राष्ट्रीय समाचार
जम्मू में बस पलटने से 16 यात्री घायल
जम्मू-कश्मीर के जम्मू जिले में मंगलवार को एक बस पलट जाने से कम से कम 16 यात्री घायल हो गए। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।
अधिकारियों ने बताया कि अरनिया से जम्मू आ रही एक बस चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई और सड़क से फिसलकर पलट गई।
अधिकारियों ने कहा, “यह दुर्घटना कल्याण इलाके में हुई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने घायल यात्रियों को अस्पताल पहुंचाया।”
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एप्पल ने फिर तोड़ा रिकॉर्ड, तिमाही में सबसे ज्यादा कमाई: टिम कुक

एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि कंपनी ने भारत समेत हर भौगोलिक क्षेत्र में जून-क्वार्टर के रेवेन्यू रिकॉर्ड बनाए। ये नतीजे सप्लाई चेन में बहुत बड़ी रुकावटों और विदेशी मुद्रा से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद आए।
एप्पल कंपनी ने 109.4 बिलियन डॉलर का तिमाही रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 50.1 प्रतिशत रहा, जिसमें टैरिफ रिफंड से लगभग 2 प्रतिशत अंक का फायदा शामिल है।
प्रति शेयर डाइल्यूटेड अर्निंग 2.02 डॉलर रही, जो पिछले साल के मुकाबले 29 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें टैरिफ रिफंड से 0.11 डॉलर का फायदा भी शामिल है।
टिम कुक ने कहा, “हमने हर भौगोलिक क्षेत्र में जून-क्वार्टर के रेवेन्यू रिकॉर्ड बनाए। हमें अमेरिका, लैटिन अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, भारत, चीन, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया में जून-क्वार्टर के रिकॉर्ड के साथ हर जगह मजबूती देखकर खुशी हुई।”
दुनिया भर में मैक का रेवेन्यू 10.4 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 29 प्रतिशत ज्यादा है। यह जून-क्वार्टर का नया रिकॉर्ड है, जिसकी वजह मैकबुक नियो और मैकबुक प्रो की मजबूत बिक्री रही।
एप्पल ने भारत में एक और रिकॉर्ड रेवेन्यू वाला क्वार्टर दर्ज किया, जिसमें मैक का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। इसकी वजह मैकबुक नियो को जबरदस्त बढ़ोतरी और आईफोन 17 सीरीज की लगातार मजबूत मांग थी, जबकि देश में आईफोन की सप्लाई सीमित रही।
एप्पल के सीएफओ केवन पारेख ने कहा, “जैसा कि टिम ने बताया, इस बार मैक का सबसे शानदार तिमाही रहा। दुनिया भर में बहुत सारे नए लोगों ने मैक खरीदा और पुराने यूजर्स ने भी अपग्रेड किया। इसमें अमेरिका, चीन और भारत के ग्राहक भी शामिल हैं।”
इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, एप्पल ने कीमतें ज्यादातर स्थिर रखी हैं, जो मेमोरी की बढ़ती लागत को संभालने की उसकी क्षमता को दिखाता है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कैलेंडर वर्ष 2026 के दौरान भारत में वॉल्यूम में सिंगल-डिजिट लेकिन वैल्यू में डबल-डिजिट ग्रोथ होगी, और आईफोन की कीमत बढ़ने की बहुत ज्यादा संभावना है। इसके बावजूद, ब्रांड का आकर्षण नए यूजर्स को इकोसिस्टम में लाता रहेगा।”
उन्होंने कहा कि कंपोनेंट की बढ़ती लागत एंड्रॉयड इकोसिस्टम में कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर कर रही है। हालांकि, उम्मीद है कि एप्पल अपने मुख्य हार्डवेयर कैटेगरी में इंडस्ट्री से बेहतर प्रदर्शन करेगा।
राजनीति
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला, बोले- जेन जी को धमकाकर चुप नहीं करा सकते

