अंतरराष्ट्रीय समाचार
इमरान खान की पीओजेके पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश नाकाम
इमरान खान सरकार ने पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक परिषद के माध्यम से आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई है। हालांकि इस परिषद को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी ने दो साल पहले ही खत्म कर दिया था। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, इस्लामाबाद ने पीओजेके के अंतरिम संविधान अधिनियम 1974 के तहत संघीय सरकार और प्रांतीय सरकार के बीच “एक पुल के रूप में काम करने के लिए” पीओजेके परिषद की स्थापना की थी। जिसके अध्यक्ष पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते थे।
संघीय सरकार ने यह सुनिश्चित किया था कि परिषद की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जांच से परे रहें।
कथित तौर पर यह परिषद, “अनियंत्रित भ्रष्टाचार और पीओजेके में हर चुनाव से पहले राजनीतिक खरीद-फरोख्त का केंद्र थी।”
संघीय सरकार की ओर से कार्य करते हुए इस परिषद ने इनलैंड रेवेन्यू और अकाउंटेट जनरल्स ऑफिस जैसे महत्वपूर्ण विभागों के “प्रशासनिक नियंत्रण” का आनंद लिया।
परिषद इस्लामाबाद स्थित अपने भारीभरकम सचिवालय का प्रशासनिक खर्च और कुछ अन्य फंटकर खर्च चलाने तथा पाकिस्तान व पीओजेके में विकास गतिविधियों के लिए पीओजेके से वसूले जाने वाल 20 प्रतिशत आयकर और कुछ अन्य फंड को अपने पास रखती थी।
हालांकि जून 2018 में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने अपनी चुनावी घोषणा और सार्वजनिक रूप से की गई मांगों के चलते इस परिषद की “प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों” को समाप्त कर दिया था।
पीएमएल-एन उस समय पीओजेके विधानसभा और परिषद दोनों में बहुमत में थी।
एक हालिया बयान के अनुसार, मजेदार बात यह कि पीओजेके में पिछले साल दक्षिणी जिलों में आए एक भूकंप और कोविड-19 महामारी के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने के बावजूद 13वें संशोधन के बाद राजस्व संग्रह काफी बढ़ गया।
डॉन ने अपनी रपट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि संघीय सरकार में मौजूद कुछ तत्व प्रस्तावित 14वें संशोधन के जरिए परिषद की राजकोषीय और प्रशासनिक शक्तियां फिर से बहाल किए जाने को लेकर आतुर हैं।
लेकिन गुरुवार को पीओके के प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर के प्रेस सचिव राजा मुहम्मद वासिम की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री हैदर की अध्यक्षता में बुधवार को मुजफ्फराबाद में कैबिनेट की एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें विधि एवं कश्मीर मामलों के संघीय मंत्रालयों से 22 जून को प्राप्त हुए संशोधनों के मसौदे पर तथा अन्य चीजों पर गहन चर्चा हुई।
बयान में इसे एक असाधारण बैठक बताते हुए कहा गया है कि पीओजेके कैबिनेट ने एकसुर से इस बात पर सहमति जताई है कि विधि और कश्मीर मामलों के संघीय मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए संविधान संशोधन मसौदे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रेस विज्ञप्ति में इस्लामाबाद से प्राप्त मसौदा प्रस्तावों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
बयान में कहा गया, “(पीओजेके) कैबिनेट का यह सर्वसम्मत मत है कि पाकिस्तान के साथ जम्मू एवं कश्मीर राज्य का वैचारिक संबंध कश्मीरी लोगों की अनंत इच्छाओं को दर्शाता है। यह किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या सरकार से संबंधित नहीं है, बल्कि राज्य के दोनों हिस्सों पर रहने वालों का एक आपसी अधिकार है। साथ ही यह संबद्धता पूरी तरह से पाकिस्तान के संस्थापक कायद-ए-आजम मुहम्मद अली जिन्ना की ²ष्टि के अनुरूप है।”
बयान में कहा गया है कि जम्मू एवं कश्मीर राज्य को भारत सरकार की मान्यता के दृष्टिकोण से “(इस्लामाबाद द्वारा) उठाए जाने वाले कदम (पीओजेके सरकार के साथ) आपसी विचार-विमर्श से होने चाहिए, जो दोनों तरफ के कश्मीरियों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार को और सशक्त करे।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप प्रशासन का दावा, 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को अमेरिका से निकाला गया

