अंतरराष्ट्रीय
दूसरा टेस्ट : दूसरे दिन का खेल खत्म, श्रीलंका का स्कोर 28/1, भारत को जीतने के लिए 9 विकेट की जरूरत
यहां एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में रविवार को दूसरे और अंतिम डे-नाइट टेस्ट में दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने सात ओवरों में एक विकेट पर 28 रन बना लिए हैं। श्रीलंकाई टीम को मैच जीतने के लिए अभी भी 419 रनों की जरूरत है। वहीं, भारत को क्लीन स्वीप करने के लिए नौ विकेट चटकाने की जरूरत है। क्रीज पर कप्तान दिमुथ करुणारत्ने (नाबाद 10) और कुसल मेंडिस (नाबाद 16) मौजूद है। जसप्रीत बुमराह ने एक विकेट हासिल की। दूसरी पारी में भारत द्वारा 303/9 रनों पारी घोषित और 446 रनों की बढ़त लेने के बाद, बल्लेबाजी के लिए उतरी श्रीलंकाई टीम को पहले ही ओवर में झटका लगा, जब बुमराह ने लाहिरु थिरिमाने बिना खाता खोले ही एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। तीसरे नंबर पर मेंडिस ने कप्तान करुणारत्ने के साथ मिलकर दिन खत्म होते तक क्रीज पर नाबाद रहे, जिससे श्रीलंका ने सात ओवरों में एक विकेट पर 28 रन बना चुके हैं। टीम को अभी भी जीतने के लिए 419 रनों की जरूरत है। वहीं भारत को पिंक बॉल टेस्ट मैच को अपने नाम करने के लिए नौ विकेट चटकाने की जरूरत है।
दूसरे दिन पहले सत्र में आधे घंटे के खेल के भीतर श्रीलंका की पहली पारी 109 रनों समाप्त करने के बाद, भारत को अच्छी शुरुआत मिली, क्योंकि रोहित शर्मा और मयंक अग्रवाल ने दूसरी पारी में तेज गति से रन बनाए। दोनों भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने कुछ खूबसूरत शॉट खेले। विशेष रूप से, मयंक आक्रामक रूप से बल्लेबाजी कर रहे थे और उन्होंने अपनी पारी के दौरान पांच चौके लगाए।
लेकिन 22 रन पर एम्बुलडेनिया के शिकार होने से पहले, मयंक ने रोहित के साथ 42 रनों की साझेदारी की। हालांकि, नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने आए हनुमा विहारी और रोहित ने रनों को बनाना जारी रखा और सुनिश्चित किया कि मेजबान टीम के और विकेट न गिरे। उन्होंने चाय पर 204 रनों की बढ़त बढ़ा दी, जिससे भारत की स्थिति मजबूत हो गई।
चाय ब्रेक से 61/1 आगे खेलते हुए कप्तान रोहित शर्मा और हनुमा विहारी ने असमतल उछाल वाली पिच पर संभल कर बल्लेबाजी की और दोनों ने कुछ शानदार शॉट खेले। दोनों बल्लेबाजों के बीच 119 गेंदों में 56 रनों की साझेदारी हुई, लेकिन 98 के स्कोर पर भारत को दूसरा झटका लगा, जब रोहित ने चार चौके 79 गेंदों में 46 रन बनाकर धनंजय डी सिल्वा की गेंद पर एंजेलो मैथ्यूज को कैच थमा बैठे।
इसके बाद, हनुमा भी चार चौके की मदद से 79 गेंदों में 35 रन बनाकर जयविक्रमा की गेंद पर बोल्ड हो गए। जल्द ही जयविक्रमा ने विराट कोहली (13) को अपना शिकार बना लिया, जिसके बाद भारत का स्कोर चार विकेट नुकसान पर 139 जोड़े। पांचवें और छठे नंबर पर आए ऋषभ पंत और श्रेयस अय्यर ने शानदार बल्लेबाजी की।
इस दौरान पंत कुछ बड़े-बड़े शॉट लगाए, जिससे वह 28 गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक बनाने वाले भारतीय क्रिकेटर बन गए। उन्होंने 40 साल पुराने महान कपिल देव के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस बीच, श्रेयस भी दूसरे छोर पर महत्वपूर्ण बनाए। दोनों के बीच 38 गेंदों में 45 रनों की साझेदारी होने के बाद पंत सात चौके और दो छक्कों की मदद से 31 गेदों में 50 रन बनाकर जयविक्रमा की गेंद पर आउट होकर पवेलियन लौट गए।
इसके बाद, सातवें नंबर पर आए रवींद्र जडेजा (10) और श्रेयस (18) डिनर तक टिके रहे, जिसे इस समय तक भारत का स्कोर 42 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 199 रन था। श्रीलंका के खिलाफ भारत ने 342 रनों की बढ़त बना ली है।
डिनर ब्रेक 199/5 से आगे खेलते हुए भारत ने तेजी से अपनी लीड को बढ़ाना शुरू किया। इस दौरान श्रेयस और रवींद्र जडेजा श्रीलंका के गेंदबाजों पर हावी रहे और शानदार शॉट खेले। इस बीच, दूसरी पारी में भी श्रेयस ने समझदारी का परिचय देते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया, जिससे दोनों के बीच दूसरी पारी में सबसे ज्यादा 101 गेंदों में 63 रनों की साझेदारी हुई। लेकिन जडेजा (22) विश्वा फनार्डो की गेंद पर बोल्ड हो गए, जिससे 58.5 ओवरों में भारत छह विकेट के नुकसान पर 247 रन बना लिए।
