राजनीति
कोरोना की तरह के संचारी रोगों से भी होगा डटकर मुकाबला : मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बरसात के मौसम में बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती है। जलजनित बीमारी थोड़ी सी असावधानी होने पर किसी को आगोश में ले लेती है। इसके लिए जनजागरूकता अभियान जरूरी है। उन्होंने कहा कोरोना की तरह के संचारी रोगों से भी डटकर मुकाबला करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कोरोना की तरह के संचारी रोग से भी डटकर मुकाबला करेंगे। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि अनलॉक को हल्के में ना लें, क्योंकि लोग अगर सावधानी नहीं बरतेंगे तो करोना का प्रसार तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 को नियंत्रित करने में भी स्वच्छता की बड़ी भूमिका है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में बहुत बेहतर काम हुआ है। आज कोविड-19 अस्पतालों में करीब डेढ़ लाख बेड हैं। रेपिड टेस्िंटग को बढ़ाकर 30 हजार प्रतिदिन किया जाएगा। आज कोविड-19 अस्पतालों में करीब डेढ़ लाख बेड हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2016 और 2017 में उप्र में सिर्फ इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) से प्रतिवर्ष 600 से ज्यादा मौतें होती थीं। यदि इसके बाद के वषों के आकड़े देखेंगे तो लगातार इन मौतों की संख्या कम हुई है। वर्ष 2019 तक यह घटकर 126 तक आ गई थी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से इस वर्ष कोरोना काल में स्वच्छता और सैनेटाइजेशन का अभियान चला है उससे इन मौतों में और कमी आएगी। जिस बीमारी ने पिछले चालीस वषों में हजारों बच्चों को निगल लिया हो, उस बीमारी को साठ फीसदी तक कम कर लिया जाए तो यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इस उपलब्धि को हासिल करने में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन की बड़ी भूमिका है।
योगी ने कहा कि प्रदेश के अंदर इंसेफेलाइटिस को रोकने का काम बड़े स्तर पर काम किया गया है। अब मलेरिया, डेंगू व संचारी रोगों को रोकने के लिए फि र से अभियान चलाया जा रहा है। विभागों के समन्वय के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में बड़े स्तर पर काम किया है। हर प्रकार के संचारी रोगों को हर हाल में हम रोकेंगे। कोरोना के लिए भी साफ -सफाई की आवश्यकता है। हमें कोरोना के खिलाफ ये जंग जीतनी है। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को हमें सुरक्षित रखना है।
इसके साथ ही उन्होंने विशेष सफोई दल को हरी झंडी दिखाई। यह सफोई दल पूरे प्रदेश में गांव और मोहल्ले में जाकर सफोई और सैनिटाइजेशन का काम करेगा। लोगों को उल्टी, दस्त जेई व एईएस आदि संचारी रोग से बचाने के लिए उन्हें जागरूक किया जाएगा। यह अभियान 31 जुलाई तक चलेगा।
राष्ट्रीय समाचार
दिवाली पर कारोबार में उछाल, दिल्ली का व्यापार 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद: सीटीआई

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने शनिवार को बताया कि दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान देशभर में कारोबार लगभग 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। जबकि अकेले दिल्ली में लगभग 80,000 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज होने की संभावना है।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि त्योहारी सीजन ने देशभर के व्यापारियों के लिए कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, क्योंकि स्वदेशी उत्पादों की उपभोक्ताओं के बीच मजबूत मांग देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जिन व्यापारियों को पिछले महीने रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार में बाधाओं का सामना करना पड़ा था, अब दिवाली की खरीदारी के बंपर सीजन से अपने नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
गोयल के अनुसार, अनुमानित 5 लाख करोड़ रुपए के देशभर के कारोबार में दिवाली की खरीदारी और विभिन्न संबंधित सेवाओं से उत्पन्न कारोबार शामिल है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की सर्वोच्च संस्था द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में खुदरा ऑटोमोबाइल बिक्री में 55 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टरों की बिक्री में क्रमशः 52 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 48 प्रतिशत, 70 प्रतिशत और 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं और त्योहारी सीजन के दौरान सकारात्मक व्यावसायिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं।
