राजनीति
नीतीश की शराबबंदी पर बैठक से पहले तेजस्वी ने पूछे 15 सवाल
बिहार में हाल के दिनों में कथित तौर पर शराब पीने से लोगों की हुई मौत के बाद प्रारंभ हुई सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को जहां इस मामले को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक करने वाले हैं, वहीं इसके पहले विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने उनसे 15 प्रश्न पूछे हैं। तेजस्वी ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इन प्रश्नों का जवाब भी देंगे। पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी ने नीतीश कुमार से पूछा की वे आज शराबबंदी पर कौन से नंबर की समीक्षा बैठक कर रहे है? क्या यह 1100वीं समीक्षा बैठक है?
उन्होंने सवाल किया कि पिछले 6 वर्ष में शराबबंदी पर की गयी हजारों समीक्षा बैठकों का क्या परिणाम निकला। अगर आज की बैठक का भी वांछित परिणाम नहीं मिलता है तो यह आपकी(नीतीश की) विफलता नहीं होगी।
तेजस्वी ने आरोप लगाते हुए कहा कि शराबबंदी के नाम पर लाखों गरीबों-दलितों को जेल में डाल दिए गए , लेकिन मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए की अब तक कितने माफिया, कारोबारी, तस्करों और अधिकारियों को जेल भिजवाया गया।
शराबबंदी को लेकर कारवाई करने पर भी तेजस्वी ने प्रश्न उठाया कि अब तक कितने डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारी बर्खास्त किए गए।
तेजस्वी ने एक अन्य प्रश्न में पूछा है कि शपथ लेने वाले अधिकांश पुलिसकर्मी और जदयू के नेता शराब क्यों पीते है?
राजद नेता ने मुख्यमंत्री से पूछा, “हम शराबबंदी में सहयोग करते है, साक्ष्य प्रस्तुत करते है तो आप कारवाई करने की बजाय सदन में बैठे-बैठे मास्क के अंदर मुस्कुराते है। आपके लिए शराबबंदी नहीं कुर्सी महत्वपूर्ण है।”
तेजस्वी ने बड़े नेताओं पर भी कारवाई नहीं करने को लेकर भी प्रश्न पूछा है। उन्होंने सवाल किया की पिछले 15 दिनों में विभिन्न जिलों में जहरीली शराब से हुई 65 मौतों का दोषी कौन है और शराब राज्य में कैसे पहुंचती है।
राजद नेता ने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा, “दिखावटी समीक्षा बैठक से पूर्व आपको गहन आत्म चिंतन, मनन और मंथन की जरूरत है। जबतक आप स्वयं की तथा खुलेमन से शासन- प्रशासन की गलतियां स्वीकार नहीं करेंगे तब तक ये बैठकें सामान्य रूप से चलती रहेंगी और इनका कोई अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आएगा।”
राजनीति
मध्य प्रदेश के आबकारी घोटाले की जांच एसआईटी करे : जीतू पटवारी

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर नाइट क्लब, रेस्टोरेंट और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े कथित आबकारी घोटाले की एसआईटी से निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में कहा कि नाइट क्लब, रेस्टोरेंट और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े एक हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपी मोहित गोगिया ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। पूछताछ में उसने पूर्व आईएएस अधिकारी सीपी रायचुरा और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त टीपी रायचुरा पर वर्ष 2024-25 में ठेकेदारों को टेंडर जारी करने और शराब दुकानों के ठेके दिलाने के लिए कथित तौर पर एक करोड़ रुपये लेने के आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की आबकारी व्यवस्था और सरकार की पारदर्शिता पर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है, लेकिन उनकी गंभीरता को देखते हुए सरकार की चुप्पी और केवल औपचारिक सफाई पर्याप्त नहीं है। जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि प्रदेश में सरकारी ठेकों का आवंटन नियमों के अनुसार हो रहा है या सत्ता के प्रभाव और कथित लेन-देन के सहारे?
उन्होंने आरोप लगाया कि मोहित गोगिया ने भोपाल के कई कारोबारियों के नाम भी लिए हैं, जिनके संबंध वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनेताओं से बताए जा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की हैं कि पूरे प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र एसआईटी से कराई जाए। शराब ठेकों की निविदा प्रक्रिया, बैंक एफडीआर, टेंडर और कथित वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच हो।
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि कथित 50-50 लाख रुपये के भुगतान और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से संबंधित बैंक खातों एवं वित्तीय अभिलेखों की जांच की जाए। जांच के दौरान साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और जांच प्रभावित होने की आशंका वाले अधिकारियों की भूमिका की नियमानुसार समीक्षा हो। जांच की समय-सीमा और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर सरकार की विश्वसनीयता केवल बयान देने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच कराने से साबित होती है। मध्य प्रदेश की जनता को आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
पीक आवर्स में बिजली संकट से निपटने की तैयारी, 3,000 मेगावाट खरीदेगा तमिलनाडु

