मनोरंजन
इस मुश्किल समय में पॉडकास्ट ने नया प्रशंसक आधार पाया है
लॉकडाउन ने पॉडकास्ट की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद की है। ओटीटी बिंग और टेलीविजन के साथ, पॉडकास्ट पिछले तीन महीनों में मनोरंजन का एक नया तरीका बनकर उभरा है।
सबसे लोकप्रिय पॉडकास्ट में से कुछ कॉमेडी शो ‘उम्मीद बाय जाकिर खान’, ‘कोरोना से जीतेंगे’, ‘डीआईबॉय करोना’ और ‘साइरस कहते हैं’ हैं। ‘उम्मीद बाय जाकिर खान’ जैसे शो, लोकप्रिय कॉमेडियन जाकिर खान द्वारा संकल्पित और होस्ट किए गए हैं और लाइट मूड में दैनिक जीवन के व्यावहारिक मुद्दों के बारे में बात करते हैं।
जाकिर कहते हैं, “कोरोना वायरस के प्रकोप का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है, प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि इसका प्रभाव संकट की अवधि से बहुत आगे बढ़ जाएगा। इस अशांत और अनिश्चित समय में, आशा और सकारात्मकता से निगेटिविटी दूर करने में मदद मिल सकती है।”
यह देखना दिलचस्प है कि न केवल मजाकिया और मनोरंजक सामग्री वाले चैट शो ने लोकप्रियता हासिल की है, बल्कि हेल्थ टिप्स और डीआईबॉय के शो भी सराहे जा रहे हैं।
‘कोरोना से जीतेंगे’ एक 10-एपिसोड की प्रेरणादायक श्रृंखला है जो मानव जीवन, सरलता और उदारता की कहानियों को उजागर करती है क्योंकि हम अपने जीवनकाल की सबसे बड़ी महामारी से लड़ रहे हैं। ‘डीआईबाय करोना’ एक कॉमेडी सीरीज है जिसमें लॉकडाउन में निडर पात्रों के एक समूह को लेकर बनाया गया है। ‘लव डाइट’ पर, पोषण विशेषज्ञ शिखा शर्मा फिट रहने के लिए पोषण और आहार के बारे में सुझाव देती हैं।
आधिकारिक रिपोटरें में हर महीने लगभग 20 प्रतिशत श्रोता की वृद्धि दिखाई देती है। आईवीएम पॉडकास्ट के संस्थापक अमित दोषी कहते हैं, “लोगों के पॉडकास्ट सुनने के तरीके में विकास हुआ है। इससे पहले लोग यात्रा के दौरान, वर्कआउट या काम करने के दौरान ही सुनते थे लेकिन लॉकडाउन के दौरान लोग यात्रा नहीं कर रहे हैं लेकिन घर पर काम करते हुए पोडकॉस्ट सुनने वालों में खासी वृद्धि हुई है। “
मनोरंजन
सोनाली बेंद्रे ने बताया कैंसर से लड़ने का अलग नजरिया, बोलीं-मैंने इसे जंग की तरह नहीं देखा

अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे हाल ही में मराठी क्विज शो ‘कोण होणार करोडपति’ के प्रीमियर में पहुंचीं, जिसे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित होस्ट कर रही हैं। शो में हुई बातचीत के दौरान अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने अपने कैंसर बैटल पर खुलकर बात की।
अभिनेत्री ने बताया कि इस मुश्किल दौर में उन्होंने अपने शरीर से प्यार करना सीखा और इस फेज से काफी कुछ सीखा। बातचीत के दौरान माधुरी ने सोनाली के कैंसर से लड़ने के हौसले और इस कठिन दौर में उनकी हिम्मत की तारीफ की। माधुरी ने सवाल पूछते हुए कहा, “आपने जिंदगी में कई अलग-अलग अनुभव देखे हैं और जब आपने कैंसर को मात दी, तब हमने आपका एक नया रूप देखा। हमने आपको एक मजबूत सोनाली के रूप में उभरते हुए देखा।”
इस पर अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे कहती हैं कि उन्होंने कभी भी कैंसर को लड़ाई के तौर नहीं देखा था, बल्कि अपने शरीर को समझने और इससे कुछ सीखने पर ध्यान दिया था। उन्होंने कहा, “हम हमेशा कहते हैं कि किसी ने कैंसर पर जीत हासिल कर ली, लेकिन उस वक्त मेरा इरादा इससे उबरने का नहीं था बल्कि, यह समझने का था कि ऐसा क्यों हो रहा है और इससे मैं क्या सीख सकती हूं।”
सोनाली बेंद्र ने माधुरी दीक्षित को बताया कि कैंसर के दौरान उन्हें जिंदगी के कई अनुभव मिलें। उन्होंने कहा, ” यकीन मानिए, मैंने इससे वाकई बहुत कुछ सीखा और मैंने इसे इसी नजरिए से देखा।”
सोनाली ने यह भी बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि लड़ाई और जीतने जैसी भाषा कभी-कभी अपने ही शरीर के साथ एक टकराव पैदा कर देती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जब हम कहते हैं कि हमने किसी चीज पर जीत हासिल कर ली है, तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है जैसे ये एक लड़ाई है। इसमें कहीं न कहीं एक निगेटिविटी आ जाती है और आखिर है तो ये हमारा ही शरीर, है ना? कैंसर सेल्स भी तो हमारे ही सेल्स हैं। तो हम खुद से ही कैसे लड़ सकते हैं?”
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सोशल मीडिया ट्रोलिंग को ऐसे हैंडल करते हैं अमिताभ बच्चन, बताया क्यों लिखना कर दिया कम

सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग अब मशहूर हस्तियों (सेलेब्स) के जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन चुकी है। चाहे कोई छोटा कलाकार हो या बड़ा, हर किसी को कभी न कभी इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसी बीच, महानायक अमिताभ बच्चन ने भी सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में आए कंटेस्टेंट विनम्र ने अभिनेता से नेगेटिविटी से निपटने के लिए उनसे सलाह मांगी, तब अभिनेता ने बताया कि जेन जी के लिए आलोचनाओं को संभालना अक्सर मुश्किल हो जाता है। शो के दौरान विनम्र ने मेगास्टार से कहा, “मैं तो आपसे यह सवाल पूछना चाहता हूं कि सोशल मीडिया पर आप आलोचना को हैंडल कैसे करते हैं? जैसे मेरी ऐज ग्रुप के लोगों को क्रिटिसिज्म बिल्कुल हैंडल करना नहीं आता और नहीं हो पाता।”
अभिनेता ने बताया कि कैसे शुरुआत में वे सोशल मीडिया को अपने दिल की बात खुलकर कहने का एक जरिया मानते थे। उन्होंने आगे बताया कि यूजर्स के कमेंट्स पढ़ने के बाद उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। अभिनेता ने बताया, “पहले हमने सोचा कि सोशल मीडिया पर हम बिना सोचे समझे दिल की बात बोल सकते हैं। उसके बाद, जब हमने इसके कमेंट पढ़ने शुरू किया, तो हमने भी इस तरह से लिखना बंद कर दिया।”
अभिनेता ने आगे बताया, “हमारे लिखे गए पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोग ‘अपने आप को क्या समझता है रे तू बुढ़ऊ… ऐसे क्यों बोल रहा है?’ तो ऐसी-ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे देखकर बहुत अजीब लगता है और हमने अब इस तरह से लिखना ही छोड़ दिया।”
मेगास्टार ने अपनी बात को हल्के-फुल्के अंदाज में खत्म करते हुए कहा, “और भाईसाहब एक बात बताएं आपको? जब से कम लिखना कर दिया है, हमारे फॉलोअर्स बढ़ते चले जा रहे हैं।”
बिग बी की बात सुनकर पूरे स्टूडियो का माहौल बदल गया, सभी लोग अभिनेता की बात सुनकर हंसने लगे।
बता दें, अमिताभ बच्चन ने साल 2008 में अपना पर्सनल ब्लॉग लिखना शुरू किया था और पिछले कई सालों से वे अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक्टिव रहे हैं।
मनोरंजन
नाना पाटेकर को याद कर भावुक हुए पवनदीप राजन, बोले- ‘दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे’

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है। कई कलाकार उनके काम के साथ-साथ समाज में उनके योगदान को भी याद कर रहे हैं। गायक पवनदीप राजन ने भी नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी और कहा कि नाना भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनसे मिली सीख आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
आईएएनएस से बातचीत में पवनदीप राजन ने कहा, ”हमारे बीच के बड़े कलाकार नाना पाटेकर हमसे काफी दूर चले गए हैं। ये तो विधि का विधान है, ऐसा सबके साथ होना ही है। उनके जाने के बाद ऐसा महसूस नहीं होता कि वह हमेशा के लिए दुनिया से चले गए हैं। उनकी फिल्मों को देखने पर ऐसा लगता है, जैसे वह आज भी हमारे बीच मौजूद हैं।”
उन्होंने आगे कहा, ”नाना पाटेकर लोगों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे। उन्होंने केवल अपना शरीर त्यागा है, लेकिन उनका काम और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी।”
पवनदीप ने नाना पाटेकर के व्यक्तित्व के उस पहलू का भी जिक्र किया जो उन्हें आम लोगों से जोड़ता था। उन्होंने कहा, “नाना आम इंसान की तरह रहते थे और उन्हें खेती करना पसंद था। खेती से उनका लगाव उनके सादगी भरे स्वभाव को दिखाता है। युवाओं ने नाना से काफी कुछ सीखा है और आने वाली पीढ़ियां भी उनके जीवन और काम से बहुत कुछ सीखेंगी।”
बता दें कि नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने साल 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘अंकुश’, ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अपहरण’, ‘टैक्सी नंबर 9211’, और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में शानदार काम किया। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। नाना पाटेकर को साल 1991 में पद्मश्री से नवाजा गया था। इसके अलावा, मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे!’ ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
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