल्लंघन में इजरायल का लेबनान पर लगातार हमले, ईरानी एयरस्पेस में एक ड्रोन का घुसना और इस्लामिक रिपब्लिक के यूरेनियम को संवर्धन करने के अधिकार को मना करना शामिल है।
ईरान और अमेरिका के बीच इन 10 प्वाइंट पर बनी बात:
दोनों पक्षों द्वारा गैर-आक्रामकता की गारंटी और ईरान के यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करना
ईरान की सेना के साथ तालमेल बैठाकर होर्मुज स्ट्रेट से नियंत्रित मार्ग
लेबनान में हिज्बुल्लाह समूह के खिलाफ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना
इलाके के सभी बेस और डिप्लॉयमेंट पॉइंट से अमेरिकी सुरक्षा बल को हटाना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना
होर्मुज स्ट्रेट में एक सुरक्षित ट्रांजिट प्रोटोकॉल बनाना, जो तय शर्तों के तहत ईरानी दबदबे की गारंटी दे
संघर्ष के दौरान अनुमान के मुताबिक ईरान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई
ईरान के खिलाफ सभी मुख्य और दूसरे बैन हटाना
विदेश में सभी ब्लॉक ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना
इन सभी शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाइंडिंग प्रस्ताव के जरिए मंजूरी देना, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आ जाएं
ईरान का डेलीगेशन अमेरिका के साथ बातचीत के लिए गुरुवार रात इस्लामाबाद पहुंचेगा। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, “पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमैटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद, ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित गंभीर बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद पहुंच रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
बलूचिस्तान में पाकिस्तान का ड्रोन अटैक, एक की मौत और कई घायल

क्वेटा, 9 अप्रैल : पाकिस्तानी ड्रोन हमले में बलूचिस्तान के एक युवक की मौत हो गई और कई महिलाएं घायल हो गईं। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को इसे रिपोर्ट किया। घटना मस्तंग जिले की बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए, ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने मस्तंग के कुर्दगाप इलाके में एक घर पर ड्रोन हमला किया, जिससे अब्दुल समद नाम का शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया। घर में मौजूद महिलाएं भी घायल हुईं।
अब्दुल की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई। हमले में घायल महिलाओं को स्थानीय अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद, बेहतर इलाज के लिए क्वेटा भेज दिया गया।
हाल के दिनों में, इस इलाके में बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए हमलों में पाकिस्तानी सेना और स्पेशल सर्विस ग्रुप के कई जवान मारे गए थे, जिसके बाद सेना ने एक बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के ड्रोन हमलों से आम नागरिक हताहत हुए हैं; ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं।
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग सहित कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, और साथ ही बलूच राजनीतिक दलों ने इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। ये संगठन सरकार से बलूचिस्तान में ऐसी और घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की अपील करते रहे हैं।
पिछले हफ्ते ही बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए मोर्टार में एक बलूच परिवार के तीन सदस्य मारे गए थे, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बताया कि यह दुखद घटना 31 मार्च की शाम को अवारान जिले के बुंगुल बाजार इलाके में हुई थी।
संगठन ने बताया कि कथित तौर पर बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा पास के एक सैन्य शिविर पर हमला किए जाने के बाद, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आम आबादी वाले इलाकों के करीब मोर्टार दागे और कई भारी हथियारों का इस्तेमाल किया।
इस गोलाबारी के दौरान, एक मोर्टार बुंगुल बाजार स्थित रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई।
60 वर्षीय मोहम्मद उमर, 57 वर्षीय फैजा, और पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी महजैब बलूच इसमें मारे गए।
इस घटना की निंदा करते हुए, ‘बलूच वॉयस फॉर जस्टिस’ (बीवीजे) ने कहा, “यह घटना अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के संभावित उल्लंघन को उजागर करती है, विशेष रूप से ‘भेदभाव’ और ‘अनुपात’ के सिद्धांतों का उल्लंघन; ये सिद्धांत सभी पक्षों को आम नागरिकों और नागरिक संपत्तियों की रक्षा करने के लिए बाध्य करते हैं।
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