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भारत में एंटरप्राइस जॉब के लिए महिलाओं के आवेदनों में 92 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 28 अप्रैल। भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। सोमवार को जारी हुई नई रिपोर्ट के मुताबिक, एंटरप्राइस जॉब के लिए महिलाओं के आवेदनों की संख्या में 92 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
जॉब्स और प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म अपना द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया कि इस साल की पहली तिमाही में रिकॉर्ड तोड़ 1.81 करोड़ जॉब एप्लीकेशन मिले हैं जो पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। यह भारत के बढ़ते आर्थिक आशावाद और सभी क्षेत्रों में डिजिटल हायरिंग बूम को दर्शाता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि जॉब मार्केट में महिलाओं की भागीदारी में तेजी से इजाफा हो रहा है और जनवरी से मार्च की अवधि में महिलाओं के जॉब एप्लीकेशन की संख्या 62 लाख रही। इसमें सालाना आधार पर 23 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़, इंदौर और जमशेदपुर जैसे टियर 2 और 3 शहरों में सबसे अधिक वृद्धि देखी जा रही है। इसकी वजह काम करने के लचीले विकल्प होना है। इन शहरों में बीपीओ, फाइनेंस और एचआर जैसे सेक्टरों में अच्छे अवसर हैं।
फ्रैशर्स के लिए भी भारत में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। इस दौरान फ्रैशर्स की ओर से करीब 66 लाख जॉब एप्लीकेशन आए। इसमें सालाना आधार पर 46 प्रतिशत की बढ़त हुई।
इसके अलावा, जॉब प्लेटफॉर्म पर 3.1 लाख जॉब पोस्टिंग देखी गईं, जो 2024 की पहली तिमाही से 26 प्रतिशत अधिक है।
एसएमबी ने सबसे आगे रहते हुए 2.1 लाख से अधिक जॉब पोस्ट कीं, जिनमें 28,547 नौकरियां विशेष रूप से महिलाओं के लिए थीं।
अपना के संस्थापक और सीईओ निर्मित पारिख ने कहा, “हम देख रहे हैं कि लोग न केवल कोई भी नौकरी पा रहे हैं, बल्कि सही नौकरी प्राप्त कर रहे हैं। सिर्फ एक तिमाही में अपना पर 1.81 करोड़ से ज्यादा नौकरी के आवेदन दर्ज किए गए। टियर 1 मेट्रो से लेकर सबसे दूरदराज के टियर 3 शहरों तक, भारत सिर्फ काम नहीं कर रहा है, बल्कि भारत जीत रहा है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का डिजिटल परिवर्तन गति पकड़ रहा है, विशेष रूप से टियर 2 शहरों में, जहां एडवांस टेक टैलेंट की मांग बढ़ रही है।
व्यापार
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के चलते शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 516 अंक लुढ़का

अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से तनाव बढ़ने के कारण नकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र है जब प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी50 और सेंसेक्स में गिरावट देखी गई।
इस दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 516.33 अंकों यानी 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,328.19 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 150.50 अंक (0.62 प्रतिशत) गिरकर 24,176.15 पर पहुंच गया।
दिन के दौरान, सेंसेक्स 77,631.94 पर खुलकर एक समय 77,146.43 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी 24,233.65 पर खुलकर 24,126.65 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में भी मिला-जुला कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत की गिरावट आई तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
विभिन्न सेक्टर्स की बात करें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 1.21 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक में 3.06 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.52 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.87 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.82 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.94 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी 50 पैक में टाइटन, अपोलो हॉस्पिटल, एशियन पेंट्स, टाटा कंज्यूमर, अदाणी पोर्ट्स, इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयरों में करीब 4.8 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली, और ये टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे, जबकि सबसे ज्यादा एसबीआई के शेयरों में 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही कोल इंडिया, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, ओएनजीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर भी गिरावट के साथ ट्रेड करते नजर आए।
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 475 लाख करोड़ रुपए से घटकर 473 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी एक दिन में निवेशकों के करीब 2 लाख करोड़ रुपए डूब गए।
व्यापार
वैश्विक अस्थिरता से फिर बढ़े सोने के दाम, चांदी 2.60 लाख रुपए के पार