तमिलनाडु की बिजली कंपनी ने शाम के पीक आवर्स (जब बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है) के दौरान 3,000 मेगावाट तक बिजली खरीदने के लिए एक अर्जेंट टेंडर जारी किया है। अक्टूबर में लंबे समय से जारी गर्मी और हवा से बिजली उत्पादन में कमी के कारण बिजली की मांग 20,000 मेगावाट के करीब बनी हुई है।
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएनपीडीसीएल) बिजली की कमी को पूरा करने के लिए आधी रात से सुबह 2 बजे के बीच 1,500 मेगावाट तक बिजली खरीदेगा। यह खरीद 12 से 31 अक्टूबर तक के लिए होगी।
केंद्र सरकार के ‘डिस्कवरी ऑफ एफिशिएंट इलेक्ट्रिसिटी प्राइस’ (डीईईपी) पोर्टल के जरिए जारी किए गए टेंडर में तमिलनाडु के अंदर और बाहर के प्राइवेट बिजली उत्पादकों से सप्लाई के लिए आवेदन मंगाए गए हैं।
बड़ी मात्रा में बिजली की खरीद शाम 6 बजे से आधी रात तक की अवधि के लिए होगी। कॉन्ट्रैक्ट फाइनल होने पर कीमतें तय की जाएंगी।
यह कंपनी पहले से ही शॉर्ट टर्म खरीद और पावर स्वैप व्यवस्थाओं के जरिए 3,000 मेगावाट तक बिजली ले रही है, साथ ही पीक आवर्स के दौरान पावर एक्सचेंज से भी इतनी ही मात्रा में बिजली खरीद रही है।
टीएनपीडीसीएल के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सितंबर से ही गर्मी का मौसम लंबा खिंचने के कारण बिजली की जरूरतें असामान्य रूप से ज्यादा बनी हुई हैं। हवा से बिजली उत्पादन में कमी और सेंट्रल जेनरेटिंग स्टेशनों से कम सप्लाई के कारण अतिरिक्त खरीद जरूरी हो गई है।
अल नीनो की स्थितियों के कारण गर्मी का मौसम लंबा खिंचने से गर्मियों के बाद भी बिजली की भारी खपत बनी हुई है, जिससे कंपनी बाहरी सप्लाई पर निर्भर है। अधिकारी ने कहा कि बिजली की कमी मुख्य रूप से शाम के समय होती है, जबकि दिन के समय तेज सोलर पावर उत्पादन से राज्य में बिजली सरप्लस (अतिरिक्त) रहती है।
अगर 20 अक्टूबर तक नॉर्थ-ईस्ट मानसून आ जाता है, तो मांग कम हो सकती है। इससे कंपनी को अगली गर्मियों से पहले सालाना मेंटेनेंस के लिए कुछ थर्मल यूनिट्स को बंद करने में मदद मिलेगी। हालांकि कमजोर मानसून के कारण नवंबर में और बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
मंगलवार को राज्य में 432.6 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई, जो पिछले साल दर्ज की गई सबसे ज्यादा दैनिक खपत के करीब है। पीक डिमांड 19,921 मेगावाट तक पहुंच गई।
टीएनपीडीसीएल के थर्मल स्टेशनों ने 80 मिलियन यूनिट बिजली सप्लाई की, जबकि सेंट्रल जेनरेटिंग स्टेशनों ने 83.4 मिलियन यूनिट का योगदान दिया। शॉर्ट टर्म खरीद से 38.5 मिलियन यूनिट और पावर एक्सचेंज से 36.5 मिलियन यूनिट बिजली मिली।
ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मलकुमार ने कहा कि पिछले साल की तुलना में पीक आवर डिमांड 3,000 मेगावाट बढ़ गई है। सेंट्रल पूल से मिलने वाली 3,000 मेगावाट बिजली भी उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण शॉर्ट टर्म टेंडर जारी करने पड़े।
मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु पहले ही ओपन मार्केट से 4,500 मेगावाट बिजली खरीद चुका है और मांग के आधार पर आगे और खरीद की व्यवस्था करेगा। उन्होंने सप्लाई पर दबाव की वजह आंशिक रूप से विंड पावर से बिजली उत्पादन में कमी और सेंट्रल स्टेशनों से बिजली की कम उपलब्धता को बताया।
राष्ट्रीय समाचार
जापान के सैन्य अधिकारियों की भारतीय सेना और डीआरडीओ संग महत्वपूर्ण वार्ता

जापान के सेना के अधिकारियों ने भारतीय सेना व डीआरडीओ के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की है। यह वार्ता भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आपसी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई। इसमें जापानी थल आत्मरक्षा बल का 34 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल रहा।
इस दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल को भारत की रक्षा क्षमताओं, सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्था और उभरती तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रतिनिधिमंडल ने सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलएडब्ल्यूएस) और वॉरफेयर डेवलपमेंट एंड रिसर्च सेंटर (वार्डेक) के अधिकारियों से भी मुलाकात की। इन संस्थानों के माध्यम से जापानी अधिकारियों को भारत में सैन्य अध्ययन, युद्ध संबंधी अनुसंधान और रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को जानकारी दी गई।
जापानी रक्षा अधिकारियों की यह यात्रा 4 अक्टूबर को प्रारंभ हुई और 9 अक्टूबर तक चली। इस दौरान उन्होंने भारत के विभिन्न संस्थानों का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल के ये सदस्य जापानी कमान एवं स्टाफ पाठ्यक्रम से जुड़े हैं। सेना के मुताबिक, यह दौरा विदेशी अध्ययन यात्रा के तहत आयोजित किया गया।
इस यात्रा के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यात्रा में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का कार्यक्रम भी शामिल था। इससे प्रतिनिधिमंडल को भारत की संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिला।
इस दौरे का उद्देश्य केवल रक्षा संस्थानों और सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्था की जानकारी हासिल करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच पेशेवर संबंधों और आपसी समझ को भी मजबूत करना था।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस तरह का संवाद एक-दूसरे के अनुभवों और रक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों को समझने में मदद करता है। भारत और जापान के बीच रक्षा साझेदारी में सैन्य संवाद, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों से जुड़े विषय महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
जापानी प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने और सैन्य स्तर पर सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल रही।
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