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जेन जी की आवाज को दबाना चाहती है।
राहुल गांधी ने लिखा, “पीएम मोदी और अमित शाह, आप जेन जी को धमकाकर चुप नहीं करा सकते। पहले आपने उनके हाथ-पैर तोड़े। अब एफआईआर कर रहे हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवा रहे हैं। आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसे लेकर सावधान रहें।”
इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि उनसे कहा गया कि अगर वे गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान पर माफी मांग लें तो उन्हें बोलने दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया।
राहुल गांधी के मुताबिक उन्होंने कई बार लोकसभा अध्यक्ष से सदन में व्यवस्था बहाल करने और उन्हें बोलने देने की अपील की, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य मंत्रियों को बार-बार बोलने का मौका मिला, जबकि उन्हें रोका गया।
राहुल गांधी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई। एक छात्र की आंख में पैलेट लग गया है और उसकी रोशनी जाने का खतरा है। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने एम्स का मेडिकल सर्टिफिकेट देखा है जिसमें पैलेट लगना कन्फर्म हुआ है।
राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाते हुए कहा था, “पैलेट गन का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना नहीं हो सकता। मैंने खुद संसद में अमित शाह को पुलिस अधिकारियों से फोन पर बात करते देखा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को भी लगातार फोन आ रहे थे। इसका मतलब सरकार को पता था कि सड़क पर क्या हो रहा है।”
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करने की तैयारी

हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत एक बड़े सुधार के तौर पर, तमिलनाडु सरकार अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करने जा रही है। इससे मंजूरी की उस बिखरी हुई प्रक्रिया का अंत होगा, जिसकी देरी और कागजी अड़चनों के लिए लंबे समय से आलोचना होती रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से तैयार किए जा रहे सरकारी आदेश को शुक्रवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के साथ समीक्षा बैठक के तुरंत बाद जारी किए जाने की उम्मीद है।
इस प्रस्तावित सिस्टम से नए अस्पतालों के लिए मंजूरी लेने में लगने वाले समय में काफी कमी आने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया कई साल से घटकर कुछ महीने की रह जाएगी। इसके लागू होने के बाद, तमिलनाडु महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स के लिए रेगुलेटरी मंजूरी को आसान बनाने के लिए पहले से ही सिंगल-विंडो सिस्टम मौजूद हैं।
इस घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह सुधार सरकार की उन व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश को तेजी देना और साथ ही रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को ज्यादा पारदर्शी और कुशल बनाना है।
इस पहल से मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर सेवाओं के लिए भारत के प्रमुख डेस्टिनेशन के तौर पर तमिलनाडु की स्थिति और मजबूत होने की भी उम्मीद है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मंजूरी की मौजूदा प्रक्रिया में (खासकर बिल्डिंग और प्रोजेक्ट डिजाइन जमा करने के बाद) अक्सर कई विभाग शामिल होते थे और बहुत ज्यादा देरी होती थी, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी रहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंजूरी लेना मुश्किल हो गया था और कुछ मामलों में 40 लाख से 50 लाख रुपए तक की मांग की जाती थी।
नए फ्रेमवर्क से, जिसमें पारदर्शी और स्टैंडर्ड फीस स्ट्रक्चर लाने की उम्मीद है, ऐसी अनियमितताओं को खत्म करने और जवाबदेही बेहतर बनाने का इरादा है।
हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों के अनुसार, तमिलनाडु में अभी कम से कम सात-आठ ऐसे अस्पतालों की मंजूरी लंबित है जिन्हें डॉक्टर प्रमोट कर रहे हैं, जबकि दूसरे राज्यों में इसी तरह के प्रोजेक्ट्स में तेजी से काम हुआ है।
उन्होंने बताया कि हेल्थकेयर इंडस्ट्री की बार-बार की अपीलों के बावजूद सिंगल-विंडो सिस्टम का प्रस्ताव एक दशक से ज्यादा समय से विचाराधीन था।
लंबे समय से प्रतीक्षित इस सुधार से अस्पतालों में प्राइवेट निवेश को बड़ा बढ़ावा मिलने, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को प्रोत्साहन मिलने और राज्य में मेडिकल संस्थान स्थापित करने की समग्र प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद सरकारी आदेश जारी होने की संभावना है, जिससे पूरे तमिलनाडु में अस्पताल परियोजनाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज और ज्यादा पारदर्शी हो सकेगी।
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