अंतरराष्ट्रीय
टोक्यो ओलम्पिक : साई ने 32 विदेशी प्रशिक्षकों का कार्यकाल बढ़ाया
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने 11 खेलों के 32 विदेशी प्रशिक्षकों के कार्यकाल को 30 सितंबर 2021 तक बढ़ा दिया है। कई प्रशिक्षकों के अनुबंध इस साल सितंबर में खत्म हो रहे थे। साई ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि टोक्यो ओलम्पिक के लिए खिलाड़ी समान प्रशिक्षकों के साथ अपनी ट्रेनिंग जारी रख सकें। टोक्यो ओलम्पिक का आयोजन इसी साल होना था लेकिन कोविड-19 के कारण इन खेलों को एक साल तक के लिए टाल दिया गया है।
इस फैसले पर खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, “ओलम्पिक खेलों के एक साल के लिए स्थगित हो जाने से यह जरूरी हो गया था कि समान प्रशिक्षक ही खिलाड़ियों के साथ रहें ताकि खिलाड़ियों को किसी तरह का नुकासन न हो।”
उन्होंने कहा, “नए प्रशिक्षकों को खिलाड़ियों को समझने में समय लगता और खिलाड़ियों को भी नए कोच की ट्रेनिंग प्रक्रिया समझने में समय लगता। हमारे पास इतना समय नहीं है।”
रिजिजू ने पहले ही कहा था कि भारतीय और विदेशी प्रशिक्षकों को चार साल के लिए एक ओलम्पिक से दूसरे ओलम्पिक तक के लिए नियुक्त किया जाएगा। चार साल के करार का प्रावधान 2024 और 2028 ओलम्पिक के मद्देनजर किया गया है।
एक साल के करार का विस्तार खिलाड़ियों को टोक्यो में पुराने प्रशिक्षकों के साथ काम करने के मकसद से किया गया है। चार साल के विस्तार पर फैसला कोच के प्रदर्शन और संबंधित राष्ट्रीय खेल महासंघ से बात करने के बाद लिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप का दावा- पूरी तरह तबाह हो गया है ईरान, चर्चा के लिए दरवाजे खुले

TRUMP
वाशिंगटन, 28 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत कमजोर हो चुका है और अब बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने सैन्य मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है। यह बातें उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत और मियामी में दिए गए एक भाषण में कहीं।
एयर फ़ोर्स वन से उतरने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “ईरान कमजोर हो रहा है। अब हम दोनों के बीच बातचीत चल रही है। वे समझौता करना चाहते हैं। हमारा सैन्य बल दुनिया में सबसे ताकतवर है।”
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान बातचीत के लिए तैयार हुआ है, हालांकि बातचीत कैसे और कब तक चलेगी, इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।
मियामी में ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट’ में एक अलग संबोधन में, ट्रंप ने स्थिति का अपना आकलन प्रस्तुत किया और ईरान को अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण काफी कमजोर बताया। उन्होंने कहा, “हम ईरान के हथियारों के जखीरे को खत्म कर रहे हैं, उनकी मिसाइल और ड्रोन फैक्ट्रियों को ऐसे स्तर पर नष्ट कर रहे हैं जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था और उनके रक्षा औद्योगिक आधार को पूरी तरह से खत्म कर रहे हैं।”
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, वायुसेना पूरी तरह बेअसर हो गई है और उसकी हवाई रक्षा व संचार व्यवस्था भी टूट चुकी है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं और देश का शीर्ष नेतृत्व भी अब पहले जैसा नहीं रहा।
ट्रंप ने इस पूरे अभियान को बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा, “हमने चार हफ्ते पहले जो लक्ष्य तय किए थे, उन्हें तय समय से दो हफ्ते पहले पूरा कर लिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि दबाव के कारण ईरान बातचीत करने के लिए मजबूर हुआ है और वह समझौता करने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों से जोड़ा, जिसमें ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नया रूप देना शामिल है। उन्होंने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर, मैं दुनिया के सबसे बड़े आतंकवाद-प्रायोजक देश को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दूंगा।”
कुल मिलाकर, ट्रंप का कहना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई से ईरान कमजोर हुआ है और इसी वजह से अब बातचीत का रास्ता खुला है।
अंतरराष्ट्रीय
चीन को टक्कर देने के लिए अमेरिका का दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका पर फोकस

