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Monday,24-August-2026
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विदेशी कंपनियों, निवेशकों के साथ किस तरह खुलेआम भेदभाव कर रहा चीन

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पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा पर जारी गतिरोध के बीच भारत में चीनी कंपनियों और उनके परिचालन के खिलाफ भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। चीन ने कई एप्स पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक नियमों को हवाला दिया है और साथ ही वह खुद को नए जमाने के व्यापार का अग्रदूत कहता है। मगर उसकी खुद की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। चीन खुद लंबे समय से उद्योगों के बीच भेदभाव कर रहा है। विशेष रूप से विदेशी संस्थाओं के खिलाफ, जो उस देश में काम करने के लिए आती हैं। चीन में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के मार्च के एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आधे से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है।

विदेशी कंपनियों ने लंबे समय से चीनी व्यवसायों, विशेषकर राष्ट्र के स्वामित्व वाले उद्यमों के साथ असमान प्रतिस्पर्धा के बारे में शिकायत की है।

उदाहरण के लिए चीन में काम करने वाली भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों टीसीएस, एचसीएल, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और विप्रो की वृद्धि एक दशक के परिचालन के बाद भी बाजार पहुंच प्रतिबंध और गैर-टैरिफ बाधाओं से पंगु हो गई है।

चीन ने देश में चलने वाली वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक सख्त नियम बनाकर रखे हैं और यह चीन के तथाकथित ‘ग्रेट फायरवॉल’ से इंटरनेट सेंसरशिप के कारण अवरुद्ध (ब्लॉक) हैं।

वैसे तो चीन भारत की ओर से सुरक्षात्मक ²ष्टिकोण से उसके एप्स पर लगाए गए प्रतिबंधों का रोना रो रहा है, मगर वह अपने गिरेबां में झांकना तक नहीं चाहता। चीनी सरकार ने विकिपीडिया, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और कुछ अन्य गूगल सेवाओं को अपने देश के लिए खतरनाक बताते हुए पूरी तरह से अवरुद्ध या अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया हुआ है।

विदेशी निवेशकों के खिलाफ चीन की भेदभावपूर्ण नीतियों को भी अच्छी तरह से जाना जाता है।

चीन में दीर्घकालिक वीजा प्राप्त करना वास्तव में मुश्किल है। इसके लिए निवेशकों को एक कंपनी बनाने और चीन के अविकसित पश्चिम में 500,000 डॉलर का निवेश करने की जरूरत होती है। इसके अलावा एक केंद्रीय प्रांत में 1,000,000 डॉलर या किसी अन्य क्षेत्र में 2,000,000 डॉलर का निवेश करके चीनी निवेश वीजा प्राप्त करना होता है।

विदेशी (स्थानीय लोग भी) चीन में संपत्ति को फ्री होल्ड नहीं कर सकते हैं। भूमि का हर भूखंड शुद्ध रूप से राष्ट्र का है और अधिकतम 70 साल की लीजहोल्ड पर ही प्राप्त किया जा सकता है। यह रियल एस्टेट निवेशकों के लिए व्यापार को बहुत कठिन बनाता है। शेयर निवेशकों को भी गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। विदेशी केवल हांगकांग के माध्यम से ‘ए-शेयर’ खरीद सकते हैं। ऐसा करने के लिए आपको हांगकांग ब्रोकरेज में अकाउंट खोलना होगा।

चीन की नियामक और कानूनी प्रणालियों में पारदर्शिता की कमी और कानून के शासन की कमी विदेशी निवेशकों को भेदभावपूर्ण प्रथाओं जैसे नियमों के चयनात्मक प्रवर्तन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के लिए असुरक्षित छोड़ने पर मजबूर करती है।

कुछ विदेशी कारोबारियों ने बताया है कि स्थानीय अधिकारी और नियामक कभी-कभी तो केवल स्वैच्छिक प्रदर्शन आवश्यकताओं या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ ही ऐसे निवेश को स्वीकार करते हैं, जो कुछ घरेलू उद्योगों को विकसित करने और स्थानीय नौकरियों के सृजन में मदद कर सके।

चीन में व्यवसाय को लेकर इस तरह के अन्य कई मापदंड हैं, जो विदेशी व्यवसायियों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं। मगर इसके बावजूद चीन खुद को नए जमाने के व्यापार का तथाकथित अग्रदूत कहता है और भारत द्वारा उसके एप्स पर सुरक्षा के ²ष्टिकोण से प्रतिबंध लगाने पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के उल्लंघन का रोना रोता है।

व्यापार

इस सप्ताह निफ्टी में गिरावट के बीच एफआईआई ने निकाले 1,602 करोड़ रुपए, घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

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ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखने को मिला। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजार से 1,602 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने खरीदारी जारी रखते हुए बाजार को सहारा दिया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एफआईआई तीन सप्ताह की लगातार खरीदारी के बाद फिर से बिकवाली के रुख में लौट आए। पूरे सप्ताह के दौरान उनका निवेश व्यवहार मिश्रित रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में उन्होंने बिकवाली की, इसके बाद अगले दो सत्रों में खरीदारी की और फिर अंतिम दो कारोबारी दिनों में दोबारा बिकवाली शुरू कर दी।

यदि 20 जुलाई से 21 अगस्त की अवधि को देखा जाए, तो एफआईआई पहले सप्ताह में विक्रेता रहे, उसके बाद लगातार तीन सप्ताह खरीदार बने और इस सप्ताह में फिर से बिकवाली की। इसके बावजूद पिछले एक महीने में उनकी कुल गतिविधि का परिणाम 1,282 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी के रूप में सामने आया।

दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार मजबूती से खरीदारी करते रहे। उन्होंने पिछले एक महीने के दौरान हर सप्ताह शुद्ध निवेश किया और कुल मिलाकर 48,390 करोड़ रुपए का निवेश किया। केवल इस सप्ताह ही डीआईआई ने 17,320 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।

अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों श्रेणियों के निवेशक कुल मिलाकर खरीदार बने हुए हैं। इस अवधि में एफआईआई ने 2,510 करोड़ रुपए और डीआईआई ने 34,370 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांकों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की और मध्य सप्ताह में 24,026 का निचला स्तर छुआ। हालांकि अंतिम दो कारोबारी सत्रों में रिकवरी देखने को मिली, जिससे सूचकांक निचले स्तरों से उबर गया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में निफ्टी 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर छूते हुए सप्ताह में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि अभी भी मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में बनी हुई है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि तेल कीमतों में और तेजी आती है, तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार को समर्थन देती रह सकती है।

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व्यापार

बिटकॉइन में तीन साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक रैली; 80,000 डॉलर के करीब पहुंची कीमत

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दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन में इन गिनों जोरदार तेजी देखने को मिल रही है और यह 80,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच गया है। पिछले तीन वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ते हुए बिटकॉइन ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर आकर्षित किया है।

शनिवार सुबह तक बिटकॉइन की कीमत लगभग 78,588 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही थी। वहीं, पिछले 24 घंटों में इसमें 4.8 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि एक सप्ताह में इसकी कीमत 24.5 प्रतिशत बढ़ी है। मार्च 2023 के बाद यह बिटकॉइन की सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त मानी जा रही है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस तेजी के पीछे अमेरिकी बॉन्ड बाजार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद (बायबैक) कार्यक्रम को दोगुना करने की घोषणा के बाद लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड दरों में गिरावट आई है, जिससे जोखिम वाले निवेशों के प्रति निवेशकों की रुचि बढ़ी और क्रिप्टो बाजार को समर्थन मिला।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में मंदी की धारणा पर लगाए गए सौदों को बंद करना पड़ा, जिससे अरबों डॉलर के शॉर्ट पोजिशन समाप्त हुए और बिटकॉइन की कीमतों में तेजी और बढ़ गई।

इस बीच, सोने की कीमतों में भी मजबूती देखने को मिली और यह मई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों को आशंका है कि बॉन्ड बाजार में हस्तक्षेप से अमेरिकी डॉलर पर दबाव पड़ सकता है, जिससे वैकल्पिक परिसंपत्तियों की मांग बढ़ी है।

क्रिप्टो मार्केट को उस समय भी सकारात्मक संकेत मिले जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कॉइनबेस ग्लोबल और पेवर्ड जैसी प्रमुख क्रिप्टो कंपनियों के अधिकारियों से मुलाकात की। निवेशकों ने इसे डिजिटल परिसंपत्तियों के प्रति प्रशासन के अपेक्षाकृत सकारात्मक रुख के संकेत के रूप में देखा।

संस्थागत निवेशकों की वापसी ने भी तेजी को मजबूती दी है। अमेरिका में सूचीबद्ध स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में इस सप्ताह जनवरी के बाद सबसे अधिक निवेश प्रवाह दर्ज होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, इस सप्ताह अब तक 13 प्रमुख बिटकॉइन ईटीएफ में 1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ है, जिससे क्रिप्टो मार्केट में तेजी का माहौल और भी मजबूत हुआ है।

हालांकि मौजूदा तेजी के बावजूद बिटकॉइन अभी भी अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर से काफी नीचे है। अक्टूबर 2025 में बिटकॉइन लगभग 1.26 लाख डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद भारी बिकवाली के चलते इसकी कीमत गिरकर जून 2026 के अंत में लगभग 58,642 डॉलर तक आ गई थी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक निवेश धारणा सकारात्मक बनी रहती है और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो बिटकॉइन आने वाले समय में 80,000 डॉलर का स्तर पार कर सकता है। हालांकि क्रिप्टो बाजार की अत्यधिक अस्थिर प्रकृति को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दी जा रही है।

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व्यापार

सोना इस हफ्ते 8 हजार रुपए से अधिक महंगा हुआ, चांदी 2.46 लाख के पार

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सोने और चांदी में इस हफ्ते तेजी देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुएं क्रमशः 8 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम और 12 हजार रुपए प्रति किलो से अधिक महंगी हो गई हैं।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 8,257 रुपए बढ़कर 1,60,620 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,52,363 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

22 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,47,128 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,39,565 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,20,465 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,14,272 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 19 अगस्त को सुबह के सत्र में 1,52,884 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 21 अगस्त को शाम के सत्र में 1,60,620 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।

सोने के साथ चांदी की कीमत में भी तेजी देखने को मिली है।

चांदी का दाम 12,788 रुपए बढ़कर 2,46,630 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,33,842 रुपए प्रति किलो था।

इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 21 अगस्त को शाम के सत्र में 2,46,630 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 19 अगस्त को सुबह के सत्र में 2,27,392 रुपए प्रति किलो देखा गया।

आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम 4,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 69 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की वजह बॉन्ड यील्ड में गिरावट और बड़े स्तर पर सुरक्षित निवेश की मांग है। इससे दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी को सहारा मिल रहा है।

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