इस बीच, भारत की बढ़त 400 के पार हो गई। इसके आठवें नंबर पर आए आर. अश्विन ने थोड़ी देर के साथ श्रेयस का साथ दिया और 13 रन बनाकर जयविक्रमा की गेंद पर डिकवेला को कैच थमा कर पवेलियन लौट गए। अगले ओवर में श्रेयस भी नौ चौके की मदद से 87 गेंदों में 67 रन बनाकर एम्बुलडेनिया की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए। इसके बाद, अक्षर पटेल (9) बोल्ड होते ही भारत ने 68.5 ओवरों में नौ विकेट गंवाकर 303 रनों पर पारी घोषित कर दी, जिससे भारत की बढ़त 446 रन हो गई और अब श्रीलंका यह मैच जीतने के लिए 447 रन बनाने होंगे।
संक्षिप्त स्कोर :
भारत 252 और 303/9 दूसरी पारी घोषित (श्रेयस अय्यर 67, ऋषभ पंत 50, प्रवीण जयविक्रमा 4/78, लसिथ एम्बुलडेनिया 3/87) श्रीलंका 109 और सात ओवरों में 28/1 (दिमुथ करुणारत्ने नाबाद 10, कुसल मेंडिस नाबाद 16, जसप्रीत बुमराह 1/9)।
अंतरराष्ट्रीय
क्या अमेरिका-इजरायल हमले में घायल हुए ईरान के नए सुप्रीम मोजतबा? राष्ट्रपति ट्रंप ने किया दावा

TRUMP
वॉशिंगटन, 13 मार्च : ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दावे किए जा रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ये दावा किया है कि मोजतबा जिंदा तो हैं, लेकिन घायल हैं।
बता दें, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले में पहले दिन ही ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया। ईरान का सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद से मोजतबा कहीं भी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ये दावा कर रहे हैं कि मोजतबा जिंदा तो हैं, लेकिन वे घायल हैं।
ट्रंप का कहना है कि उन्हें लगता है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा हैं लेकिन ‘घायल’ हैं। इससे पहले ईरान के सरकारी चैनल ने इस बात की जानकारी दी थी कि मोजतबा को हल्की चोटें आई हैं। अली खामेनेई की मौत की खबर जब सामने आई थी, तब ये चर्चाएं भी हो रही थीं कि मोजतबा की भी इजरायल-अमेरिकी हमले में मौत हो गई।
हालांकि, बाद में जानकारी आई कि हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ, मोजतबा की पत्नी, उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में अली खामेनेई के पोते और बेटी की भी मौत की जानकारी सामने आई।
साइप्रस में ईरान के राजदूत अलिरेजा सालारियन ने द गार्जियन को बताया कि मोजतबा खामेनेई के पैरों, हाथों और बांहों में चोटें आई हैं। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि उनके पैरों और बांहों में चोटें आई हैं। मुझे लगता है कि वह हॉस्पिटल में हैं क्योंकि उन्हें चोट लगी थी।”
ईरान के बाहर की अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि मोजतबा का पैर टूट गया है और चेहरे पर हल्की चोटें आई हैं, जिसमें उनकी बाईं आंख के आसपास चोट के निशान और ऊपर की ओर कटा हुआ है।
अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। रविवार को एक पादरी सभा द्वारा चुने जाने के बाद से खामेनेई को ईरानियों ने नहीं देखा है। सुप्रीम लीडर बनने के बाद उनकी तरफ से जारी पहले बयान को गुरुवार को ईरानी टेलीविजन प्रेजेंटर ने पढ़ा।
एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि नए नियुक्त सुप्रीम लीडर को हल्की चोटें आई हैं; सरकारी टेलीविजन द्वारा हमले में घायल बताए जाने के बाद उनका ऑपरेशन जारी है।
अंतरराष्ट्रीय
पीएम नेतन्याहू ने ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा को आईआरजीसी की कठपुतली बताया

तेल अवीव, 13 मार्च : ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित नहीं था कि एक बार इजरायल और अमेरिका ऐसे हालात बना देंगे तो ईरान के लोग इस्लामिक रिपब्लिक को गिरा देंगे।
ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा कि आप किसी को पानी तक ले जा सकते हैं; आप उसे पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। वहीं, उन्होंने ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कठपुतली बताया।
ईरान में सत्ता बदलने की संभावना के बारे में पीएम नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टरों से कहा, “हम ऐसा करने के लिए सबसे अच्छे हालात बनाएंगे, जिसमें हवाई हमले भी शामिल हैं, जैसा हमने कल किया था, जैसा हम इन दिनों कर रहे हैं, ताकि (ईरानी लोगों) को सड़कों पर उतरने के लिए जरूरी जगह मिल सके।”
उन्होंने आगे कहा, “हम इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स और बासिज (उनकी सड़कों पर तैनात सेना) उनके चेकपॉइंट्स पर जबरदस्त हमले कर रहे हैं और अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है।”
इजरायली प्रधानमंत्री ने मोजतबा खामेनेई को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कठपुतली बताया, जो सार्वजनिक तौर पर अपना चेहरा नहीं दिखा सकते। दरअसल, ईरान के नए सुप्रीम लीडर युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। सुप्रीम लीडर बनने से पहले भी वह सार्वजनिक रूप से ना के बराबर दिखाई दिए हैं।
सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मोजतबा के सार्वजनिक तौर पर ना दिखने को लेकर माना जा रहा है कि वह एयरस्ट्राइक में घायल हो गए हैं। गुरुवार को, ईरान की सरकारी मीडिया ने मोजतबा खामेनेई का एक विद्रोही बयान पढ़ा गया। रविवार को सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद मोजतबा का यह पहला बयान था, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से उन्हें न तो देखा गया है और न ही सुना गया है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, “मैं इससे इनकार नहीं करता, मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि ईरानी लोग इस शासन को गिरा देंगे।” हालांकि, उन्होंने ईरानी जनता से बात करते हुए कहा, “हमने आपसे कहा था, ‘मदद आ रही है’। खैर, मदद आ गई है और आगे भी आएगी। हम सभी इस शासन के गिरने के नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन एक सत्ता परिवर्तन देश के अंदर से ही हो सकता है।”
ईरामन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को ठहराते हुए पीएम नेतन्याहू ने कहा कि ताकत का इस्तेमाल जरूरी था क्योंकि पिछले जून में 12 दिन चले इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से सरकार अपने न्यूक्लियर हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर वापस लौट आई थी।
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को इजरायल ने चेतावनी दी थी कि वे “मौत के उद्योग” को फिर से बनाने की कोशिश न करें, लेकिन खामेनेई ने इसके बजाय ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को तेज कर दिया और अब हमने खामेनेई को खत्म कर दिया है।
उन्होंने कहा, “अगर हमने तुरंत एक्शन नहीं लिया होता, तो कुछ ही महीनों में ईरान का मौत का उद्योग किसी भी हमले से बच जाता। इसलिए, हम एक साथ लड़ाई के लिए निकले, अमेरिका-इजरायल, ताकि जो हमने शुरू किया था उसे जारी रख सकें और ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोक सकें। ईरान को ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने से रोकना जो इजरायल, अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए खतरा हों। यही हमारा मकसद है।
नेतन्याहू ने कहा कि मौजूदा लड़ाई में, इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है और एक बहुत जरूरी न्यूक्लियर वैज्ञानिक को ढेर कर दिया है और इजरायल के पास इस अभियान के लिए कई हैरान करने वाली चीजें हैं और यह उम्मीद से बेहतर चल रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर, इजरायल एक ऐसी सरकार को रोक रहा है जो उसे (इजरायल को) खत्म करना चाहती थी। हमारे दुश्मन एक पल में गायब नहीं हो रहे हैं, लेकिन हमारी कमाल की कामयाबी देखिए।
