राजनीति
देश ने एक महान खिलाड़ी खो दिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 91 वर्षीय दिग्गज भारतीय एथलीट मिल्खा सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए शनिवार को कहा कि देश ने एक महान खिलाड़ी खो दिया है। मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी, श्री मिल्खा सिंह जी के निधन से, हमने एक महान खिलाड़ी खो दिया है। एक ऐसा खिलाड़ी, जिसने देश की कल्पना पर राज किया। उनके प्रेरक व्यक्तित्व ने खुद को लाखों लोगों को पसंद किया। उनके निधन से दुखी हैं।
एक अन्य ट्वीट में मोदी ने कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही मिल्खा सिंह से बात की थी। मोदी ने लिखा, मुझे नही पता था कियह हमारी आखिरी बातचीत होगी। कई नवोदित एथलीट उनकी जीवन यात्रा से ताकत हासिल करेंगे। उनके परिवार और दुनिया भर में कई प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा: भारत महान धावक श्री मिल्खा सिंह जी, द फ्लाइंग सिख के दुखद निधन पर शोक व्यक्त करता है। उन्होंने विश्व एथलेटिक्स पर एक अमिट छाप छोड़ी है। राष्ट्र उन्हें हमेशा भारतीय खेलों के सबसे चमकीले सितारों में से एक के रूप में याद करेगा। उनके परिवार और अनगिनत अनुयायियों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।
महान धावक मिल्खा सिंह ने शुक्रवार रात अंतिम सांस ली। वह 91 साल के थे और कोविड-19 के खिलाफ एक मजबूत लड़ाई के बाद विजेता के रूप में सामने आए थे। बुधवार को उनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया था।
मिल्खा को चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। मिल्खा परिवार ने एक बयान जारी कर इस महान धावक के निधन की पुष्टि की।
पूर्व एथलीट, जिसे ‘फ्लाइंग सिख’ नाम से भी माना जाता है, को एक सप्ताह तक मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के बाद ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट के बाद 3 जून को पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया था।
मिल्खा ने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता में चार बार स्वर्ण पदक जीता है और 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। हालांकिक, 91 वर्षीय को 1960 के रोम ओलंपिक के 400 मीटर फाइनल में उनकी एपिक रेस के लिए याद किया जाता है।
उन्होंने 1956 और 1964 के ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है और उन्हें 1959 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
बीते 13 जून को ही मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर का कोरोना के कारण निधन हो गया था। सिंह के परिवार में तीन बेटियां डॉ मोना सिंह, अलीजा ग्रोवर, सोनिया सांवल्का और बेटा जीव मिल्खा सिंह हैं। गोल्फर जीव, जो 14 बार के अंतरराष्ट्रीय विजेता हैं, भी अपने पिता की तरह पद्म श्री पुरस्कार विजेता हैं।
उनके निधन के बाद मिल्खा सिंह के परिवार ने भी एक बयान जारी किया।
पारिवारिक बयान में कहा गया है, उन्होंने बहुत संघर्ष किया लेकिन भगवान के अपने तरीके हैं और शायद यह सच्चा प्यार और साथ था कि हमारी मां निर्मल जी और अब पिताजी दोनों का निधन हो गया है।
परिवार ने कहा, हम पीजीआई में डॉक्टरों के बहादुर प्रयासों और दुनिया भर से और खुद से मिले प्यार और प्रार्थना के लिए उनके आभारी हैं। हम आपको धन्यवाद देते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने रूसी डीजल समझौते की आलोचना की

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने रूस से डीजल खरीदने को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना पर फिर से हमला बोला है। दूसरी तरफ, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इस समझौते का बचाव किया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक अहम अमेरिकी कानून की समयसीमा नजदीक आ रही है, जिससे भारत और चीन जैसे रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर भारी शुल्क लग सकता है।
कृष्णमूर्ति ने बुधवार को ‘एक्स’ पर लिखा, “ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक गैरकानूनी युद्ध शुरू किया, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गईं। अब वह रूस के साथ डीजल समझौता करके पुतिन को फायदा पहुंचा रहे हैं और साथ ही यूक्रेन पर रूसी तेल सुविधाओं पर हमले रोकने का दबाव डाल रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि पुतिन को अरबों डॉलर मिलेंगे, यूक्रेन को ज्यादा रूसी हमलों का सामना करना पड़ेगा और इसका आर्थिक बोझ अमेरिकी जनता पर पड़ेगा।
