राजनीति
नया संसद भवन स्थापत्य कला और आधुनिकता का होगा बेजोड़ संगम
नये संसद भवन के निर्माण कार्य की तैयारियां पूरी हो गयी हैं। नये संसद भवन को भव्यता देने के लिए इसमें स्थापत्य कला और आधुनिकता का मिश्रण किया जायेगा। प्रयास किया जा रहा है नये भवन के जरिये नया इतिहास रचा जाए और नये प्रतीक खड़े किये जाएं। इससे पहले देश भर में लागू की गयी देशव्यापी ‘बंदी’ की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया था। लेकिन नया संसद भवन कैसा होगा, क्या सुविधा होगी, सुरक्षा के क्या इंतजाम होंगे इन सारे प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
ध्यान रहे कि नया संसद भवन कैसा हो, इस पर माननीय सांसदों की भी राय ली जा चुकी है। इस बावत लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बजट सेशन के दौरान ही सामान्य प्रयोजन संबंधी समिति की बैठक बुलाकर सांसदों से सुझाव मांगे थे। बैठक में संसद की सभी समितियों के अध्यक्ष के साथ पार्टी अध्यक्षों को भी बुलाया गया था।
बैठक में सभी सदस्यों के सामने डिजिटल प्रजेंटेशन भी हुआ। प्रजेंटेशन में संसद भवन का प्रारूप, अंदर की साज सज्जा और सुविधा, बनावट, सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इस बैठक के बाद भी कई सदस्यों ने लिखित सुझाव भी दिया था।
बैठक में शामिल हुए बीजू जनता दल के नेता पिनाकी मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से कहा कि नये संसद भवन के निर्माण में इस बात का ध्यान रखा जाए कि पुराने भवन में शामिल सभी ऐतिहासिक धरोहरों को शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि भवन छोटा भी हो तो चलेगा, लेकिन इसकी ऐतिहासिक धरोहर वाली छवि बनी रहे।
जाहिर है संसद भवन में भारतीयता की छाप भरपूर रखने की वकालत की गयी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भवन निर्माण में भारतीय वास्तुकला, भारतीय शिल्प कला को प्रमुखता दी जायेगी। मौजूदा संसद भवन में उकेरे गये वेदों और उपनिषदों के श्लोक से ज्यादा नए भवन में उकेरे जायेंगे। भारतीय संस्कृति, लोकाचार, भारतीय परंपरा का भी भरपूर ध्यान नये संसद भवन में रखा जाएगा।
नये संसद भवन में आध्यात्मिक केंद्र भी बनाये जाने हैं, जिसमें सर्वधर्म प्रार्थना स्थल होगा। संसद भवन में स्वदेशी कलाकृतियों को भी भरपूर स्थान दिया जायेगा। नये भवन में भारतीय संस्कृति, परंपरा, कला समेत स्वदेशी कला परंपरा को तरजीह दी जायेगी।
संसद भवन में सांसदों के गाड़ी से उतरने के बाद उनके कक्ष तक इलेक्ट्रिक कार से ले जाने की व्यवस्था की बजाय, इस तरह का निर्माण किया जा सकेगा, जिससे सांसद गाड़ी से उतरने के बाद ‘वाक वे’ के जरिये अपने गंतव्य को जा सकें।
बताया गया है कि प्रस्तावित नए संसद भवन में सेंट्रल हॉल का प्रावधान नहीं रखा गया था, लेकिन सांसदों ने सुझाव दिया है कि सेंट्रल हॉल अनिवार्य है, इसे बनाया जाना चाहिए ताकि राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य आपस में मिल सकें और विचारों का आदान-प्रदान कर सकें।
पहले नये संसद भवन के निर्माण के लिये 2022 तक का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन राष्ट्रव्यापी बंदी की वजह से अब थोड़ा विलंब हो सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
आरबीआई अगले हफ्ते होने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कर सकता है बढ़ोतरी : एसबीआई रिपोर्ट

मौजूदा समय में जोखिमों का संतुलन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 25 आधार अंक (0.25 प्रतिशत) की ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में निर्णायक रूप से झुक गया है। इसकी वजह महंगाई का दबाव बढ़ना, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का बिगड़ना, तरलता की बदलती स्थिति और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के नए सिरे से उभरना है। यह जानकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दी गई।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है, जिसमें बेंचमार्क रेपो रेट पर फैसला किया जाएगा।
एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के पुनर्मूल्यांकन को देखते हुए, “हमारे लिए बेहतर होगा कि हम स्थिति से पीछे रहने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाएं।”
