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Tuesday,26-October-2021
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बाढ़ की चपेट में उत्तर प्रदेश के 24 जिले, 605 गांव

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Floods

 उत्तर प्रदेश में प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते 24 जिलों के करीब 605 गांवों को बाढ़ प्रभावित घोषित कर दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 605 हो गई है।

राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने बताया कि बदायूं, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया जिलों में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

उन्होंने कहा कि औरैया, जालौन, हमीरपुर, बांदा और प्रयागराज जिलों में यमुना खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि बेतवा नदी हमीरपुर में उफान पर है।

उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और इसी तरह गोंडा में कुवानो और उत्तर प्रदेश-राजस्थान सीमा पर चंबल में बह रही है।

हमीरपुर जिले में 75, बांदा में 71, इटावा और जालौन में 67-67, वाराणसी में 42, कौशांबी में 38, चंदौली और गाजीपुर में 37-37, औरैया में 25, कानपुर देहात और प्रयागराज में 24-24, फरु खाबाद में 23, आगरा में 20 और बलिया जिले में 17 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

प्रसाद ने कहा कि मिर्जापुर, गोरखपुर, सीतापुर, मऊ, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, बहराइच, गोंडा और कानपुर जिलों के गांवों में भी बाढ़ आई है।

राहत आयुक्त ने कहा, “राज्य सरकार ने नौ जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की नौ टीमों, 11 जिलों में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 11 टीमों और 39 जिलों में प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की 39 टीमों को राहत और बचाव अभियान के लिए तैनात किया गया है।”

उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने 536 लोगों को बचाया और 504 चिकित्सा टीमों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

इसके अलावा, राज्य में 11,235 बाढ़ चौकियां और 940 बाढ़ आश्रय स्थल बनाए गए हैं और 1,463 नौकाओं को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया है।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच भोजन के पैकेट और सूखा राशन वितरित किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा, “गांवों के साथ-साथ नदी तटबंधों और अन्य संवेदनशील जगहों पर नियमित गश्त की जा रही है। जिला प्रशासन को सामुदायिक रसोई स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। पेट्रोल, डीजल, मिट्टी के तेल और खाद्य पदार्थों जैसी आवश्यक वस्तुओं की बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नियमित आपूर्ति को बनाए रखा जा रहा है।”

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बाढ़ प्रभावित महाराष्ट्र में 89 हजार लोग बेघर

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 बारिश तो थम गई, लेकिन महाराष्ट्र में बारिश और बाढ़ प्रभावित जिलों ने एक गंभीर स्थिति पेश की, जिसमें 89,000 से अधिक लोगों को निकाला गया और केवल इस विचार से जूझना शुरू हो गया कि उनका जीवन का पुनर्निर्माण कैसे किया जाए। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हेलीकॉप्टर से रायगढ़ के लिए रवाना हुए और फिर सड़क मार्ग से महाड़ के पास सबसे ज्यादा प्रभावित तालिये गांव का सर्वेक्षण किया, जहां शुक्रवार को एक पहाड़ी के नीचे 50 से अधिक लोग मारे गए थे।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के अनुसार, रत्नागिरी जिले के चिपलून और खेड़ शहर में पूरी तरह से पानी से भर गया था, दोनों ही भूमि मार्गों से कटे हुए थे क्योंकि वशिष्ठी नदी का पुल बाढ़ में बह गया था।

अभूतपूर्व बारिश के कारण जल स्तर 15-20 फीट (या, इमारतों की दो-तीन मंजिल) से अधिक हो गया, हजारों लोग छतों या ऊपरी बाढ़ में फंसे हुए थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे।

एनडीआरएफ और आईसीजी टीमों को उन्हें बचाने के लिए तैनात किया गया था, जबकि भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने भोजन और दवा के पैकेट गिराए और 1,000 से अधिक को सुरक्षित निकाल लिया गया।

महाबलेश्वर के लोकप्रिय हिलस्टेशन में 110 सेंटीमीटर की शानदार बारिश के साथ, भारी पानी कोयना बांध और कोलतेवाड़ी बांध में चला गया और उनके निर्वहन के कारण वशिष्ठ नदी खतरे के स्तर से ऊपर हो गई, जिसके परिणामस्वरूप कस्बों और गांवों में बाढ़ आ गई।

विभिन्न जिलों में एक दर्जन से अधिक पहाड़ियां और भूस्खलन हुए हैं और कई लापता होने की सूचना है और उन्हें कीचड़ और पत्थरों से बचाने के लिए युद्ध के प्रयास जारी हैं।

राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जहां जल स्तर कम होना शुरू हो गया है और सफाई अभियान शुरू कर दिया गया है।

एसडीएमए ने आज बाढ़, पहाड़ी-पर्ची, भूस्खलन और अन्य बारिश से संबंधित त्रासदियों में 59 अन्य लापता और 38 घायलों के अलावा 76 पर वर्तमान आधिकारिक मौत का अनुमान लगाया।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कोल्हापुर, रायगढ़, सांगली, रत्नागिरी, सतारा, सिंधुदुर्ग, मुंबई और ठाणे थे, जिसमें कुल 890 गांव थे।

एनडीआरएफ की कुल 25 टीमें और आठ स्टैंडबाय पर, भारतीय सेना और भारतीय तटरक्षक बल की तीन-तीन इकाइयां, भारतीय नौसेना की सात और भारतीय वायु सेना की एक, स्थानीय अधिकारियों के अलावा, पिछले 24 घंटों से लगातार बचाव अभियान में लगी हुई है।

एसडीएमए ने कहा कि क्षेत्र में ताजा बारिश शुरू होने के साथ, अधिकारी किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए हाई अलर्ट पर हैं, जबकि स्वास्थ्य अधिकारी बाढ़ के बाद किसी भी बीमारी के संभावित प्रकोप के लिए क्षेत्र पर नजर रख रहे हैं।

