मनोरंजन
विशाल ने ‘लट्ठी’ में एक कांस्टेबल और पिता की भूमिका निभाई
अभिनेता विशाल ने निर्देशक विनोथ कुमार की आगामी एक्शन फिल्म ‘लट्ठी’ में अपने करियर में पहली बार एक कांस्टेबल और सात साल के बच्चे के पिता की भूमिका निभाई है। यूनिट के करीबी सूत्रों का कहना है कि फिल्म पर काम जोरों पर चल रहा है और शूटिंग पूरी होने वाली है।
फिल्म के स्टंट सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान दूसरी बार चोटिल हुए विशाल ने शूटिंग फिर से शुरू कर दी है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि फिल्म में सुनैना विशाल की पत्नी का किरदार निभा रही हैं। एक सूत्र ने बताया, “तमिलनाडु में 1.2 लाख से ज्यादा पुलिस कांस्टेबल हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों के लिए ‘लट्ठी’ ही एकमात्र आसान हथियार है। यह फिल्म उस हथियार के महत्व के बारे में बताएगी।”
यह याद किया जा सकता है कि विशाल को हाल ही में फिल्म के एक एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान अपने पैर में चोट लग गई थी, जिससे यूनिट के पास दिन के लिए शूटिंग रद्द करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।
इस चोट से पहले, विशाल को उसी फिल्म के चरमोत्कर्ष भाग के लिए कुछ उच्च-ऑक्टेन एक्शन ²श्यों की शूटिंग के दौरान कई हेयरलाइन फ्रैक्च र का सामना करना पड़ा था। फाइट सीक्वेंस को स्टंट मास्टर पीटर हेन द्वारा कोरियोग्राफ किया जा रहा है।
विशाल को अपनी चोटों से उबरने के लिए केरल के पेरिंगोडे के एक आयुर्वेदिक उपचार केंद्र में कुछ हफ्तों तक इलाज कराना पड़ा।
मनोरंजन
अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में बयां किया संगीत से प्यार, कहा- संगीत बिना जीवन नीरस, बेस्वाद और फीका है

मेगास्टार अमिताभ बच्चन अक्सर अपने ब्लॉग के जरिए फैंस से अपने दिल की बात साझा करते रहते हैं। इस बार बिग बी ने अपनी जीवन में संगीत के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे संगीत उनकी आत्मा से जुड़ा हुआ है और उनके लिए इसका क्या मतलब है।
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने संगीत से अपने जुड़ाव के बारे में बात करते हुए कहा कि संगीत के बिना जिंदगी नीरस, बेस्वाद और फीकी है। बिग बी ने अपने ब्लॉग में संगीत से अपने गहरे लगाव के बारे में लिखा, “जब संगीत की डोर आत्मा से जुड़ जाती है, तो समय मासूम हो जाता है।”
उन्होंने आगे लिखा, “जब संगीत की डोर आत्मा से जुड़ जाती है, तो समय नादान हो जाता है। ऐसा ही हुआ और अभी तक उस डोर को पकड़े हुए हैं। संगीत बिना जीवन नीरस, अरुचिकर, बिना स्वाद के और जो करना चाहिए था, उसका समय निकल गया है। ईर्ष्या होती है उन लोगों से, जिन्होंने संगीत के रस को घोल-घोल कर पिया है, पिरोया है अपने जीवन में।”
अपनी बात खत्म करते हुए बिग बी ने लिखा, “बस अब तो केवल उनकी अपार प्रशंसा करने योग्य होने का दावा करने की कोशिश करते हैं। मानें या न मानें, जीवन का प्रत्येक क्षण संगीत रस से भरा हुआ होता है। वो प्याला यदि मिल जाए, तो उसे कभी न छोड़ूं। प्रणाम! निद्रा और संगीत भरी रात्रि का आगमन।”
अभिनेता अमिताभ बच्चन इन दिनों क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति-18वां सीजन’ होस्ट कर रहे हैं। यह शो पहली बार वर्ष 2000 में शुरू हुआ था। इस क्विज शो को इंडियन टेलीविजन की सबसे आइकॉनिक फ्रेंचाइजी में से एक बना दिया था।
यह शो ब्रिटिश शो ‘हू वांट्स टू बी अ मिलियनेयर?’ का हिंदी वर्जन है। इसका फॉर्मेट ‘हू वांट्स टू बी अ मिलियनेयर?’ फ्रेंचाइजी के दूसरे शोज जैसा ही है, जिसमें प्रतियोगियों से बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाते हैं और उन्हें चार विकल्पों में से सही जवाब चुनना होता है। अगर उन्हें जवाब पर शक हो तो मदद के लिए उन्हें लाइफलाइन भी दी जाती है।
मनोरंजन
अर्चना पूरन सिंह ने कॉमेडी का असली नियम बताया, कहा- साथी कलाकार को बेहतर बनाना जरूरी

