अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश अशांति: शेख हसीना के लिए ब्रिटेन जाने की तुलना में भारत में रहना अधिक सुरक्षित होगा।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अपने इस्तीफे और ढाका से भागने के बाद भारत में शरण ली है। रिपोर्टों के अनुसार, शुरू में हसीना का इरादा भारत में कुछ समय रुकने के बाद ब्रिटेन जाने का था, लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों से वीज़ा स्वीकृति लंबित होने के कारण नई दिल्ली में उनका प्रवास लंबा हो सकता है।
हसीना 1975 में पहले भी भारत में रह चुकी हैं।
भारत ने ऐतिहासिक रूप से हसीना को शरण दी है, खास तौर पर 1975 में उनके पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद, जब उन्हें और उनकी बहन को गुप्त रूप से बर्लिन से नई दिल्ली लाया गया था।
वे छह साल तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के संरक्षण में एक सुरक्षित घर में रहीं। यह ऐतिहासिक मिसाल यह साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि क्यों एक बार फिर भारत हसीना के लिए ब्रिटेन की तुलना में अधिक सुरक्षित प्रतीत होता है।
हसीना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित सुरक्षा उपाय किए गए
हाल ही में भागने के दौरान भारतीय वायुसेना के रडार ने हसीना के विमान को भारत की ओर उड़ते हुए पाया। विमान को भारतीय वायु क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी गई और पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयर बेस से दो राफेल लड़ाकू विमानों द्वारा सुरक्षा प्रदान की गई।
भारतीय वायुसेना और सेना प्रमुखों ने स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी और ज़मीन पर शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ समन्वय किया। हिंडन एयर बेस पर उतरने के बाद, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति और उनकी भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए हसीना से मुलाकात की।
हसीना के आगमन पर भारत सरकार की तत्काल और व्यापक प्रतिक्रिया उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तर की तैयारी और इच्छाशक्ति को दर्शाती है। यह ब्रिटेन के विपरीत है, जहां उनका वीजा अनुमोदन अभी भी लंबित है, जिससे उनका तत्काल भविष्य अनिश्चित है।
हसीना के शरण अनुरोध पर यू.के. की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की स्थिति पर यू.के. की प्रतिक्रिया, शरण मुद्दे को सीधे संबोधित किए बिना, उथल-पुथल की यू.एन. के नेतृत्व वाली जांच के आह्वान तक ही सीमित रही है। स्पष्टता की यह कमी हसीना के यू.के. में संभावित कदम के इर्द-गिर्द अनिश्चितता को बढ़ाती है।
यदि यू.के. उन्हें शरण देने से इनकार करता है, तो हसीना को किसी अन्य स्थान की तलाश करनी होगी, जिससे उनकी पहले से ही अनिश्चित स्थिति और जटिल हो जाएगी। ऐसी स्थिति में, 76 वर्षीय हसीना के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करने के बजाय भारत में रहना बेहतर विकल्प होगा।
हत्या का संभावित खतरा
विश्व नेताओं को आसानी से राजनीतिक शरण देने की प्रतिष्ठा रखने वाले ब्रिटेन में भी हत्याओं का इतिहास रहा है, जिन पर सरकार का ध्यान नहीं गया। हसीना के मामले में, उनके पिता की भी हत्या कर दी गई थी और अब जबकि उनके अपने देश में उनके खिलाफ़ हंगामा हो रहा है, तो उन्हें अपनी जान का भी डर सता रहा होगा।
भारत सरकार सक्रिय रूप से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा का ध्यान रख रही है और अगर वह यहां रहती हैं, तो भी वह देश के साथ उनके संबंधों को देखते हुए उनकी सुरक्षा का ध्यान रखेगी।
व्यापार
टाटा मोटर्स ने कमर्शियल वाहनों के दाम 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाए, 1 जुलाई से लागू होंगी नई कीमतें

टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स (टीएमसीवी) ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है और नई कीमतें 1 जुलाई से लागू होंगी। यह जानकारी गुरुवार को कंपनी की ओर से दी गई।
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होना और लागत का बढ़ना है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल पर विभिन्न होगी और 2.5 प्रतिशत तक सीमित होगी।
इस बढ़ोतरी से टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे माल और लागत में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में इजाफा किया है।
इससे पहले, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने 12 जून को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।
टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।
कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। वहीं, मध्य पूर्व तनाव के चलते मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियां गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, टीएमसीवी के मुनाफे में सालाना आधार पर 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि आय 22 प्रतिशत बढ़कर 24,452 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी का एबिटा मार्जिन 13.90 प्रतिशत रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपए का डिविडेंड भी घोषित किया।
व्यापार
शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का मार्केटकैप 1.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार में बीते हफ्ते शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का मार्केटकैप 1.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इसकी वजह घरेलू बाजार में मजबूती रैली थी।
इस दौरान सेंसेक्स 1,284.61 अंक या 1.73 प्रतिशत की मजबूती के साथ 75,527.95 और निफ्टी 256.20 अंक या 1.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी की वजह अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ना है। इससे वैश्विक स्तर पर अस्थिरता में कमी आई, जिसमें भारत के साथ दुनिया के बाजार में खरीदारी देखने को मिली।
विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्ष एक शांति समझौता करने के अंतिम दौर में है। जल्द ही अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक डील हो सकती है।
समीक्षा अवधि में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एलएंडटी और एचयूएल के मार्केट कैप में बढ़ोतरी हुई है, जबकि टीसीएस और एलआईसी के वैल्यूएशन में कमी देखने को मिली है।
आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 56,223 करोड़ रुपए बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, एचडीएफसी बैंक का बाजार मूल्यांकन 38,571 करोड़ रुपए बढ़कर 11.89 लाख करोड़ रुपए हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का बाजार मूल्यांकन 36,138 करोड़ रुपए बढ़कर 9.39 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 18,367 करोड़ रुपए बढ़कर 5.72 लाख करोड़ रुपए हो गया है। भारती एयरटेल का मार्केटकैप 14,380 करोड़ रुपए बढ़कर 11.11 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
एलएंडटी का मार्केटकैप 13,241 करोड़ रुपए बढ़कर 5.57 लाख करोड़ रुपए हो गया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप 10,984 करोड़ रुपए बढ़कर 5.09 करोड़ रुपए हो गया है।
दूसरी तरफ, टीसीएस का मार्केटकैप 13,296 करोड़ रुपए घटकर 7.82 लाख करोड़ रुपए हो गया है। एलआईसी का मार्केटकैप 822 करोड़ रुपए कम होकर 5.05 लाख करोड़ रुपए रह गया है।
व्यापार
सोना एक हफ्ते में करीब 6,400 रुपये और चांदी 14,300 रुपये से अधिक सस्ती हुई

सोने और चांदी में इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः 6,400 रुपये और 14,300 हजार रुपये से अधिक सस्ते हो गए हैं।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 6,438 रुपये कम होकर 1,47,800 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,54,238 रुपए पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,35,385 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,41,282 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,10,850 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,15,679 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 11 जून को सुबह के सत्र में 1,44,782 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 9 जून को सुबह के सत्र में 1,52,519 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 14,326 रुपये कम होकर 2,42,582 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,56,908 रुपये प्रति किलो था। इस हफ्ते चांदी में सबसे न्यूनतम दाम 11 जून को शाम के सत्र में 2,32,591 रुपये प्रति किलो देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 9 जून को शाम के सत्र में 2,45,938 रुपये प्रति किलो देखा गया।
वैश्विक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम 4,248 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 68 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह महंगाई बढ़ने की आशंका और अमेरिका – ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत उच्च स्तर पर रहना है। इसके साथ ही ब्याज दरों के बढ़ाने की आसान कहां है निवेशकों को सोने और चांदी में मुनाफा वसूली पर मजबूर किया है।
बीते एक वर्ष में सोने और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया है। डॉलर में इस दौरान सोने ने 24 प्रतिशत से अधिक और चांदी ने 87 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
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