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Tuesday,03-November-2026
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प्रवासी मजदूरों की जिंदगी बदलने में लगे नवनीत सहगल

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Navneet-Sehgal

वह अपने काम की वजह से पहचाने जाते हैं। विभाग कोई भी हो, अपनी कार्यशैली की वजह से कुछ दिनों में वह सुर्खियों में आ ही जाते हैं। अपनी खूबियों के नाते अब तक वह कई सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

बात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल की हो रही है। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग व निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के प्रमुख सचिव हैं। कोरोना के कारण जारी लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों से अपनी रोजी-रोटी छोड़ घर लौटे प्रवासी श्रमिकों व कामगारों को स्थानीय स्तर पर उनके हुनर के अनुसार रोजगार देने की अपेक्षा के कारण उनका विभाग इस समय खासा महत्वपूर्ण हो गया है। चूंकि एमएसएमई में न्यूनतम पूंजी, कम जोखिम और कम इन्फ्रास्टक्चर में सर्वाधिक रोजगार देने की संभावना है। केंद्र सरकार भी मौजूदा समय में इस सेक्टर की अहमियत से वाकिफ है। यही वजह है कि केंद्र ने इस सेक्टर को तीन लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि प्रदेश की सर्वाधिक आबादी और देश में सर्वाधिक (14 फीसद) एमएसएमई इकाईयों की संख्या के मद्देनजर पैकेज का सर्वाधिक हिस्सा भी उप्र को ही मिले। फिलहाल विभाग के प्रमुख हाकिम नवनीत सहगल मुख्यमंत्री की मंशा को परवान चढ़ाने में जुटे हैं।

आईएएनएस से एक विशेष वार्ता में सहगल ने बताया, “एमएसएमई का पहिया तेजी से घूमे, मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार इसमें अधिकतम लोगों को रोजगार मिले और इनके बूते उप्र कई उत्पादों के उत्पादन का हब बने, इसके लिए हर संभव प्रयास हो रहे हैं। इस क्षेत्र की समस्याओं की पहचान और उद्यमियों से संवाद के लिए हाल ही में साथी एप लांच किया गया। एप से हमने योजनाओं का लिंक दिया है। इससे योजनाओं की जानकारी पारदर्शी हो गयी। सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या पूंजी की है। इसके लिए हम बैंकर्स से लगातार बात कर रहे हैं। इसके नतीजे भी सकारात्मक रहे हैं। केंद्र से आर्थिक पैकेज की घोषणा होने के 24 घंटे के भीतर है ऑनलाइन लोन मेला के जरिए 57 हजार से अधिक उद्यमियों को ऋण मुहैया कराना इसका सबूत है।”

सहगल ने बताया कि जून में एक लाख और जुलाई-अगस्त में सवा-सवा लाख उद्यमियों को ऋण मुहैया कराने के बारे में भी बैंकर्स से सहमति बन चुकी है। स्थिति सामान्य होने पर इसके लिए जगह-जगह लोन मेले भी लगेंगे। क्षमता विस्तार और तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के साथ हम सरकारी विभाग बकाया दिलाने या जीएसटी को रिफंड कराने में भी मदद कर रहे हैं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “यह आशंका निराधार है कि केंद्र द्वारा एमएसएमई का दायरा बढ़ाने से छोटी ईकाइयां प्रभावित होंगी। हम सबको साथ लेकर चलेंगे। उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में इस सेक्टर में 10-12 लाख लोग समायोजित हो जाएंगे।”

उन्होंने बताया, “योगी सरकार की चौंपियन स्कीम, एक जिला एक उत्पाद के तहत हमने 20 सेक्टरों की पहचान की है। मसलन बनारस का सिल्क, भदोही की कालीन, कानपुर का चमड़ा, मुरादाबाद के पीतल के सामान, सहारनपुर के लकड़ी के सामान, अलीगढ़ का हार्डवेयर, बरेली का हैंडीक्राफ्ट, लखनऊ का चिकनकारी और गोरखपुर का टेराकोटा आदि। ये उत्पाद खुद में ब्रांड हैं। संबंधित जिलों में इन उत्पादों के क्लस्टर भी हैं। यहां के उत्पाद गुणवत्ता और कीमत में और प्रतिस्पद्र्घी बनें, इसके लिए हर संभव मदद दी जा रही है। इसके अलावा नोएडा के गारमेंट हब को और बेहतर बनाया जाएगा। फार्मा और चिकित्सा उपकरणों के फार्म स्थापित करने पर भी केंद्र और प्रदेश सरकार में बात चल रही है।