क्रिकेटर रोहित शर्मा के पॉपुलर शो ‘फैमिली फुल हाउस’ के आगामी एपिसोड में अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह अभिनेता राकेश बेदी के साथ गेस्ट के तौर पर नजर आएंगी। आगामी एपिसोड में अभिनेत्री ने बताया कि राकेश बेदी के साथ काम करने का अनुभव बताया।
अभिनेत्री ने बताया, “आपको एक मजेदार बात बताती हूं कि हमने एक बार दूरदर्शन के लिए एक साथ सीरियल किया था, ‘जाने भी दो पारो’। उसमें मैं डायरेक्टर-एक्टर दोनों थी और राकेश बेदी ने मेरे पति का रोल प्ले किया था। जो पहला ओपनिंग सीन लिखा गया था, उसे हमने एक-दो बार करके देखा, लेकिन बिल्कुल भी मजा नहीं आया। हालांकि सीन लिखा हुआ था और शॉट भी तैयार था, फिर राकेश मुझसे बोले कि तू स्क्रिप्ट की छोड़, बस मुझसे पहली लाइन बोल और उसके बाद जो भी मैं जवाब दूंगा, तू उस पर जवाब देना।”
अभिनेत्री ने बताया कि उस सीन को दोनों ने बिना किसी स्क्रिप्ट के जल्द ही शूट कर लिया था।
वहीं, अभिनेता राकेश बेदी ने अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा, “कुछ-कुछ एक्टर्स ऐसे होते हैं जो आपके बहुत अच्छे साथी कलाकार बन जाते हैं, जिन्हें आप भूल नहीं पाते और हमने तो 4-5 साल काम किया है, जिनमें ‘श्रीमान श्रीमती’ और 1-2 साल ‘जाने भी दो पारो’ में साथ काम किया।”
राकेश बेदी ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में अर्चना पूरन सिंह जैसी कोई दूसरी बेहतरीन कलाकार नहीं देखी। अभिनेत्री ने कहा, “दरअसल कॉमेडी का एक उसूल होता है। कॉमेडी में ऐसा नहीं है कि एक्टर को सोचना पड़े कि मैं दूसरे एक्टर से क्या छीन लूं, बल्कि सोचना ये होता है कि मैं उसे क्या दूं जिससे उसका सीन और ज्यादा निखर कर आए।”
इस पर अर्चना ने याद करते हुए कहा कि कैसे वे दोनों एक-दूसरे की परफॉर्मेंस को और बेहतर बनाते थे। उन्होंने कहा कि हम हमेशा एक-दूसरे से कहते थे, ‘राकेश, तुम ये बोलो, फिर मैं ये बोलूंगी।’ तो हम एक-दूसरे को पंच देते थे।
उन्होंने कहा, “अगर मुझे उसके लिए कोई अच्छा पंच सूझता या उसे मेरे लिए कुछ अच्छा लगता तो हम वो पंच एक-दूसरे को दे देते थे। ये सोचकर कि अगर हम दोनों अच्छा करेंगे तो सीन और भी शानदार बनेगा, लेकिन राकेश, आपके साथ काम करके बहुत मजा आया।”
मनोरंजन
लारा दत्ता ने मां के अल्जाइमर से जूझने का किया जिक्र, बोलीं, ‘इसे बढ़ती उम्र की बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें’

दिल्ली में वर्ल्ड अल्जाइमर डे के मौके पर अभिनेत्री लारा दत्ता भूपति अल्जाइमर अवेयरनेस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से बात की और लोगों से अपील की कि अल्जाइमर को केवल भूलने की बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करें। इस बीमारी को लेकर परिवार में समय रहते बातचीत शुरू करना जरूरी है ताकि इसके शुरुआती संकेतों को पहचाना जा सके और जरूरत पड़ने पर सही मदद ली जा सके।
लारा दत्ता ने कहा, ”आज वर्ल्ड अल्जाइमर डे है और सबसे जरूरी मैसेज जो मैं देना चाहती हूं, वह यह है कि हम अक्सर सोचते हैं कि अल्जाइमर सिर्फ भूलने की बीमारी है। मेरी मां 80 साल की हैं और वह करीब 10 साल से अल्जाइमर और डिमेंशिया के साथ जी रही हैं।”
उन्होंने कहा, ”जिस तरह की देखभाल हम उन्हें दे पाए हैं, वह अच्छे डॉक्टरों, एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम और देखभाल करने वालों की मदद के बिना मुमकिन नहीं होती। इसलिए जब अल्जाइमर की बात आती है तो आज सबसे जरूरी बात यह है कि हम इसके बारे में बात करें और बातचीत शुरू करें।”
लारा के कहा, ”बीमारी के शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी है। हमें जितनी जल्दी हो सके शुरुआत करनी चाहिए, ताकि बीमारी को उसके शुरुआती स्टेज में पहचाना जा सके और खुद को मजबूत बनाया जा सके। अगर हमें अपने किसी करीबी में या खुद में सोचने या याददाश्त में बदलाव महसूस होने लगे, तो हम सही तरीके से मदद ले सकें।”
अभिनेत्री ने लोगों से अपील की, कि हर तरह की भूलने की समस्या को सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मान लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ”इसे सिर्फ भूलने की समस्या समझकर पांच साल इंतजार मत कीजिए कि देखते हैं क्या होता है। यह बहुत जरूरी है कि आप इसे सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया मानकर न चले।”
इसके अलावा, लारा दत्ता ने लोगों से अच्छे हेल्थकेयर प्रैक्टिशनर से मिलने, सवाल पूछने और जरूरत के मुताबिक सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा, ”अल्जाइमर या डिमेंशिया के साथ रह रहे व्यक्ति के साथ-साथ उसकी देखभाल करने वाले परिवार के सदस्यों को भी मदद और सहयोग की जरूरत होती है।”
बता दें कि हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, साल 2021 में दुनिया भर में करीब 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे थे और हर साल लगभग एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। डिमेंशिया याददाश्त के साथ सोचने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। साल 2026 के वर्ल्ड अल्जाइमर मंथ की थीम ‘द अर्लियर यू नो, द मोर यू कैन डू: ए डिमेंशिया डायग्नोसिस मैटर्स’ है।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