अमेरिका से 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को निर्वासित किया गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि लगातार 15 महीनों से किसी भी अवैध प्रवासी को रिहा नहीं किया गया है। उसने 14 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को करदाताओं के पैसे से संचालित सार्वजनिक सहायता लाभों से बाहर कर दिया है। इसके अलावा अवैध प्रवासियों को करदाताओं द्वारा वित्तपोषित एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य योजनाओं से भी वंचित किया गया है, हालांकि इन योजनाओं के नाम या राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए।
व्हाइट हाउस ने आव्रजन प्रवर्तन के अपने रिकॉर्ड का विस्तृत ब्योरा जारी करते हुए यह जानकारी दी। ये आंकड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित दो कार्यकारी आदेशों के साथ जारी व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में शामिल किए गए हैं।
इन आदेशों के तहत कुछ श्रेणियों के बच्चों के लिए जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) पर प्रतिबंध लगाया गया है और संघीय एजेंसियों को बर्थ टूरिज्म रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार, निर्वासित किए गए लोगों में हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए हजारों लोग भी शामिल थे। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित प्रवासियों के मूल देशों, निर्वासन की अवधि या विस्तृत आंकड़ों का कोई ब्योरा नहीं दिया।
प्रशासन ने यह भी दावा किया कि पिछले 15 महीनों में किसी भी अवैध प्रवासी को अमेरिका में रिहा नहीं किया गया। व्हाइट हाउस ने इसे ट्रंप के सत्ता में वापसी के पहले सप्ताह में शुरू किए गए कदमों का परिणाम बताया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिणी सीमा पर संकट का हवाला देते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अवैध आव्रजन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। व्हाइट हाउस का कहना है कि इससे पिछली सरकार की सीमा संबंधी नीतियों को पलटा गया।
फैक्ट शीट में वीजा जांच प्रक्रिया को और सख्त करने तथा 75 देशों के लिए वीजा प्रोसेसिंग निलंबित करने का भी जिक्र है, हालांकि प्रशासन ने इन देशों के नाम, निलंबन की अवधि या प्रभावित वीजा श्रेणियों की जानकारी नहीं दी।
इन कदमों का उद्देश्य अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऐसे विदेशी नागरिकों को हतोत्साहित करना है जो अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रुक जाते हैं।
व्हाइट हाउस ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह एक ऐसा अभियान है जो पहले कभी नहीं चला और जिसमें धोखाधड़ी से अमेरिकी नागरिकता पाने के आरोपी लोगों को निशाना बनाया गया।
इसमें कहा गया कि 88 लोगों के खिलाफ दावे किए गए हैं, जिन्हें अयोग्य होने के बावजूद अमेरिकी नागरिकता मिल गई। हालांकि फैक्ट शीट में उन लोगों की पहचान नहीं बताई गई, न ही कथित उल्लंघनों के बारे में बताया गया और न ही कार्रवाई की स्थिति बताई गई।
फैक्ट शीट में नागरिकता परीक्षा में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि संशोधित परीक्षा के जरिए आवेदकों के अमेरिकी इतिहास, शासन व्यवस्था और मूल्यों के ज्ञान का बेहतर आकलन किया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी कहा कि वह राज्यवार मतदाता सूचियों से हजारों अवैध प्रवासियों के नाम हटाने की दिशा में काम कर रहा है, हालांकि इसमें शामिल राज्यों या अब तक हटाए गए नामों की संख्या संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की गई।
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न्यूजीलैंड: 15 साल बाद वेलिंगटन में बर्फबारी, कई प्रमुख राजमार्ग बंद

एक तरफ जहां यूरोप के कई इलाके भीषण गर्मी की मार अब भी झेल रहे हैं वहीं ओशिनिया के द्वीपीय देश न्यूजीलैंड की राजधानी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड का सामना कर रहा है। अंटार्कटिका से आई भीषण शीत लहर के प्रभाव से न्यूजीलैंड के बड़े हिस्से में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वेलिंगटन में करीब 15 वर्षों बाद समुद्र तल तक बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि दक्षिणी शहर डुनेडिन में लोगों ने दुनिया की सबसे खड़ी सड़क पर स्कीइंग कर इस दुर्लभ मौसम का आनंद लिया।