यह पूछने पर कि अभी तक कितने प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिया गया है, उन्होंने बताया, “दूसरे प्रदेशों से आने वाले श्रमिकों को उनके हुनर के अनुसार स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता है। हमने 2़ 80 लाख ऐसे लोगों के नाम अलग- अलग सेक्टर के उद्यमियों को दे दिया है। उनको रोजगार मिलने की प्रक्रिया शुरू भी हो गयी है। अभी नोएडा के गारमेंट हब से भी दो लाख लोगों की मांग आयी है, जितने लोग उपलब्ध हैं उनको भेज रहे हैं। स्किल मैपिंग के अनुसार सूची अपडेट होने के साथ ही इकाईयों की मांग के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराएंगे। एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने की योजना के पीछे यही मकसद है।”

एक अन्य सवाल के जवाब में प्रमुख सचिव ने बताया कि कोरोना काल में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा भारी मात्रा में फेस मास्क बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खादी के छह लाख मीटर कपड़ों से बने 50 लाख मास्क में से हम 40 लाख बेच भी चुके हैं।

राजनीति

दीया मिर्जा के दीपावली वीडियो पर सियासी घमासान, शिवसेना ने किया विरोध तो एनसीपी आई सपोर्ट में

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बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा अभिनेत्री दीया मिर्जा का पर्यावरण-अनुकूल और पटाखा-मुक्त दीपावली को बढ़ावा देने वाला जागरूकता वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर शिवसेना के नेता आनंद दुबे ने वीडियो का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो अभिनेत्री दीया मिर्जा के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।

शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि कलाकार लोगों को ज्ञान देने के बजाय टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, “देखिए, सनातन इतना महान है कि उसे दीया मिर्जा या किसी से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली का पावन पर्व सभी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा त्योहार होता है। हमें दीपावली का पर्व कैसे और किस तरह से मनाना है, ये किसी और से जानने की जरूरत नहीं है। हमें अच्छी तरह से अपनी संस्कृति के बारे में पता है और यह भी पता है कि पर्यावरण की किस तरह से रक्षा करनी है।”

उन्होंने कहा कि कलाकार टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम अपना काम कर लेंगे। हम अपनी परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को हमेशा आगे रखकर चलते हैं। तो हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है कि किस तरह से त्योहार मनाना चाहिए।”

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र परिवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का कहना है कि दीया मिर्जा ने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “दीया मिर्जा ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी नहीं किया है, बल्कि बीएमसी के किसी इंचार्ज ने उन्हें वीडियो बनाने के लिए अप्रोच किया था और दीया मिर्जा ने वीडियो बना दी, तब कहीं जाकर बीएमसी के हैंडल पर वीडियो डाली गई। जब दीया मिर्जा को अप्रोच किया जा रहा था, तब बीएमसी की मेयर ऋतु रावडे को इस बात की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने उस समय कुछ भी क्यों नहीं कहा था? इसका मतलब है कि बीएमसी में भी अलग-अलग ग्रुप बन रहे हैं, जो मेयर को कुछ बताते नहीं हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह का वीडियो माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे ने भी बनाया था। दोनों ने भी वही बात कही थी। इस वीडियो को लेकर बेवजह विवाद बढ़ाया जा रहा है। देखिए, दीपावली का त्योहार हम सभी मनाते हैं। यह खुशी का पर्व है, तो जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस तरह की बातें कही जाती हैं, तो यह गलत है। दीया मिर्जा ने कोई गलती नहीं की, उन्हें सिर्फ बताया गया था कि ये हाई कोर्ट के आदेश हैं। बीएमसी ने वही बात दीया मिर्जा समेत सभी कलाकारों से कहलवाई, लेकिन भाजपा बात का बतंगड़ बना रही है।”