गोयल ने आगे कहा कि दिवाली के त्योहार के दौरान किफायती वस्तुओं से लेकर प्रीमियम उत्पादों तक लगभग पांच करोड़ उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे त्योहारी बिक्री में काफी योगदान मिला।
सीटीआई ने कहा कि उसने होटल और बैंक्वेट एसोसिएशन, रेस्तरां और मॉल एसोसिएशन, सिनेमा एसोसिएशन, शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, मेकअप और सैलून एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद अपने अनुमानित व्यावसायिक अनुमान तैयार किए हैं।
व्यापारियों के संगठन ने एक बयान में कहा कि इस साल दिवाली के मौसम में स्वदेशी उत्पादों की खरीद-बिक्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है और भारतीय निर्मित वस्तुओं की लोकप्रियता उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही है।
संगठन ने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों से भारतीय उत्पादों को अधिक मान्यता मिली है और स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की मांग मजबूत हुई है।
घर की सजावट के सामान, दिवाली पूजा की सामग्री, मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीवार पर टांगने वाली वस्तुएं, हस्तशिल्प और शुभ-लाभ और ओम जैसे पारंपरिक शुभ प्रतीक, और उन उत्पादों में शामिल हैं जिनकी मांग देखी जा रही है। देवी-लक्ष्मीो और भगवान गणेश की पूजा से संबंधित वस्तुएं, साथ ही स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और कुशल श्रमिकों द्वारा निर्मित सजावटी उत्पाद भी त्योहारी बिक्री में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
इनके अलावा, कई अन्य क्षेत्रों (एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, रसोई के बर्तन, उपहार वस्तुएं, मिठाई, स्नैक्स, घरेलू साज-सज्जा, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े, फैशन परिधान, जूते, घड़ियां, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन, सौंदर्य उत्पाद, मोबाइल फोन और सहायक उपकरण शामिल) में भी अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
त्योहारी मांग पैदा करने वाले अन्य क्षेत्रों में बर्तन, निर्माण सामग्री, लकड़ी और प्लाईवुड, पेंट और कांच, दूध और डेयरी उत्पाद, किराना, अनाज, खाद्य तेल, दालें, साइकिल और सहायक उपकरण, दीवार घड़ियां, गोटा-जरी, साड़ियाँ और पोशाक सामग्री शामिल हैं।
सीटीआई ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी त्योहारी सीजन में लगभग 80,000 करोड़ रुपए के कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारियों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यापारिक नुकसान हुआ।
गोयल ने कहा कि अब व्यावसायिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और त्योहारी खरीदारी के लिए दिल्ली भर के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है।
उन्होंने बताया कि चांदनी चौक, दरीबा कलां, मालीवाड़ा, सदर बाजार, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, वज़ीरपुर, पीतमपुरा, राजौरी गार्डन, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, यूसुफ सराय, लाजपत नगर, प्रीत विहार, शाहदरा और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न कंपनियों के ऑटोमोबाइल शोरूम भी त्योहारी अवधि के दौरान अच्छी बिक्री दर्ज कर रहे हैं।
ग्राहक मोबाइल फोन, उपहार, सजावटी सामान, सूखे मेवे, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू साज-सज्जा सहित कई तरह के उत्पाद खरीद रहे हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी में खरीदारी गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र एटीएस की बड़ी कार्रवाई, ठाणे के ठाकुर्ली से 10 लाख के इनामी नक्सली को किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र एटीएस ने कार्रवाई करते हुए ठाणे जिले के ठाकुर्ली इलाके से एक नक्सली को गिरफ्तार किया है। यह नक्सली झारखंड के जंगलों का रहने वाला है। सूत्रों ने बताया कि यह पिछले 10 दिनों से ठाकुर्ली में रह रहा था। इस नक्सली पर 10 लाख रुपये का इनाम झारखंड सरकार ने रखा था। आरोपी को शनिवार को एटीएस कोर्ट में पेश करेगी।
