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Wednesday,30-September-2026
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आपूर्ति बाधा और भू-राजनीतिक बदलावों के दौर में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में जुटा भारत

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पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के साथ भारत भू-राजनीतिक बदलावों और आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के बीच विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में जुटा है।

सूत्रों ने कहा कि निवेश संबंधी मामलों से जुड़े मंत्रालयों, राज्य सरकारों और प्रशासन को सलाह दी गई है कि वे विदेशी निवेशकों को हैंडल करने यानी उन्हें आकर्षित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जापान में वहां निवेशकों के साथ व्यक्तिगत रूप से सिलसिलेवार बैठकें कीं। इन बैठकों के बाद आत्मनिर्भर भारत को मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के रूप में दुनिया के सामने पेश किया जाने लगा है।

एक सरकारी सूत्र ने इंडिया नैरेटिव को बताया, नई उभरती भू-राजनीतिक व्यवस्था में भारत ने खुद को एक विश्वसनीय, भरोसेमंद देश के रूप में स्थापित किया है। अब यहां अर्थव्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। सरकार निवेश को सुविधाजनक बनाने और उसमें तेजी लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक उथल-पुथल और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के अनुसार काम करना जारी रखेगा।

भारत में 2021-22 में रिकॉर्ड 83.57 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) दर्ज किया।

क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान की दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने 30 से अधिक जापानी सीईओ और शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत निवेश के अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

नरेंद्र मोदी ने जापान में कहा, ”कोविड -19 महामारी, वैश्विक तनाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता तथा सुरक्षा की चुनौतियों ने मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, मानव-केंद्रित विकास मॉडल और स्थिर तथा मजबूत अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।”

बीते माह दक्षिण कोरिया के कारोबारियों के एक बड़े समूह ने निवेश के अवसरों का पता लगाने के लिए शिमला का दौरा किया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यह खबर सुर्खियां नहीं बटोर सकी।

कई दक्षिण कोरियाई कंपनियों ने भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधाएं स्थापित करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। दक्षिण कोरियाई और तथा अन्य एशियाई देशों के निवेशकों ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), ईवी के कलपुर्जो, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपनी विनिर्माण इकाई स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाना शुरू कर दिया है।

भारत में दक्षिण कोरिया से हर साल एक अरब डॉलर का एफडीआई आता है। कोरियाई निवेश वहां की बड़ी कंपनियों और उनके आपूर्तिकर्ताओं के जरिये मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टील के क्षेत्र होता है। अब कई छोटी और मंझोली कंपनियां भी भारतीय बाजार में कदम रखने की उम्मीद कर रही हैं।

भारत में दक्षिण कोरिया के राजदूत चांग जे-बोक ने पिछले सप्ताह कहा, अभी रसायनों और स्टील क्षेत्र में और निवेश करने पर विचार किया जा रहा है। छोटे और मंझोले उद्यम भी भारतीय बाजार में तेजी से दस्तक दे रहे हैं।

महाराष्ट्र, नई दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा, आंध्र प्रदेश सबसे अधिक एफडीआई प्राप्त करने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 14 प्रमुख क्षेत्रों में पीएलआई योजनाओं के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की है, जिससे 60 लाख नये रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के तहत 2.34 लाख करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं की गई हैं।

सार: सरकार अब चाहती है कि विदेशी निवेशक भारत के आत्मनिर्भर भारत या आत्मनिर्भरता की पहल का लाभ उठायें। विदेशी निवेशक देश में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करें, जो समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हुए रोजगार पैदा करेंगी।

(यह सामग्री इंडिया नैरेटिव के साथ एक व्यवस्था के तहत जारी की जा रही है)

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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