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राजनीति

तमिलनाडु में नई तमिल फिल्मों को बड़ी राहत, रिलीज के पहले हफ्ते में रोजाना 6 शो की मंजूरी

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तमिलनाडु सरकार ने फिल्म उद्योग को बड़ी राहत देते हुए नई तमिल फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के सभी सिनेमाघरों में नई रिलीज होने वाली तमिल फिल्मों के लिए रिलीज की तारीख से एक सप्ताह तक प्रतिदिन छह शो (सुबह 6:00 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे के बीच) चलाने की अनुमति देने के आदेश जारी किए हैं।

यह फैसला तमिल फिल्म एक्टिव प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और तमिलनाडु थिएटर एवं मल्टीप्लेक्स ओनर्स एसोसिएशन की मांगों पर विचार करने के बाद लिया गया। संगठनों ने सरकार से नई फिल्मों के प्रदर्शन के लिए शो की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था।

वर्तमान में तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियम, 1957 के तहत सिनेमाघरों को जारी ‘सी’ फॉर्म लाइसेंस की शर्तों के अनुसार प्रतिदिन चार शो प्रदर्शित करने की अनुमति है, हालांकि राज्य सरकार पहले से ही नई तमिल फिल्मों को रिलीज के बाद सात दिनों तक प्रतिदिन पांच शो चलाने की विशेष अनुमति दे रही थी। इसके अलावा स्थानीय त्योहारों, सार्वजनिक अवकाशों तथा सप्ताहांत पर भी पांच शो के प्रदर्शन की व्यवस्था लागू थी।

फिल्म उद्योग की मांग पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियमों में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया। इसके तहत अब नई तमिल फिल्मों को रिलीज की तारीख से सात दिनों तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे तक अधिकतम छह शो प्रदर्शित किए जा सकेंगे।

इससे पहले तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री विजय ने उच्चस्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया। यह समिति पूर्व पुलिस महानिदेशक जेके त्रिपाठी, आईपीएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए सिफारिशें देना है। यह फैसला थेनी जिला जेल से हाल ही में 17 कैदियों के फरार होने की घटना के बाद लिया गया है।

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राष्ट्रीय समाचार

मध्य प्रदेश: राज्यसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का नामांकन खारिज

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मध्य प्रदेश में 12 नवंबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए मंगलवार को जांच के दौरान कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन खारिज कर दिया गया। इससे भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को चुनौती देने की विपक्षी दल की कोशिश को बड़ा झटका लगा है।

राजकुमार लोहानी ने नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन, सोमवार को कांग्रेस विधायकों के समर्थन से अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे।

लोहानी का नामांकन इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अनिवार्य ‘फॉर्म 26’ हलफनामा जमा नहीं किया था। इस हलफनामे में उम्मीदवार की संपत्ति, देनदारियों, शैक्षणिक योग्यता और यदि कोई आपराधिक रिकॉर्ड हो तो उसका विवरण देना होता है।

लोहानी ने कमियों को सुधारने का मौका मांगा। उन्होंने झारखंड में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का उदाहरण दिया, जिन्हें अपने नामांकन पत्रों में सुधार करने की अनुमति दी गई थी।

कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, जो लोहानी के प्रस्तावकों में से एक थे, ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पुरी के नामांकन हलफनामे पर भी आपत्तियां जताईं।

कटारे ने मंगलवार को तीन आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री की पत्नी का नाम न बताने, विदेशी मुद्रा में कुछ विदेशी संपत्तियों की घोषणा करने और हलफनामे के नोटरीकरण में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।

कटारे ने प्रेस से बात करते हुए कहा, “हमने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने इन तीनों बिंदुओं पर आपत्तियां जताई हैं। हमें बहुत उम्मीद तो नहीं है, लेकिन देखते हैं कि रिटर्निंग ऑफिसर क्या फैसला लेते हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुरी के हलफनामे में जिनेवा में एक अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों का विवरण ठीक से नहीं दिया गया है।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के कारण जरूरी हो गया था।

भाजपा ने 28 अक्टूबर को पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया।

230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं। इससे चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को संख्या बल के लिहाज से काफी बढ़त हासिल है।

उपचुनाव के लिए मतदान 12 नवंबर को होना है और उसी दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी।

नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 5 नवंबर है।

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