रिपोर्ट में कहा गया, “हमें यह भी उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान में 30 आधार अंक और महंगाई के अनुमान में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी करेगा।”
महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया लगातार गिरावट के दौर में है, डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है और पिछले शुक्रवार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली के कारण 4.45 अरब डॉलर की निकासी हुई है। ऐसे में सट्टेबाजी वाली ताकतों को रोकने और प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने की आरबीआई की क्षमता पर भरोसा उसकी आंतरिक मजबूती की बड़ी परीक्षा होगी।
रिपोर्ट में कहा गया, “भले ही ब्याज दर में बढ़ोतरी अब करीब आती दिख रही है, लेकिन मानसून की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। 2026 का मानसून वर्ष 2000 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा, जो दीर्घकालिक औसत (एपीए) का केवल 87 प्रतिशत रहा। वहीं, 43 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।”
मजबूत अल नीनो परिस्थितियां और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी फसलों के उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा कर सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर तरलता भले ही अधिक है, लेकिन वास्तविक स्तर पर प्रभावी तरलता का सृजन काफी कम है।
विशेष स्वैप सुविधा के तहत रिकॉर्ड 143.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह के बावजूद, नियामकीय आवश्यकताएं (सीआरआर/एसएलआर/एलसीआर) बैंकों द्वारा अतिरिक्त जमा राशि के इस्तेमाल को सीमित करती हैं।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 16 प्रतिशत ऋण वृद्धि को समर्थन देने के लिए, नियामकीय प्रावधानों, यूपीआई और स्पर्श संबंधी आवश्यकताओं के कारण बैंकों के स्तर पर जमा सृजन में अभी भी 8.2 लाख करोड़ रुपए का अंतर रहेगा।”
रिपोर्ट में कहा गया कि फिलहाल भारत को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नीति निर्माताओं और नियामकों के लिए यह बेहतर होगा कि वे ऐसी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहें, जहां बदलती व्यापक आर्थिक परिस्थितियां व्यापक हितों की सुरक्षा के लिए कुछ असामान्य ब्याज दर संबंधी उपायों को अपनाने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप का दावा: ईरान के साथ युद्ध ‘बहुत जल्द’ होगा खत्म, इसके बाद तेजी से गिरेंगी तेल की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध ‘बहुत जल्द’ खत्म हो जाएगा। उन्होंने अनुमान जताया कि संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान सैन्य और आर्थिक रूप से काफी कमजोर हो चुका है।
टेक्सास पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए और बाद में डेंटन में पीटरबिल्ट मोटर्स की एक फैक्ट्री के दौरे के दौरान ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के सामने यह फैसला करने का समय है कि संघर्ष किस तरह खत्म होगा।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “ईरान का मामला बहुत जल्द किसी न किसी तरह खत्म होने वाला है। या तो वह खुद कहेगा कि देखिए, वहां 301 प्रतिशत महंगाई है। उनके पास पैसा नहीं है, उनकी करेंसी नहीं है। उनकी सेना हार चुकी है, उनकी नौसेना खत्म हो गई है, वायुसेना खत्म हो गई है, सब कुछ खत्म हो गया है।”
उन्होंने कहा, “किसी न किसी तरह यह बहुत जल्द खत्म होने वाला है। और जब यह खत्म होगा, तो तेल की कीमतें चट्टान की तरह तेजी से नीचे गिरेंगी।”
ट्रंप ने कहा कि कीमतों में राहत देने के लिए अमेरिका किसी यूरोपीय देश के पास मौजूद डीजल के स्टॉक को जारी कराने पर विचार कर सकता है। हालांकि, उन्होंने उस देश का नाम नहीं बताया।
ट्रंप ने कहा, “हां, हम ऐसा कर सकते हैं। उनके पास कुछ डीजल है, लेकिन कीमतें नीचे आ रही हैं। सभी कीमतें नीचे आ रही हैं।”
उन्होंने कहा, “एक चीज यह है कि तेल की कीमत थोड़ी ज्यादा है, लेकिन यह बाइडेन के समय के मुकाबले काफी कम है। और हमने वह काम किया जो बाइडेन ने नहीं किया।”
