राष्ट्रीय समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका पर महाराष्ट्र प्राधिकरण को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में मांगा जवाब
suprim court
नई दिल्ली, 24 मार्च। चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने के मामले में आरोपी के घर और दुकान पर बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर महाराष्ट्र प्राधिकरण से जवाब मांगा है।
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने की शिकायत के बाद स्थानीय अधिकारियों ने आरोपी के घर और दुकान पर बुलडोजर कार्रवाई की थी।
याचिकाकर्ता ने इसे सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर, 2024 के फैसले का उल्लंघन बताते हुए अवमानना याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि बिना कारण बताओ नोटिस और पीड़ित पक्ष को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिए बिना संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र प्राधिकरण को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।
बता दें कि चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में 15 वर्षीय किशोर और उसके परिवार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस आरोप के बाद परिवार ने दावा किया है कि उनका बेटा पढ़ाई के लिए मदरसे में जाता था। उसकी क्रिकेट खेलने या देखने में कोई भी रुचि नहीं है।
इस मामले में पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार किया था और उनके बेटे को किशोर बोर्ड के सामने पेश किया गया था। इसके बाद अवैध रूप से बनी उनकी दुकान को महाराष्ट्र प्राधिकरण ने बुलडोजर से गिरा दिया था। लड़के के पिता कबाड़ के कारोबारी हैं।
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जम्मू-कश्मीर मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान जारी, सोपोर में एक तस्कर गिरफ्तार

100 दिवसीय नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत चल रहे व्यापक मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान को जारी रखते हुए सोपोर पुलिस ने कार्रवाई को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में फ्रूट मंडी पुलिस चौकी के अधिकार क्षेत्र में एक मादक पदार्थ तस्कर को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, बाग-ए-सुंदरी क्रॉसिंग पर नाका चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को रोका गया। तलाशी लेने पर स्पैस्मोप्रॉक्सीवॉन प्लस कैप्सूल और अल्प्राज़ोलम टैबलेट जैसे पदार्थ बरामद किए गए, जिन्हें जब्त कर लिया गया। इसके साथ ही तस्कर को मौके से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान ज़ैद बशीर भट पुत्र बशीर अहमद भट निवासी अपर अशपीर के रूप में हुई है।
आरोपी के खिलाफ सोपोर पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही तस्कर के स्रोत और व्यापक संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
सोपोर पुलिस ने दोहराया कि निरंतर जागरूकता अभियानों के साथ-साथ, मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई पूरे जिले में जारी है, ताकि मादक पदार्थों के नेटवर्क को नष्ट किया जा सके और समाज को मादक पदार्थों के खतरे से बचाया जा सके। सोपोर पुलिस ने नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त समाज सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
इसके पहले 20 अप्रैल को पुलवामा जिले में पुलिस ने दो बाइक सवारों को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है। नाका चेकिंग के दौरान पुलिस पोस्ट नेवा पुलवामा ने एक मोटरसाइकिल को रोका, जो हसनवानी से सिंगू नारबल की ओर आ रही। चेकिंग के दौरान मोटरसाइकिल की सीट के नीचे से हरे रंग का एक पॉलीथीन बैग बरामद किया गया। बैग की तलाशी लेने पर उसमें से हेरोइन जैसा दिखने वाला पदार्थ बरामद हुआ। हेरोइन का वजन लगभग 7.50 ग्राम था। दोनों व्यक्तियों ने अपने नाम मोहम्मद अल्ताफ लोन, निवासी तुरका वाघम और समीर अहमद डार, निवासी बटपोरा बताए। पुलिस स्टेशन पुलवामा में दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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भारत के प्राइवेट सेक्टर में गतिविधियां अप्रैल में बढ़ीं, रोजगार सृजन 10 महीनों के उच्च स्तर पर

भारत के प्राइवटे सेक्टर में अप्रैल में गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह क्षमता में विस्तार, बेहतर मांग, नए ऑर्डर्स और टेक्नोलॉजी निवेश में बढ़ोतरी होना है। यह जानकारी एचएसबीसी ‘फ्लैश इंडिया पीएमआई कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स’ में गुरुवार को दी गई।
यह इंडेक्स मासिक आधार पर भारत के सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों को दिखाता है। अप्रैल में यह 58.3 पर रहा है, मार्च में यह 57.0 पर था।
एचएसबीसी की ओर से बताया गया कि अप्रैल में नए ऑर्डर मार्च की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़े हैं।
सर्वेक्षण में बताया गया कि भारत में निजी क्षेत्र में रोजगार में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल में रोजगार सृजन में वृद्धि 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी बाधाओं के कारण मार्च में आई सुस्ती के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है। उत्पादन और नए ऑर्डर में तेजी से वृद्धि के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने इस सुधार का नेतृत्व किया।”
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि कंपनियां आपूर्ति पक्ष के झटके की अवधि को लेकर अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर स्टॉक बना रही हैं।
भंडारी ने कहा, “खरीद की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी वृद्धि हुई है। इनपुट लागत का दबाव उच्च बना हुआ है और कंपनियों ने बढ़ी हुई बिक्री कीमतों के माध्यम से इस वृद्धि का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूला।”
मुद्रास्फीति दरें ऐतिहासिक रूप से उच्च बनी रहीं, लेकिन सेवा क्षेत्र में मंदी के कारण पिछले महीने की तुलना में इनमें कुछ कमी आई।
एस एंड पी ग्लोबल द्वारा संकलित पीएमआई रिपोर्ट में कहा गया है, “उत्पादन और बिक्री में मजबूत उछाल के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने रिकवरी का नेतृत्व किया, लेकिन यहां कीमतों का दबाव बढ़ गया।”
रिपोर्ट के अनुसार, सेवा प्रदाताओं की तुलना में वस्तु उत्पादकों ने नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी से वृद्धि दर्ज की।
सेवा कंपनियों ने भी वृद्धि दर्ज की, हालांकि यह तुलनात्मक रूप से मामूली थी। निर्यात के रुझान क्षेत्र स्तर पर मिश्रित रहे, क्योंकि सेवा प्रदाताओं में वृद्धि की धीमी गति वस्तु उत्पादकों में तेजी से वृद्धि के विपरीत थी।
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2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चार आरोपी हुए बरी

2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने बुधवार को चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर करते हुए उन्हें बरी कर दिया। मालेगांव में इन धमाकों में 37 लोगों की जान चली गई थी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की ओर से एक स्पेशल कोर्ट के सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इस अपील में ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के तरीके और मामले में कई सह-आरोपियों को बरी किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने जिन चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द किया है, उनमें राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया और लोकेश शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के आज के फैसले से इन आरोपियों के खिलाफ मामला बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल भी खत्म हो गया।
बेंच ने इससे पहले अपील दायर करने में हुई 49 दिन की देरी को माफ कर दिया था, यह देखते हुए कि यह चुनौती राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (एनआईए अधिनियम) की धारा 21 के तहत एक वैधानिक अपील थी।
मालेगांव मामला 8 सितंबर 2006 का है, जब इस शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच सबसे पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिसंबर 2006 में चार्जशीट दायर की।
इसके बाद फरवरी 2007 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और बाद में एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया। एनआईए ने आगे की जांच के बाद अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों को भी आरोपी बनाया था और एक नई चार्जशीट दायर की थी।
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