बाद में एक और पोस्ट में कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह समझौता पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद देगा, लेकिन इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने लिखा, “यह गैरकानूनी है, असरदार नहीं है और ट्रंप के ईरान युद्ध को खत्म करने का विकल्प भी नहीं है।”
वहीं, रूस के निवेश और आर्थिक सहयोग मामलों के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इन आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “दुनिया के सभी व्यावहारिक नेता, जो अपनी जनता की भलाई चाहते हैं, वे रूस सहित किसी भी स्रोत से सस्ता डीजल, गैस और तेल चाहते हैं।”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने पत्रिका द इकोनॉमिस्ट की आलोचना करते हुए कहा कि उसने यह नहीं बताया कि इस समझौते के बाद डीजल की कीमतों में पांच प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे अमेरिकी किसानों, उपभोक्ताओं और ऊर्जा बाजारों को फायदा हुआ है।
हालांकि, दिमित्रिएव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने यह आंकड़ा कैसे निकाला या कीमतों में यह गिरावट कितने समय के दौरान हुई। इस मुद्दे पर अमेरिकी संसद में भी विरोध बढ़ता जा रहा है।
कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि वह अपने 12 साथियों के साथ मिलकर ट्रंप से इस ‘विनाशकारी रूसी डीजल समझौते’ को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की सुरक्षा के हितों और पुतिन के खिलाफ लड़ रहे बहादुर यूक्रेनियों, दोनों के साथ विश्वासघात है।
दक्षिण कैरोलिना से प्रतिनिधि जेम्स क्लाइबर्न ने इस फैसले को ‘गलती’ बताया।
उन्होंने कहा, “रूसी डीजल पर प्रतिबंधों में ढील देने का ट्रंप का फैसला अमेरिकी ईंधन कीमतों पर बहुत कम असर डालेगा, लेकिन इससे यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को आर्थिक मदद जरूर मिलेगी।”
एरिजोना से प्रतिनिधि ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि यह योजना संभवतः गैरकानूनी है और कीमतें कम करने में भी नाकाम रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अरबों डॉलर रूस को मिलेंगे।
कैलिफोर्निया से प्रतिनिधि माइक लेविन ने इसे रूस की युद्ध मशीन के लिए लाइफलाइन बताया। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस समझौते के जरिए करीब चार अरब डॉलर अमेरिकी धन रूस की अर्थव्यवस्था में जा सकता है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएएसी) ने शुक्रवार को जनरल लाइसेंस 135 जारी किया था। इसके तहत अप्रैल 2027 तक रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेन-देन की अनुमति दी गई है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में हो रहा है, जब ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ के तहत तय समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली है।
कानून की धारा 113 के अनुसार, राष्ट्रपति उन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकते हैं, जो रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं और तय समयसीमा के बाद भी नई खरीद जारी रखते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति चाहें तो यह प्रमाणित करके कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, इन शुल्कों से छूट भी दे सकते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत, चार जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

तमिलनाडु में गुरुवार से उत्तर-पूर्वी मानसून के शुरू होने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चार जिलों में बहुत भारी बारिश और 15 अन्य जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया है।
चेन्नई मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, नीलगिरी, कोयंबटूर, थेनी और विरुधुनगर जिलों में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसमी बारिश की शुरुआत के साथ ही इन चार जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को मयिलादुथुराई, नागपट्टिनम, तिरुवरुर, तंजावुर, कुड्डालोर, तेनकासी, कन्याकुमारी, कल्लाकुरिची, सलेम, तिरुचिरापल्ली, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, रानीपेट, तिरुपुर और डिंडीगुल जिलों में भी भारी बारिश हो सकती है।
मौसम केंद्र के अनुसार, तमिलनाडु के कई अन्य हिस्सों में मध्यम बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी मानसून के आने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश होने की उम्मीद है। पूर्वानुमान के मुताबिक, शुक्रवार को भारी बारिश का दायरा और अधिक जिलों तक फैल सकता है।
