राजनीति
उप्र : विधायक जनमेजय का निधन, विस सत्र शनिवार तक के लिए स्थागित
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे दिन विधायक जनमेजय सिंह के निधन के कारण विधानसभा की कार्यवाही शनिवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन का काम शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। शनिवार को अवकाश नहीं होगा। आज का एजेंडा कल सदन में लागू होगा। उधर, विधानपरिषद में कानून व्यवस्था को लेकर हंगामा हो रहा है। भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के निधन पर शोक सभा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक प्रस्ताव पेश किया। सभी सदस्यों ने 2 मिनट का मौन रख कर श्रद्घांजलि दी। शोक प्रस्ताव के बाद विधानसभा की कार्यवाही शनिवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
समाजवादी पार्टी ने अपने ट्वीटर के माध्यम से लिखा कि “देवरिया जिले की सदर सीट से भाजपा विधायक श्री जन्मेजय सिंह जी का लखनऊ में निधन अत्यंत दु:खद। शत्-शत् नमन एवं भावभीनी श्रद्घांजलि। सरकार की जनविरोधी नीतियों को लेकर आज पार्टी कार्यालय से विधानसभा तक होने वाली सपा विधायकों की विरोध प्रदर्शन साइकिल रैली को स्थगित कर दिया गया है।”
उधर, विधान परिषद में प्रश्नकाल शुरू होते ही सपा के नरेश चंद्र उत्तम ने राज्य की ध्वस्त कानून व्यवस्था, बाढ़ की बिगड़ती स्थिति और कोरोना संक्रमण के बेकाबू होते हालात पर सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराने की मांग की।
इसी बीच, सपा के सदस्यों ने सभापति के आसन के सामने आकर सरकार के विरोध में नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। सभापति रमेश यादव के समझाने पर भी सपा सदस्य शांत नहीं हुए और नारेबाजी जारी रही। इस पर सभापति ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी है।
आज सदन में 17 विधेयक पेश किए जाने थे। इनमें सार्वजनिक और निजी संपत्ति अध्यादेश की क्षति की वसूली, गौ-हत्या रोकथाम (संशोधन) अध्यादेश और सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी नियंत्रण अध्यादेश है।
इससे पहले, गुरुवार को पहले दिन गुरुवार को सदन के दिवंगत तीन पूर्व सदस्यों और कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले सरकार के दो मंत्रियों को श्रद्घांजलि अर्पित करने के बाद सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हो गई।
राजनीति
नीतीश कुमार ने 20 साल के शासन में बिहार को दिलाई अलग पहचान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को बिहार के लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद अब बिहार में एनडीए की नई सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय चौधरी के साथ मुख्यमंत्री आवास से निकले और लोक भवन पहुँचे। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया।
इस बीच, कहा जा रहा है कि बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। हालांकि अब तक मुख्य्मंत्री के नाम को घोषणा नहीं हुई है। भाजपा के प्रदेश कार्यलाय को सजाया गया है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की भी विधायक दल की बैठक होगी। भाजपा ने अभी तक भले ही अगले मुख्यमंत्री के लिए अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार के इस इस्तीफे के साथ बिहार में नीतीश युग के समाप्त होने की बात कही जा रही है। पिछले साल नवंबर महीने में विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले बहुमत के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों का है। हाल ही में उनके राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद से ही कयास लगाये जाने लगे थे वे अब बिहार का मुख्यमंत्री का पद त्याग कर दिल्ली की राजनीति करेंगे।
इस बीच उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दिया था। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1985 में जनता दल से हुई थी, जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। 1994 में, नीतीश ने लालू प्रसाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण विद्रोह में भाग लिया, जिसमें 14 सांसदों ने जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में दल-बदल कर जनता दल (जॉर्ज) बनाई, जो बाद में समता पार्टी में तब्दील हो गई।
यह नीतीश कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ था, क्योंकि उन्होंने लालू से अलग होकर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का पहला दौर 2000 में हुआ था, लेकिन गठबंधन में संख्याबल की कमी के कारण उनकी सरकार सात दिन के भीतर गिर गई। 2005 में उनकी शानदार वापसी हुई, जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासन को समाप्त किया और बिहार में ‘नए दौर’ की शुरुआत की। नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिना किसी गंभीर राजनीतिक चुनौती के शासन किया।
महाराष्ट्र
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कपड़ा उद्योग का निर्यात प्रभावित, रईस शेख ने राज्य से पैकेज की मांग की

मुंबई; वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है और कॉटन और धागे जैसे कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे इंडस्ट्री में तीन दिन का लॉकडाउन लगा है। इसलिए इंडस्ट्री को बचाने के लिए भिवंडी ईस्ट से समाजवादी पार्टी के एमएलए रईस शेख ने राज्य की महागठबंधन सरकार से स्पेशल फाइनेंशियल पैकेज की मांग की है। एमएलए रईस शेख ने हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और टेक्सटाइल मंत्री संजय सावक्रे को टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए तुरंत स्पेशल फाइनेंशियल पैकेज देने के लिए एक लेटर लिखा था। इस बारे में बात करते हुए एमएलए रईस शेख ने कहा कि स्टेट टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन के एक सर्वे से पता चला है कि राज्य में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मार्च 2026 के महीने में 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
