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Thursday,09-April-2026
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खेल

आईपीएल टीम का नेतृत्व करने में दबाव होता है : स्टेन

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दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी ने रविवार की देर रात घोषणा की थी कि कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ेंगे। कोहली ने कुछ दिन पहले टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।

स्टेन ने कहा, “कोहली आरसीबी के साथ शुरूआत से हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का युवा परिवार है और कप्तानी दिमाग पर बोझ डालती है और इससे आपके निजी जीवन पर दबाव बढ़ता है।”

उन्होंने कहा, “हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।”

पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा कि किसी को कोहली की कप्तानी पर शक नहीं है और वह एक शानदार खिलाड़ी हैं और उनके फैसले का सम्मान होना चाहिए।

स्टेन ने कहा, “हम उनकी कप्तानी पर शक नहीं कर सकते। कोहली एक शानदार लीडर हैं और उनकी निजी उपलब्धि यह बयां करती है। यह उनके ऊपर है कि वह क्या करना चाहते हैं। शायद यह सही फैसला है क्योंकि टी20 विश्व कप होने वाला है। हम आईपीएल के शेष सत्र और टी20 विश्व कप में एक बेस्ट कोहली को देख सकते हैं।”

राजनीति

जनता के दिल में ममता बनर्जी के लिए अब ममता नहीं बची : नीरज कुमार

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पटना, 9 अप्रैल : जदयू नेता नीरज कुमार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि इस चुनाव में जनता का मोह उनसे भंग हो चुका है और अब उनके दिलों में ममता नहीं बची है।

नीरज कुमार ने पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार में जिस तरह से तेजस्वी यादव को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और वे बिहार छोड़कर भाग गए, कहीं ममता बनर्जी भी इसी चीज को न दोहरा दें।

जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने ममता बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाया, जो स्वाभाविक है। पूरे चुनावी अभियान में ममता दीदी ने यह नहीं कहा कि जनता के हित में हमने कौन-कौन से काम किए हैं। कभी एसआईआर तो कभी पदाधिकारियों का मुद्दा उठाया। संविधान इसकी इजाजत देता है कि जिनका जन्म इस धरती पर हुआ है, वह यहां के मूलनिवासी हैं। अन्य देश के लोग इस देश में रहें, यह किसी को मंजूर नहीं। ममता दीदी मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही हैं। इसीलिए जनता ने सीएम से ममता छोड़ दी है।

नीरज कुमार ने इंदौर में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख के वंदे मातरम गाने से इनकार करने पर कहा कि यह बिल्कुल गलत है। अगर कोई भी ये कृत्य कर रहा है। कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम गाया गया है, जिस नेता द्वारा इनकार किया गया है, उसे सबसे पहले कांग्रेस पार्टी से निकाल देना चाहिए।

सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर नीरज कुमार ने कहा कि उनके इस फैसले से बिहार के लोग के साथ ही पार्टी असमहत थी। लेकिन, सीएम के फैसले का सम्मान किया गया। नीतीश कुमार एक ऐसी मिसाल हैं, जो कभी पद के लिए नहीं रूके, वे आगे-आगे चलते रहे, पीछे-पीछे पद चलता रहा है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए सीएम का चुनाव होगा।

उन्होंने कहा कि आजादी के लंबे अरसे के बाद विशेष सत्र के तहत महिला आरक्षण बिल को पारित कर दिया जाएगा। इसी के साथ राम मनोहर लोहिया का सपना भी पूरा हो जाएगा। नीतीश कुमार राज्यसभा में मौजूद होंगे, जब महिला सशक्तीकरण के लिए बिल पर चर्चा होगी।

नीरज कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग असम में एक दिन में मतदान की प्रक्रिया सुनिश्चित कर रहा है, जो असम उग्रवाद की चपेट में रहता था, जहां कई चरणों में चुनाव होते थे, आज एक चरण में चुनाव हो रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय

पाकिस्तान में तेल कंपनियों का संकट नहीं हो रहा खत्म, सरकार ने रोक रखी है राशि

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक जारी रहे संघर्ष का असर क्रूड ऑयल की सप्लाई पर पड़ा। इस बीच पाकिस्तान की मीडिया के अनुसार, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गंभीर नकदी संकट का सामना कर रही हैं। करीब 107 अरब रुपए तक के प्राइस डिफरेंस क्लेम अब भी लंबित हैं। इसकी वजह से कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

उद्योग से जुड़े लोगों ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी पर आरोप लगाया है कि वह बकाया भुगतान करने के बजाय बार-बार दस्तावेज की आवश्यकताओं में बदलाव कर रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक उलझती जा रही है।

इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि मार्च के बीच में फाइल किया गया लगभग 27 बिलियन रुपए का पहला क्लेम सिर्फ थोड़ा ही सेटल हुआ था, जबकि 70-80 बिलियन रुपए के बाद के क्लेम अभी भी पूरी तरह से बिना पेमेंट के हैं। कराची के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, कुल मिलाकर इस नुकसान की वजह से कंपनियां बहुत कम मार्जिन पर काम कर रही हैं और कैश फ्लो बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि असली समस्या पारदर्शिता की नहीं, बल्कि अनिश्चितता की है। उनका आरोप है कि हर बार जब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) नियमों का पालन करने की कोशिश करती हैं, तो अथॉरिटी नई दस्तावेजी मांगें सामने रख देती है।

मांगों में इनवॉइस-स्तर पर मिलान से लेकर बार-बार सीईओ, सीएफओ और ऑडिटर सर्टिफिकेशन तक शामिल हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया बार-बार शुरू से करनी पड़ती है। सोमवार रात तक एक नया संशोधित फॉर्मेट भी जारी किया गया, लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं था कि आगे बदलाव किए जाएंगे या नहीं, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।

इंडस्ट्री के एक सीनियर सोर्स ने कहा, “हर बार जब इंडस्ट्री पालन करने की तैयारी करती है, तो एक नई जरूरत आ जाती है। कोई फिनिशिंग लाइन नजर नहीं आती है।”

अगर रेगुलेटरी अथॉरिटी फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के साथ टैक्स रिकंसिलिएशन तक पेमेंट का 10 फीसदी रोकने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है, तो हालात और खराब हो सकते हैं। इस कदम से 7.4 बिलियन रुपए और दो महीने तक अटक सकते हैं।

प्राइस डिफरेंशियल क्लेम उस स्थिति में पैदा होते हैं, जब सरकार ईंधन की कीमतें उसकी खरीद लागत से कम तय कर देती है। ऐसे में इस अंतर की भरपाई कंपनियों को की जानी होती है। भुगतान में देरी होने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस अंतर को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ता है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव और अधिक बढ़ जाता है।

औद्योगिक अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर लिक्विडिटी कम होती रही तो यह संकट जल्द ही फ्यूल सप्लाई में रुकावट में बदल सकता है। आर्टिकल में आगे कहा गया है कि क्षेत्र ने ऊर्जा मंत्रालय से दखल देने की अपील की और बकाया का तुरंत सेटलमेंट करने, एक ही डॉक्यूमेंटेशन फ्रेमवर्क और कुछ पेमेंट रोकने के प्रस्तावित कदम को वापस लेने की मांग की है।

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अंतरराष्ट्रीय

इस्लामाबाद में सन्नाटा, बातचीत की आहट! लेकिन भरोसे पर सवाल बरकरार

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : “ईरान की सभ्यता को पूरी तरह से खत्म करने” की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी मध्यस्थता का जिक्र करते हुए सीजफायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये संघर्ष विराम अगले 2 हफ्तों तक जारी रहेगा।

इसके बाद लगा कि हालात सामान्य होंगे। पूरी दुनिया ने प्रसन्नता जाहिर की। पाकिस्तान फूला नहीं समाया, लेकिन इसके बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है। इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था।

इस सबके बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है। सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है। वजह है ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन, जो एक बेहद संवेदनशील और अहम कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंचने वाला है।

एक अस्थायी संघर्षविराम के बाद शुरू हो रही इस वार्ता से उम्मीद तो है, लेकिन उसके सफल होने को लेकर संशय भी उतना ही गहरा है। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसे उसकी कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।

शहर में लागू सुरक्षा इंतजाम इस बात का संकेत हैं कि इस वार्ता को कितना संवेदनशील माना जा रहा है। खासकर डिप्लोमैटिक एन्क्लेव और सरकारी परिसरों के आसपास कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे या विरोध को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है। पिछले अनुभवों और बार-बार संघर्षविराम उल्लंघनों के आरोप ने इस अविश्वास को और गहरा किया है।

बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां बंद सड़कों और कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की एक मुश्किल कोशिश जारी है।

आशंका इसलिए भी क्योंकि ईरानी संसद के स्पीकर एमबी घालिबाफ ने 10 में से तीन शर्तों के हनन का आरोप यूएस पर लगाया, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में ईरान के एम्बेसडर, रेजा अमीरी मोगादम, ने एक्स पर एक पोस्ट डिलीट कर दी, जिसमें कहा था कि ईरान का एक डेलीगेशन गुरुवार रात यूएस के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने वाला है।

मोगादम ने पोस्ट किया था: “इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी पब्लिक ओपिनियन पर शक के बावजूद… ईरान के बताए 10 पॉइंट्स पर सीरियस बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद आ रहा है।

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