अंतरराष्ट्रीय
क्या रेयर अर्थ मिनरल्स और एलिमेंट्स को लेकर ट्रंप और जिनपिंग में बनेगी बात? मलेशिया पर टिकी सबकी नजर
न्यूयॉर्क, 25 अक्टूबर : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने एशिया दौरे के पहले चरण में शनिवार को कुआलालंपुर पहुंचेंगे। वे मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान जाएंगे, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध जारी है।
पूरे क्षेत्र में व्यापार और निवेश समझौते होने की उम्मीद है, लेकिन इस दौरे का सबसे ज्यादा ध्यान दक्षिण कोरिया में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात पर होगा।
दरअसल, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच टैरिफ, रेयर अर्थ एलिमेंट, तकनीक और दवाओं को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात पर दुनिया की नजर होगी।
30 अक्टूबर को ट्रंप की मुलाकात दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक शहर ग्योंगजू में 21 सदस्यीय एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग समिट के दौरान होगी। बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इस क्षेत्र की पहली यात्रा रविवार और सोमवार को कुआलालंपुर में आसियान शिखर सम्मेलन से शुरू होगी।
मलेशिया में आयोजित आसियान समिट में इसके दस सदस्यों के नेताओं और ट्रंप के अलावा, ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, और चीन के प्रधान मंत्री ली कियांग, जापान की पीएम साने ताकाइची, ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बानीज और कनाडा के माइक कार्नी शामिल होंगे।
वहीं ट्रंप की टीम में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर शामिल होंगे।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस समिट में आने के लिए आमंत्रित किया गया था। हालांकि, वह वर्चुअल माध्यम से समिट में भाग लेंगे। वहीं कार्यक्रम के दूसरे दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर पीएम मोदी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो टैरिफ बम फोड़ा है, उससे कई आसियान सदस्य परेशान हैं। खासकर लाओस और म्यांमार की बात करें तो उन पर 40 फीसदी टैरिफ चिंता का विषय है।
हाल ही में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक छोटी झड़प हुई थी, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी मध्यस्थता से सुलझा दिया था। ऐसे में संभव है कि राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में दोनों देश एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
एपीईसी शिखर सम्मेलन से इतर ट्रंप-शी की बैठक होने वाली है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी नेता वास्तविक शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे, बल्कि समिट से इतर द्विपक्षीय बैठकों में शिरकत करेंगे।
एक तरफ चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स पर व्यापक निर्यात नियंत्रण की धमकी दी। दूसरी तरफ अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह पहले से लगाए गए शुल्कों में 100 प्रतिशत शुल्क जोड़ देगा, जिससे चीन पर कुल शुल्क 157 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
ट्रंप ने मांग की है कि चीन रेयर अर्थ मिनरल्स और चुम्बकों पर प्रतिबंध हटाए, सोयाबीन खरीदना शुरू करे, और फेंटेनाइल दवा और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर रोक लगाए।
हालात देखते हुए समिट में होने वाली इस मुलाकात के दौरान चीन-अमेरिका में समझौता केवल इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप और शी इन सभी लंबित व्यापार मुद्दों पर कोई समझौता कर पाते हैं या नहीं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “दक्षिण कोरिया में हमारी बैठकें समाप्त होने के बाद, चीन और मैं एक बहुत ही निष्पक्ष और बेहतरीन व्यापार समझौता करेंगे।”
दक्षिण कोरिया राष्ट्रपति ट्रंप को सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुनघ्वा, से सम्मानित कर सकता है। समिट के दौरान ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात की चर्चाएं भी तेजी से हो रही थीं। हालांकि, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों शिखर सम्मेलनों के बीच ट्रंप सोमवार से बुधवार तक जापान दौरा भी करेंगे। यह यात्रा व्यापार और निवेश के मुद्दों पर केंद्रित होगी और इसमें सम्राट नारुहितो से मुलाकात के लिए शाही महल का दौरा भी शामिल होगा।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
चीनी राज्य परिषद ने ‘भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ की जारी

बीजिंग, 10 अप्रैल : चीनी राज्य परिषद द्वारा जारी ‘चीन (भीतरी मंगोलिया) पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ 9 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही चीन में पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्रों की कुल संख्या 23 हो गई है।
समग्र योजना भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र को सुधारों में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे इसे प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित करने और व्यापक क्षेत्रों में गहन स्तर पर मौलिक, एकीकृत और विशिष्ट अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इसमें 19 सुधार और नवाचार उपायों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें सीमा व्यापार में नवाचार और विकास, अंतरराष्ट्रीय रसद सेवाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के रूपांतरण और अनुप्रयोग की दक्षता में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान का विस्तार करना शामिल है।
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