गिरफ्तार नक्सली का नाम संजय सरोज यादव उर्फ संजय गोदराय उर्फ बुधराम है। इसकी उम्र 45 साल है। यह नक्सली यहां क्यों और किस मकसद से आया था, इसकी जांच की जा रही है।
एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वह ठाकुर्ली में किसी संपर्क में था, क्या किसी संगठन के लिए काम कर रहा था या फिर यहां छिपने के इरादे से आया था। पिछले 10 दिनों में उसकी गतिविधियों और मिलने-जुलने वाले लोगों की भी जांच हो रही है।
इससे पहले 24 अक्टूबर को, महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने मुंबई के माहिम इलाके से 33 वर्षीय एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था। उस पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने का शक था।
आरोपी की पहचान मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के रूप में हुई थी। उसे एक गुप्त सूचना के आधार पर महाराष्ट्र एटीएस की कालाचौकी यूनिट ने माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से पकड़ा गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी रैपिडो राइडर और इत्र विक्रेता के तौर पर काम करने की आड़ में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहा था। एटीएस ने बताया था कि वह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सांप्रदायिक नफरत और राष्ट्र-विरोधी भावनाएं फैलाने की कोशिश कर रहा था। जांच टीम को उसके मोबाइल फोन से ऐसी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी मिली थी।
एजेंसी के मुताबिक, आरोपी एक टेलीग्राम ग्रुप चलाता था। आरोप है कि उसने 1 जून को इस ग्रुप पर जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भड़काऊ ऑडियो भाषण अपलोड किए थे, जो बाबरी मस्जिद और अन्य मुद्दों से जुड़े थे। एटीएस ने यह भी दावा किया कि वह ‘इब्न-ए-कासिम’ नाम के एक पाकिस्तान-समर्थित चरमपंथी टेलीग्राम चैनल का सक्रिय सदस्य था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो तेल टैंकरों में आग, नियमों के उल्लंघन पर बारूदी सुरंगों से टकराए

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार को कहा कि नियमों का उल्लंघन कर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) से टकरा गए, जिसके बाद उनमें आग लग गई।
आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार एजेंसी सेपाह न्यूज के बयान के अनुसार, उसकी नौसेना ने कहा कि दोनों जहाजों ने अपने नेविगेशन और पहचान संबंधी सिस्टम बंद कर दिए थे। वे जलडमरूमध्य से एक ‘अनधिकृत’ रास्ते के जरिए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें अमेरिकी सेना का समर्थन प्राप्त था लेकिन रास्ते में बारूदी सुरंगों से टकराने के कारण उनकी कोशिश नाकाम हो गई।
नौसेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अभी बंद है और जब तक अमेरिका ईरान द्वारा रखी गई सात शर्तों को नहीं मानता, तब तक वहां की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से तेल टैंकरों को इस बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर करने की कोशिशों से केवल लगातार और शर्मनाक हार ही मिलेगी।
गुरुवार को भी आईआरजीसी ने बताया था कि पिछली रात दो अलग-अलग घटनाओं में तीन जहाजों, जिनमें दो सुपरटैंकर शामिल थे, में आग लग गई थी। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में स्थित एक गैरकानूनी और अनधिकृत मार्ग से गुजर रहे थे।
एक घटना में एक तेल टैंकर उस गैरकानूनी रास्ते से गुजरते समय नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकरा गया और उसमें आग लग गई। दूसरी घटना में एक अन्य तेल टैंकर, जो उसी रास्ते से जलडमरूमध्य छोड़ रहा था, आग लगने के बाद रुक गया। उसकी मदद के लिए पहुंचे एक टगबोट (खींचने वाली नाव) में भी आग लग गई।
आईआरजीसी ने एक अलग अभियान का भी जिक्र किया। उसके अनुसार, उसकी नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाई ने घुसपैठ करने वाले दो मानव रहित लड़ाकू ड्रोन पर नियंत्रण हासिल कर लिया और उन्हें बिना नुकसान के सुरक्षित उतार लिया।
आईआरजीसी ने अमेरिकी सरकार पर आरोप लगाया कि वह जहाजों को नियमों का उल्लंघन करने और बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके कारण अमेरिका और उसके पश्चिम एशियाई सहयोगियों पर बीमा की भारी लागत पड़ रही है, जिसका बोझ अंततः अमेरिकी करदाताओं को उठाना पड़ रहा है।
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