राज्य में 9,48,000 पावरलूम और 4,000 हैंडलूम हैं। देश के 39% पावरलूम अकेले महाराष्ट्र में हैं। अगर सरकार इस इंडस्ट्री की मदद नहीं करती है, तो कोरोना काल की तरह मज़दूरों का रिवर्स माइग्रेशन शुरू हो जाएगा। खेती के बाद सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाली इंडस्ट्री सिर्फ़ टेक्सटाइल इंडस्ट्री है। भिवंडी, मालेगांव और अचल करंजी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बड़े सेंटर हैं। खाड़ी युद्ध की वजह से इस इंडस्ट्री का कच्चा माल और एक्सपोर्ट चेन खत्म हो गया है और हफ़्ते में दो दिन प्रोडक्शन बंद हो गया है। इस बारे में एमएलए रईस शेख का कहना है कि राज्य सरकार को इस इंडस्ट्री को तुरंत फ़ाइनेंशियल पैकेज देने की ज़रूरत है। असल में, यह इंडस्ट्री महंगी बिजली की वजह से मुश्किलों का सामना कर रही है। अगर इस आर्थिक रूप से ज़रूरी इंडस्ट्री का एक्सपोर्ट बंद हो गया तो इसके बर्बाद होने का डर है। अगर ऐसा हुआ तो राज्य में लाखों स्किल्ड और अनस्किल्ड नौकरियाँ जाने का डर है। इसलिए एमएलए रईस शेख ने चिट्ठी में ज़ोर देकर मांग की है कि राज्य सरकार तुरंत टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए फ़ाइनेंशियल पैकेज का ऐलान करे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
परमाणु मांगों पर विवाद के बीच अमेरिका और ईरान की वार्ता ठप

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “काफी प्रगति” हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका अपनी प्रमुख मांगों पर अड़ा रहा, जिनमें समृद्ध यूरेनियम को हटाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सत्यापन योग्य सीमाएं शामिल हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फाक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान में उच्च स्तर पर हुई वार्ताओं ने लचीलेपन और अमेरिका की “रेड लाइन्स” दोनों को स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि चीजें गलत हुईं। मुझे लगता है कि कई चीजें सही भी हुईं। हमने काफी प्रगति की,” और जोड़ा कि यह “पहली बार था जब ईरानी और अमेरिकी सरकारें इतने उच्च स्तर पर मिलीं।”
वेंस के अनुसार, मुख्य विवाद का मुद्दा यह रहा कि अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि ईरान “कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता,” जो उसकी सभी वार्ता स्थितियों का आधार है।
उन्होंने दो गैर-समझौताकारी मांगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा,“हमें समृद्ध सामग्री (यूरेनियम) को ईरान से बाहर करना होगा।” दूसरी मांग थी “परमाणु हथियार विकसित न करने की निर्णायक प्रतिबद्धता,” जिसे सत्यापन तंत्र के जरिए सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा, “ईरान यह कह दे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, यह एक बात है… लेकिन इन बातों का सत्यापन भी जरूरी है।”
वेंस के मुताबिक, ईरानी वार्ताकार “हमारी दिशा में बढ़े” लेकिन “पर्याप्त नहीं बढ़े” जिसके कारण दोनों पक्षों ने बातचीत रोककर अपने-अपने देशों में लौटने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, “अब गेंद उनके पाले में है” और संकेत दिया कि आगे की बातचीत तेहरान की अमेरिकी शर्तें मानने की इच्छा पर निर्भर करेगी।
वेंस ने वार्ता की प्रगति को क्षेत्रीय मुद्दों से भी जोड़ा, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना शामिल है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
उन्होंने कहा, “हमें जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला देखना होगा,” और ईरान पर बातचीत के दौरान “लक्ष्य बदलने” का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजों की आवाजाही में “कुछ बढ़ोतरी” हुई है लेकिन “पूरी तरह से खुलना अभी नहीं हुआ है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूरी पहुंच बहाल नहीं हुई, तो इससे वार्ता की दिशा “मौलिक रूप से बदल सकती है।”
कार्रवाई के बारे में वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसैनिक अभियान केवल ईरानी झंडे वाले जहाजों ही नहीं बल्कि ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को भी निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जो भी जहाज ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहा है या वहां से आया है… हमें इसकी जानकारी होगी,” और अमेरिकी खुफिया क्षमताओं का हवाला दिया।
उन्होंने ईरान पर वैश्विक शिपिंग को खतरे में डालकर “पूरी दुनिया के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद” करने का आरोप लगाया और कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो हम भी एक सिद्धांत पर काम करेंगे कि कोई भी ईरानी जहाज बाहर नहीं जा सकेगा।”
तनाव के बावजूद, वेंस ने कहा कि एक व्यापक समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “खुश होंगे यदि ईरान एक सामान्य देश की तरह व्यवहार करे… और उसके लोग समृद्धि हासिल कर सकें” लेकिन इसके लिए उसे “परमाणु हथियार और आतंकवाद का पीछा न करना” होगा।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरानी वार्ताकारों को किसी समझौते से पहले तेहरान में उच्च अधिकारियों से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा, “उन्हें वापस जाकर हमारी तय शर्तों के लिए मंजूरी लेनी होगी।”
वेंस ने वार्ता में अमेरिका की स्थिति को मजबूत बताते हुए “सैन्य बढ़त” और “नाकाबंदी के जरिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत सारे पत्ते हैं। हमारे पास बढ़त है।”
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