वॉशिंगटन : चीन के बढ़ते आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव का सामना करते हुए, अमेरिकी अधिकारियों ने सीनेटरों से कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले चरण को आकार देने में वॉशिंगटन की रणनीति के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका केंद्र बिंदु होंगे।
सीनेट की विदेश संबंध समिति की पुष्टि सुनवाई में शीर्ष कूटनीतिक पदों के लिए नामित व्यक्तियों ने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (एएसईएएन), अफ्रीकी विकास बैंक, और वैश्विक शिक्षा एवं सांस्कृतिक पहुंच से जुड़ी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, जो अमेरिकी प्रभाव को मजबूत करने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (एएसईएएन) में अमेरिका के राजदूत पद के लिए नामित केविन किम ने दक्षिण-पूर्व एशिया को वैश्विक व्यापार और सुरक्षा का एक रणनीतिक केंद्र बताया।
उन्होंने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया उन समुद्री मार्गों पर स्थित है, जिनसे हर साल वैश्विक शिपिंग का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र “स्वतंत्र और खुला” बना रहे।
किम ने जोर दिया कि लगभग चार ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (एएसईएएन), अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी वस्तुओं के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार हैं। यह प्राथमिकता सुनिश्चित करनी होगी कि अमेरिका दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (एएसईएएन) देशों के लिए “पहला पसंदीदा साझेदार” बना रहे। साथ ही व्यापार पहुंच का विस्तार, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना और क्षेत्रीय नियमों को आकार देना शामिल होगा।
किम ने तर्क दिया कि अमेरिका के पास संरचनात्मक लाभ बने हुए हैं, जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रमुख स्रोत होना शामिल है।
उन्होंने कहा कि हम अभी भी दक्षिण-पूर्व एशिया में एफडीआई के सबसे बड़े प्रदाता हैं, और यह क्षेत्र की आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने में मदद करता है।
अफ्रीका के संदर्भ में अफ्रीकी विकास बैंक में अमेरिका के कार्यकारी निदेशक पद के लिए नामित अडेमोला अडेवाले-सादिक ने कहा कि वाशिंगटन को एक प्रमुख शेयरधारक के रूप में अपनी भूमिका का बेहतर उपयोग करना चाहिए, ताकि आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कहा कि हम दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक हैं… और इसका कुछ मतलब होना चाहिए और विकास परियोजनाओं में अमेरिकी कंपनियों के लिए अधिक अवसर पैदा करने हेतु सुधारों की मांग की।
उन्होंने अफ्रीका को एक दीर्घकालिक रणनीतिक मोर्चे के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि अफ्रीका का विकास वैश्विक जीडीपी के लिए विस्तार का सबसे बड़ा एकल अवसर है, और यह तर्क दिया कि अमेरिका की मजबूत भागीदारी से अमेरिकी और अफ्रीकी, दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय
व्हाइट हाउस ने ईरान संकट पर पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत की सराहना की

वाशिंगटन, 28 मार्च : व्हाइट हाउस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ईरान संकट को लेकर हुई बातचीत की तारीफ की। हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि इस बातचीत में एलन मस्क भी शामिल थे या नहीं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया से कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं और यह बातचीत उपयोगी रही।”
उन्होंने यह बात उस खबर के जवाब में कही, जिसमें दावा किया गया था कि दोनों नेताओं की बातचीत में एलन मस्क भी शामिल हुए थे। व्हाइट हाउस ने न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस बातचीत में मस्क की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच रिश्ते फिर से बेहतर हो रहे हैं।
अखबार ने आगे कहा, “पिछले साल गर्मियों में दोनों के बीच तब खटास आ गई थी, जब मस्क ने सरकार में अपना पद छोड़ दिया था। उन्हें सरकार में कर्मचारियों की संख्या कम करने का काम सौंपा गया था। ऐसा लगता है कि हाल के महीनों में दोनों के बीच सब कुछ ठीक हो गया है।”
खबरों के मुताबिक, इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा हुई, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर। यह एक अहम समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है। हाल के दिनों में ईरान से जुड़े घटनाक्रम और समुद्री आवाजाही में रुकावट की आशंका के कारण तनाव बढ़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस समुद्री मार्ग का खुला, सुरक्षित और सुचारु रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के लिए संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एक निजी कारोबारी होने के बावजूद एलन मस्क का इस बातचीत में शामिल होना असामान्य है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि उन्हें क्यों जोड़ा गया या उन्होंने बातचीत में हिस्सा लिया या नहीं।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने की आशंका बढ़ रही है। इस रास्ते से दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो तेल आयात करते हैं।
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