राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली में अब राशन कार्ड उपभोक्ताओं को मिलेगी राशन की होम डिलीवरी
दिल्ली सरकार अब जरूरतमंदों के घर राशन की डिलीवरी करवाएगी। केजरीवाल सरकार ने यह निर्णय लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत लोगों को राशन की दुकानों पर नहीं जाना होगा, बल्कि राशन कार्ड धारक को उसका तय राशन घर पर ही पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली कैबिनेट ने इस निर्णय को मंजूरी दे दी है। अगले छह-सात महीनों में राशन की होम डिलीवरी प्रारंभ कर दी जाएगी। इस योजना को दिल्ली सरकार ने ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ का नाम दिया है।”
घर-घर राशन की होम डिलीवरी करने की इस योजना के अंतर्गत राशन कार्ड उपभोक्ताओं को गेहूं के बदले आटा उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “पूरे देश में हर राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर गरीबों को राशन बांटती है, लेकिन इसमें लोगों को काफी परेशानी होती है। कई बार दुकान खुलती नहीं। लंबी-लंबी लाइने लगती है। कई जगह पूरा राशन नहीं तोला जाता, कई जगह ज्यादा पैसे लिए जाते हैं। दिल्ली सरकार ने राशन की इस व्यवस्था में काफी सुधार किया है। दिल्ली सरकार ने अब जो फैसला लिया है उसे एक क्रांतिकारी कदम कहा जा सकता है।”
दिल्ली सरकार अब सीधे एफसीआई के गोदाम से गेहूं लेकर उसे पिसवाएगी और फिर आटा, चीनी, चावल के पैकेट सभी लाभार्थियों के घर तक पहुंचाए जाएंगे। हालांकि यदि कोई व्यक्ति राशन की होम डिलीवरी नहीं लेना चाहता तो उसके पास पहले की ही तरह राशन की दुकान पर जाकर राशन लेने का विकल्प उपलब्ध होगा।
दिल्ली सरकार के मुताबिक, राशन की होम डिलीवरी के लिए अभी से अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग टेंडर दिए जाएंगे। राशन की होम डिलीवरी शुरू होने में 6 से 7 महीने का समय लग सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जिस दिन से दिल्ली में राशन की होम डिलीवरी योजना शुरू होगी उसी दिन से दिल्ली में केंद्र सरकार की ‘वन नेशन वन राशन’ कार्ड योजना भी लागू कर दी जाएगी।”
राजनीति
रेहान वाड्रा के समर्थन में उतरे आदित्य ठाकरे, बोले-तिरंगे की फोटो हटाने से इनकार करना साहसिक कदम

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और कलाकार रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी को लेकर शुरू हुए विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने रेहान वाड्रा का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज वाली तस्वीरों को हटाने से इनकार कर उन्होंने साहस का परिचय दिया है।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “शाबाश रेहान वाड्रा। ऐसे शासन का सामना करते हुए जो बिना किसी विवरण वाली तस्वीरों से भी डरता है, राष्ट्रीय ध्वज के समर्थन में खड़े रहने और तिरंगे वाली तस्वीरें न हटाने के लिए आपको बधाई।”
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी स्थल के प्रबंधन को यह सोचना चाहिए कि क्या वह वास्तव में भारतीय है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरों को हटाना एक राष्ट्रविरोधी कृत्य है।
आदित्य ठाकरे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जब लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया जाएगा, तब इस राष्ट्रविरोधी कार्य के लिए प्रबंधन को भारतीय संस्करण के नूर्नबर्ग ट्रायल का सामना करना चाहिए।” दरअसल नूर्नबर्ग ट्रायल वह ऐतिहासिक अदालत थी, जिसने नाजी जर्मनी के शीर्ष नेताओं पर युद्ध अपराध और आक्रामक युद्ध छेड़ने के आरोपों की सुनवाई की गई थी।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने बेटे रेहान वाड्रा के समर्थन में एक्स पर भावनात्मक संदेश साझा किया। इसी पर आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा कि जब सत्ता में बैठा व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह यह नहीं समझता कि वह जिस शक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा है, उसे पहले ही खो चुका है।”
प्रियंका ने कहा, “सच के साथ खड़े रहो और हर खूबसूरत चीज तुम्हारे पास अपना रास्ता तलाश लेगी। मुझे तुम पर गर्व है और हमेशा रहेगा।”
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस प्रशासन ने उनकी एकल फोटो प्रदर्शनी “नो आइडिया इज फाइनल” से 70 से अधिक तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया।
आईएएनएस से बातचीत में रेहान वाड्रा ने कहा कि उन्होंने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री संबंधी नीति का पालन करते हुए ही तस्वीरों का चयन किया था। उनके अनुसार, प्रदर्शनी में कोई राजनीतिक नारे नहीं थे और राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें भी बहुत कम थीं।
रेहान वाड्रा ने कहा कि शुरुआत में उन्हें कुछ तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया था और उन्होंने सहयोग की इच्छा भी जताई थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि कोई आपत्ति है तो चार या पांच तस्वीरें हटाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए कारण बताया जाए। उनका आरोप है कि उन्हें कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और बाद में पूरी प्रदर्शनी से 70 तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया।
राजनीति
मध्य प्रदेश: नगर निकाय की खरीद को लेकर एसीएस का वायरल वीडियो विवाद का कारण बना