पीटरबिल्ट की फैक्ट्री में अपने बाद के संबोधन में भी ट्रंप ने कई बार ईरान और ऊर्जा की कीमतों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरानी पाबंदियों के बावजूद अमेरिका ने तेल की आवाजाही जारी रखने में मदद की है।
ट्रंप ने कहा, “यह बहुत जल्द खत्म होगा, किसी न किसी तरह इसे खत्म होना ही है। या तो वे कोई सही और समझदारी वाला कदम उठाएंगे या वे ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।”
उन्होंने कहा, “तो किसी न किसी तरह यह खत्म होने वाला है। और जब यह खत्म होगा तो तेल की कीमत बहुत तेजी से नीचे जाएगी। इस बीच तेल की कीमतें पहले ही काफी नीचे आ चुकी हैं।”
ट्रंप से ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड से जुड़ी एक कथित नाकाम आतंकी साजिश में ईरान की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर ट्रंप ने कहा कि वह ईरान की भूमिका की पुष्टि नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “मैं इसकी पुष्टि के साथ नहीं कह सकता, लेकिन ऐसा ही लग रहा है।”
टेक्सास दौरे के दौरान ट्रंप ने ईरान पर अपनी टिप्पणियों के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था की स्थिति के लिए जितना श्रेय मिलना चाहिए, उतना नहीं मिल रहा है।
ट्रंप ने कहा, “हमारे आंकड़े शानदार हैं। हम मैनेजमेंट के मामले में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” उन्होंने शेयर बाजार, रिटायरमेंट खातों और नई फैक्ट्रियों में हो रहे निवेश का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को अपने आर्थिक रिकॉर्ड के बारे में लोगों तक अपनी बात ज्यादा बेहतर तरीके से पहुंचाने की जरूरत है।
राजनीति
राज्यसभा उम्मीदवार के नाम को लेकर मायावती का अखिलेश पर निशाना, बोली-पीडीए के नाम पर छलावा कर रही सपा

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर परिवारवाद और धनबल की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सपा अपने आपको समाजवादी और पीडीए की पार्टी बताती है, लेकिन उसके काम इसके विपरीत नजर आते हैं।
मायावती ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवार प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सपा ने 30 सितंबर को दोनों उम्मीदवारों का नामांकन कराया था।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेफॉर्म एक्स पर लिखा कि बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में परिवार, सगे-संबंधियों, भाई-भतीजों और बड़े पूंजीपतियों को टिकट नहीं देती। उनके मुताबिक पार्टी सर्वसमाज के गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों से जुड़े कर्मठ अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाती है।
उन्होंने कहा, ”बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, करीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल गरीब, मध्यम वर्ग व कमजोर तबकों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बसपा की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ‘पीडीए’ की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज्यादा नजर आती है।”
मायावती ने कहा कि इसका एक और खास व ताजा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिए द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नजदीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ‘फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिए होगा।
मायावती ने कहा कि इस प्रकार का है सपा, उसका ‘पीडीए’ व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ‘पीडीए’ का चाहिए, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूंजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ‘पीडीए’ के बहकावे में ना आए तो यह सही।
उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिए खासकर अपरकास्ट समाज के गरीबों तथा ‘बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब खासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही जरूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिए कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बसपा में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
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