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भूस्खलन से तबाह हो गया रायगढ़ का तालिये गाँव, 120 लोगों की आबादी, 49 मरे, 47 लापता

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महाराष्ट्र में भारी बारिश के बाद बाढ़ और भूस्खलन से तबाही मची है। अलग-अलग घटनाओं में अभी तक 136 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। लेकिन सबसे दर्दनाक हादसा रायगढ़ जिले के महाड तालुका के तालिये गांव में हुआ है, जहां 49 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां 12 लोग अभी घायल हैं, जबकि 47 अन्य लापता बताए जा रहे हैं। तस्वीरों में देखिए मंजर.. रायगढ़ के तालिये में भूस्खलन की यह घटना गुरुवार की शाम हो हुई। राहत और बचाव का काम जारी है। यहां के निवासी मिलिंद गंगवाने ने बताया, ‘सरकार और प्रशासन की तरफ से ग्रामीणों को आपदा का अलर्ट नहीं जारी किया गया था। हमारे छोटे से गांव में 120 लोगों की ही आबादी है। पहाड़ से 100 फीट की ऊंचाई से पत्थर गिरा।’

उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन की तरफ से 4-5 दिन पहले सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया गया था लेकिन बारिश कम होने पर वे वापस लौट आए। रायगढ़, सतारा, रत्नागिरी में बाढ़ और भूस्खलन की अलग-अलग घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई है। वहीं तालिये की अंकिता नाम की निवासी ने बताया- मेरा घर टूट गया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। लोगों ने नए घर बनाए थे और उसके लिए लोन भी लिया था। सबकुछ खत्म हो गया। विपक्षी बीजेपी ने सत्तापक्ष के नेताओं और प्रशासन पर समय से ऐक्शन नहीं लेने और घटना के 20 घंटे बाद भी नहीं पहुंचने का आरोप लगाया। वहीं मुंबई से हेलिकॉप्टर के जरिए आई एनडीआरएफ की टीम को प्रशासन की तरफ से लैंडिंग की जगह नहीं मिलने से वापस लौटना पड़ा।

रायगढ़, कोंकण और सातारा में अगले दो दिन के लिए रेड अलर्ट है। कोल्हापुर, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग ऑरेंज अलर्ट पर है। कोल्हापुर की नदी पंचगंगा, रत्नागिरी की काजली और मुचकुंदी, कृष्ण नदी और कोयना डैम के साथ-साथ विशिष्टि नदी अब भी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बारिश के कारण हुए हादसों में मृतकों के घरवालों को 5-5 लाख रुपये की अंतरिम मदद का ऐलान किया है। केंद्र सरकार मृतकों के परिजन को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देगी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंत्रालय के आपात नियंत्रण कक्ष में पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

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महाबलेश्वर में भारी बारिश से रत्नागिरी, रायगढ़ जिलों में तबाही

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महाराष्ट्र के महाबलेश्वर और सतारा जिले के नवाजा में पिछले दो दिनों में हुई अत्यधिक भारी बारिश से राज्य के निकटवर्ती तटीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में, खासकर रत्नागिरि और रायगढ़ जिलों में बाढ़ आ गई है । अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कोंकण क्षेत्र के इन दो जिलों में कई स्थान पानी में डूबे हुए हैं और प्रशासन वहां फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए कदम उठा रहा है।

पुणे में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक के एस होसलिकर ने कहा कि सतारा में लोकप्रिय पर्वतीय क्षेत्र महाबलेश्वर में 22 जुलाई को सुबह साढ़े आठ बजे से 23 जुलाई को देर रात एक बजे तक, करीब 17 घंटों में 483 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इससे पहले 22 जुलाई को समाप्त हो रहे 24 घंटे की अवधि में, इसी मौसम केंद्र ने वहां 461 मिलीमीटर बारिश दर्ज की थी। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 204.4 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश को अत्यधिक भारी बारिश माना गया है।

हालांकि, महाबलेश्वर और नवाजा में राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों द्वारा दर्ज आंकड़े दिखाते हैं कि बारिश इससे कहीं ज्यादा थी।भौगोलिक दृष्टि से, महाबलेश्वर सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला (पश्चिमी घाट) के शीर्ष बिंदुओं में से एक है जो महाराष्ट्र को तटीय क्षेत्र और पठार के बीच विभाजित करता है। इसी प्रकार की भारी वर्षा सतारा जिले में महाराष्ट्र के प्रमुख पन-बिजली संयंत्र कोयना पर स्थापित मौसम केंद्र, नवाजा में भी दर्ज की गई।अधिकारियों ने बताया कि रत्नागिरि जिले में चिपलुन नवाजा के पश्चिम में है जहां इसी अवधि में 300 मिमी से ज्यादा वर्षा दर्ज की गई।

आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “महाबलेश्वर और महाद (रायगढ़ जिले में) के साथ ही नवाजा और चिपलुन में हवाई दूरी ज्यादा नहीं है इसलिए इन शीर्ष बिंदुओं पर भारी बारिश से पानी इन कस्बों की तरफ बहकर आ रहा है।” रायगढ़ जिला कलेक्ट्रेट से एक अधिकारी ने बताया कि महाद तहसील में, पोलादपुर में 22 जुलाई से 23 जुलाई के बीच 305 मिमी बारिश हुई। अगर शुक्रवार को भी बारिश जारी रहती है तो अधिकारियों के लिए तलाश एवं बचाव अभियान चलाना बहुत मुश्किल होगा। रत्नागिरि जिलाधिकारी बी एन पाटिल ने कहा कि यह चिपलुन में पिछले 40 वर्षों में हुई सबसे बुरी बारिश है।

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