राजनीति
किसानों ने केंद्र का प्रस्ताव सर्वसम्मति से खारिज किया, आंदोलन जारी रखेंगे
नए कृषि कानूनों पर किसानों का आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है। कई दौर की बैठकें बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है। सरकार ने किसानों को लिखित प्रस्ताव भेजा था, लेकिन किसानों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और उनका कहना है कि आंदोलन अभी जारी रहेगा।
सरकार ने किसानों की कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए उन्हें लिखित मसौदा प्रस्ताव भेजा था, जिसमें तीन विवादास्पद कृषि कानूनों में संशोधन करने की बात भी शामिल थी, जो आंदोलनरत किसानों की सबसे बड़ी मांगों में से एक रही है।
सरकार ने किसानों के सामने एक लिखित मसौदा प्रस्ताव के माध्यम से अपना पक्ष रखा था, जिसमें उसने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) के संबंध में दो मुख्य संशोधनों पर सहमति व्यक्त की थी। हालांकि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की किसानों की सबसे बड़ी मांग को खारिज कर दिया था।
किसान नेताओं में से एक कुलवंत सिंह संधू ने कहा, “हमने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। हमारी भविष्य की कार्रवाई यह है कि हम एक-दो दिनों में सभी सीमाओं को बंद कर देंगे।”
किसान आंदोलन के 14वें दिन सिंघु बॉर्डर पर सरकार ने किसानों की सबसे बड़ी मांग में से एक एमएसपी पर लिखित में गारंटी देने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव में केंद्र ने एक लिखित न्यूनतम समर्थन मूल्य आश्वासन और एपीएमसी के लिए एक समान कर के लिए सहमति व्यक्त की है, जो कि राज्य सरकारों द्वारा स्थापित एक विपणन बोर्ड है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसानों का बड़े खुदरा विक्रेताओं की ओर से शोषण न हो।
प्रस्ताव में कहा गया है कि निजी व्यापारियों के लिए व्यापार करने को लेकर पंजीकरण का प्रावधान होगा।
कृषि कानूनों को खत्म करने के मुद्दे पर, सरकार ने कहा कि वह उन कानूनों के प्रावधानों पर विचार करने के लिए तैयार है, जिन पर किसानों ने आपत्तियां जताई हैं।
व्यापारियों के पंजीकरण के मुद्दे पर, सरकार ने नए नियमों को लागू करने का आश्वासन दिया है, जिसके तहत राज्य सरकारों को किसानों के कल्याण के लिए नए नियमों के साथ आने के लिए अधिकार दिए जाएंगे।
सरकार ने किसानों के बीच इस आशंका को भी दूर करने का प्रयास किया है कि उनकी खेती उनसे छिन जाएगी। सरकार ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करने की बात सुनिश्चित की है। सरकार के प्रस्ताव ने स्पष्ट किया कि नए कानूनों में प्रावधान बहुत स्पष्ट हैं और अगर किसानों को अभी भी इस मुद्दे पर कोई भ्रम रहेगा, तो उन्हें और भी स्पष्ट तरीके से समझाया जाएगा।
सरकार ने एपीएमसी अधिनियम पर उस गलत धारणा को भी खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा है कि किसान निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएंगे। सरकार ने एक संशोधन प्रस्तावित किया, जिसमें एक प्रावधान होगा कि राज्य सरकारें निजी मंडियों के लिए पंजीकरण नियम लागू कर सकती हैं। इसमें यह भी प्रावधान होगा कि राज्य सरकारें निजी और साथ ही एपीएमसी मंडियों में भी उपकर शुल्क की समान दर सुनिश्चित कर सकती हैं।
सरकार के प्रस्ताव में उस आरोप को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि बड़े उद्योगपति किसानों की जमीन पर कब्जा कर लेंगे और किसान भूमिहीन हो जाएंगे।
सरकार ने यह भी कहा कि दीवानी अदालतों (सिविल कोर्ट) से संपर्क करने वालों को अब अनुमति दी जाएगी।
विद्युत संशोधन अधिनियम 2020 पर, सरकार ने आश्वासन दिया है कि अधिनियम को लागू नहीं किया जाएगा और पहले की प्रक्रिया को यथास्थिति बनाए रखा जाएगा।
पराली जलाने वाले मुद्दे पर सरकार ने कहा है कि वह इस विषय पर एक उचित व्यवस्था के साथ सामने आएगी।
किसान हालांकि इन कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
पिछली रात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई किसान प्रतिनिधियों की बैठक के बाद किसानों को यह प्रस्ताव भेजा गया था। दोनों पक्षों की ओर से अपने मुद्दों पर अड़े रहने के कारण अब तक हुई सरकार-किसान वार्ता के पांच दौर बेनतीजा रहे हैं।
राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति में 5 साल बाद न शिंदे रहेंगे न अजित पवार: असदुद्दीन ओवैसी

धुले, 9 जनवरी: महाराष्ट्र के धुले में आयोजित एक जनसभा में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर तल्ख टिप्पणी की और पार्टी द्वारा लगाए गए उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें एआईएमआईएम को भाजपा की ‘बी-टीम’ कहा गया। ओवैसी ने कहा कि ऐसे आरोप सच्चाई से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं।
अपने भाषण में ओवैसी ने मुंबई ट्रेन ब्लास्ट का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई ट्रेन धमाकों में 185 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी और इस मामले में 11 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया। ये सभी 11 लोग करीब 19 साल तक जेल में बंद रहे।
उन्होंने कहा, “जरा सोचिए, अगर आप यहां बैठे हों और अचानक आपको फोन आए कि तुरंत आ जाइए। अब उन 11 लोगों के बारे में सोचिए, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 19 साल सलाखों के पीछे गुजार दिए।”
ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, अजित पवार अपने ही चाचा शरद पवार के सामने खड़े नहीं हो सके तो जो लोग आंख बंद करके उनका पीछा कर रहे हैं, उनका क्या होगा?”
असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि आने वाले पांच साल बाद जब फिर से चुनाव होंगे, तब न तो एकनाथ शिंदे रहेंगे और न ही अजित पवार। उस वक्त असदुद्दीन ओवैसी की जमात रहेगी।
एआईएमआईएम प्रमुख ने संसद में अपने एक पुराने कदम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि कुछ कानून बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान के खिलाफ हैं और उन्होंने उस कानून की प्रति फाड़कर संसद के फर्श पर फेंक दी थी। ओवैसी ने सवाल किया, ‘क्या अजित पवार ऐसा कर सकते थे?’
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ही जनता की आवाज को मजबूती से आगे ले जा सकती है।
राजनीति
भाजपा का एआईएमआईएम और कांग्रेस के साथ गठबंधन पाखंड का शर्मनाक प्रदर्शन: शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई, 9 जनवरी: महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में चल रही चुनावी सरगर्मियों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला है और उस पर सत्ता के लिए अपनी मूल विचारधारा छोड़ने का आरोप लगाया है।
पार्टी ने एआईएमआईएम और कांग्रेस पार्टी के साथ स्थानीय गठबंधनों के खुलासे के बाद महाराष्ट्र में भाजपा की हालिया राजनीतिक चालों को “पाखंड का शर्मनाक प्रदर्शन” बताया।
ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, “भाजपा की मौजूदा मानसिकता किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने और विपक्ष में बैठने से बचने की है, क्योंकि उसके पास कोई मूल विचारधारा नहीं है; उनका हिंदुत्व स्वार्थी राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक दिखावा है। सत्ता के बिना, भाजपा का टिकना मुश्किल होगा। यही वजह है कि वे ओवैसी की पार्टी के साथ साझेदारी करने को तैयार हैं। सत्ता के लिए, भाजपा ने पहले “अजान” और फिर “निकाह” किया, यहां तक कि “खतना” भी करवाया, लेकिन “काजी” (जज/मौलवी) ने इतनी ज़ोर से दुआएं पढ़ीं कि भाजपा का यह गुप्त रिश्ता पूरी दुनिया में फैल गया।”
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में विपक्ष के वोटों को बांटने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम का अक्सर “छिपे हुए मददगार” के तौर पर इस्तेमाल किया है।
संपादकीय में कहा गया, “जब भी ओवैसी महाराष्ट्र में ‘अजान’ देने आते हैं, तो यह इस बात का संकेत होता है कि भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं,” इस रिश्ते को “पेड़ों के पीछे का रोमांस” बताया गया है जो अब सबके सामने आ गया है।
ठाकरे कैंप ने नगर परिषदों में हाल के घटनाक्रमों का हवाला दिया। अकोट नगर परिषद में, भाजपा पर एआईएमआईएम के साथ “खुली शादी” करने का आरोप लगाया। अंबरनाथ नगर परिषद में, भाजपा ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को कमजोर करने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया। सार्वजनिक विरोध के बाद, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन गठबंधनों से “ट्रिपल तलाक” का आदेश देकर और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का वादा करके स्थिति को संभालने की कोशिश की। हालांकि, भाजपा की प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा की हालत ऐसी हो गई है कि जो प्रतिष्ठा एक बूंद में चली जाती है, वह टंकी भर पानी से भी वापस नहीं आती।
अपराध
मुंबई में शिवसेना उम्मीदवार पर हमला के मामला: पुलिस ने अज्ञात शख्स के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

CRIME
मुंबई, 9 जनवरी; मुंबई के बांद्रा पूर्व के संत ज्ञानेश्वर नगर इलाके में शिवसेना उम्मीदवार हाजी सलीम कुरैशी पर हुए चाकू हमले के मामले में अभी तक हमलावर का कोई सुराग नहीं लगा है। चुनाव प्रचार के दौरान हाजी सलीम कुरैशी पर हमला हुआ था। घटना के 36 घंटे बाद भी हमलावर पुलिस की पकड़ से बाहर है।
मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में पीड़ित कुरैशी के बयान के आधार पर मुंबई की खेरवाड़ी पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, बुधवार शाम करीब 5 बजे कुरैशी कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ प्रचार करते हुए एक बेहद संकरी और कम रोशनी वाली गली में पहुंचे थे। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उनके पेट पर चाकू से वार किया। गली की चौड़ाई महज दो फीट होने और दृश्यता कम होने के कारण न तो कुरैशी और न ही उनके साथ मौजूद कार्यकर्ता हमलावर को पहचान सके। हमले की जानकारी तब सामने आई, जब कुरैशी ने अपने पेट से खून निकलते देखा।
इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में सभी ने यही कहा है कि किसी ने भी आरोपी को नहीं देखा।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल पर कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं था। आसपास के इलाकों में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। हालांकि, पुलिस ने पूछताछ के लिए इलाके के कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। फिर भी जांच में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। इसके साथ ही, खेरवाड़ी पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
बता दें कि वार्ड नंबर 92 से चुनाव लड़ रहे सलीम कुरैशी पहले एआईएमआईएम के टिकट पर नगरसेवक रह चुके हैं और बाद में शिवसेना में शामिल हुए थे। हमले के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि पुलिस अलग-अलग एंगल से मामले की जांच कर रही है।
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