खेल
आईपीएल टीम का नेतृत्व करने में दबाव होता है : स्टेन
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी ने रविवार की देर रात घोषणा की थी कि कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ेंगे। कोहली ने कुछ दिन पहले टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।
स्टेन ने कहा, “कोहली आरसीबी के साथ शुरूआत से हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का युवा परिवार है और कप्तानी दिमाग पर बोझ डालती है और इससे आपके निजी जीवन पर दबाव बढ़ता है।”
उन्होंने कहा, “हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।”
पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा कि किसी को कोहली की कप्तानी पर शक नहीं है और वह एक शानदार खिलाड़ी हैं और उनके फैसले का सम्मान होना चाहिए।
स्टेन ने कहा, “हम उनकी कप्तानी पर शक नहीं कर सकते। कोहली एक शानदार लीडर हैं और उनकी निजी उपलब्धि यह बयां करती है। यह उनके ऊपर है कि वह क्या करना चाहते हैं। शायद यह सही फैसला है क्योंकि टी20 विश्व कप होने वाला है। हम आईपीएल के शेष सत्र और टी20 विश्व कप में एक बेस्ट कोहली को देख सकते हैं।”
राष्ट्रीय
एलपीजी को लेकर विपक्ष के रवैये पर भड़के भाजपा नेता, ‘विपक्ष जनता को गुमराह कर कहा’

नई दिल्ली, 13 मार्च : पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 12 मार्च गुरुवार को कहा था कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और भारत के पास इस समय पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहें न फैलाएं और फर्जी जानकारी से बचें। केंद्रीय मंत्री के बयान पर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना सांसद मिलिंद देवरा ने कहा कि भारत सरकार ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति अपनी मंशा पहले ही व्यक्त कर दी है। यह बात भारत के विदेश मंत्री और तेल मंत्री द्वारा भी कही जा चुकी है।
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि विपक्ष को काम करना नहीं है। वे सिर्फ इसी तरह की हरकतें करते हैं। जो मुद्दा ही नहीं है उसके बारे में कांग्रेस का आंदोलन करने की नीति ही रही है। कांग्रेस को सदन में काम करने की कोई इंटरेस्ट नहीं है। सदन के बाहर प्रोटेस्ट करना और सुर्खियों में रहना यही इनका काम है।
भाजपा सांसद मयंक नायक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित है। देशवासियों से मैं कहना चाहता हूं कि कोई पैनिक न लें। विपक्ष जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। देश की जनता पीएम मोदी के नेतृत्व में सलामत है। देश की जनता को टेंशन लेने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जनता के सामने जाने के लिए कोई मौका ही नहीं है। जनता के सामने विपक्ष किस मुद्दे को लेकर जाए।
भाजपा सांसद ममन मिश्रा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का काम आधारहीन होता है। उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री बोल रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्री कह रह हैं, सबकुछ जनता के सामने है। कहीं कोई संकट नहीं है। एलपीजी का प्रोडक्शन हमने बढ़ा दिया है। कई जगह विपक्ष के रवैये की वजह से पैनिक हो गया है।”
राष्ट्रीय
वोटर लिस्ट मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ रिवीजन पिटीशन की सुनवाई टली

नई दिल्ली, 13 मार्च : नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई टल गई। यह मामला कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़ा है, जिन पर बिना नागरिकता हासिल किए वोटर सूची में नाम शामिल कराने का आरोप है। अब अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
इस मामले में अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से सुनवाई टालने की मांग के कारण फिलहाल आगे बढ़ाया नहीं गया। अगली सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।
पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की तरफ से जवाब दाखिल किया गया था। इसमें याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया। बताया गया कि यह मामला केवल राजनीतिक उद्देश्यों के तहत हवा में उड़ा दिया गया है और किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित नहीं है।
वहीं, याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी जबकि उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल किया गया और क्या इसके लिए किसी फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया गया। इसके अलावा, यह भी पूछा गया कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया और जब 1983 में नागरिकता हासिल की गई, तब किस दस्तावेज के आधार पर उनका नाम सूची में शामिल किया गया।
सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका में आरोप लगाए गए थे कि इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की जांच कर सही तथ्य सामने लाए जाएं। हालांकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर में सोनिया गांधी की खिलाफ दर्ज याचिका को खारिज कर दिया था लेकिन याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ रिवीजन पिटीशन दाखिल की।
कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद अब 30 मार्च को अगली सुनवाई होगी। इस दौरान सभी पक्षों को अपने तर्क रखने का मौका मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय
क्या अमेरिका-इजरायल हमले में घायल हुए ईरान के नए सुप्रीम मोजतबा? राष्ट्रपति ट्रंप ने किया दावा

TRUMP
वॉशिंगटन, 13 मार्च : ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दावे किए जा रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ये दावा किया है कि मोजतबा जिंदा तो हैं, लेकिन घायल हैं।
बता दें, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले में पहले दिन ही ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया। ईरान का सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद से मोजतबा कहीं भी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ये दावा कर रहे हैं कि मोजतबा जिंदा तो हैं, लेकिन वे घायल हैं।
ट्रंप का कहना है कि उन्हें लगता है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा हैं लेकिन ‘घायल’ हैं। इससे पहले ईरान के सरकारी चैनल ने इस बात की जानकारी दी थी कि मोजतबा को हल्की चोटें आई हैं। अली खामेनेई की मौत की खबर जब सामने आई थी, तब ये चर्चाएं भी हो रही थीं कि मोजतबा की भी इजरायल-अमेरिकी हमले में मौत हो गई।
हालांकि, बाद में जानकारी आई कि हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ, मोजतबा की पत्नी, उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में अली खामेनेई के पोते और बेटी की भी मौत की जानकारी सामने आई।
साइप्रस में ईरान के राजदूत अलिरेजा सालारियन ने द गार्जियन को बताया कि मोजतबा खामेनेई के पैरों, हाथों और बांहों में चोटें आई हैं। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि उनके पैरों और बांहों में चोटें आई हैं। मुझे लगता है कि वह हॉस्पिटल में हैं क्योंकि उन्हें चोट लगी थी।”
ईरान के बाहर की अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि मोजतबा का पैर टूट गया है और चेहरे पर हल्की चोटें आई हैं, जिसमें उनकी बाईं आंख के आसपास चोट के निशान और ऊपर की ओर कटा हुआ है।
अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। रविवार को एक पादरी सभा द्वारा चुने जाने के बाद से खामेनेई को ईरानियों ने नहीं देखा है। सुप्रीम लीडर बनने के बाद उनकी तरफ से जारी पहले बयान को गुरुवार को ईरानी टेलीविजन प्रेजेंटर ने पढ़ा।
एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि नए नियुक्त सुप्रीम लीडर को हल्की चोटें आई हैं; सरकारी टेलीविजन द्वारा हमले में घायल बताए जाने के बाद उनका ऑपरेशन जारी है।
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