शुक्रवार के लिए विभाग ने नीलगिरी, कोयंबटूर, इरोड, तिरुपुर, डिंडीगुल, थेनी, विरुधुनगर, तेनकासी, कन्याकुमारी, रामनाथपुरम और शिवगंगा जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया है।
इसके अलावा, शुक्रवार को तिरुचिरापल्ली, नमक्कल, धर्मपुरी, कृष्णगिरि, सलेम, तिरुवन्नामलाई, कल्लाकुरिची, विल्लुपुरम, नागपट्टिनम, तिरुवरुर और तंजावुर जिलों में भी भारी बारिश होने का अनुमान है। शुक्रवार को चेन्नई और उसके आसपास के जिलों में भी भारी बारिश हो सकती है।
विभाग ने चेन्नई, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, रानीपेट, कुड्डालोर और मयिलादुथुराई के लिए चेतावनी जारी की है। कुल मिलाकर, पूर्वानुमान में 29 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां शुक्रवार को भारी बारिश हो सकती है। इसकी तुलना में, गुरुवार को चार जिलों में बहुत भारी बारिश और 15 जिलों में भारी बारिश होने का अनुमान था।
चेतावनी के अनुसार, दूसरे दिन बारिश का दायरा और अधिक फैल जाएगा, जिसमें पश्चिमी जिले, दक्षिणी बेल्ट, कावेरी डेल्टा और उत्तरी तटीय इलाके (राज्य की राजधानी सहित) शामिल होंगे।
गुरुवार का ‘ऑरेंज अलर्ट’ मुख्य रूप से नीलगिरी, कोयंबटूर, थेनी और विरुधुनगर जिलों के लिए है, जबकि अन्य जिलों के लिए पूर्वानुमान में भारी बारिश और मध्यम बारिश के बीच अंतर बताया गया।
मौसम विज्ञान केंद्र के दो-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, कई जिलों में लगातार दो दिनों तक बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इनमें कोयंबटूर, नीलगिरी, थेनी, विरुधुनगर, तिरुप्पुर, डिंडीगुल, तेनकासी और कन्याकुमारी के साथ-साथ डेल्टा और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं।
चेन्नई के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को यहां भारी बारिश हो सकती है, जबकि गुरुवार को सबसे भारी बारिश की चेतावनी चार अन्य जिलों के लिए दी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
यूएन में भारत का सख्त बयान, ओएचसीएचआर के दोहरे मानदंड पर उठाए सवाल

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त के साथ ‘इंटरैक्टिव डायलॉग’ के दौरान प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत का बयान रखते हुए ओएचसीएचआर के चयनात्मक रवैये और दोहरे मानदंडों को लेकर आगाह किया और साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघनों पर रिपोर्ट की मांग की।
अनुज स्वरूप ने मानवाधिकार परिषद में भारत के सदस्य के रूप में अपनी रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की ओर से चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देने और दोहरे मानदंड अपनाने से बहुपक्षीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। साथ ही भारत ने यह भी दोहराया कि वह उच्चायुक्त के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत ने पाकिस्तान पर एक ओएचसीएचआर रिपोर्ट जारी करने की मांग की, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से लोगों की हत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच, हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार दिए जाने और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर लगी सभी पाबंदियां हटाने जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही।
भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस बात पर आत्ममंथन करे कि उसके देश के कई हिस्सों, खासकर उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में, मानवाधिकारों का किस तरह उल्लंघन हो रहा है।
प्रथम सचिव ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और इस दिशा में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया गया था। स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर परमाणु हथियारों की धमकी से दबने वाला नहीं है। बेदी ने कहा कि भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी आतंकी हमले का जवाब देगा।
उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा। भारत आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा।
बेदी ने कहा कि पिछले साल पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किया गया था। पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।
उन्होंने कहा कि भारत ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। साथ ही, यह भी कहा कि ये कदम संतुलित, सटीक और हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए उठाए गए थे।
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