महाराष्ट्र
नाला सफाई कार्यों की समीक्षा करें, एसपी विधायक रईस शेख ने बीएमसी से कहा।
- शेख का कहना है कि नाले की अधूरी सफाई के कारण मुंबई में बाढ़ की आशंका है
- बीएमसी अधिकारियों और कर्मचारियों के चुनाव ड्यूटी में लगने के बाद से नाले की सफाई का काम ठीक से नहीं हो पाया है
- ढिलाई और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए
मुंबई: मानसून के मौसम से पहले, समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने शहर में नाला सफाई कार्यों की गहन समीक्षा करने और ठेकेदारों के खिलाफ उनकी ढिलाई और काम को ठीक से करने में विफलता के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शेख ने बुधवार को इस मुद्दे पर बीएमसी प्रमुख भूषण गगरानी को पत्र लिखा।
निकाय प्रमुख को लिखे अपने पत्र में शेख ने कहा कि हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में बीएमसी अधिकारी और कर्मचारी चुनाव कर्तव्यों में लगे हुए थे।
“परिणामस्वरूप, वार्षिक प्री-मानसून नाले की सफाई का काम ठीक से नहीं किया गया है। इसलिए, मानसून के दौरान शहर में संभावित जलजमाव की घटनाओं की आशंका है। शेख ने कहा, मैं नागरिक प्रशासन से नाला सफाई कार्यों की व्यापक समीक्षा करने और कार्यों में अनियमितताओं और लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।
शेख ने आगे कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की है। इसलिए, जलजमाव को लेकर नगर निगम प्रशासन को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। चूंकि नगर निगम के कर्मचारी और अधिकारी चुनाव कर्तव्यों में व्यस्त थे, इसलिए गाद निकालने के काम में ढिलाई और अनियमितताएं थीं, ”उन्होंने कहा।
सपा विधायक ने आगे मांग की कि बीएमसी को शहर में पंपिंग स्टेशन कार्यों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बीएमसी को नागरिकों को बीएमसी के काम के बारे में आश्वस्त करने के लिए यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।”
महाराष्ट्र
एमपीएससी में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति, तुकाराम मुंडे को मिली सचिव की जिम्मेदारी

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर जारी उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग से जुड़े मामलों की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार का यह फैसला रविवार को सामने आया। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में एसएम जोशी पुल पर आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान समिति के गठन की जानकारी दी। यहां उम्मीदवार पिछले 10 दिनों से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। तुकाराम मुंडे के अलावा इसमें लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर विचार करने की अपेक्षा है।
सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।
आंदोलनकारी उम्मीदवारों की मांगों में केवल महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार ही शामिल नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा, उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की भी खबर है।
महाराष्ट्र
मुंबई में अवैध मलबा निस्तारण पर बीएमसी सख्त, ट्रैकिंग नियमों के उल्लंघन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना

मानसून की वापसी के बाद मुंबई में वायु गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इस बीच, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने जा रही है। सोमवार से बिना अधिकृत और सक्रिय व्हीकल ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (वीटीएमएस) के निर्माण मलबा या खुदाई से निकली सामग्री ले जाने वाले प्रत्येक वाहन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
बीएमसी के मुंबई डेब्रिस कंट्रोल एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एमडीसीटीएस) पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने वाली निर्माण परियोजनाओं पर भी प्रत्येक उल्लंघन के लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह कदम निर्माण मलबे के अवैध निस्तारण और मुंबई के पर्यावरण एवं वायु गुणवत्ता पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। बीएमसी ने सभी 26 नगर निगम वार्डों को जारी एक सर्कुलर में अधिकारियों को तत्काल निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
मुंबई में प्रतिदिन 8,000 टन से अधिक निर्माण एवं तोड़फोड़ का मलबा निकलता है, जो शहर की प्रसंस्करण क्षमता से काफी ज्यादा है। दहिसर और शिलफाटा स्थित दो प्रसंस्करण केंद्रों की संयुक्त क्षमता प्रतिदिन लगभग 1,200 टन मलबे के निस्तारण की है। मलबे की मात्रा और प्रसंस्करण क्षमता के बीच बड़े अंतर के कारण अवैध तरीके से मलबा फेंकने की समस्या बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि निर्माण मलबे को अक्सर सड़कों के किनारे, खाली भूखंडों, नालों, खाड़ियों, जलाशयों और मैंग्रोव क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है।
मलबे के परिवहन और निस्तारण की निगरानी बेहतर बनाने के लिए बीएमसी ने 24 अगस्त को एमडीसीटीएस पोर्टल शुरू किया था। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे की उसके उत्पादन स्थल से लेकर अधिकृत निस्तारण या प्रसंस्करण केंद्र तक निगरानी करना है।
इस पोर्टल के जरिए नगर निगम अधिकारी मलबा ले जाने वाले वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी कर सकते हैं। साथ ही, निर्धारित मार्ग से हटने वाले वाहनों का पता लगाने और मलबे के अवैध निस्तारण के संदिग्ध मामलों की पहचान करने में भी मदद मिलती है।
बीएमसी ने निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों, सरकारी एजेंसियों और निजी डेवलपरों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकृत संस्थाओं को मलबा प्रबंधन की विस्तृत योजना प्रस्तुत करनी होगी। वहीं, मलबा ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस-सक्षम वीटीएमएस उपकरण लगाना और निर्धारित परिवहन मार्गों का पालन करना जरूरी होगा।
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त से 9 अक्टूबर के बीच एमडीसीटीएस पोर्टल पर कुल 220 पंजीकरण हुए। इनमें 109 बिल्डर और डेवलपर, 44 परिवहनकर्ता, बीएमसी के 19 ठेकेदार, मलबा और मिट्टी के 17 बाहरी खरीदार, 15 कॉरपोरेट संस्थाएं और चार सरकारी एजेंसियां शामिल हैं। इस अवधि में किसी भी व्यक्तिगत नागरिक ने पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया।
महाराष्ट्र
घाटकोपर रोड चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर गिराए गए

मुंबई ; घाटकोपर (वेस्ट) में झुनझुनवाला कॉलेज और अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड के बीच सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर को गिराने का अभियान कल (7 अक्टूबर, 2026) मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘एन’ वार्ड (एन वार्ड) ऑफिस द्वारा चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर (‘एन’ वार्ड) जयदीप मोरे ने किया। ऑपरेशन के दौरान म्युनिसिपल अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पर्याप्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई थी।
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