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वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है और कीमतों में शुक्रवार को 0.81 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,261 रुपए के मुकाबले 411 रुपए बढ़कर 1,52,672 रुपए पर खुला।
सुबह 9:43 पर यह 471 रुपए या 0.31 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,52,732 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,52,672 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,53,103 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है।
चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछ्ली क्लोजिंग 2,58,540 रुपए के मुकाबले 1,445 रुपए की बढ़त के साथ 2,59,999 रुपए पर खुला।
खबर लिखे जाते समय यह 2,118 रुपए या 0.82 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,60,658 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी का न्यूनतम स्तर 2,59,999 रुपए और उच्चतम स्तर 2,61,811 रुपए रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,725 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.17 प्रतिशत की मजबूती के साथ 80.30 डॉलर प्रति औंस पर थी।
सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की वजह वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का बढ़ना है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ने के चलते इसमें इजाफा हुआ है। इससे सुरक्षित माने जाने वाले सोने और चांदी की खरीद को बढ़ावा मिल रहा है।
हालांकि, शांति के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है और उम्मीद की जा रही है कि एक अस्थायी समझौता जल्द ही हो सकता है।
अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। इस दौरान सेंसेक्स 212.58 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,631.94 और निफ्टी 93 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,233.65 पर था।
राष्ट्रीय समाचार
भारत एआई के चलते टेक्नोलॉजी पर खर्च में अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ देगा: रिपोर्ट

भारतीय कंपनियों के टेक्नोलॉजी पर खर्च में 2026 में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, इसमें से 40-45 प्रतिशत एआई और टेक ट्रांसफॉरमेशन से जुड़ा होने की उम्मीद है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आईटी खर्च में वृद्धि वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के लिए अनुमानित 4-6 प्रतिशत वृद्धि से कहीं अधिक रहने की उम्मीद है।
पिछले 12-18 महीनों में खर्च में तेजी आई है और अगले 2-3 वर्षों तक यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है, जो संरचनात्मक रूप से मजबूत निवेश चक्र को दिखाता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय उद्यम अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक क्षमता निर्माण, विशेष रूप से एआई प्लेटफॉर्म और डेटा आधुनिकीकरण के लिए आवंटित कर रहे हैं। भारत में टेक्नोलॉजी बजट का 50-60 प्रतिशत पूंजीगत व्यय होता है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 20-30 प्रतिशत है।
भारतीय कंपनियों के पूंजीगत व्यय का 30 प्रतिशत हिस्सा एआई प्लेटफॉर्म और डेटा आधुनिकीकरण पर खर्च किया गया।
टेक्नोलॉजी खर्च में कोर एप्लिकेशन आधुनिकीकरण (25 प्रतिशत), क्लाउड और आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर (25 प्रतिशत) और साइबर सुरक्षा (20 प्रतिशत) प्रमुख है, जो मूलभूत क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2026 के टेक्नोलॉजी बजट का लगभग 40 प्रतिशत परिवर्तनकारी पहलों के लिए आवंटित किए जाने की उम्मीद है, जिसमें एआई और डेटा-आधारित परिवर्तन लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार होंगे।
अनुमान है कि अगले 12 महीनों में लगभग 60 प्रतिशत सीआईओ उच्च-प्रभाव वाले एआई रोडमैप को प्राथमिकता देंगे।
रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 72 प्रतिशत मुख्य सूचना अधिकारियों ने पुरानी तकनीकी खामियों को परिवर्तन में सबसे बड़ी बाधा बताया, इसके बाद अगली पीढ़ी के क्षेत्रों में कौशल की कमी (57 प्रतिशत) और नई तकनीक से जुड़ी पहलों पर निवेश पर अप्रमाणित प्रतिफल (49 प्रतिशत) का स्थान रहा।
लगभग 90 प्रतिशत बिजनेस लीडर्स ने संकेत दिया कि वर्तमान डेटा आधार और एआई की परिपक्वता पूरे उद्यम में विस्तार के लिए पर्याप्त नहीं है।
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