स्थानीय मीडिया आउटलेट स्टफ के अनुसार, राजधानी वेलिंगटन में बर्फबारी से शहर सफेद चादर में ढक गया। लंबे समय बाद हुई इस बर्फबारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर बर्फबारी की तस्वीरें और वीडियो भी तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
दक्षिणी शहर डुनेडिन में भारी बर्फबारी के कारण कई स्कूल बंद कर दिए गए। बर्फ से ढकी दुनिया की सबसे खड़ी सड़क ‘बाल्डविन स्ट्रीट’ पर स्थानीय लोगों ने स्की और स्नोबोर्ड चलाकर मौसम का आनंद लिया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को देश के कई हिस्सों में तापमान शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच गया। बर्फबारी और फिसलन के कारण कई प्रमुख राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं, जबकि क्राइस्टचर्च हवाई अड्डे पर भी उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है। पुलिस ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
न्यूजीलैंड की मौसम एजेंसी ‘मेटसर्विस’ ने कहा है कि बुधवार को कुछ क्षेत्रों में मौसम में अस्थायी सुधार हो सकता है, लेकिन इसके बाद ठंड की एक और लहर आने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक, गुरुवार कई इलाकों में इस वर्ष की सबसे ठंडी सुबह हो सकती है।
इस बीच, राष्ट्रीय बिजली ग्रिड संचालक ‘ट्रांसपावर’ ने रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज होने की जानकारी दी है और सप्ताह के अंत तक बिजली आपूर्ति पर दबाव बने रहने की चेतावनी दी है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
इजरायली राजदूत अजार ने भारत और इजरायल के स्टार्टअप, इको सिस्टम और शिक्षा की सराहना की

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भारत और इजरायल की शिक्षा, स्टार्टअप और इको सिस्टम की सराहना की। हाल के दिनों में भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी आई है। इस बीच इजरायली राजदूत ने ये बयान दिया।
भारत में इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष यूनिवर्सिटी में से 6 इजरायली और 5 भारतीय को इस बात की संभावना के लिए चुना गया है कि उनके ग्रेजुएट में से कोई एक वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, जिससे एक यूनिकॉर्न कंपनी बनेगी!”
अजार का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और इजरायल के बीच तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड का यह विश्लेषण वेंचर कैपिटल फंडिंग और यूनिकॉर्न बनने की दर के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही इजरायली राजदूत ने द जेरुसेलम पोस्ट का एक लेख भी साझा किया।
इसमें दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज के पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की सफलता को मापा गया। द जेरुसेलम पोस्ट में लिखा गया कि स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के मुताबिक, नेगेव की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी इस मामले में इजरायल में पहले और अमेरिका के बाहर की यूनिवर्सिटी में तीसरे नंबर पर है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि उसका कोई ग्रेजुएट जो वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, वह आगे चलकर एक यूनिकॉर्न कंपनी बनाएगा।
अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष रैंक वाली संस्थाओं में छह इजरायली विश्वविद्यालय शामिल हुए, जो किसी भी अन्य देश से ज्यादा हैं। इजरायली संस्थानों में बेन-गुरियन विश्वविद्यालय का ऑड्स रेशियो 6.6 रहा, जो सबसे ऊंचा है। इसके बाद राइखमान विश्वविद्यालय, टेक्नियन-इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बार-इलान विश्वविद्यालय, तेल अवीव विश्वविद्यालय और हिब्रू विश्वविद्यालय यरूशलम का नंबर आता है।
इजरायली संस्थानों में राइखमान विश्वविद्यालय 5.4 के ऑड्स रेशियो के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद टेक्नियन 3.1 के साथ, बार-इलान विश्वविद्यालय 2.9 के साथ, तेल अवीव विश्वविद्यालय 2.8 के साथ और हिब्रू विश्वविद्यालय 2.2 के साथ रहा। शीर्ष 18 में भारत के 5 संस्थान शामिल थे, जबकि कनाडा के 3 और यूनाइटेड किंगडम के 2 संस्थान इस सूची में थे।
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