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मध्य प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे, शहरी स्थानीय निकायों द्वारा की गई खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाते दिख रहे हैं। इस दौरान वरिष्ठ नौकरशाह ने खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।
यह वायरल वीडियो भोपाल के भौरी स्थित एक प्रशिक्षण संस्थान में हुई समीक्षा बैठक का बताया जा रहा है। इस बैठक में दुबे ने पिछले तीन वर्षों के दौरान शहरी स्थानीय निकायों द्वारा ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदारी पर चर्चा की। बैठक में पेश किए गए विश्लेषण के अनुसार, इस अवधि में 374 शहरी स्थानीय निकायों ने पोर्टल के जरिए 1,134 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
विश्लेषण में एक जैसी वस्तुओं और उपकरणों की खरीद में कीमतों के बीच भारी अंतर पाया गया।
एक उदाहरण देते हुए दुबे ने बताया कि एक शहरी स्थानीय निकाय ने कचरा उठाने वाला वाहन 2 लाख रुपए में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने उसी तरह के वाहन के लिए 6 लाख रुपए का भुगतान किया, जिसमें बस एक अतिरिक्त डस्टबिन लगा हुआ था।
विश्लेषण के मुताबिक, अगर ये खरीदारी औसत दरों पर की गई होती तो राज्य सरकार लगभग 250 करोड़ रुपए बचा सकती थी।
यह आंकड़ा संभावित बचत का अनुमान है। इससे यह साबित नहीं होता कि कोई वास्तविक वित्तीय नुकसान हुआ है या भ्रष्टाचार हुआ है।
दुबे ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि इस वर्ष से खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है तो उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने शहरी स्थानीय निकायों की खरीद प्रक्रियाओं और सार्वजनिक खर्च की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर कर्ज के बोझ और मुख्यमंत्री के लिए एक विमान खरीदने के प्रस्ताव को लेकर निशाना साधा।
पटवारी ने कहा, “इतिहास इस बात पर शर्मिंदा होगा कि जब मध्य प्रदेश 6 लाख करोड़ रुपए के कर्ज तले दबा हुआ था, तब मुख्यमंत्री अपनी निजी पसंद पूरी करने के लिए एक विमान पर 350 करोड़ रुपए खर्च कर रहे थे।”
उन्होंने भाजपा पर राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और इसे ‘भ्रष्टाचार का कैंसर’ करार दिया। साथ ही, उन्होंने मांग की कि गांव के सरपंच से लेकर संसद सदस्यों तक, हर स्तर से भाजपा को सत्ता से बाहर किया जाना चाहिए।
शहरी विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने गुरुवार को आईएएनएस के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अनियमितताओं का पता लगाने के लिए उचित पर्यवेक्षण और नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई की है और आगे भी गलत कामों के खिलाफ उचित कदम उठाती रहेगी।
राजनीति
‘जेल में बंद व्यक्ति हमले की योजना नहीं बना सकता,’ टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले पर बोलीं सुप्रिया सुले

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी की घटना पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया ने प्रतिक्रिया दी है। हमले की जिम्मेदारी जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने ली है, जिसको लेकर सुप्रिया सुले ने गुरुवार को कहा कि जेल में बंद कोई भी व्यक्ति हमले की योजना नहीं बना सकता और फिर उसकी जिम्मेदारी लेकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकता।
सुप्रिया सुले ने कहा, “मुझे हैरानी हुई क्योंकि न्यूज चैनल और अखबार कहते हैं कि लॉरेंस बिश्नोई जेल में है। फिर भी, वह खुद पोस्ट कर रहा है और कह रहा है कि ‘मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं।’ यह समझना मुश्किल है कि जेल के अंदर बैठा कोई व्यक्ति इस तरह जिम्मेदारी कैसे ले सकता है। यह बहुत उलझन में डालने वाली बात है। जिस तरह से सबको डराया-धमकाया जा रहा है, उसे देखते हुए हम इस बात की जांच की मांग करेंगे कि जेल के अंदर बैठा कोई व्यक्ति यह सब कैसे कर सकता है।”
गुरुवार को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले के सिलसिले में चार और आरोपियों, दो महिलाओं, राधा और बबीता, तथा कुणाल और सुमित, को ट्रांजिट रिमांड पर किला कोर्ट लेकर आई।
इस बीच, पुलिस सूत्रों से पता चला है कि हमले से पहले आरोपियों ने मुंबई के पास एक जगह पर शूटिंग (गोली चलाने) का अभ्यास किया था। बताया जा रहा है कि अंधेरी के अपने होटल के कमरे में हथियार की जांच करते समय एक बार गोली गलती से चल भी गई थी (मिसफायर हो गया था)।
खबरों के अनुसार, आरोपी असल में किसी और बॉलीवुड सेलिब्रिटी को निशाना बनाना चाहते थे। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब वे अपने पहले से तय टारगेट तक आसानी से नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि टाइगर के प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया रील्स पर शेयर की गई जानकारी से आरोपियों को पता चला कि उस समय टाइगर के पास पुलिस सुरक्षा नहीं थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उसे निशाना बनाने का फैसला किया।
शुरुआती पूछताछ में यह भी सामने आया है कि टाइगर पर हमले का मकसद इंडस्ट्री में डर फैलाना था।
18 अक्टूबर की शाम को मुंबई के जुहू इलाके में मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने टाइगर पर गोलियां चलाईं, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। इस हमले में अभिनेता को तो कोई चोट नहीं आई, लेकिन उनका ड्राइवर घायल हो गया।
घटना के कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल होने लगी, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अनिल पंडित होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने गोलीबारी की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि यह अभिनेता के लिए एक चेतावनी थी कि वे सुपरस्टार सलमान खान के साथ काम करना बंद कर दें।
घटना के कुछ ही घंटों के अंदर, राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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