जब नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या इजरायल खामेनेई के बेटे और वारिस, मोजतबा खामेनेई के पीछे जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया, “मैं आतंकी संगठनों के किसी भी नेता के लिए जीवन बीमा पॉलिसी नहीं लूंगा।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के अमेरिकी तेल टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत, 15 क्रू सदस्य सुरक्षित निकाले गए

नई दिल्ली/बगदाद, 12 मार्च : बुधवार को इराक के बसरा के पास एक अमेरिकी तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर ईरान ने हमला कर दिया। इस हमले में टैंकर पर काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है। इराक में भारतीय दूतावास ने जानकारी दी।
बगदाद में भारतीय दूतावास ने कहा कि जहाज पर सवार बाकी 15 भारतीय क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया गया और एक सुरक्षित जगह पर ले जाया गया।
यह हमला फारस की खाड़ी में हुआ, जहां इराक के समुद्री इलाके में एक और तेल टैंकर पर हमला होने के बाद उसमें भी आग लगने की खबर सामने आई। ईरान ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि पानी के अंदर ड्रोन हमले में जहाजों को निशाना बनाया गया था।
ईरानी सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी के मुताबिक, इस ऑपरेशन में पानी के अंदर ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरानी ड्रोन ने “फारस की खाड़ी में दो तेल टैंकर उड़ा दिए”। जिन जहाजों पर हमला हुआ, वे माल्टीज के झंडे वाला टैंकर जेफिरोस और मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला सेफसी विष्णु थे। सेफसी विष्णु का मालिकाना हक अमेरिकी की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के पास है, जबकि टैंकर जेफिरोस का मालिक ग्रीस में रहता है।
घटना के बाद, बगदाद में भारतीय दूतावास ने कहा कि वह इराकी अधिकारियों और बचाए गए भारतीय नाविकों के साथ लगातार संपर्क में है।
बगदाद में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “11 मार्च, 2026 को, मार्शल आइलैंड्स के झंडे के नीचे चल रहे अमेरिका के कच्चे तेल के टैंकर सेफसी विष्णु पर इराक के बसरा के पास हमला हुआ, जिसमें दुर्भाग्य से एक भारतीय क्रू मेंबर की जान चली गई। बाकी 15 भारतीय क्रू को तब से सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया है।”
दूतावास ने यह भी पुष्टि की कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और निकाले गए क्रू सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहा है। बयान में आगे कहा गया, “बगदाद में भारतीय दूतावास इराकी अधिकारियों और बचाए गए भारतीय नाविकों के साथ लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद दे रहा है।”
जानमाल के नुकसान पर सहानुभूति व्यक्त करते हुए, मिशन ने दुखी परिवार के प्रति भी संवेदना व्यक्त की। भारतीय दूतावास ने कहा, “दूतावास मृतक क्रू मेंबर के परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।”
यह घटना इलाके में बढ़ते तनाव और समुद्री ट्रैफिक के लिए बढ़ते खतरों के बीच हुई है। इससे पहले, ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को आग लगा देगा। बता दें, होर्मुज स्ट्रेट एक जरूरी समुद्री कॉरिडोर है जिससे दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई आमतौर पर गुजरती है।
तेहरान की चेतावनी के बावजूद, इस रास्ते से कुछ ही शिपिंग ट्रैफिक जारी रहा है, हालांकि सुरक्षा चिंताओं के कारण हालात को देखते हुए कुल मिलाकर आवाजाही में काफी कमी आई है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने कहा कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट में संभावित खतरों का मुकाबला करने के लिए कार्रवाई की है। ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायली सैन्य अभियान अब अपने 12वें दिन में पहुंच गया है और लड़ाई के जल्द खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
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